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भूलकर के भी इग्नोर न करें बच्चों के स्कूल से जुड़ी ये बातें

भूलकर के भी इग्नोर न करें बच्चों के स्कूल से जुड़ी ये बातें

हर पेरेंट्स अपने बच्चे को पढ़ा-लिखा कर काबिल इंसान बनाना चाहते है लेकिन कई बार बच्चे स्कूल जाने के नाम से ही रोना शुरू कर देते है। ऐसे में बच्चों को स्कूल और पढ़ाई की अहमियत बता कर आप उन्हें जाने के लिए मना सकते हैं। इसके अलावा स्कूलों में हो रही विभिन्न घटनाओं की वजह से हम खुद भी बच्चों के लिए चिंतित रहते हैं। इसलिए बच्चों के स्कूल से जुड़ी कुछ मुख्य बातें जिन्हें कभी भी इग्नोर नहीं करना चाहिए।

स्कूल में कहीं अकेले जाए तो रोकें

स्कूल से जुड़ी बातों में बच्चों को बताएं कि स्कूल में कहीं जाना हो तो अकेले नहीं जाएं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि अगर उन्हें बाथरूम या किसी दूसरे क्लास में जाना हो तो अपने फ्रेंड्स में से किसी को साथ ले लें। बच्चों को समझाएं कि वो कहीं अकेले जाने के बजाए क्वेटीचर से रिस्ट कर सकते हैं कि उनके साथ किसी स्टाफ को भेज दें।

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बस या कैंपस में संदेह की स्थिति में

बच्चों का एक बड़ा समय स्कूल बस और स्कूल कैंपस में बीतता है। इतनी देर तक घर से दूर बच्चे की चिंता होती रहती है। बच्चा कभी भी स्कूल से जुड़ी संदेहास्पद स्थिति की जिक्र करे तो उन्हें बताएं कि ऐसी स्थिति दोबारा हो तो टीचर से बताएं।

पनिशमेंट का डर बढ़ने न दें

कई बार बच्चे स्कूल में पनिशमेंट के डर की वजह से घबराए रहते हैं। घर पर भी इसका असर देखने को मिलता है। वह थोड़े उदास दीखते हैं, पढ़ाई में मन नहीं लगा पाते। स्कूल जाने में कतराते है। अगर ऐसा है तो बच्चों से बात करके इसका कारण पूछें। इसकी वजह जानकर उसका हल निकालें और बच्चों के अंदर से पनिशमेंट का डर को भगाएं।

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हाइजीन से जुड़ी बातें समझाएं

आप अपने बच्‍चे को स्कूल में पर्सनल हाइजीन की सीख जरूर दें। अगर बच्चा स्‍कूल में है तो उसके पास आप बार-बार नैप्पी जांच करने के लिए आप नहीं होंगे। आप बच्‍चे को सिखाएं कि अगर टॉयलेट आए बताए, टॉयलेट सीट पर बैठना, शौच का सही तरीका, शौच के बाद अपने हाथ-पैर की सफाई रखना।

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बच्‍चे अभद्र न बनें

कई बार मां-बाप बच्‍चे की गलती पर प्यार से हंस कर उसे टाल देतें हैं। आगे परिणाम यह होता है कि बच्‍चे को इसकी आदत लग जाती है और वह अभद्र होता चला जाता है। जैसे आप अपने बच्‍चे को बड़ों का आदर करना, आप करके बात करना सिखाएं, प्‍लीज, थैंक्‍यू और सॉरी जैसी कम्युनिकेशन स्किल्स के बेसिक बातें सिखाएं। जिससे कि वह स्‍कूल में अकेलापन महसूस न करे और दोस्‍त बना ले।

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नॉन-टीचिंग स्टाफ से नजदीकी

अपने बच्चों को स्कूल के नॉन-टीचिंग स्टाफ जैसे – बस ड्राईवर, कंडक्टर, या माली और चपरासी से नजदीकी बढ़ाकर कर न रखने को कहें। इससे बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ता है और भटकाव होने की संभावना हो जाती है।

