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क्या है शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर, कैसे पाएं इससे छुटकारा?

क्या है शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर, कैसे पाएं इससे छुटकारा?

इंटरनेट के इस जमाने में लोग इंडिया में अपने घर में बैठ कर देश छोड़िये विदेशों के लिए भी काम करते हैं। इसलिए, अब बदलते वक्त के साथ-साथ काम करने के तरीके में भी बदलाव आया है। अब जहां इतने बदलाव हो रहें हैं, ऐसे में इसका असर सेहत पर तो पड़ेगा ही। ऐसी परिस्थिति में, अब 24 घंटे काम करने का चलन तेज होता जा रहा है। अब लोग सिर्फ 9-5 की ड्यूटी ही नहीं, बल्कि बहुत-से लोग नाइट शिफ्ट भी करते हैं। शिफ्ट की वजह से लोगों के लाइफस्टाइल में भी बदलाव आने लगा है। ऐसे में उन्हें स्लीप डिसऑर्डर की समस्या काफी होने लगी है। इस आर्टिकल में हम शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर के बारे में बात करेंगे। पहले जानेंगे कब हो सकती है यह परेशानी।

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किन-किन परिस्थितियों में हो सकता है शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर?

निम्नलिखित परिस्थितियों में हो सकता है शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर। जैसे-

  • नाईट शिफ्ट या अलग-अलग शिफ्ट में काम करना
  • नींद नहीं आना या सिर्फ किसी एक वक्त पर ही नींद आना
  • कामकाज के वक्त पर बहुत ज्यादा नींद आना
  • किसी पुरानी बीमारी का कारण या फिर सिर्फ वर्किंग ऑवर
  • अत्यधिक चाय या कॉफी का सेवन करना
  • किसी ऐसी ड्रिंक का सेवन करना जिससे नींद नहीं आती हो

जिस तरह स्वस्थ सेहत पौष्टिक आहार और व्यायाम से जुड़ी है, ठीक उसी तरह सेहत के लिए बेहतर नींद भी जरूरी है। ठीक से न सोने की परेशानी हर चीज को प्रभावित कर सकती है और आप शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर के शिकार हो सकते हैं।

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शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर के लक्षण क्या हो सकते हैं?

शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे-

  • काम के दौरान या काम के बाद भी नींद आना
  • ध्यान केंद्रित करने पर या किसी काम पर फोकस करने पर परेशानी महसूस होना
  • कमजोरी महसूस होना
  • सोने के बावजूद भी अत्यधिक नींद आना
  • डिप्रेशन होना
  • कोई शारीरिक परेशानी होना या कोई कोई अन्य तनाव

इन लक्षणों के अलावा अन्य लक्षण भी हो सकते हैं।

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बेहतर नींद आने के उपाय क्या हैं?

