शिशु की सुरक्षा चाहते हैं तो इन छोटी-छोटी बातों को न करें इग्नोर

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अगस्त 17, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

शिशु की सुरक्षा एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। उसे गोद में लेते वक्त लोग कुछ महत्वपूर्ण बातों को भूल जाते हैं। जिसमें शिशु को किस करना, बिना हाथ धोए उसे गोद में लेना और खिलाते वक्त नाखूनों का बड़ा और साफ न होना। ये लापरवाही इंफेक्शन का कारण बन सकती हैं। कुछ मामले इतने गंभीर हो सकते हैं कि इंफेक्शन होने पर शिशु की मृत्यु तक हो जाती है। हम इस आर्टिकल में आपको कुछ ऐसी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनका आपको शिशु की सुरक्षा को देखते हुए विशेष ध्यान रखना चाहिए।

और पढ़ें: शिशुओं की सुरक्षा के लिए फॉलो करें ये टिप्स, इन जगहों पर रखें विशेष ध्यान

शिशु की सुरक्षा के लिए उसे होंठ पर किस ना करें

ये बात जरूर याद रखें कि शिशु की सुरक्षा के लिए उसके होंठ या इसके आसपास हिस्से पर किस न करें क्योंकि किस करने से उन्हें हर्पीस हो सकता है। यह दो प्रकार का होता है। पहला ओरल हर्पीस वायरस (HSV-1) दूसरा जेनेटल हर्पीस वायरस (HSV-2)। सेंटर्स फोर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, आधी से ज्यादा आबादी को ओरल हर्पीस वायरस का इंफेक्शन होता है।

वहीं, तीन महीने से कम आयु के शिशु का इम्यून सिस्टम इस वायरस से लड़ने में सक्षम नहीं होता है। शिशु के होंठ या इसके आसपास के हिस्से पर किस करने से उन्हें इंफेक्शन हो सकता है, जिससे उन्हें कोल्ड सॉर (छाले) हो सकते हैं।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (एएपी) के मुताबिक, बड़े बच्चे और व्यस्कों की बॉडी में हर्पीस से लड़ने की क्षमता होती है। इनमें हर्पीस का इंफेक्शन समय के साथ ठीक हो जाता है लेकिन, शिशु और विशेषकर नवजात शिशु को हर्पीस होने की स्थिति में अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है।

ओरल हर्पीस (HSV-1) का वायरस शिशु को किस करते वक्त उसकी बॉडी में फैल सकता है। हर्पीस का वायरस एक बार बॉडी में जाने पर यह आजीवन रहता है। यह मौत का कारण भी बन सकता है। इस बात को शिशु की सुरक्षा को देखते हुए गांठ बांध लें।

और पढ़ें: मां के स्पर्श से शिशु को मिलते हैं 5 फायदे

शिशु की सुरक्षा के लिए उसे गोद में लेने या उसके साथ खेलने से पहले नाखून काटें

सीडीसी के मुताबिक, हांथों की उंगलियों के नाखून के नीचे बैक्टीरिया और गंदगी जमा हो जाती है। इससे पिनवॉर्म जैसे इंफेक्शन फैलते हैं। इस स्थिति को देखते हुए आपको उंगलियों के नाखून छोटे रखने चाहिए। नाखून के नीचे के हिस्से को नियमित रूप से साफ किया जाना चाहिए। नाखून के लंबे रहने से इनमें पैदा होने वाले बैक्टीरिया शिशु तक पहुंच सकते हैं। शिशु की सुरक्षा को देखते हुए आपको इस बात को इग्नोर नहीं करना चाहिए।

और पढ़ें: बच्चों में फूड एलर्जी का कारण कहीं उनका पसंदीदा पीनट बटर तो नहीं

शिशु की सुरक्षा के लिए हाथ साफ करें

सेंटर्स फोर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, लोगों या जानवर के पूप से सालमोनेला, ई- कोली 0157 और नोरोवायरस फैलते हैं। यह वायरस आपके हांथों में संपर्क में आने के बाद शिशु तक पहुंच सकते हैं। इन वायरस से शिशु को डायरिया हो सकता है। इन वायरस से शिशु में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन्स जैसे एडीनोवायरस और हाथ और पैर की बीमारियां फैल सकती हैं। अक्सर यह वायरस डायपर बदलने या टॉयलेट से फैलता है। इसलिए शिशु को कभी भी गोद में उठाने से पहले अपने हाथों को साफ कर लें। ऐसा करके आप शिशु की सुरक्षा का घेरा मजबूत कर रहे हैं।

और पढ़ें: पिकी ईटिंग से बचाने के लिए बच्चों को नए फूड टेस्ट कराना है जरूरी

शिशु की सुरक्षा के लिए स्मोकिंग ना करें

शिशु को गोद में लेते वक्त या गोद में लेने के बाद स्मोकिंग न करें। नवजात शिशु का प्रतिरक्षा तंत्र बहुत ही कमजोर होता है। यहां तक कि आपको शिशु के आसपास स्मोकिंग नहीं करनी है। इससे शिशु को रेस्पिरेटरी वायरस से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।

और पढ़ें: इस तरह नवजात शिशु को बचा सकते हैं इंफेक्शन से, फॉलो करें ये टिप्स

शिशु की सुरक्षा के लिए परफ्यूम का इस्तेमाल ना करें

शिशु की सुरक्षा के लिए इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शिशु को गोद में लेते वक्त यह सुनिश्चित करें कि आपने परफ्यूम का इस्तेमाल नहीं किया है। नवजात शिशु की त्वचा और प्रतिरक्षा तंत्र बेहद ही संवेदनशील होता है। परफ्यूम के संपर्क में आने पर उसकी स्किन में एलर्जी हो सकती है। यहां तक कि उसे रैशेस भी हो सकते हैं। यह अतिसंवेदनशील नवजात शिशुओं में श्वसन संबंधी समस्याएं भी पैदा कर सकता है, जैसे कि एटोपिक अस्थमा।

