मोटापा और गर्भावस्था: क्या जन्म लेने वाले शिशु के लिए है खतरनाक?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट सितम्बर 29, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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पुरे विश्व में 1.9 बिलियन एडल्ट्स मोटापे के शिकार हैं। 650 मिलियन ओवर वेट की समस्या से परेशान हैं। इन आंकड़ों में गर्भवती महिला भी शामिल हैं। दरअसल नेशनल सेंटर फॉर बायो टेक्नोलॉजी (NCBI) के अनुसार हाल में किये गए सर्वे से ये बात सामने आई है। बढ़ते वजन कई बीमारियों को न्योता देते हैं। ऐसे में क्या मोटापा और गर्भावस्था दोनों एक साथ होने पर भी शारीरिक परेशानी हो सकती है? क्या मोटापा और गर्भावस्था दोनों होने पर गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है?

स्कॉटलैंड की दी यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग द्वारा किये गए रिसर्च के अनुसार मोटापा और गर्भावस्था यानि जो महिला गर्भधारण करने के पहले से ही मोटी हों, तो ऐसे में इन महिलाओं से जन्म लेने वाले शिशुओं में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा ज्यादा देखा जाता है। यही नहीं ब्रिटेन में डिलिवरी से पहले हर पांच में से एक महिला मोटापे की शिकार होती हैं। हालांकि मोटापा और गर्भावस्था से घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि कई ऐसी महिलाएं हैं, जो मोटापा और गर्भावस्था के बावजूद भी शिशु को आसानी से जन्म देती हैं।

गर्भावस्था और मोटापे का संबंध:  मोटापा और गर्भावस्था का क्या है नकारात्मक प्रभाव?

रिसर्च के अनुसार मोटापा और गर्भावस्था की वजह से प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज और गर्भवती महिला में इन कारणों से बढ़ सकता है प्रीक्लेमप्सिया (preeclampsia) का खतरा ऐसी स्थिति होने पर स्टिलबर्थ (गर्भ में ही शिशु की मौत), चाइल्डहुड अस्थमा, चाइल्डहुड ओबेसिटी, शारीरिक विकास ठीक तरह से न होना और कॉन्जेनिटल अनोमालीज (congenital anomalies) (हार्ट से संबंधित परेशानी) का खतरा शुरू हो सकता है। मोटापा और गर्भावस्था की वजह से जन्म लेने वाले नवजात को भविष्य में भी शारीरिक परेशानी में डाल सकता है। मोटापा और गर्भावस्था की वजह से गर्भवती महिला को भी हार्ट डिजीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।  मोटापा और प्रेग्नेंसी की वजह से मां और शिशु दोनों में ही डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

देखा जाए तो प्रेग्नेंसी में वजन बढ़ना सामान्य है और इस बढ़ते वजन से मां बनने वाली महिला को परेशान नहीं होना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नॉर्मल गर्भवती महिला का वजन 11 से 16 किलो, अंडर वेट गर्भवती महिला का वजन 12 से 18 किलो और ओवर वेट गर्भवती महिला का वजन 07 से 11 किलो तक बढ़ना तय माना जाता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान आपको कितना वजन कम करना है या कम करना चाहिए? इन बातों पर ध्यान न दें। प्रेग्नेंसी के शुरुआत से ही आप अपने  BMI (बॉडी मास इंडेक्स) पर ध्यान दें। दरअसल BMI की मदद से आप अपनी हाइट के अनुसार यह आसानी से समझ सकती हैं की आपका वजन कितना होना चाहिए।

और पढ़ें: प्रेग्नेंसी में नॉन-इनवेसिव प्रीनेटल टेस्ट क्यों करवाना है जरूरी?

गर्भावस्था और मोटापे का संबंध:  मोटापा और गर्भावस्था होने पर कैसे समझें की आपका वजन सामान्य से ज्यादा है?

गर्भवती महिला आसानी से समझ सकती हैं की उनका वजन सामान्य से ज्यादा है। अगर उनका बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 18.5 से कम है, तो गर्भवती महिला अंडरवेट हैं। वहीं अगर किसी महिला का BMI 18.5 से 24.9 है, तो उनका वजन संतुलित है। अगर BMI 25 से 29.9 है, तो महिला का वजन सामान्य से ज्यादा है और अगर BMI 30 से ज्यादा है, तो महिला ओबेसिटी की शिकार हैं।

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गर्भावस्था और मोटापे का संबंध: मोटापा और गर्भावस्था होने पर गर्भवती महिला को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

मोटापा और प्रेग्नेंसी: इन दोनों ही स्थिति में निम्नलिखित बातों का रखें ध्यान। जैसे:-

जेस्टेशनल डायबिटीज की जांच- गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला डायबिटीज की समस्या से पीड़ित  हो जाती हैं। इस दौरान गर्भवती महिला का ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। ऐसा प्रेग्नेंसी के 24वें हफ्ते से प्रेग्नेंसी के 28वें हफ्ते के बीच होता है, जो प्रेग्नेंसी के बाद ठीक हो जाती है। अगर गर्भवती महिला का वजन पहले से ही ज्यादा है तो जेस्टेशनल डायबिटीज की जांच प्रेग्नेंसी के शुरुआती जांच में करवाएं।

फीटल अल्ट्रासाउंड- स्टेंडर्ड फीटल अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था के 18वें हफ्ते और गर्भावस्था के 20वें हफ्ते में की जाती है। इस अल्ट्रसाउंड की मदद से शिशु के सेहत की जानकारी मिलती है लेकिन, इस अल्ट्रासाउंड की मदद से एब्डॉमिनल फैट टिशू की जानकारी नहीं मिल पाती है। इसलिए इस बारे में अपने गायनोकॉलिस्ट से खुलकर बात करें और उनसे सलाह लें।

ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया स्क्रीनिंग- गर्भावस्था के दौरान अगर गर्भवती महिला ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया की समस्या से पीड़ित होती हैं, तो ऐसी स्थिति में गर्भवती महिलाओं में प्रीक्लेम्पसिया के खतरे के साथ-साथ अन्य शारीरिक परेशानी होने की संभावना बढ़ जाती है।

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मोटापा और प्रेग्नेंसी: कैसे रखें वजन को बैलेंस्ड?

  • गर्भावस्था के शुरुआती वक्त से ही गायनोकोलॉजिस्ट और डायट एक्सपर्ट से बात करें और उनसे समझने की कोशिश करें की आप प्रेग्नेंसी के दौरान वजन को कैसे बैलेंस करें।
  • प्रेग्नेंसी के शुरुआत से ही वजन को ट्रैक करें। ध्यान रखें की आपका वजन कितना बढ़ रहा है और कितनी तेजी से बढ़ रहा है। हेल्दी वेट गेन पर फोकस करें। ऐसा करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहा शिशु दोनों फिट रहेगा। यह ध्यान रखें की आपका वजन जितना भी प्रेग्नेंसी के दौरान आपका वजन थोड़ा और बढ़ेगा।  
  • मोटापा और प्रेग्नेंसी होने की स्थिति में सॉफ्ट ड्रिंक, डेजर्ट, फ्राइड फूड और फैटी मीट जैसे खाद्य या पेय पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इनके सेवन से वजन और ज्यादा बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान यह ध्यान रखें की आप कितना कैलोरी का सेवन करती हैं। गर्भावस्था के शुरुआती 3 महीने तक सामान्य से ज्यादा कैलोरी की जरूरत नहीं पड़ती है। वहीं चौथे मंथ की शुरुआत से 340 कैलोरी ज्यादा सेवन की जरूरत पड़ती है। 450 कैलोरी गर्भावस्था के आखरी 3 महीने में लेना चाहिए। ऐसा करने से बॉडी वेट मेंटेन रह सकता है।

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  • रिफाइंड फ्लॉर और चीनी का सेवन कम से कम करें। इस दौरान खाने में नमक भी कम खाएं और ऊपर से नमक डालकर खाना न खाएं। प्रेग्नेंसी के 9 महीने तक बटर और नमक दोनों ही लो सोडियम युक्त खाएं। बाजार में लो सोडियम सॉल्ट आसानी से मिल जाता है।
  • नियमित रूप से पानी, फल और जूस का सेवन करें। ऐसा करने से आप डिहाइड्रेट नहीं होंगी।
  • मोटापा और गर्भावस्था में खाने-पीने की चीजों पर ध्यान देने के साथ-साथ नियमित वर्कआउट भी करना चाहिए। इस दौरान वॉकिंग भी शरीर को फिट रखने के लिए बेहतर एक्सरसाइज माना जाता है। सिर्फ एक्सरसाइज या वॉकिंग के दौरान सतर्कता बरतें। क्योंकि बढ़े हुए वजन की वजह से गिरने का डर बना रहता है।

और पढ़ें: प्रेग्नेंसी में एक्सरसाइज और योग किस हद तक है सही, जानें यहां

अगर आप मोटापा और गर्भावस्था से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहती हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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