गर्भावस्था में पालतू जानवर से हो सकती हैं ये बीमारियां, अगर नहीं बरतेंगे सावधानियां

    गर्भावस्था में पालतू जानवर से हो सकती हैं ये बीमारियां, अगर नहीं बरतेंगे सावधानियां

    क्या आप प्रेग्नेंट हैं और आपके घर में पेट्स हैं? क्या इन पालतू जानवरों से गर्भवती महिला को कुछ नुकसान हो सकते हैं? वैसे तो, घरों में पालतू जानवर रखना सुरक्षित ही माना जाता है लेकिन, गर्भावस्था में पालतू जानवर को लेकर सावधानी बरतनी पड़ती है। जैसे, अगर घर में कोई महिला प्रेग्नेंट है। “हैलो स्वास्थ्य” के इस आर्टिकल में जानते हैं कि कैसे गर्भावस्था में पालतू जानवर गर्भ में पल रहे शिशु को प्रभावित कर सकते हैं।

    गर्भावस्था में पालतू जानवर से क्या नुकसान हो सकते हैं?

    जुनोटिक रोग (Zoonotic disease)

    जुनोटिक एक ऐसी बीमारी है जो एक जानवर, से इंसान तक पहुंच सकती है। तरह-तरह के जानवरों में अलग-अलग रोगाणु होते हैं जो इंसानों में बीमारी फैला सकते हैं। यदि आप अपने जानवर की सही से देखरेख करते हैं तो उसे बीमारी होने की संभावनाएं कम होती हैं। कुछ जुनोटिक बीमारियों का इलाज आसानी से किया जा सकता है लेकिन, कुछ विशेष रूप से कमजोर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक हो सकती हैं। इसलिए गर्भावस्था में पालतू जानवर से सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

    [mc4wp_form id=”183492″]

    गर्भावस्था में पालतू जानवर: सलमोनेलोसिज (Salmonellosis)

    सलमोनेलोसिज एक जीवाणु संक्रमण है जो कि साल्मोनेला से होता है। पालतू जानवर के कारण आपको सलमोनेलोसिज होता है, जिसके चलते आपको बुखार, दस्त, उल्टी और पेट दर्द जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। दस्त और उल्टी से डीहायड्रेशन हो सकता है। गर्भवती महिलों के लिए यह काफी खतरनाक होता है क्योंकि बैक्टीरिया गर्भ में पल रहे शिशु तक भी पहुंच सकते है।

    और पढ़ें : अगर गर्भवती हैं, तो जरूर जान लें रूबेला के लक्षण

    गर्भावस्था में पालतू जानवर: लिम्फोसाइटिक कोरियोमेनिन्जाइटिस (Lymphocytic Choriomeningitis)

    लिम्फोसाइटिक कोरियोनिन्जाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जो लिम्फोसाइटिक कोरिओनामाइटिस वायरस (एलसीएमवी) से होती है। एलसीएमवी ज्यादातर जंगली चूहों से फैलता है लेकिन, पालतू चूहों में संक्रमण भी हो सकता है। माइल्ड एलसीएमवी से फ्लू जैसी परेशानी हो सकती है। साथ ही इससे न्यूरोलॉजिकल समस्याएं जैसे : मेनिन्जाइटिस (Meningitis) या पैरालिसिस (Paralysis) भी हो सकता है। गर्भावस्था में पालतू जानवर के वायरस बच्चे को प्रभावित कर सकते हैं और इससे गर्भपात (मिसकैरिज), स्टिलबर्थ या जन्मजात असामान्यताएं भी हो सकती हैं

    और पढ़ें : गर्भवती महिलाओं को ज्यादा पसीना क्यों आता है?

    गर्भावस्था में पालतू जानवर: रेबीज (Rabies)

    रेबीज संक्रमण एक ऐसे जानवर की लार से फैलता है जिसके पास रेबीज वायरस होता है। एक जानवर दूसरे जानवर या इंसान को यह इंफेक्शन दे सकता है। इसकी शुरुआत बुखार, ठंड लगना और मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षणों से होती है। फिर, यह मस्तिष्क को प्रभावित करना शुरू कर देता है जिससे चिंता और नींद आने में कठिनाई होने लगती है। यदि कोई कुत्ता या जंगली जानवर गर्भवती महिला को काटता है, तो आपको जल्द से जल्द अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए। एंटी-रेबीज शॉट्स के जरिए, वायरस को लक्षण शुरू होने से पहले ही रोका जा सकता है। यह उपचार गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित माना जाता है।

    और पढ़ें : क्या होती है बेबी ड्रॉपिंग? प्रेग्नेंसी के दौरान कब होता है इसका अहसास?

    प्रेग्नेंसी के दौरान कुत्ते से ये नुकसान हो सकते हैं

    आमतौर पर गर्भवती और नवजात शिशुओं के लिए कुत्तों का आसपास होना सुरक्षित माना जाता है। यदि आपका पालतू कुत्ता स्वस्थ है और उसे सभी तरह के जरूरी टीके लगे हैं तो ऐसे में आपको कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। गली के कुत्ते किसी को भी खासतौर पर गर्भवती महिला या छोटे बच्चे के लिए मुश्किल का कारण बन सकते है। इसलिए, निम्नलिखित बातें अवश्य सुनिश्चित करें :