अच्छी नींद के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं। जैसे-

  1. पॉवर नैप लेने की आदत डालें, इससे नींद अच्छी आएगी और सेहत भी अच्छी बनी रहेगी। कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा किए गए रिसर्च के अनुसार दोपहर में नींद लेने वाले लोगों का ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल रहता है वहीं आर्ट्रिस और हार्ट में हाई ब्लड प्रेशर से होने वाली समस्या को किया जा सकता है।
  2. वर्क स्टेशन में ब्राइट लाइट का स्तेमाल करने से लाभ मिल सकता है। इसलिए आप जहां काम करते हैं, तो वहां लाइट का ध्यान रखें। इससे आपको काम करने में भी सहुलियत होगी और आंखों पर दवाब भी नहीं पड़ेगा।
  3. शिफ्ट में ज्यादा बदलाव नहीं करना चाहिए। इसका असर नींद और सेहत दोनों पर पड़ता है।
  4. दिन में सोने के दौरान ऐसे म्यूजिक न सुनें, जिनसे नींद खराब हो। रात में सोने के दौरान स्लीप म्यूजिक सुनना लाभकारी हो सकता है।
  5. अगर आपको चाय-कॉफी पीने की आदत ज्यादा है, तो कोशिश करें कि इनका सेवन कम से कम हो। ऐसे में आप बस सुबह ही चाय या कॉफी का सेवन करने की कोशिश करें। अगर आप शाम के वक्त चाय, कॉफी या किसी भी हर्बल टी का सेवन करते हैं, तो कोशिश करें शाम 5 या 6 बजे के बाद इनका सेवन न करें। क्योंकि देर शाम इसके सेवन से नींद आने में परेशानी हो सकती है क्योंकि इनमें कैफीन की मात्रा होती है।
  6. बेडरूम में ऐसी रोशनी और आवाज न हो, जिनकी वजह से नींद आने में परेशानी हो। बेडरूम में शांत वातावरण हो।
  7. सोने से पहले अपनी चिंताओं को भूलने की कोशिश करें। इससे आसानी से जल्दी और अच्छी नींद आ सकती है।
  8. नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटी करें। इससे बेहतर नींद आने में मदद मिलेगी।
  9. भूखे या भरपेट खाने के बाद तुरंत सोने की कोशिश न करें। खासतौर पर, सोने के कुछ घंटों के अंदर भारी या तले और मसालेदार खाने से बचें। रात का खाना 7 से 8 बजे तक खाना हेल्थ के साथ-साथ अच्छी नींद में भी मददगार होता है।
  10. सही समय पर नियमित रूप से सोने की आदत डालें। इससे भी सेहत अच्छी हो सकती है और नींद भी अच्छी आएगी।
  11. अगर आप एक हफ्ते तक नाइट शिफ्ट में काम करते हैं या अगर आपका वर्किंग ऑवर अलग-अलग रहता है, तो कोशिश करें की एक हफ्ते के बाद 48 घंटे का ब्रेक लें और इस दौरान आराम करें और साउंड स्लीप लें।

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शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर होने की वजह से कौन-कौन सी शारीरिक परेशानी हो सकती है?

शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर की वजह से निम्नलिखित परेशानी हो सकती है। जैसे-

रिसर्च के अनुसार नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में या बहुत देर तक जागते रहने पर डिप्रेशन यानि अवसाद की परेशानी हो सकती है। डिप्रेशन जिसे मेजर डिप्रेसिव डिसॉर्डर और क्लिनिकल डिप्रेशन के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल यह एक तरह का मूड डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति लगातार उदास रहता है और उसका अन्य कार्यों को करने की इच्छा नहीं होती है। कभी-कभी डिप्रेशन के कारण व्यक्ति के मन में सुसाइड करने की इच्छा भी शुरू हो जाती है।

ठीक से नींद न आने की स्थिति में मेटाबॉलिज्म में बदलाव होने लगता है। दरअसल लेप्टिन हॉर्मोन (Leptin Hormone) आपके ब्लड शुगर और इन्सुलिन(Insulin) को कंट्रोल करता है। रात को न सोने पर इस हॉर्मोन के लेवल में बदलाव होने लगता है, जिसकी वजह से शारीरिक परेशानियां शुरू हो सकती हैं। शरीर का वजन अगर बढ़ने या घटने लगता है तो ऐसी स्थिति में अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगता है। इसलिए अगर आप नाइट शिफ्ट या अलग-अलग शिफ्ट में काम करते हैं तो दिन में अपनी नींद पूरी करें। अगर आप ऐसा करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं तो डायबिटीज जैसी अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

अगर किसी कारण की वजह से दिन में भी नींद नहीं आ रही है, तो बेहतर होगा की डॉक्टर से संपर्क किया जाए और डॉक्टर को नींद न आने की परेशानी ठीक से बताएं। ऐसा करने से एक्सपर्ट को समझने में आसानी होगी और इलाज भी सही तरीके से होगा।

अगर आप शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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लेखक की तस्वीर
Dr. Pooja Bhardwaj के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nidhi Sinha द्वारा लिखित
अपडेटेड 08/07/2019
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