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सैल्पिंगेक्टोमी क्या है? जानिए कब पड़ती है इसकी जरूरत....

सैल्पिंगेक्टोमी क्या है? जानिए कब पड़ती है इसकी जरूरत....

प्रेग्नेंसी के लिए कंसीव करने में फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tubes) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन इसमें आई दिक्कत कई बार मां बनने में बाधा पैदा करती है। फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tubes)के आई गड़बड़ी के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन इसके इलाज के लिए कई बार इन टयूबस की सर्जरी करने के आवश्यकता होती है। जिस प्रॉसेज को सैल्पिंगेक्टोमी कहा जाता है। इस सर्जरी के दौरान कई बार फैलोपियन टयूब की निकालने की जरूर भी पड़ जाती है। आइए जानते हैं कि सैल्पिंगेक्टोमी (Salpingectomy) क्या है? और सैल्पिंगेक्टोमी (Salpingectomy) के दौरान किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

और पढ़ें: फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होने के कारण, लक्षण और उपाय

सल्पिंगेक्टोमी (Salpingectomy) क्या है?

फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tubes) महिलाओं के प्रजनन प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हम यह भी कह सकते हैं कि फैलोपियन टयूब, अंडाशय और गर्भाशय के बीच का संबंध है। लेकिन जब कई किसी कारणवंश फैलोपियन टयूब को को रिमूव करना पड़ता है, तो उस सर्जर प्रॉसेज को सैल्पिंगेक्टोमी (Salpingectomy) कहा जाता है। यह सर्जरी कई कारणों से करनी पड़ सकती है, लेकिन जिन महिलाओं में ओवेरियन कैंसर होता है, उनमें इस सर्जरी की आवश्यकता ज्यादा देखी गई है। सर्जरी के अलावा सैल्पिंगेक्टोमी में सर्जरी के अलावा, जब फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tubes) में पानी भर जाता है। तो फैलोपियन ट्यूब में भरे तरल को निकालने के लिए एक छेद किया जाता है और फ्लूइिड को निकाला जाता है। सल्पिंगेक्टोमी, स्थितिनुसार एक या दोनों फैलोपियन टयूब की हो सकती है। प्रेग्नेंसी में फैलोपियन टयूब की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। फैलोपियन ट्यूब अंडे को अंडाशय से गर्भाशय तक पहुचाने का फंक्शन करता है। सैल्पिंगेक्टोमी तब भी होती है, जब फैलोपियन ट्यूब का केवल एक हिस्सा हटा दिया जाता है। सल्पिंगेक्टोमी की जरूरत अन्य सर्जरी के साथ भी पड़ सकती है, जिनमें शामिल हैं या ओओफोरेक्टॉमी, हिस्टेरेक्टॉमी और सिजेरियन सेक्शन (C-Section)।

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सल्पिंगेक्टोमी (Salpingectomy) और सल्पिंगेक्टोमी-ओओफोरेक्टोमी में अंतर

सल्पिंगेक्टोमी तब होती है जब केवल फैलोपियन ट्यूब को हटाया जाता है, लेकिन ओओफोरेक्टॉमी में फैलोपियन के साथ अंडाशय को भी हटाया जाता है। जब ये दोनों प्रक्रियाएं एक ही साथ की जाती हैं, तो इसे सैल्पिंगेक्टोमी-ओओफोरेक्टॉमी (Salpingectomy-oophorectomy) या सल्पिंगो-ओओफोरेक्टॉमी (Salpingo-oophorectomy) कहा जाता है। सर्जरी के कारणों के आधार पर, सल्पिंगो-ओओफोरेक्टॉमी को कभी-कभी हिस्टेरेक्टॉमी के साथ भी इसे किया जाता है। सल्पिंगेक्टोमी या सल्पिंगो-ओओफोरेक्टॉमी ओपन सर्जरी या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के रूप में किया जा सकता है।

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सैल्पिंगेक्टोमी की जरूरत कब पड़ती है‌?

सैल्पिंगेक्टोमी का जरूरत कई तरह की समस्याओं के इलाज के लिए पड़ सकती है। आपका डॉक्टर इसकी सलाह इन स्थितियों में कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

वैसे तो फैलोपियन ट्यूब कैंसर, एक दुर्लभ कैंसर है, जिसके केसेज कम देखे जाते हैं। हां, आवेरियन कैंसर के कारण कई बारे फैलोपियन टयूब भी प्रभावित हो सकती है। फैलोपियन ट्यूब के घाव, बीआरसीए जीन म्यूटेशन (BRCA gene mutation) वाली लगभग आधी महिलाओं में होते हैं, जिन्हें ओवेरियन का कैंसर (ovarian cancer) भी होता है। कुछ स्थितियों में ओवेरियन का कैंसर कभी-कभी फैलोपियन ट्यूब से शुरू होता है। लेकिन रोगनिरोधक, सल्पिंगेक्टोमी डिम्बग्रंथि के कैंसर के विकास के जोखिम को कम कर सकता है।

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खुद को सैल्पिंगेक्टोमी के लिए कैसे तैयार करें (How to Prepare)?

सैल्पिंगेक्टोमी से पहले डाॅक्टर मरीज से इस प्रक्रिया के बारे में पूरा चर्चा करेंगे और ऑपरेशन से पहले और बाद के निर्देश बताएंगे। इसके साथ यह भी चैक करेंगे कि उन्हें पहले से कोई हेल्थ कंडिशन तो नहीं है। सभी मरीज में इसके आधार भिन्न हो सकते हैं, जैसे कि मरीज की ओपन सर्जरी होगी या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी। यह सर्जरी, मरीज के रोग के कारण, उम्र और उनके हेल्थ कंडिशन पर निर्धारित करती है। सर्जरी से पहले कुछ जरूरी बातों का पता होना चाहिए।

  • सर्जरी से पहले मरीज को एनेस्थीसिया दिया जाएगा, जिससे उन्हें घबराहट हो सकती है और पेट में दर्द (Stomach Pain) भी हो सकता है।
  • वहां पहनने के लिए ढीले-ढाले, आरामदायक कपड़े लेकर जाएं।
  • यदि आप पहले से किसी अन्य ट्रीटमेंट की दवाएं ले रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से पूछें कि क्या आपको उन्हें सर्जरी के दिन लेना चाहिए।
  • अपने डॉक्टर से पूछें कि सर्जरी (Surgery) से पहले आपको कितनी देर पहले से खाना-पीना बंद कर देना है।

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प्रक्रिया (Process) के दौरान क्या होता है ?

ओपन एब्डोमिनल सर्जरी (Open abdominal surgery) से ठीक पहले, मरीज को जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है। सर्जन मरीज के पेट के निचले हिस्से पर लंबा चीरा लगाया जाता है। फिर फैलोपियन ट्यूब को स्थिति को देखते हुए सर्जरी की जाती है और उसे रिमूव किया जाता है, यानि कि सैल्पिंगेक्टोमी की जाएगी। फिर, इसके बाद टांके लगा दी जाती है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी, ओपन सर्जरी की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होती है। इसमें आपके पेट के निचले हिस्से में एक छोटा चीरा लगाया जाएगा। लैप्रोस्कोपी, एक लंबा सा उपकरण है, जिसके साथ फोक्स लाइट और कैमरा होता है। इसे चीरे के माध्यम से अंदर डाला जाता है। मरीज का पेट गैस से फूल जाता है, यह आर्टिफिश्यल गैस होती है।

और पढ़ें: ऑर्किेऐकटमी : प्रोस्टेट कैंसर को रिमूव करने वाली सर्जरी के बारे इन बातों को जानना है जरुरी!

कैसी होती है रिकवरी (Recovery) ?

सर्जरी के बाद, डॉक्टर मरीज की निगरानी के लिए रिकवरी रूम में जाएंगे। एनेस्थीसिया से पूरी तरह से मरीज को जागने में कुछ समय लगेगा। इसके बाद मरीज मूं कुछ मिचली के साथ-साथ चीरे के आसपास दर्द (Pain) महसूस भी हो सकता है। यदि किसी को ओपन सर्जरी हुई है, तो मरीज को तब तक हॉस्पिटल में रहना होगा, जबतक कि वो पूरी तरह से स्वस्थ्य महसूस न करने न लगें। इसके बाद मरीज पहले जैसी अपनी सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए डॉक्टर की सलाह का पालन करें। इसमें केवल कुछ दिन लग सकते हैं, लेकिन कभी-कभी अधिक समय भी लग सकता है। घर आने के बाद, मरीज में यह लक्षण नजर आ सकते हैं:

  • बुखार और ठंड लगना
  • दर्द होना या मतली महसूस होना
  • लालीमा या सूजन होना
  • ब्लीडिंग
  • यूरिन में दिक्कत
  • लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में लगे चीरे छोटे होते हैं और ओपन सर्जरी की तुलना में अधिक जल्दी ठीक हो जाते हैं।

और पढ़ें: कैरोटिड एंडारटेरेक्टॉमी : ब्रेन से जुड़ी इस सर्जरी कर बारे में जानतें हैं आप?

संभावित जटिलताएं क्या हैं?

लैप्रोस्कोपी में ओपन सर्जरी की तुलना में अधिक समय लग सकता है, इसलिए मरीज लंबे समय तक एनेस्थीसिया से बेहाेश रह सकता है। सैल्पिंगेक्टोमी के अन्य जोखिमों में शामिल हैं

136 महिलाओं पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि सिजेरियन सेक्शन के साथ सैल्पिंगेक्टोमी करने वाली महिलाओं में जटिलताएं कम देखी गई थीं। हालांकि इस प्रॉसेज में समय थोड़ा अधिक लगता है। इसके अलावा लेप्रोस्कोपिक, सैल्पिंगेक्टोमी को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में पाया गया है। क्योंकि यह अधिक प्रभावी है और ओवेरियन कैंसर से बचाव में मदद कर सकता है। नसबंदी चाहने वाली महिलाओं के लिए यह एक अतिरिक्त विकल्प है।

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सैल्पिंगेक्टोमी के कुछ प्रभाव

सैल्पिंगेक्टोमी के दौरान यदि किसी महिला की केवल एक ही फैलोपियन टयूब हटाया गया है, तो भविष्य में उसके मां बनने की उम्मीद होती है। लेकिन यदि किसी महिला के दोनों ही फैलोपियन टयूब हटा दिए गए हैं, तो फिर यह उम्मीद खतम हो जाती है। दोनों फैलोपियन ट्यूब को हटाने का मतलब है कि वो महिल गर्भधारण नहीं कर सकती हैं और न ही उन्हें प्रेग्नेंसी से बचाव के लिए गर्भनिरोधक जैसे किसी सुरक्षा की आवश्यकता होगी। हालांकि, यदि किसी महिला का गर्भाशय है, वो हटाया नहीं गया है, तो इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (In Vitro Fertilization) की मदद से गर्भाधारण संभव हो सकता है।

सैल्पिंगेक्टोमी कराने से पहले, अपने डॉक्टर या किसी फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से अपनी फर्टिलिटी प्लान के बारे में चर्चा करें। अपने सभी हेल्थ कंडिशन के बारे में डॉक्टर को बताएं। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से मिलें।

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 17/08/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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