    • सुनिश्चित करें कि आपके पालतू कुत्ते की नियमित जांच होती हो और समय-समय पर उसे टीके लग रहे हों।
    • यदि कुत्ते का व्यवहार अनियमित हो तो ऐसे में उन्हें ट्रेनिंग दें।
    • कुत्तों में ईर्ष्या की भावना हो सकती है, ऐसे में बच्चे और मां का ख्याल ज्यादा रखें।
    • उन कुत्तों से सावधान रहें जिन्हें आप नहीं जानते हैं और अपने बच्चे को घर लाने से पहले कुत्ते के व्यवहार संबंधी संकेतों पर ध्यान दें।
    • अपने कुत्ते को टिक्स (जूं) से बचाएं।

    और पढ़ें-प्रेग्नेंसी के दौरान योग और व्यायाम किस हद तक है सही, जानें यहां

    बिल्ली से हो सकता है इंफेक्शन

    गर्भावस्था में पालतू जानवर से सावधानी बरतने की जरूरत होती है। यदि आपके पास बिल्ली है तो बता दें बिल्ली के मल में पैरासाइट होता है जो की टोक्सोप्लाज्मोसिस का कारण बनता है। टोक्सोप्लाज्मोसिस एक सामान्य संक्रमण है और गर्भवती महिला और बच्चे को यह संक्रमण प्रभावित नहीं करता है। यदि आप काफी समय से बिल्लियों के आसपास रहे हैं, तो संभावना है कि आप इस इन्फेक्शन के शिकार हो जाएं। हालांकि, सभी बिल्लियों में पैरासाइट नहीं होता है। वैसे घर में रहने वाली बिल्लियों में टोक्सोप्लाज्मोसिस या किसी अन्य बीमारी होने की संभावना कम होती है, लेकिन संक्रमण कब और किसे घेर ले, यह कहना मुश्किल है। इसलिए, संक्रमण को रोकने के लिए ये टिप्स फॉलो करें-

  • समय समय पर अपने हाथ धोएं।
  • बिल्ली को कच्चा मीट ना खिलाएं क्योंकि उसमें पैरासाइट होने की संभावना अधिक होती है।
  • बिल्ली जिस जगह पर मल और मूत्र त्यागे, उस जगह से दूर रहें।
  • बिल्लियों के लिए उपयोग होने वाले सैंडबॉक्स को ढककर रखे।
  • सैंडबॉक्स को साफ करते समय हमेशा डिस्पोजेबल दस्ताने पहनें।
  • सैंडबॉक्स को प्रतिदिन साफ करें।
  • नियमित रूप से बिल्ली की जांच करवाएं और टीकाकरण के लिए पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
  • मछली है घर में तो बरतें ये सावधानी

    पालतू मछली से आमतौर पर गर्भवती महिलाओं को कोई समस्या नहीं होती है। लेकिन, आपको खुद को स्वस्थ रखने के लिए मछलियों और उनके टैंक की देखभाल करनी चाहिए। गर्भावस्था के समय पालतू मछली की देखभाल के लिए यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं।

    • मछलियों के पानी या उपकरण के संपर्क में आने के बाद हमेशा अपने हाथ धोएं।
    • टैंक को साफ करते समय दस्ताने अवश्य पहने, खासकर यदि आपके हाथों पर चोट लगी हो। ऐसे में कोशिश करें कि कोई और ही टैंक को साफ करें।
    • हर मछली की अपनी अलग-अलग जरूरतें होती हैं। मछली को स्वस्थ रखने के लिए, सुनिश्चित करें कि आपके पास मछली के लिए सही टैंक, उपकरण और भोजन है।
    • यदि आपके टैंक में कोई बीमार या मृत मछली हो, तो उसे जल्द से जल्द टैंक से निकाल दें। दस्ताने पहनना ना भूले।

    गर्भावस्था में पालतू जानवर द्वारा काटे जाने पर क्या करें?

    गर्भावस्था में पालतू जानवर द्वारा काटने पर सबसे पहले आप फर्स्ट ऐड का इस्तेमाल करें। प्रभावित जगह को किसी एंटीसेप्टिक से साफ करें और उस पर एंटी-सेप्टिक क्रीम लगाएं। जल्दी से जल्दी डॉक्टर से टीका लगवाएं ताकि कोई गंभीर समस्या न हो।

    नवजात शिशु के लिए अपने पालतू जानवरों को कैसे तैयार करें?

    कोई भी पालतू जानवर नए इंसान को देख कर घबरा जाता है। नवजात शिशु के आने पर पालतू जानवर बच्चे से डर सकता है या बच्चे से उसको जलन भी महसूस हो सकती है। बच्चे के आने से पहले ही पालतू जानवरों के जीवन में कुछ परिवर्तन ला कर उन्हे तैयार कर सकते हैं। जैसे-

    • बच्चे के जन्म से पहले ही अपने पालतू जानवर को पट्टे से बांधने की आदत डालें।
    • बच्चे के जन्म के बाद, जानवरों को शिशु के कपड़ो की गंध से बच्चे की पहचान करवाएं।
    • अपने नवजात को पालतू जानवर के साथ कभी अकेला न छोड़ें।
    • नवजात शिशु के आने के बाद भी अपने पालतू जानवर की केयर करना न भूले।

    गर्भावस्था में पालतू जानवर को आसपास रखना चाहिए या नहीं। वैसे तो डॉक्टर भी गर्भवती होने के बाद महिलाओं को पालतू जानवरों से दूर रहने की सलाह देते हैं। लेकिन, पेट्स से प्यार करने वालों के लिए यह काफी मुश्किल हो जाता है। इसलिए, गर्भावस्था में पालतू जानवर आपके साथ है तो ऊपर बताएं गई बातों का ध्यान रखें जिससे मां और उसके शिशु की देखभाल सही से की जा सके।

     

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    Mayank Khandelwal


    Shikha Patel द्वारा लिखित · अपडेटेड 04/08/2020

    advertisement
    advertisement
    advertisement
    advertisement