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मिसकैरिज के बारे में प्रचलित इन बातों पर न करें भरोसा, जान लें इनकी सच्चाई

मिसकैरिज के बारे में प्रचलित इन बातों पर न करें भरोसा, जान लें इनकी सच्चाई

मिसकैरिज (Miscarriage) के बाद एक मां के केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, मानसिक रूप से भी परेशान हो जाती है। खुद की परेशानी के साथ कई बार लोगों की बातें भी मन को दुखी कर सकती हैं। मिसकैरिज के बारे में लोगों के मन में बहुत सी बातें होती हैं। मिथ के रूप में मिसकैरिज के बाद महिला दोबारा मां न बन पाना, मिसकैरिज के लिए महिला का जिम्मेदार होना, ब्लीडिंग से मिसकैरिज का संबंध आदि बातें शामिल होती हैं। मिसकैरिज के बाद भी महिला स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दे सकती है। मिसकैरिज के बारे में ऐसे ही तमाम मिथक समाज में फैले हैं। गर्भपात को लेकर अगर आपके मन में भी ऐसे ही मिथ है तो ये खबर जरूर पढ़ें।

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मिथ- मिसकैरिज (Miscarriage) के बारे में कहा जाता है कि गर्भपात के बाद दूसरी प्रेग्नेंसी (Second Pregnancy) के लिए इंतजार करना चाहिए।

सच- मिसकैरिज के बाद दूसरी प्रेग्नेंसी के लिए इंतजार के बारे में फोर्टिस हॉस्पिटल कोलकाता की कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्‍ट डॉ. सगारिका बसु कहती हैं कि ‘मिसकैरिज के बाद दूसरी प्रेग्नेंसी के लिए ज्यादा इंतजार करने की जरूरत नहीं होती है। महिला दो से तीन महीने का समय ले सकती है। जब महिला शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत हो जाए तो वो दोबारा कंसीव करने के बारे में सोच सकती है। अगर सर्जिकल अबॉर्शन हुआ है तो डॉक्टर से पूछने के बाद दोबारा कंसीव किया जा सकता है।’

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मिसकैरिज के बारे में मिथ– एक मिसकैरिज (Miscarriage) का मतलब है कि दोबारा भी ऐसा हो सकता है

सच- अगर महिला का एक बार मिसकैरिज हो चुका है तो ये जरूरी नहीं है कि दूसरी बार भी मिसकैरिज हो। कई बार परिस्थितियां अनुकूलन न होने की वजह से ऐसा होता है। दूसरी बार महिला आसानी से कंसीव भी कर सकती है और मां भी बन सकती है। अगर महिला का एक से अधिक बार मिसकैरिज हो चुका है तो अगली बार मिसकैरिज होने की संभावना बढ़ सकती है। डॉक्टर समस्या का समाधान कर प्रेग्नेंसी को सफल बनाने में सहयोग करते हैं।

मिसकैरिज के बारे में मिथ- प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लीडिंग (Bleeding during Pregnancy) या फिर स्पॉटिंग (Spotting) का मतलब है कि मिसकैरिज हो जाएगा

सच- प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही के दौरान स्पॉटिंग होना कॉमन माना जाता है। प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में 20 प्रतिशत से 40 प्रतिशत महिलाओं को ब्लीडिंग हो सकती है। अगर महिला को अचानक से बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो जाती है तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए। कई बार ब्लीडिंग की वजह खतरनाक भी हो सकती है। अगर चेकअप के बाद भी ब्लीडिंग हो रही है तो डॉक्टर इसका उचित समाधान बताएंगे।

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मिसकैरिज के बारे में मिथ (Myth about Miscarriage) – मिसकैरिज का मतलब है कि महिला का प्रेग्नेंसी के दौरान ठीक से ख्याल नहीं रखा गया

सच –लापरवाही से मिसकैरिज संभावना हो सकती है, यह इसका कारण नहीं बन सकता। मिसकैरिज के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। सर्वाइकल वीकनेस, यूट्रस का एब्नॉर्मल शेप, एज रिलेटेड इनफर्टिलिटी, जेनेटिक एब्नार्मेलिटी, इंफेक्शन और ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर आदि मिसकैरिज के कारण हो सकते हैं। हाॅर्मोन के बैलेंस न होने के कारण भी मिसकैरिज होने की संभावना रहती है। थायरॉइड डिसफंक्शन, हाई प्रोलेक्टिन लेवल, प्रोजेस्ट्राॅन की सही मात्रा न होना भी मिसकैरिज का कारण हो सकता है।

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मिसकैरिज के बारे में मिथ (Myth about miscarriage)- मिसकैरिज के बाद मां बनना मुश्किल है

सच- मिसकैरिज के बारे में यह मिथ बहुत ही कॉमन है। जबकि सच ये है कि अगर महिसा को दो से तीन बार भी मिसकैरिज हो जाए तो भी उसके 50 से 65 प्रतिशत मां बनने की संभावना रहती है। मिसकैरिज के बाद डॉक्टर से राय और परामर्श के बाद आसानी से कंसीव किया जा सकता है। मिसकैरिज के कारणों का पता लगना बहुत जरूरी है ताकि अगली प्रेग्नेंसी में संबंधित सावधानी रखी जा सके।

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मिसकैरिज के बारे में मिथ – तीन मिसकैरिज के बाद डॉक्टर को दिखाना चाहिए

सच- पहले के समय में मिसकैरिज के बारे में इस बात पर विश्वास किया जाता था कि जब तक महिला के तीन मिसकैरेज न हो जाए, तब तक डॉक्टर को नहीं दिखाना चाहिए। आज के समय में महिलाएं भी इस बात से अवेयर हैं कि किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। जिस वजह से मिसकैरिज हुआ है, डॉक्टर उस कारण का पता लगाकर ट्रीटमेंट करेंगे ताकि भविष्य में उसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। अगर महिला की उम्र 35 से अधिक है तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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मिसकैरिज (Miscarriage) के बारे में मिथ- मिसकैरिज भारी सामान उठाने की वजह से होता है

सच- मिसकैरिज के बारे में यह मिथ बिलकुल ही गलत है। 60 प्रतिशत गर्भपात क्रोमोसोमल एब्नार्मेलिटी की वजह से होते हैं। साथ ही हार्मोन डिसऑर्डर (hormone disorder), ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (autoimmune disorder) और ब्लड क्लॉटिंग (blood clotting) की वजह से होता है। ये सच है कि प्रेग्नेंसी के दौरान भारी सामान उठाने के लिए मना किया जाता है, लेकिन भारी सामान उठाने की वजह से गर्भपात नहीं होता है।

मिसकैरिज होना महिला के लिए शारीरिक और मानसिक हानि के बराबर होता है। ऐसे में परिवार के सदस्यों को महिला का साथ देना चाहिए। अगर आपके मन में भी मिसकैरिज के बारे में किसी तरह का प्रश्न है तो एक बार अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

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मिसकैरिज के बारे में मिथ- महिला में कोई कमी है

सच – मिसकैरिज के बारे में यह अक्सर सुना जाता है कि जरूर महिला में ही कोई कमी रही होगी जो गर्भपात हुआ है। लेकिन, यह पूरी तरह से गलत धारणा है। अगर महिला का मिसकैरिज हो गया है तो ये जरूरी नहीं है कि उसके अंदर बहुत बड़ी कमी या शारीरिक समस्या है। मिसकैरिज, क्रोमोसोमल एब्नार्मेलिटी की वजह से या फिर हार्मोन डिसऑर्डर, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर और ब्लड क्लॉटिंग की वजह से हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है मिसकैरिज के बाद महिला को किसी भी प्रकार की कमी का ताना देकर उसे मानसिक रूप से परेशान किया जाए। मिसकैरिज महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर करता है। ऐसे में परिवार वालों को महिला का सहारा बनना चाहिए न कि उसकी कमी निकालनी चाहिए।

उम्मीद है कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा। इस लेख में बताए गए मिसकैरिज के बारे में मिथ से जुड़ी सही जानकारी आप तक पहुंच सकी होगी फिर भी इससे जुड़ा कोई सवाल आपके मन में है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। मिसकैरिज के बारे में कोई और शंका है तो आप अपने डॉक्टर से भी इस बारे में डिटेल में बात कर सकते हैं।

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सूत्र

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Early Pregnancy Loss/https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/pregnancy-loss-miscarriage/symptoms-causes/syc-20354298/ Accessed on 29/11/2019

Miscarriage/https://www.acog.org/Patients/FAQs/Early-Pregnancy-Loss?IsMobileSet=false/Accessed on 29/11/2019

Miscarriage – information and support/https://www.seleni.org/advice-support/2018/3/20/5-myths-about-recurrent-miscarriage/ Accessed on 29/11/2019

Miscarriage/https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/9688-miscarriage/ Accessed on 23rd September 2021

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Understanding Myths in Pregnancy and Childbirth and the Potential Adverse Consequences/
https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6719884/Accessed on 23rd September 2021

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 23/09/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड