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Shanchol vaccine: हैजा जैसी बीमारी से छुटकारा दिलाती है शंकोल वैक्सीन!

Shanchol vaccine: हैजा जैसी बीमारी से छुटकारा दिलाती है शंकोल वैक्सीन!

हमारे शरीर में बैक्टीरिया या वायरस अटैक कर शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाने का काम करते हैं। अगर शरीर को इंफेक्शन से बचाना है, तो सही समय पर वैक्सीन लगवाना बहुत जरूरी होता है। एक ऐसी ही बीमारी है हैजा, जो बैक्टीरिया के इंफेक्शन के कारण फैलती है। हैजा का रोग गंदे पानी या फिर दूषित भोजन के माध्यम से फैलता है और शरीर को संक्रमित करने का काम करता है। ये संक्रमण डायरिया का भी कारण बनता है। अगर समय पर पेशेंट का इलाज न कराया जाए, तो ये मृत्यु का कारण भी बन सकता है। अगर ये कहा जाए कि हैजा डेवलपिंग कंट्रीज की बीमारी है, तो ये गलत नहीं होगा। पेशेंट के शरीर में पानी की कमी न होना बहुत जरूरी है, वरना हैजा के पेशेंट को डिहायड्रेशन (Dehydration) की समस्या का सामना करना पड़ता है, जो कि खतरनाक स्थिति है। लोगों को हैजा जैसी बीमारी का सामना न करना पड़े, इसलिए शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) का इस्तेमाल किया जाता है। इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) से जुड़ी अहम जानकारी देंगे। आइए पहले जानते हैं हैजा से जुड़ी अहम जानकारी के बारे में।

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हैजा (Cholera) क्या है?

शंकोल वैक्सीन

कॉलरा या हैजा संक्रामक बीमारी है। ये बीमारी विब्रियो कोलेरे (Vibrio cholerae) नामक बैक्टीरिया के कारण फैलती है। इस बीमारी के कारण शरीर से अधिक मात्रा में पानी का लॉस हो जाता है। जो लोग कच्चे फल या सब्जियां बिना धुले ही खा लेते हैं, उनमें भी ये संक्रमण हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति जब मल करता है, तो मल के माध्यम से ये बैक्टीरिया पानी के साथ ही भोजन को भी दूषित करने का काम करता है। जो लोग पानी को साफ करके नहीं पीते हैं या फिर खानपान के दौरान साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं, उन्हें ये संक्रमण आसानी से हो जाता है। बीमारी की शुरुआत में अक्सर ये समझ नहीं आता है कि ये कोई संक्रमण है या फिर नहीं। हैजा होने पर डॉक्टर जांच करते हैं और पेशेंट को अधिक पानी पीने की सलाह, इंटरवीनस फ्लूइड रीहाइड्रेशन (Intravenous fluid rehydration ), बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। इस संक्रमण के कारण पेशेंट को पेट में ऐंठन, बुखार (Fever), नींद का एहसास आदि समस्याएं महसूस होती है। जानिए हैजा की बीमारी से बचने के लिए शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) कैसे काम करती है।

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शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) क्या है?

शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) का इस्तेमाल कॉलरा से बचने के लिए किया जाता है। ये वैक्सीन एक वर्ष की आयु के ऊपर के बच्चों को मौखिक रूप यानी ओरली दी जा सकती है। करीब दो सप्ताह के अंतराल में इस वैक्सीन के दो डोज दिए जा सकते हैं। वैक्सीन लेने के करीब दस दिन बाद तक वैक्सीन का असर शुरू हो जाता है। इस वैक्सीन को खाली पेट लेने की सलाह दी जाती है। दवा का डोज एक बार लेना या दो बार, इस बारे में डॉक्टर से जानकारी लेना बेहतर रहेगा। हैजा से सुरक्षा के लिए ये वैक्सीन असरदार है। इसे बच्चे से लेकर वयस्क भी ले सकते हैं लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के इसे नहीं लेना चाहिए। कॉलरा को खतरनाक बीमारी माना जाता है। शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) लेने के बाद शरीर बैक्टीरिया (Bacteria) के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने लगता है, जो बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है। जिन स्थानों में कॉलरा का इंफेक्शन फैला हुआ है, वहां जाने वाले लोगों को शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) लेने की सलाह दी जा सकती है।

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शंकोल वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स (Shanchol vaccine side effects)

किसी भी वैक्सीन को लेने के बाद दुष्प्रभाव दिखना आम बात होती है। शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) मुंह के माध्यम से ली जाती है। वैक्सीन लेने के बाद लक्षण कुछ समय तक दिखते हैं और फिर अपने आप ही चले भी जाते हैं। शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) लेने के बाद नींद न आना, सिरदर्द (Headache), चिड़चिड़ापन, फीवर, कमजोरी का एहसास (Weakness), इचिंग, रैशेज, खांसी (Cough), मुंह में सूखापन, खांसी आदि साइड इफेक्ट्स नजर आ सकते हैं। आप वैक्सीन लेने से पहले इस बारे में डॉक्टर से भी जानकारी ले सकते हैं कि बच्चे में क्या दुष्रभाव दिख सकते हैं। डॉक्टर आपको कुछ जरूरी मेडिसिंस भी दे सकते हैं ताकि बच्चे को कोई परेशानी होने पर आप उसका इस्तेमाल कर सके।

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प्रेग्नेंसी या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान सुरक्षित है ये वैक्सीन?

प्रेग्नेंसी या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) को सुरक्षित नहीं माना जाता है। अगर आप प्रेग्नेंट है तो डॉक्टर से इस बारे में जानकारी जरूर लें। प्रेग्नेंसी के दौरान इस वैक्सीन को लेने से डेवलपिंग बेबी पर क्या असर होता है, इस बारे में ज्यादा स्टडी नहीं हुई। वहीं अगर आप ब्रेस्टफीडिंग (Breastfeeding) या बच्चे को दूध पिला रही हैं, तो इस वैक्सीन को लेने की सलाह दी जा सकती है। आपको इस बारे में अपनी डॉक्टर की सलाह को मानना चाहिए। हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता है। किडनी या लिवर पेशेंट्स के लिए शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) को सुरक्षित माना जाता है लेकिन बिना डॉक्टर की जानकारी के कोई भी कदम न उठाएं। शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) के एक डोज की कीमत 355 रु है। वैक्सीन की कीमत कुछ कम या फिर ज्यादा भी हो सकती है। हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता है।

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हैजा से बीमार बच्चे को शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) तुरंत नहीं दी जा सकती है। ऐसी स्थिति में बच्चे के ठीक होने का इंतजार करना होता है और फिर वैक्सीन दी जाती है। अगर आप खुद को और अपने बच्चों को हैजा जैसी गंभीर बीमारी से बचाना चाहते हैं, तो नीचे दी गई बातों को जरूर ध्यान रखें।

  • हैजा से बचाव के लिए साफ-सफाई बहुत जरूरी है। साफ पानी के लिए आप प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • अगर आपके पास प्यूरीफायर नहीं है, तो डॉक्टर से पानी को साफ करने के उपाय के बारे में जानकारी जरूर लें।
  • बाथरूम का इस्तेमाल करने के बाद हाथ अच्छी तरह से धुलें।
  • खाने को बनाते समय अच्छी तरह से पकाएं।
  • बच्चों को कच्चे फल या फिर सब्जियों को खाने से रोकें क्योंकि इससे भी हैजा का अधिक खतरा रहता है।
  • जिन स्थानों में हैजा की बीमारी फैली हुई है, वहां जाने से बचें। अगर आपको जाना जरूरी है, तो डॉक्टर से परामर्श के बाद वैक्सीन जरूर लें।

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हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता है। इस आर्टिकल में हमने आपको शंकोल वैक्सीन (Shanchol vaccine) के बारे में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ दिन पहले को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड