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एंग्जायटी और इंसोम्निया, क्या दोनों में है कुछ संबंध?

एंग्जायटी और इंसोम्निया, क्या दोनों में है कुछ संबंध?

‘कम सोना या नींद की कमी आपको डम्ब बना सकती है’। यह पढ़कर शायद आपको विश्वास ना हो, लेकिन यह सच है। नींद की कमी से मेमोरी लॉस होता है और इसके साथ ही अलर्टनेस भी कम होती है। जिससे आपका दिमाग ठीक से काम नहीं कर पाता। इतना ही अगर आप अनिद्रा से जूझ रहे हैं तो आपकी सेक्शुअल लाइफ खतरे में पड़ सकती है, आपको डायबिटीज, हार्ट से रिलेटेड बीमारियां हो सकती हैं और आपके एक्सीडेंट होने के चांसेज बढ़ सकते हैं। ये किसी बाबा की भविष्यवाणियां नहीं है। कई प्रकार की रिसर्च में ये बात सामने आई हैं कि अच्छी नींद का संबंध बॉडी की ओवरऑल हेल्थ से है। शायद आपने सपने (वैसे सपने तो तभी आते हैं जब हम सोते हैं 😉 में भी नहीं सोचा होगा कि नींद की कमी या अनिद्रा आपके लिए इतनी सारी परेशानियां ला सकती है। इसलिए अगर आप नींद से जुड़ी किसी समस्या से जूझ रहे हैं, तो यह आर्टिकल ध्यान से पढ़िए।

आपको बता दें कि अनिद्रा को इंसोम्निया (insomnia) भी कहा जाता है और एंग्जायटी और इंसोम्निया (Anxiety and insomnia) का सीधा-सीधा संबंध है। यानी चिंता के कारण नींद ना आने की समस्या होती है। ये समझने के लिए किसी रिचर्स की जरूरत नहीं है कि जब इंसान तनाव में होता है तो उसकी नींद उड़ जाती है। अगर आपको निम्न लक्षण दिखाई देते हैं तो आपको अनिद्रा की बीमारी है।

  • नींद आने में कठिनाई (Sleeping Difficulty)
  • बार-बार नींद का खुलना या सोते हुए परेशान होना
  • बहुत जल्दी जाग जाना
  • सोकर उठने के बाद भी थका हुआ फील होना आदि है

एंग्याजटी या चिंता तनाव की नैचुरल प्रतिक्रिया है। जहां पर आप डर या आशंका महसूस करते हैं कि आगे क्या होने वाला है। यदि आप हमेशा चिंतिंत रहते हैं, चिंता 6 महीने से ज्यादा समय तक रहती है और यह आपकी डेली लाइफ और रिलेशनशिप में बाधा रही है तो आप एंग्जायटी डिसऑर्डर (anxiety disorder) का शिकार हो सकते हैं।

अमेरिकन हेल्थ केयर के अनुसार अमेरिकन में नींद की कमी सीधे-सीधे डिप्रेशन और एंग्जायटी (Depression and anxiety) से रिलेटेड हैं। इससे आप समझ सकते हैं कि एंग्जायटी और इंसोम्निया आपस में जुड़े हुए हैं। अगर भारत के आकंड़ों की बात करें तो न्यूरोलॉजी ऑफ इंडिया में छपी स्टडी के अनुसार 9 प्रतिशत लोग इंसोम्निया से पीड़ित हैं। वहीं लगभग 30 प्रतिशत लोग कभी-कभी अनिद्रा की समस्या का शिकार हुए हैं। इस स्टडी में ये बात सामने आई है कि इंसोम्निया का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर्स एंग्जायटी और डिप्रेशन है। यानी ये बात साफ हो चुकी है कि एंग्जायटी और इंसोम्निया (Anxiety and Insomnia) भाई- बहन हैं।

और पढ़ें: चैन की नींद सोना है बहुत जरूरी, जानिए क्या होते हैं अच्छी नींद के फायदे?

क्या एंग्जायटी के कारण इंसोम्निया होता है या इंसोम्निया के कारण एंग्जायटी?

यह सवाल किसी के भी दिमाग में आ सकता है, इसका जबाव है कि स्लीप डेप्रिवेशन (Sleep deprivation) एंग्याजटी डिसऑर्डर (anxiety disorder) का रिस्क बढ़ा सकता है। यहां तक कि ये रिकवरी को भी रोक सकता है और एंग्जायटी नींद को डिस्ट्रब कर सकती है। यानी एंग्जायटी और इंसोम्निया एक दूसरे के जुड़े हुए हैं। हालांकि मेंटल हेल्थ और नींद का क्या संबंध है इस पर अभी और रिसर्च की जा रही हैं लेकिन हावर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के अनुसार न्यूरोकैमेस्ट्री स्टडीज कहती है कि:

  • रात की र्प्याप्त नींद मानसिक और भावनात्मक हेल्थ के लिए पोषण का काम करती है
  • क्रोनिक स्लीप डिर्सप्शन (chronic sleep disruptions) नेगेटिव थिकिंग और भावनात्मक संवदेनशीलता पैदा करती है।
  • आपको बता दें कि अनिद्राका इलाज करने से एंग्जायटी डिसऑर्डर के लक्षणों में राहत मिल सकती है। वैसे ही एंग्जायटी डिसऑर्डर का इलाज करने से इंसोम्निया में।
  • अब तो आप समझ ही गए होंगे कि एंग्जायटी और इंसोम्निया किस हद तक एक दूसरे के खास हैं।

और पढ़ें: नींद की कमी का करें इलाज, इससे हो सकती हैं कई बड़ी बीमारियां

क्या मुझे इंसोम्निया है? (Do I have insomnia?)

अगर इस आर्टिकल को पढ़ते-पढ़ते आपको लगने लगा है कि आपको इंसोम्निया (Insomnia) है तो तुरंत अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह लें। फिजिकल एग्जाम के बाद डॉक्टर आपको स्लीप डायरी मैंटेन करने के लिए भी कह सकते हैं। अगर उन्हें लगता है कि आपको इंसोम्निया हो सकता है तो वे आपको स्लीप स्पेशलिस्ट को दिखाने की सलाह भी दे सकते हैं। स्लीप स्पेशिलस्ट स्लीप स्टडी कर सकते हैं। जिसमें आपको नींद के दौरान कई प्रकार की फिजिकल स्टडीज से गुजरना होगा। जिसमें स्लीप को इलेक्ट्रोनिकली मॉनिटर करना शामिल है।

और पढ़ें: अगर आपको है इंसोम्निया की प्रॉब्लम, तो इसे दूर करें इन एक्यूप्रेशर पॉइंट्स से

इंसोम्निया का उपचार कैसे होता है? (insomnia treatment)

एंग्जायटी और इंसोम्निया

इंसोम्निया का इलाज दवाओं के साथ आसानी से किया जा सकता है। इसके साथ ही इंसोम्निया के इलाज के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (cognitive behavioral therapy) का उपयोग भी किया जाता है। जिसका शॉर्ट फॉर्म सीबीटी (CBT) है। इस थेरिपी को दवाओं के जितना ही या उससे अधिक प्रभावी बताया गया है। सीबीटी- I का उपयोग आपके दृष्टिकोण को समझने, पहचानने और बदलने में मदद करने के लिए किया जाता है जो आपकी नींद और सोने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। चिंता या नकारात्मक विचारों जो आपको जगाए रखते हैं को नियंत्रित करने या समाप्त करने में मदद करने के साथ-साथ, CBT उस साइकल को एड्रेस करती है जिसमें आपको नींद आने की इतनी चिंता है कि आप सो नहीं पा रहे हैं।

और पढ़ें: मेनोपॉज के दौरान इंसोम्निया की समस्या कहीं आप पर हावी न हो जाए, ध्यान रखें इन बातों का

एंग्जायटी और इंसोम्निया दोनों से राहत दिलाने वाले उपाय:

