जानिए क्या हैं गर्भपात से जुड़े मिथ और उनकी सच्चाई

By Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar

मिसकैरिज के बाद एक मां के केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, मानसिक रूप से भी परेशान हो जाती है। खुद की परेशानी के साथ कई बार लोगों की बातें भी मन को दुखी कर सकती हैं। मिसकैरिज के मिथ को लेकर लोगों के मन में बहुत सी बातें होती हैं। मिथ के रूप में मिसकैरिज के बाद महिला दोबारा मां न बन पाना, मिसकैरिज के लिए महिला का जिम्मेदार होना, ब्लीडिंग से मिसकैरिज का संबंध आदि बातें शामिल होती हैं। मिसकैरिज के बाद भी महिला स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दे सकती है। मिसकैरिज को लेकर अगर आपके मन में भी मिथ है तो ये खबर जरूर पढ़ें।

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मिथ- मिसकैरिज के बाद दूसरी प्रेग्नेंसी के लिए इंतजार करना चाहिए।

सच- मिसकैरिज के बाद दूसरी प्रेग्नेंसी के लिए इंतजार के बारे में फोर्टिस हॉस्पिटल कोलकाता की कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्‍ट डॉ. सगारिका बसु कहती हैं कि ‘मिसकैरिज के बाद दूसरी प्रेग्नेंसी के लिए ज्यादा इंतजार करने की जरूरत नहीं होती है। महिला दो से तीन महीने का समय ले सकती है। जब महिला शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत हो जाए तो वो दोबारा कंसीव करने के बारे में सोच सकती है। अगर सर्जिकल अबॉर्शन हुआ है तो डॉक्टर से पूछने के बाद दोबारा कंसीव किया जा सकता है।’

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मिथ – एक मिसकैरिज का मतलब है कि दोबारा भी ऐसा हो सकता है

सच- अगर महिला का एक बार मिसकैरिज हो चुका है तो ये जरूरी नहीं है कि दूसरी बार भी मिसकैरिज हो। कई बार परिस्थितियां अनुकूलन न होने की वजह से ऐसा होता है। दूसरी बार महिला आसानी से कंसीव भी कर सकती है और मां भी बन सकती है। अगर महिला का एक से अधिक बार मिसकैरिज हो चुका है तो अगली बार मिसकैरिज होने की संभावना बढ़ सकती है। डॉक्टर समस्या का समाधान कर प्रेग्नेंसी को सफल बनाने में सहयोग करते हैं।

मिथ- प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लीडिंग या फिर स्पॉटिंग का मतलब है कि मिसकैरिज हो जाएगा

सच- प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही के दौरान स्पॉटिंग होना कॉमन माना जाता है। प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में 20 प्रतिशत से 40 प्रतिशत महिलाओं को ब्लीडिंग हो सकती है। अगर महिला को अचानक से बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो जाती है तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए। कई बार ब्लीडिंग की वजह खतरनाक भी हो सकती है। अगर चेकअप के बाद भी ब्लीडिंग हो रही है तो डॉक्टर इसका उचित समाधान बताएंगे।

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मिथ- मिसकैरिज का मतलब है कि महिला का प्रेग्नेंसी के दौरान ठीक से ख्याल नहीं रखा गया

सच –लापरवाही से मिसकैरिज संभावना हो सकती है, यह इसका कारण नहीं बन सकता। मिसकैरिज के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। सर्वाइकल वीकनेस, यूट्रस का एब्नॉर्मल शेप, एज रिलेटेड इनफर्टिलिटी, जेनेटिक एब्नार्मेलिटी, इंफेक्शन और ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर आदि मिसकैरिज के कारण हो सकते हैं। हाॅर्मोन के बैलेंस न होने के कारण भी मिसकैरिज होने की संभावना रहती है। थायरॉइड डिसफंक्शन, हाई प्रोलेक्टिन लेवल, प्रोजेस्ट्राॅन की सही मात्रा न होना भी मिसकैरिज का कारण हो सकता है।

मिथ- मिसकैरिज के बाद मां बनना मुश्किल है

सच- मिसकैरिज के मिथ में ये बहुत ही कॉमन मिथ है। जबकि सच ये है कि अगर महिसा को दो से तीन बार भी मिसकैरिज हो जाए तो भी उसके 50 से 65 प्रतिशत मां बनने की संभावना रहती है। मिसकैरिज के बाद डॉक्टर से राय और परामर्श के बाद आसानी से कंसीव किया जा सकता है। मिसकैरिज के कारणों का पता लगना बहुत जरूरी है ताकि अगली प्रेग्नेंसी में संबंधित सावधानी रखी जा सके।

मिथ – तीन मिसकैरिज के बाद डॉक्टर को दिखाना चाहिए ।

सच- पहले के समय में इस बात पर विश्वास किया जाता था कि जब तक महिला के तीन मिसकैरेज न हो जाए, तब तक डॉक्टर को नहीं दिखाना चाहिए। आज के समय में महिलाएं भी इस बात से अवेयर हैं कि किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। जिस वजह से मिसकैरिज हुआ है, डॉक्टर उस कारण का पता लगाकर ट्रीटमेंट करेंगे ताकि भविष्य में उसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। अगर महिला की उम्र 35 से अधिक है तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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मिथ-  मिसकैरिज भारी सामान उठाने की वजह से होता है

सच- ऐसा बिलकुल नहीं है। 60 प्रतिशत मिसकैरिज क्रोमोसोमल एब्नार्मेलिटी की वजह से होते हैं। साथ ही हार्मोन डिसऑर्डर, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर और ब्लड क्लॉटिंग की वजह से होता है। ये सच है कि प्रेग्नेंसी के दौरान भारी सामान उठाने के लिए मना किया जाता है, लेकिन भारी सामान उठाने की वजह से मिसकैरिज नहीं होता है।

मिसकैरिज होना महिला के लिए शारीरिक और मानसिक हानि के बराबर होता है। ऐसे में परिवार के सदस्यों को महिला का साथ देना चाहिए। अगर आपके मन में भी मिसकैरिज को लेकर प्रश्न हैं तो एक बार अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

मिथ- महिला में कोई कमी है

सच – अगर महिला का मिसकैरिज हो गया है तो ये जरूरी नहीं है कि उसके अंदर बहुत बड़ी कमी या शारीरिक समस्या है। मिसकैरिज मिसकैरिज क्रोमोसोमल एब्नार्मेलिटी की वजह से या फिर हार्मोन डिसऑर्डर, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर और ब्लड क्लॉटिंग की वजह से हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है मिसकैरिज के बाद महिला को किसी भी प्रकार की कमी का ताना देकर उसे मानसिक रूप से परेशान किया जाए। मिसकैरिज महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर करता है। ऐसे में परिवार वालों को महिला का सहारा बनना चाहिए न कि उसकी कमी निकालनी चाहिए।

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