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बच्चों में फोबिया के क्या हो सकते हैं कारण, डरने लगते हैं पेरेंट्स से भी!

बच्चों में फोबिया के क्या हो सकते हैं कारण, डरने लगते हैं पेरेंट्स से भी!

ऐसा नहीं है कि डर केवल छोटे बच्चों को ही लगता है। डर किसी को भी लग सकता है और कुछ लोगों को ज्यादा लग लगता है। जब डर किसी एक चीज तक सीमित हो जाता है, तो उसे फोबिया भी कह सकते हैं। बच्चों और एडल्टस को कई तरह के फोबिया हो सकते हैं। इन फोबिया के कारण उनमें कई तरह के डर भी पनपने लगते हैं। बच्चों में साधारण डर और फोबिया में फर्क एंग्जाइटी कितनी गंभीर है इसके आधार पर तय किया जाता है। बच्चों में फोबिया (Phobia in children) से जुड़ी चीजों के सामने आने पर एंग्जाइटी का स्तर बहुत ही अधिक बढ़ जाता है। बच्चों में फोबिया (Phobia in children) या बच्चों का डरना उनके भीतर डर छह महीने से कई सालों तक रह सकता है।

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बच्चों में फोबिया (Phobia in children) किन कारणों से हो सकता है?

फोबिया में किसी चीज के लिए बहुत ज्यादा डर पैदा हो सकता है। इसके कुछ उदाहरण हैं:

  • जैसे किसी एक तरह के लोगों से, उदाहरण के लिए बच्चे अक्सर दाढ़ी वाले लोगों से डर जाते हैं।
  • किसी जानवर या कीड़े से डर
  • किसी चीज से डर
  • किसी जगह या एक ही तरह की जगहों से डर
  • किसी विशेष परिस्थिति से डर

फोबिया के कारण बच्चों मे डर की भावना बहुत प्रबल हो जाती है। इसके कारण बच्चे की दिनचर्या भी प्रभावित हो सकती है। उनका डर इस हद तक बढ़ सकता है कि वे रोजमर्रा की सामान्य चीजों और अपने परिवार के लोगों से भी डरने लगते हैं।

बच्चों में फोबिया के हो सकते हैं ये कारण (Causes of phobia in children)

  • जानवर से डर लगना
  • ब्लड देखकर डर जाना
  • अंधेरा देखकर डर लगना
  • बंद जगहें
  • ऊंचाई
  • बीमारी
  • अगर मां-बाप या भाई-बहन में से कोई बीमार हो जाए
  • पालतू जानवर की मृत्यु या बीमार होना
  • कीड़ें और मकड़ियां
  • इंजेक्शन के कारण
  • बिजली कड़कना या तेज हवा

वहीं कुछ बच्चों को पेरेंट्स, भाई-बहन या अपने डॉगी से दूर होने का डर भी सताता है। इसे सेपरेशन एंग्जाइटी डिसऑर्डर (SAD) कहा जाता है। फोबिया से जूझ रहे बच्चे भी सामान्य बच्चों की ही तरह किसी चीज से डर सकते हैं। लेकिन, इन बच्चों का डर बहुत ज्यादा हो सकता है। जहां सामान्य बच्चे कुछ समय बाद शांत हो जाते हैं। ये बच्चे लगातार डर में ही रहते हैं। जानिए (Phobia in children) बच्चों में फोबिया के कारण के बारे में।

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फोबिया के कारण

फोबिया एक प्रकार का एंग्जाइटी डिसऑर्डर है, जिसमें बच्चे के अंदर हर चीज के प्रति लड़ने की भावना विकसित हो जाती है। इस डिसऑर्डर में बच्चे की प्रवृति किसी भी परिस्थिति में न कहने की बन जाती है। इसके अलावा बच्चे बिना किसी कारण के चीजों में डरना शुरू कर देते हैं।

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बच्चों में फोबिया इन कारणों से होता है विकसित

बायोलॉजिकल फैक्टर्स

दिमाग में कई तरह के केमिकल मौजूद होते हैं। इन्हें न्यूरोट्रांसमीटर्स कहते हैं। ये न्यूरोट्रांसमीटर्स ही इस चीज के लिए जिम्मेदार होते हैं कि कोई शख्स क्या महसूस करता है। इसके लिए वह दिमाग तक संकेत भेजते हैं और संकेतों को प्राप्त करते हैं। सेरोटोनिन (Serotonin) और डोपामाइन (Dopamine) दो अलग तरह के न्यूरोट्रांसमीटर्स हैं, जिनके कारण ही कोई शख्स एंग्जाइटी को महसूस करता है।

फैमिली फैक्टर्स (Family factors)