दोस्तों के बारे में बातें बताना

यदि आपका बच्चा आपको उसके दोस्तों के बारे में कुछ बताना चाहता है तो उसकी इस बाद को इग्नोर न करें। क्योंकि हो सकता है कि वह आप से कुछ ऐसा शेयर करना चाहता हो जो उसके लिए सही नहीं है व साथ ही आपकी राय उसके लिए बेहद मायने रखती हो।

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टीचर से फ्रेंडशिप

अपने बच्चों को स्कूल के बारे में पूछें कि क्या उसकी कोई टीचर दोस्त है? अगर वह हां कहता तो उससे टीचर के बारे में पूछें और साथ ही जानने की कोशिश करें की बच्चा टीचर के साथ कितना समय बीतता है व टीचर उसके साथ कोई गलत व्यवहार तो नहीं करता या करती हैं।

स्कूल में लड़ाई

बच्चों को स्कूल में हुई किसी लड़ाई के बारे में बताना बेहद मुश्किल होता है, तो उसे समझाएं की उसे इस प्रकार के विषय से दुरी बनाकर रखनी है और साथ ही यदि कोई बच्चा उसे परेशान करता है तो वह उसकी शिकायत टीचर को करें। यदि टीचर कोई एक्शन नहीं लेता है तो बच्चे को बताएं की वह आप से भी शेयर कर सकता है।

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बार-बार पनिशमेंट मिलना

स्कूल में टीचर अक्सर बच्चों पर अपना गुस्सा निकालते हैं। ऐसे कई मामलें न्यूज के जरिए सामने भी आ चुके हैं। ऐसे में अपने बच्चे से पूछते रहा करें कि उसके साथ स्कूल में क्या हुआ?, उसका दिन कैसा रहा? और क्या टीचर ने उसे किसी बात के लिए डांटा या पनिश तो नहीं किया।

अनलाइन सिस्टम

आज के इस दौर में सबकुछ अनलाइन होने लगा है फिर चाहे वह पढ़ाई हो या पेरेंट्स टीचर मीटिंग। अपने बच्चे की स्कूल टीचर से पूछें कि स्कूल का अनलाइन सिस्टम कैसा और क्या आपको इसे जॉइन करने की आवश्यकता है? अनलाइन क्लास की तरह पेरेंट्स के लिए भी अनलाइन बातचीत के लिए वीडियो कॉल और फेसबुक ग्रुप्स बनाए जाते हैं। इनकी मदद से न केवल आप टीचर से कम्यूनिकेट कर पाएंगे बल्कि स्कूल होने वाले इवेंट्स के बारे में भी जान पाएंगे।

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होमवर्क

बच्चों का स्कूल का होमवर्क एक बेहद महत्वपूर्ण चीज होती है। कई बार बच्चे होमवर्क पूरा होने की वजह से घबराएं रहते हैं और स्कूल न जाने के बहाने ढूंढते हैं। होमवर्क पूरा होने के कारण बच्चे को पनिशमेंट या दोस्तों के आगे शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यह आपकी ड्यूटी होती है कि आप अपने बच्चों स्कूल डायरी रोजाना चेक करें और उनका होमवर्क पूरा करने में उनकी मदद करें।

बच्चों को बेहतर ढंग से समझने के लिए उनकी सभी बातों को अच्छे से सुने और उनपर सही रिएक्ट करना सीखें। बच्चे को कभी भी अकेला महसूस न होने दें और उसे समझाएं की स्कूल जाना उसके लिए कितना जरूरी है। इसके साथ ही आपकी यह भी ड्यूटी होती है कि आप उसकी परेशानियों को समझें और उसको सही समाधान दें। कभी भी अपने बच्चे की बातों को इग्नोर न करें। इससे वह आगे चल के आपको महत्वपूर्ण बातों के बारे में भी शायद न बताए। कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता का सपोर्ट बेहद जरूरी होता है।

उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और बच्चे की देखभाल से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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सूत्र

U.S. Department of Education/https://www2.ed.gov/parents/academic/help/succeed/succeed.pdf/Accessed on 06/08/2020

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Parent Engagement in Children’s Learning/https://www.education.gov.au/parent-engagement-children-s-learning/Accessed on 06/08/2020

लेखक की तस्वीर
Dr. Abhishek Kanade के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nikhil Kumar द्वारा लिखित
अपडेटेड 05/11/2019
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