कैसे हैंडल करें किशोरों के मूड स्विंग और सिबलिंग फाइटिंग?

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Update Date मई 21, 2020 . 2 मिनट में पढ़ें
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पेरेंट्स का बच्चों के जीवन और करियर पर नजरिया आज बदला है। नए पेेरेंट्स बच्चों के करियर को लेकर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा अवेयर हुए हैं। लेकिन, सभी पॉसिबल तरीकों को अपनाने के बावजूद भी बच्चों में मूड स्विंगिंग मूड स्विंग की शिकायतें बढ़ी हैं। एक बच्चे को उदासी या अत्यधिक मनोदशा की लगातार भावनाओं को महसूस करने का कारण बन सकता है जो कई लोगों में सामान्य नेचर के सामान्य से कहीं अधिक गंभीर है। यह बच्चे को वास्तविकता से दूर कर देता हैं। 

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कैसे पहचानें बच्चों के बदलते मिजाज को 

कई मनोवैज्ञानिकों के अनुसार जहां पहले बच्चों में हाॅर्मोनल बदलाव 13-14 वर्ष में होते थे, अब यह बदलाव 10-12 साल के बच्चों में देखा गया है। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सीमा हिंगोरानी कहती हैं : बच्चों को मशीन बना दिया गया है। बच्चे क्लास, और ट्यूशन में इतना उलझा हुआ है कि वह रुकने का नाम ही नहीं लेती। वह जान ही नहीं पाता कि, बॉडी और माइंड में किस तरह के बदलाव हो रहे हैं? गुस्सा करना इनकी आदत जैसी होने लगती है। फैमिली एक्टिविटीज में कमी के कारण बच्चों में मूड स्विंग करना आम हो गया है। 

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मूड स्विंग को कैसे पहचानें?

ये हैं आसान तरीके :

सभी बच्चों में मूड स्विंग के दौरान अलग रिएक्शन  होता है। कुछ बच्चे इस के रिजल्ट में ज्यादा गुस्सा दिखाते हैं तो वहीं कुछ बच्चे पहले से ज्यादा चिड़चिड़े दिखते हैं। कई बच्चे खाना-पीना कम कर देते हैं, तो बहुत से बच्चे घंटों नहाने की आदत के शिकार हो जाते हैं। कई बच्चे लोगों से मिलना-जुलना छोड़ने लगते हैं। यह एक बहुत बड़े संकेत की ओर इशारा करती है कि बच्चों में मूड स्विंग ने जगह बनाना शुरू कर दिया है। 

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बच्चों से मूड स्विंग को दूर करने के उपाय

  • जब बच्चे मूड स्विंग को लेकर परेशान हों तब आपको अपने बच्चों के शरीर में आ रही बदलाव को समझने की कोशिश करना चाहिए। 
  • बच्चों पर अपनी आकांक्षाओं का बोझ अभी से न डालें, बच्चे हर चीज में उतने होशियार नहीं होते, जितना कि बड़े चीजों को समझते हैं। 
  • बच्चों में हो रही हार्मोनल चेंज पर पैनी नजर बनाए रखें और उनसे बहुत सॉफ्ट्ली पेश आना चाहिए।  ऐसी स्थिति होने पर जितनी ज्यादा हो सके उनसे बात करती रहनी चाहिए।
  • सबसे जरूरी घर के माहौल को पॉजिटिव बनाए रहना है। घर के अंदर और बाहर पॉजिटिविटी बनाए रखें।  बच्चों के सामने ऐसी कोई चीज न करें, जिनसे उन्हें अकेलापन महसूस हो सकता ह। किसी भी कीमत उन्हें अकेलापन नहीं महसूस होने दें।
  • कभी-कभी बच्चे आपसे बात नहीं करना चाहते तो उन्हें ज़्यादा परेशान न करें. हर समय उन्हें कुछ सिखाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जितना अधिक हो सके बच्चों से सीम्पैथी बनाए रखें, गुस्सा करने की जरूरत नहीं है। उन्हें डांटने की बजाए उनसे प्यार से ट्रीट करें। 
  • आपकी सवाल का जवाब दें, तो उन्हें बीच में टोक टाक बिल्कल भी न करें। जब बच्चा जवाब दे रहा हो तो उनको ध्यान से सुनें। 
  • मूड स्विंग के दौरान बच्चे के डाईट से किसी तरह का समझौता नहीं करें। हेल्दी और पौष्टिक खाना खिलाएं। फल, और अंडे रेगुलर बेसिस पर खिलाने से उनमें नेगेटिविटी से लड़ने में ताकत मिलेगी। एक बार में खिलाने से बेहतर है कि उनके खानों को बारी-बारी बांटकर खिलाएं।

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