एंग्जायटी और इंसोम्निया दोनों से राहत दिला सकती हैं ब्रीदिंग एक्सरसाइज

ब्रीदिंग एक्सरसाइज (Breathing exercises) और मसल्स रिलैक्सेशन बेडटाइम की एंग्जायटी को दूर करने में बेहद मददगार है। इनको करने का तरीका भी बेहद आसान। ब्रीदिंग एक्सरसाइज की जानकारी पाने के लिए पढ़ें ये लेख: लंग्स को हेल्दी रखने में मदद कर सकती हैं ये आसान ब्रीदिंग एक्सरसाइज
इसके अलावा बेड पर जाने से पहले नहाना और मेडिटेशन करना भी एंग्जायटी और इंसोम्निया दोनों में राहत प्रदान कर सकता है।

नैप ना लें

वैसे तो छोटी सी नैप के बड़े फायदे हैं, लेकिन अगर आप इंसोम्निया (Insomnia) जैसी गंभीर परेशानी से जूझ रहे हैं तो दिन में सोना या बीच में कभी भी छोटी सी झपकी लेने की आदत को थोड़े दिन के लिए बंद करके देखे। इससे आप थकान महसूस करेंगे और यह इंसोम्निया से राहत दिला सकता है क्योंकि ऐसे में आपको जल्दी नींद आएगी।

रेगुलर दूर कर सकती है एंग्जायटी और इंसोम्निया (Anxiety and Insomnia) की समस्या

एक्सरसाइज

रेगुलर एक्सरसाइज करना मेंटल और फिजिकल हेल्थ दोनों की अच्छा है। यह फस्ट्रेशन को बाहर करती है और मूड को बेहतर बनाने वाले हॉर्मोन एंड्रोफिन (endorphins) को रिलीज करती है। जिससे एंग्जायटी और इंसोम्निया (Anxiety and Insomnia) दोनों समस्याओं से राहत मिलती है। योगा भी एंग्जायटी और स्ट्रेस को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स आयटम्स का उपयोग बेडरूम में ना करें

बेडरूम का उपयोग सिर्फ सोने के लिए ही करें। यहां पर टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स का उपयोग ना करें। यह आपको अपने बिस्तर को व्यस्त गतिविधियों से अलग करने में मदद करेगा और आपको नींद लाने में भी।

टू डू लिस्ट जरूर बनाएं और एंग्जायटी और इंसोम्निया से राहत पाएं

एंग्जायटी और इंसोम्निया

अपनी एनर्जी और टाइम उन कामों में लगाएं जो सच में महत्वपूर्ण हैं। बड़े कामों को छोटे कामों और आसानी से करने योग्य कामों में डिवाइड करें और फिर उन्हें करें। इससे आपको एंग्जायटी नहीं होगी और एंग्जायटी से होने वाले इंसोम्निया से भी राहत मिलेगी। एंग्जायटी और इंसोम्निया दोनों में यह टिप्स मदद कर सकती है।

सोने से पहले स्टिम्युलेंट्स से दूर रहें

सोने से पहले स्टिम्यूलेंट्स जैसे कि कैफीन और निकोटीन का उपयोग करना नींद में रूकावट डालने के साथ ही चिंता को बढ़ा सकते हैं। इसलिए अगर आप एंग्जायटी और इंसोम्निया दोनों से राहत पाना चाहते हैं तो सोने से पहले इन दोनों का ही यूज ना करें। कुछ डॉक्टर्स बेडटाइम से पहले एल्कोहॉल का यूज करने से भी मना करते हैं।

इन टिप्स को भी आजमा कर देखें

 

  • सोने और जागने का समय निर्धारित करना भी अनिद्रा की शिकायत को दूर करने में मदद कर सकता है
  • सोने से पहले सॉफ्ट म्यूजिक सुनना माइंड और बॉडी को रिलैक्स करने के साथ ही ब्लड प्रेशर को भी लो करता है। आप ये भी ट्राई कर सकते हैं
  • सोने से पहले निगेटिव न्यूज ना सुनें और ना ही सोशल मीडिया पर स्क्रॉलिंग करें

उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और एंग्जायटी और इंसोम्निया से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 08/03/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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