पीएमएस और प्रेग्नेंसी के लक्षणों में क्या अंतर है ?

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अपडेट डेट सितम्बर 24, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
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महिलाओं को अक्सर प्रेग्नेंसी और मासिक धर्म के पूर्व के लक्षणों (pre-menstrual symptom) के बीच के अंतर को पहचानने में गलतफहमी हो जाती है। मासिक धर्म के पूर्व लक्षणों (पीएमएस) में अक्सर मूड स्विंग, कमर दर्द, बार-बार यूरिन पास होना, क्रैंपिंग, ब्लोटिंग के साथ ब्रेस्ट में टेंडरनेस महसूस होती है। जब आप प्रेग्नेंट होती हैं तब भी कुछ ऐसे ही लक्षण सामने आते हैं। ऐसी स्थिति में प्रेग्नेंसी और पीएमएस के लक्षण के बीच अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है लेकिन, दोनों ही परिस्थितियों के लक्षणों में एक बारीक अंतर होता है। हालांकि आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं इसे जानने के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट सबसे बेहतर उपाय है।

आज हम इस आर्टिकल में आपको पीएमएस और प्रेग्नेंसी के बीच के फर्क को समझाने जा रहे हैं। प्रेग्नेंट न होने की सूरत में हर 28 दिनों में पीरियड शुरू होते हैं। मासिक धर्म के पूर्व लक्षणों को आम बोलचाल की भाषा में पीएमएस (PMS) के नाम से भी जाना जाता है।  इस आर्टिकल में हम पीएमएस और प्रेग्नेंसी के लक्षण में अंतर बताने जा रहे हैं। जिसस आपको समझने में आसानी होगी कि ये लक्षण पीएमएस के हैं या प्रेग्नेंसी के।

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पीएमएस और प्रेग्नेंसी के लक्षण में अंतर

पीएमएस और प्रेग्नेंसी में ब्रेस्ट पेन

पीएमएस और प्रेग्नेंसी दोनों में ब्रेस्ट पेन होता है, लेकिन दोनों में क्या अंतर है आइए जानते हैं।

PMS: पीएमएस के दौरान में ब्रेस्ट में सूजन और टेंडरनेस आ सकती है। यह कम या ज्यादा हो सकती है। पीरियड्स से बिलकुल पहले यह सबसे ज्यादा होती है। ब्रेस्ट का बाहरी हिस्सा फूला हुआ नजर आता है। ब्रेस्ट में हल्का दर्द और भारीपन का अहसास हो सकता है। पीरियड के बाद प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम होने से यह दर्द कम हो जाता है।

प्रेग्नेंसी: प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में ब्रेस्ट छूने में काफी संवेदनशील और टेंडर नजर आ सकते हैं। इस दौरान यह भारी भी हो सकते हैं। गर्भधारण करने के एक या दो हफ्ते बाद यह स्थिति पैदा होती है। प्रोजेस्टेरोन का स्तर ज्यादा रहने से आखिरी तक ऐसा ही रह सकता है।

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पीएमएस और प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग

पीएमएस और प्रेग्नेंसी दोनों में ब्लीडिंग भी होती है, लेकिन दोनों में अंतर कितना है आइए जानते हैं।

PMS: मासिक धर्म के पूर्व के लक्षणों में स्पॉटिंग या ब्लीडिंग नहीं होती है। पीरियड्स शुरू होने पर ब्लीडिंग का फ्लो बढ़ जाता है और यह एक हफ्ते तक रह सकता है।

प्रेग्नेंसी: कुछ मामलों में प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षणों में वजायना से हल्की ब्लीडिंग होती है। इसका रंग पिंक और डार्क ब्राउन हो सकता है। यह गर्भधारण करने के 10 से लेकर 14 दिन तक रह सकती है। वहीं स्पॉटिंग एक या दो दिन तक होती है। इसकी अवधि सामान्य पीरियड्स के मुकाबले कम होती है।

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पीएमएस और प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग होना

पीएमएस और प्रेग्नेंसी दोनों में मूड स्विंग देखे जाते हैं, लेकिन दोनों में काफी अंतर होता है।

PMS: चिड़चिड़ापन, बेचेनी, दुखी या रोने जैसा अहसास होना पीएमएस के लक्षण हो सकते हैं। हालांकि मासिक धर्म की शुरुआत होने पर यह लक्षण गायब हो जाते हैं।