एंग्जाइटी और डर लोगों में इनहेरिडेटरी भी हो सकते हैं यानि ये बच्चे में उनके मां-बाप से भी आ सकते हैं। जिस तरह बच्चों को पेरेंट्स से बच्चों के बालों का कलर मिलता है उसी तरह उनमें इस तरह के डर भी आ सकते हैं। इसके अलावा एंग्जाइटी फैमिली मेंबर्स के कारण भी बच्चों में आ सकती है। उदाहरण के लिए यदि बच्चे के आस-पास कोई मकड़ियों से बहुत डरता है, तो बच्चे के अंदर भी मकड़ियों के लिए डर बैठ जाता है।

पर्यावरण से संबंधित फैक्टर्स

कोई दर्घटना या जीवन का कोई बुरा अनुभव (जैसे कि पेरेंट्स का तलाक, बीमारी या परिवार में किसी की मौत) बच्चों में एंग्जाइटी डिसऑर्डर का कारण बन सकता है।

बच्चों में फोबिया से कैसे निपटें (How to deal with phobias in children)

आज की इस भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल और तनाव के माहौल का असर बच्चों पर भी दिखने लगा है। बच्चों में अलग-अलग तरह की एंग्जाइटी और फोबिया के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों को फोबिया से बचाने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं।

नकारात्मक व्यक्तियों से बचें

बच्चे के आस-पास नकारात्मक विचारों के व्यक्ति को न आने दें। ऐसे व्यक्तियों का दृष्टिकोण काफी निराशावादी होता है और वे हमेशा नकारात्मक सुझाव देते हैं। ऐसे लोगों का संपर्क आपके बच्चे के आत्मविश्वास को कम कर सकता है।

वातावरण में बदलाव करें

यदि बच्चा फोबिया से परेशान है, तो घर के वातावरण को बदलें। सुबह-शाम बच्चे के साथ सैर पर जाएंपॉजिटिव लोगों और दोस्तों से मिलें। पारिवारिक आयोजनों में भाग लें, रोचक और ज्ञानवर्धक टीवी प्रोग्राम देखें और प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़ें।

पर्याप्त नींद लेने को कहें

मानसिक तनाव को दूर करने के लिए कम से कम छह से आठ घंटे की गहरी नींद बच्चों को दें। पर्याप्त नींद लेने से मानसिक और शारीरिक थकान को दूर करने में सहायता मिलती है। इसके साथ-साथ मन की एकाग्रता को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से उनके साथ एक्टिविटीज करें।

संतुलित भोजन लें

आपके द्वारा दी गई डायट का भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। बच्चों को भारी और तला-भुना भोजन देने से उसकी मानसिक और शारीरिक ऊर्जा का स्तर गिर जाता है। बच्चे को हल्की और बैलेंस डायट दें।

बच्चों में दिखने लगा है स्टडी फोबिया भी

बच्चों में फोबिया (Phobia in children) की लिस्ट में एक नया फोबिया भी शामिल हुआ है। इसे स्टडी फोबिया कहा जाता है। आमतौर पर देखा भी जाता है कि स्कूल का नाम सुनते ही बच्चे मुंह बनाने लगते हैं। इतना ही नहीं कई बच्चे तो स्कूल न जाने से बचने के लिए पेटदर्द, सिरदर्द या फिर इसी तरह के कई बहाने भी बनाते हैं। ऐसे में माना जाता है कि बच्चों का होमवर्क पूरा न होने या एग्जाम में कम नंबर आने के कारण पेरेंट्सस या टीचर्स से डांट खाने के कारण बच्चों में फोबिया (Phobia in children) पैदा हो जाता है। इसे ही स्टडी फोबिया कहा जाता है। कई बार पढ़ाई में अच्छा करने की पेरेंट्स की अपेक्षा के कारण भी बच्चों में फोबिया (Phobia in children) पैदा हो जाता है।

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कैसे पहचाने बच्चे को हुआ है स्टडी फोबिया

बच्चों में फोबिया (Phobia in children) के लक्षण आम तौर एक जैसे ही होते हैं। लेकिन, स्कूल फोबिया में ये थोड़े अलग हो सकते हैं। स्टडी फोबिया में देखा जाता है कि बच्चे स्कूल जाने या पढ़ाई करने से जी चुराने लगते हैं। इसके अलावा स्कूल न जाने के लिए हर रोज कोई नया बहाना ढ़ूढने लगते हैं। साथ ही स्कूल के प्रेशर के कारण बच्चों की भूख में कमी देखने को मिल सकती है। कई बार बच्चे स्टडी फोबिया के कारण चिड़चिड़े भी हो जाते हैं। इसके अलावा बच्चों का वजन कम होना, लूज मोशन आदि भी बच्चों में स्टडी फोबिया के लक्षण हो सकते हैं।

आप चाहे तो इस संबंध में डॉक्टर से बात कर सकते हैं। हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता। इस आर्टिकल में हमने आपको बच्चों में फोबिया (Phobia in children) के संबंध में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंग।

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लेखक की तस्वीर
Govind Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 30/06/2021 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड