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इंसोम्निया (Insomnia) क्या है और यह क्यों होता है?

इंसोम्निया (Insomnia) क्या है और यह क्यों होता है?

इंसोम्निया (Insomnia) और कम नींद सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है। एक अनुमान के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अनिद्रा और नींद से जुड़ी समस्याएं ज्यादा होती हैं और इन समस्याओं के कारण मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह समस्या किसी भी उम्र के लोगों के साथ हो सकती है। नींद न आने के पीछे कई कारण भी हो सकते हैं। इस आर्टिकल में हम इसी बारे में बात करेंगे। पहले जानते हैं इंसोम्निया के प्रकार।

इंसोम्निया (Insomnia) के प्रकार

  1. शॉर्ट टर्म एक्यूट इंसोम्निया (Short Term acute insomnia) : यह कुछ दिनों से कुछ सप्ताह तक रहता है और तकरीबन तीन सप्ताह तक चलता है। ऐसा आमतौर पर एक दर्दनाक घटना के प्रभाव या तनाव के कारण हो सकता है। इसके अलावा, तनाव या जीवन में किसी प्रकार का फेरबदल होना। यह टेंपरेरी इंसोम्निया हो सकता है। इसके अलावा, और भी कई दूसरे कारणों से भी नींद नहीं आती है, जैसे बहुत काम करना, बहुत घूमना, वातावरण में बदलाव। शॉर्ट टर्म एक्यूट इंसोम्निया खुद ठीक भी हो जाता है।
  2. क्रोनिक लॉन्ग टर्म इंसोम्निया (chronic long term insomnia) : यह एक महीने से ज्यादा भी हो सकता है। कई रातों तक जागने के बाद सोने के बाद ऐसा हो सकता है। ऐसे में आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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किन कारणों से नहीं आती है नींद?

नींद न आने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। जैसे-

  • रेस्टलेस लेग सिन्ड्रॉम : इस दौरान, लोगों के पैरों में पैरों में सेंसेशन होती है, जिससे वो असहज महसूस करते हैं। इस वजह से उनकी नींद बार-बार टूटती रहती है। ज्‍यादा समय तक इस बीमारी से ग्रस्त रहने पर डिप्रेशन की परेशानी भी हो सकती है, क्योंकि इंसोम्निया के लक्षण मानसिक तौर पर बीमार कर सकते हैं।
  • तनाव : तनाव की स्थिति किसी भी वजह से हो सकती है। परिवार की फायनेंशियल कंडिशन, स्वास्थ्य, काम के बारे में चिंता करना या फिर जरूरत से ज्यादा वर्क लोड इस समस्या का कारण हो सकता है। इन सभी का सीधा असर दिमाग पर पड़ता है और तनाव की स्थिति शुरू हो जाती है, जिससे नींद आने में कठिनाई होती है।
  • अन्य कारण : सोने से पहले बहुत ज्यादा खाना, ज्यादा टेलीविजन देखना, काम के दौरान अपने बिस्तर का उपयोग करना, सोने की जगह ठीक न होना या अनियमित सोने का समय अनिद्रा पैदा कर सकता है।

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इंसोम्निया (Insomnia) के लक्षण क्या हैं?

इसके लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे-

  1. रात में ठीक से तरह से नींद नहीं आना
  2. रात में सोना कम और ज्यादा जागना या बार-बार नींद खुलना
  3. नियमित कामों को ठीक से नहीं कर पाना
  4. हमेशा थका हुआ महसूस करना

ठीक से नहीं सोने की वजह से हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक ब्रेन संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में बेहतर होगा की कुछ बातों का ख्याल रखा जाए, जैसे :

  • इंसोम्निया से बचाव इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज किस प्रकार से अपने आप को आराम दे सकता है। कुछ सामान्य बदलाव हर उम्र के मरीजों के लिए लाभदायक होते हैं।
  • नियमित रूप से सुबह जागना और नियमित समय से ही सोना। सही समय पर न सोने की वजह से भी नींद आने में परेशानी हो सकती है। इसलिए सोने का समय तय रखें और साथ ही सुबह जागने का भी समय नियमित रखें।
  • सोने तभी जाएं जब आपको लगने लगे की आपको नींद आ रही है।
  • सोते समय अपने आपको रिलैक्स रखें। किसी भी बातों के बारे में न सोचें। क्योंकि सोने के दौरान सोचने की वजह से नींद आने में परेशानी हो सकती है।
  • नियमित रूप से योगा या व्यायाम की आदत डालें। इससे अच्छी नींद आने में मदद मिलेगी।
  • सोने की जगह को साफ और अच्छा रखने से भी नींद अच्छी आती है। इसलिए अपने बेडरूम को क्लीन रखें।
  • सोने के कुछ देर पहले खाना खाएं। फिर टहलकर रात को सोने जाएं।
  • सोते वक्त मोबाइल का इस्तेमाल न करें और टीवी भी न देखें। यह ध्यान रखें की सोने के दौरान किसी भी गेजेट्स का प्रयोग न करें।
  • हल्की नीली लाइट में जल्दी नींद आती है, इसका इस्तेमाल आप अपने सोने वाले कमरे में कर सकते हैं। हालांकि रिसर्च के अनुसार बेडरूम में रेड लाइट (नाइट बल्ब) का प्रयोग करना चाहिए। इससे नींद अच्छी आती है।
  • बेडशीट (चादर) कॉटन का प्रयोग करें और तकिये और गद्दे के क्वॉलिटी का भी ध्यान रखें। कभी-कभी तकिये और गद्दे की क्वॉलिटी ठीक नहीं होने के कारण भी नींद आने की परेशानी होती है।

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मुंबई में रहने वाले 35 साल के प्रशांत कुमार मीडिया की कंपनी में काम करते हैं। उनसे जब हमने नींद से जुड़ी परेशानी के बारे में समझना चाहा तो उनका कहना था कि ‘अगर गद्दे या तकिये में से कोई भी एक ठीक न हो तो मुझे नींद नहीं आती है और नींद ठीक से पूरी नहीं होती है तो मैं अपने काम पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता हूं। यही नहीं ठीक से नहीं सोने की वजह से कब्ज की परेशानी भी होने लगती है। इसलिए मैं बेडशीट, मेट्रेस और तकिये के साथ-साथ बेडरूम को भी ठीक रखता हूं।’

इंसोम्निया की समस्या सिर्फ बड़ों में ही नहीं होती है बल्कि इसके शिकार बच्चे भी होते हैं। एक रिसर्च के अनुसार 41 प्रतिशत पेरेंट्स बच्चों में इंसोम्निया की समस्या की परेशानी डॉक्टर से शेयर कर चुके हैं।

बच्चों में इंसोम्निया के कारण क्या हैं?

बच्चों में इंसोम्निया के कारण निम्नलिखित हैं। जैसे-

इन कारणों के अलावा अन्य कारण भी हो सकते हैं। जैसे-

अगर आपका बच्चा ठीक से नहीं सो रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करें। अच्छी नींद हेल्थ को फिट रखने के लिए अहम भूमिका निभाती है।

नींद न आना किसी गंभीर बीमारी को न्योता देने के लिए काफी है। इसलिए, नींद नहीं आने की स्थिति में खुद से इलाज न करें। इंसोम्निया या नींद न आने से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Everything You Need to Know About Insomnia/https://www.healthline.com/health/insomnia/ Accessed on 10/12/2019

Insomnia/https://www.nhlbi.nih.gov/health-topics/insomnia/ Accessed on 10/12/2019

What is Insomnia?/https://www.sleepfoundation.org/insomnia/what-insomnia/ Accessed on 10/12/2019

Insomnia/https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/insomnia/symptoms-causes/syc-20355167/ Accessed on 10/12/2019

Insomnia: Everything you need to know/https://www.medicalnewstoday.com/articles/9155.php/ Accessed on 10/12/2019

 

 

लेखक की तस्वीर
Nidhi Sinha द्वारा लिखित
अपडेटेड 05/07/2019
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