प्रेग्नेंसी: यदि आपको इस प्रकार के भावों का अहसास लगातार हो रहा है तो यह प्रेग्नेंसी के लक्षण हो सकते हैं। लगातार दुखी होने का अहसास डिप्रेशन की समस्या का संकेत हो सकता है। दुनियाभर की करीब 10 प्रतिशत महिलाएं प्रेग्नेंसी के शुरुआत में मेंटल हेल्थ कंडिशन जैसे डिप्रेशन का अहसास करती हैं।

पीएमएस और प्रेग्नेंसी में कब्ज

कब्ज की समस्या भी पीएमएस और प्रेग्नेंसी दोनों में होती है। हार्मोन में बदलाव के कारण भी कब्ज हो सकता है। हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव आने से बाॅवेल मूवमेंट धीमा हो जाता है।

PMS: पीएमएस में बॉवेल से संबंधित दिक्कतें पीरियड शुरू होने के बाद खत्म हो जाती है।

प्रेग्नेंसी: वहीं अध्ययनों में पाया गया है कि प्रेग्नेंसी के दौरान 38 प्रतिशत महिलाओं को कब्ज हो सकता है। गर्भवती महिलाओं को शुरुआती दो ट्राइमेस्टर में कब्ज की दिक्कत हो सकती है। कब्ज की समस्या में स्टूल पास करने में समस्या होती है। कब्ज की समस्या स्टूल टाइट हो जाता है और प्रेशर भी अधिक लगाना पड़ता है। यदि कब्ज की समस्या के दौरान फाइबर युक्त भोजन किया जाए तो समस्या से राहत मिल सकती है। फाइबर युक्त फूड में फलों के साथ ही सब्जियों का सेवन करना चाहिए। कब्ज की समस्या से राहत पाने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार सकारात्मक परिणाम दिखाई पड़ते हैं।

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पीएमएस और प्रेग्नेंसी में थकान

पीएमएस और प्रेग्नेंसी दोनों में थकान महसूस होती है, लेकिन दोनों में अंतर भी होता है। आइए जानते हैं इसको।

PMS: पीरियड्स से पहले प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ने से थकावट बढ़ जाती है। यह थकावट पीरियड के शुरू होने से खत्म हो जाती है। कुछ महिलाओं थकान पीरियड के अंत तक भी रह सकती है। इसके अतिरिक्त यह बॉडी में आयरन की कमी के चलते एनीमिया का संकेत हो सकता है।

प्रेग्नेंसी: प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में थकावट एक सामान्य लक्षण है। अक्सर यह पहले ट्राइमेस्टर तक लगातार बनी रह सकती है। यहां तक कि कुछ महिलाओं को नौ महीने तक भी थकान रह सकती है।

प्रेग्नेंसी और पीएमएस के लक्षणों में कंफ्यूज होने के साथ ही कई बार महिलाएं नकली और असली लेबर में कंफ्यूज हो जाती हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में।

 पीएमएस और प्रेग्नेंसी में  फूड क्रैविंग का एहसास

PMS: जिन महिलाओं को पीएमएस की समस्या होती है उनकी ईटिंग हैबित बदल जाती है। ऐसे में चॉकलेट, कार्बोहाइड्रेड, शुगर, स्वीट्स या फिर सॉल्टी फूड के लिए क्रैविंग हो सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान इस तरह की क्रैविंग हो, ऐसा जरूरी नहीं है।

प्रेग्नेंसी:  प्रेग्नेंसी के दौरान किसी खास फूड के लिए हाई क्रैविंग हो सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ फूड को खाने का बिल्कुल भी मन नहीं करता है। वहीं कुछ स्मैल से या फिर टेस्ट से दिक्कत भी होती है। ऐसा पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान एहसास हो सकता है। अगर महिलाओं को नॉनफूड आइटम्स के प्रति क्रैविंक का एहसास हो रहा हो तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

पीएमएस और प्रेग्नेंसी में जी मिचलाने का एहसास

PMS: पीएमएस की समस्या के दौरान जी मिचलाने का एहसास हो सकता है। जी मिचलाने का एहसास अक्सर डायजेशन के खराब होने के कारण होता है। पीएमएस के लक्षण के तौर पर जी मिचलाने का एहसास हो सकता है।

प्रेग्नेंसी : प्रेग्नेंसी के दौरान जी मिचलाने का एहसास हो सकता है। मॉर्निंग सिकनेस की समस्या गर्भावस्था के दौरान आम समस्या के रूप में दिखाई पड़ती है। प्रेग्नेंसी के दौरान जी मिचलाने के साथ ही वॉमिटिंग भी होती है। प्रेग्नेंट महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या कभी भी हो सकती है। ये जरूरी नहीं है कि मॉर्निंग सिकनेस की समस्या सभी प्रेग्नेंट महिलाओं को नहीं होती है।

गर्भावस्था और पीएमएस के लक्षणों में अंतर:  पीएमएस और प्रेग्नेंसी में निप्पल चेंजेस

प्रेग्नेंसी और पीएमएस के लक्षणों के तौर पर निप्पल के रंग में बदलाव आ सकता है। पीरियड्स के पहले निप्पल के कलर में चेंज कुछ महिलाओं में हो सकते हैं। वहीं प्रेग्नेंसी के दौरान निप्पल में बदलाव होता है। निप्पल के आसपास के एरिया का रंग अधिक गहरा हो सकता है। प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में निप्पल में अधिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अगर आपको इस तरह के बदलाव नजर आते हैं तो आप डॉक्टर से परामर्श भी कर सकते हैं।

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 क्या होता है नकली लेबर पेन?

कई महिलाएं प्रेग्नेंसी की आखिरी तिमाही में गर्भाशय में कसाव या उसके सख्त होने पर तुरंत हॉस्पिटल पहुंच जाती हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लेबर पेन शुरू हो गया है, लेकिन डॉक्टर से मिलने पर उन्हें पता चलता है कि यह असली नहीं, बल्कि नकली लेबर पेन था। आपके साथ ऐसा न हो इसलिए असली और नकली लेबर पेन के अंतर को समझना जरूरी है। नकल लेबर पेन यू तो लेबर पेन जैसा ही होता है लेकिन यह डिलिवरी का संकेत नहीं होता है। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, उपचार और निदान प्रदान नहीं करता। आपको अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

नकली लेबर पेन के लक्षणः

  • संकुचन में ज्यादा दर्द नहीं होता, लेकिन असहज महसूस होता है।
  • संकुचन लगातार नहीं होता और ना ही समय के साथ इसकी गंभीरता या फ्रीक्वेंसी बढ़ती है।
  • यदि आप अपनी पुजिशन बदलते हैं जैसे बैठी हैं तो चलने लगती हैं, लेटी हैं तो उठकर बैठ जाती हैं और इससे दर्द कम हो जाता है।
  • दर्द पेट के निचले हिस्से में होता है पीठ के निचले हिस्से में नहीं।
  • संकुचन होते ही भ्रूण की गति (मूमेंट) बढ़ जाती है।

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असली लेबर पेन में कैसा संकुचन महसूस होता है?

असली लेबर पेन डिलिवरी से पहले शुरू होता है, लेकिन इसके लक्षण करीब पूरे महीने होने वाले शारीरिक बदलाव के रूप में दिखने लगते हैं। असली लेबर पेन के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं जैसे- गर्भाशय का मुंह खुलना, बच्चे का नीचे पेल्विक में खिसकना आदि। जबकि नकली लेबर पेन में इसके मुकाबले परेशानी कम होती है।

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असली लेबर पेन के लक्षणः

  • संकुचन अधिक दर्दनाक, गंभीर और लगातार होता है।
  • लेबर पेन बहुत गंभीर और तेज हो जाता है और पुजिशन बदलने पर भी कम नहीं होता।
  • लेबर पेन पीठ के निचले हिस्से से शुरू होकर पेट के निचले हिस्से और कभी-कभी पैरों तक फैल जाता है।
  • दर्द के साथ ही कभी-कभी पेट खराब हो जाता है और दस्त शुरू हो जाते हैं।
  • लेबर पेन का कोई निश्चित नियम या पैटर्न नहीं है। यह हर महिला में अलग-अलग हो सकता है, लेकिन आमतौर पर संकुचन ज्यादा तेजी से होने लगता है और हर संकुचन पहले से अधिक दर्दनाक होता है और दर्द में लगातार वृद्धि होती है।
  • वॉटर ब्रेक हो जाता है यानी पानी की थैली फट जाती है। ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

अगर आपको उपरोक्त लक्षण नजर आते हैं तो बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से जांच कराएं। जांच के बाद पता चलेगा कि महिला प्रेग्नेंट है या फिर उसमे पीएमएस के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। अगर आपको उपरोक्त लक्षण दिखाई दें तो इग्नोर न करें।

उपरोक्त जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।  प्रेग्नेंसी को लेकर परेशान होने से पहले एक बार पीएमएस और प्रेग्नेंसी के लक्षणों के अंतर को बारीकी से समझ लेना सही होगा। हम आशा करते हैं कि आपको इस आर्टिकल के माध्यम से प्रेग्नेंसी और पीएमएस के लक्षणों के बारे में जानकारी मिल गई होगी। अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं। आप स्वास्थ्य संबंधि अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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