शिशु की सुरक्षा के लिए स्लीपिंग पुजिशन का ध्यान रखें

शिशु का पीठ के बल सोना सबसे सुरक्षित माना जाता है। बच्चे को इस पुजिशन में नींद तो अच्छी आती ही है, साथ ही वह आरामदायक भी महसूस करता है। यूएस के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ एंड ह्यूमन डेवलपमेंट के अनुसार ने पीठ के बल सोने को सबसे बेहतरीन पुजिशन बताया है। छोटे नैप या गहरी नींद के लिए यह पुजिशन ठीक है। सेफ बेबी स्लीप के लिए  पेट के बल सोना सही नहीं होता है। ऐसे में बच्चे का शरीर नीचे की ओर दबता है। मुख्य रूप से जबड़ा दबता है। इससे नवजात को सांस लेने में परेशानी हो सकती है और घुटन महसूस हो सकती है। अगर बच्चा गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स (gastroesophageal reflux) या अन्य पेट की परेशानी से ग्रस्त है तो बच्चे को पेट के बल न सुलाएं।

शिशु की सुरक्षा के लिए बच्चे के साथ में सोएं

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार सेफ बेबी स्लीप के लिए शिशुओं को जन्म के करीब एक से दो साल तक माता-पिता के साथ सोना चाहिए। आकड़ों के अनुसार ऐसा करने से बच्चों में इंफेंट डेथ सिंड्रोम (SIDS) के चांस 50 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं। साथ ही एक बात और बता दें कि बच्चे को सोने के लिए अपने स्पेस की जरूरत होती है। अगर पेरेंट्स में कोई भी ध्रूमपान करता है तो बेबी सेफ स्लीप पॉसिबल नहीं हो पाता है। ऐसे में बच्चों को सोते समय खतरा हो सकता है। सांस लेने में जोखिम बढ़ जाता है। अगर आप शिशु की सुरक्षा चाहते हैं तो स्मोकिंग से दूरी बना लें।

शिशु की देखभाल में इन छोटी सी बातों की अनदेखी कई बार गंभीर समस्याएं पैदा कर देती हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि आप अपने स्तर पर इन बातों का पालन करें। इससे शिशु की सुरक्षा की संभावना और बढ़ेगी और वह स्वस्थ और मस्त रहेगा। हम उम्मीद करते हैं कि शिशु की सुरक्षा से संबंधित यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित होगा। किसी प्रकार की शंका होने पर डॉक्टर या पिड्रियाटिक से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान और उपचार प्रदान नहीं करता।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

क्या बच्चों के जन्म से दांत हो सकते हैं? जानें इस दुर्लभ स्थिति के बारे में

जानें जन्म से दांत आना कैसे मुमकिन है और इस स्थिति में माता-पिता को क्या करना चाहिए। Natal teeth में आपने शिशु का कैसे इलाज करवाएं।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shivam Rohatgi
बच्चों की देखभाल, पेरेंटिंग अप्रैल 22, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

बच्चों की नींद के घरेलू नुस्खे: जानें क्या करें क्या न करें

जानें बच्चों की नींद के घरेलू नुस्खें और शिशु को किस तरह सुलाने पर उनको आती है जल्दी नींद। इसके अलावा शिशु को सुलाने के उपाय और कितने घंटे नींद है सही।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Ankita mishra
पेरेंटिंग टिप्स, पेरेंटिंग अप्रैल 16, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें

REM sleep behavior disorder : रैपिड आई मूवमेंट स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर

रैपिड आई मूवमेंट(REM) स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर एक नींद की बीमारी है, जिसमें हम शारीरिक रूप से अप्रिय सपने या दुःस्वप्न में तेज आवाज़,बाते करना, या शारीरिक गत

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Siddharth Srivastav
हेल्थ कंडिशन्स, स्वास्थ्य ज्ञान A-Z अप्रैल 15, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

रटी-रटाई बातें भूल जाता है बच्चा? ऐसे सुधारें बच्चों में भूलने की बीमारी वाली आदत

जानिए बच्चों में भूलने की बीमारी in Hindi, बच्चों में भूलने की बीमारी कैसे ठीक करें, बच्चे की याददाश्त कैसे बढ़ाएं, baccho me bhulne ki bimari,

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Ankita mishra
पेरेंटिंग टिप्स, पेरेंटिंग अप्रैल 8, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

Recommended for you

जिरकोल्ड

Zyrcold: जिरकोल्ड क्या है? जानिए इसके उपयोग और साइड इफेक्ट्स

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Satish singh
प्रकाशित हुआ जून 19, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
ग्रिलिंक्टस बीएम

Grilinctus BM: ग्रिलिंक्टस बीएम क्या है? जानिए इसके उपयोग और साइड इफेक्ट्स

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Satish singh
प्रकाशित हुआ जून 15, 2020 . 7 मिनट में पढ़ें
ग्रिलिंक्टस सिरप /Grilinctus syrup

Grilinctus syrup: ग्रिलिंक्टस सिरप क्या है? जानिए इसके उपयोग और साइड इफेक्ट्स

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया shalu
प्रकाशित हुआ जून 2, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
पैसिफायर-या-अंगूठा-चूसना

पैसिफायर या अंगूठा चूसना बच्चे के लिए क्या दोनों गलत है?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shivam Rohatgi
प्रकाशित हुआ अप्रैल 27, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें