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कहीं नींद न आने का कारण स्लीप डिहाइड्रेशन (Sleep Dehydration) तो नहीं?

कहीं नींद न आने का कारण स्लीप डिहाइड्रेशन (Sleep Dehydration) तो नहीं?

पानी और नींद का रिश्ता बहुत गहरा है। यह सुनने में बहुत अजीब लग सकता है लेकिन यह सच है। पानी की कमी न सिर्फ आपके सेहत पर और स्किन पर असर डालती है, बल्कि इससे नींद भी काफी प्रभावित होती है। इस समस्या को स्लीप डिहाइड्रेशन (Sleep Dehydration) कहते हैं। स्लीप डिहाइड्रेशन होने से आपको नींद लेने में परेशानी हो सकती है, जिससे आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

यही नहीं, यदि स्लीप डिहाइड्रेशन हो तो आपको इंसोम्निया का सामना करना पड़ सकता है। पानी और नींद का क्या रिश्ता है जानने के लिए यह आर्टिकल जरूर पढ़ें। आइए पहले जानते हैं कि स्लीप डिहाइड्रेशन की समस्या क्या है।

और पढ़ें – REM sleep behavior disorder : रैपिड आई मूवमेंट स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर

स्लीप डिहाइड्रेशन (Sleep Dehydration) की समस्या क्या है?

  • सोने से पहले बहुत सारा पानी पीने के कारण आप बार-बार उठते हैं। चूंकि इससे आपको पेशाब जाना पड़ता है पर कम पानी पीने से भी समस्या हो सकती है। यह आपके शरीर को डिहाइड्रेट कर सकता है। इसके कारण नींद में कई बार आपको उठना पड़ता है। यदि आप थोड़े भी प्यासे हैं तो यह आपके नींद में खलल डाल सकता है यानी स्लीप डिहाइड्रेशन के कारण इंसोम्निया की समस्या बढ़ सकती है। इंसोम्निया के कारण व्यक्ति को तमाम तरह की शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं।
  • रात भर सोते समय डिहाइड्रेट रहने के कारण भी रात को आपको खर्राटों आ सकते हैं। वहीं सुबह उठते ही आपका गला सूखा और शरीर आलस और थकान से भरा हुआ हो सकता है।
  • स्लीप डिहाइड्रेशन के कारण मुंह और नाक की नली ड्राय हो जाता है, जिसके कारण कई समस्या हो सकती है।
  • स्लीप डिहाइड्रेशन के कारण नोक्टर्नल लैग क्रैंप (nocturnal leg cramps) का कारण बन सकता है। (nocturnal leg cramps) में पैरों में बहुत दर्द या खिंचाव होता है। यह दर्द रात को सोते हुए ज्यादा होता है।
  • स्लीप एप्निया व जो लोग सोते समय नाक के बजाए मुंह से सांस लेते हैं उन लोगों में भी स्लीप डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
  • यदि आप एसी में सोते हैं तो यह रूम के मॉइस्चर के साथ ही आपके शरीर से भी नमी को चुरा लेता है। इसलिए एसी वाले रूम में सोते हुए भी खुद को हाइड्रेट रखना जरूरी है।
  • ज्यादा गर्म या ड्राई कमरे में भी डिहाइड्रेशन की दिक्कत हो सकती है।
  • यदि आपको बहुत शराब या कैफीन पीने की आदत है तो याद रखें कि यह रात भर आपको डिहाइड्रेट करता है और सुबह आप थकान भरा महसूस करते हैं।

और पढ़ें – पार्टनर को डिप्रेशन से निकालने के लिए जरूरी है पहले अवसाद के लक्षणों को समझना

क्या कहती है शोध?

कम सोने वालों में स्लीप डिहाइड्रेशन ज्यादा होता है

पेन्न स्टेट यूनिवर्सिटी, पेन्नसिल्वेनिया (Penn State University, Pennsylvania) की स्लीप जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार छह घंटे सोने वालों में स्लीप डिहाइड्रेशन की समस्या ज्यादा होती है। स्टडी के मुताबिक जो लोग आठ घंटे की नींद पूरी करते हैं उनके मुकाबले छह घंटे यानी निर्धारित समय से दो घंटे कम सोने वालों में पानी की कमी ज्यादा देखी जा सकती है।

नींद के दौरान दिमाग किडनी को सिग्नल भेजकर बॉडी का अतिरिक्त तरल रोकने को कहता है। ऐसे में जिनकी नींद टूट जाती है या जल्दी खुल जाती है उनमें सिग्नल ठीक तरह से किडनी तक नहीं पहुंच पाते और ज्यादातर पानी पेशाब के जरिए शरीर से निकल जाता है। इसकी वजह से ही स्लीप डिहाइड्रेशन होता है।

और पढ़ें – इंसोम्निया (Insomnia) क्या है और यह क्यों होता है?

स्लीप डिहाइड्रेशन के मुख्य कारण

दवाओं के सेवन से हो सकती है यह स्थिति

मार्केट में कई ऐसी दवाएं मौजूद हैं जिनके सेवन के कारण स्लीप डिहाइड्रेशन की स्थिति दुष्प्रभाव के रूप में उत्पन्न हो सकती है। इनमें शामिल हैं –

  • एंटीडिप्रेस्सेंट
  • एंटीकोलिनर्जिक
  • कोर्टिकोस्टेरॉयड
  • एसजीएलटी2 इन्हिबिटर्स
  • एंटीसाइकोटिक

अगर आप इन दवाओं का सेवन करने के बाद नींद से प्यासे उठते हैं तो आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेने की आवश्यकता है। आप चाहें तो उनसे किसी अन्य दवा का सेवन करने की भी पूछ सकते हैं। जिनसे आपको सोते समय प्यास न लगे।

और पढ़ें – Drug allergy : ड्रग एलर्जी क्या है?

कहीं हैंगओवर तो नहीं इसके पीछे की वजह?

अगर आपने कम समय में कई एलकोहॉल ड्रिंक का सेवन किया है तो रात में सोते समय प्यास के कारण उठना बेहद सामन्य स्थिति होती है।

आपकी प्यास का कारण अधिक पेशाब आना हो सकता है। क्योंकि जब हम शराब का सेवन करते हैं तो शरीर से अधिक मात्रा में तरल पदार्थ निकलते हैं। जिसके कारण पानी की कमी होने लगती है। यह शरीर की रसायनिक प्रणाली को भी प्रभावित करता है।

जब हमारे शरीर में एलकोहॉल जाता है तो हमारी बॉडी उसे अवशोषित करने के लिए एसीटैल्डिहाइड नामक रसायन का उत्पाद करती है। यह रसायन कई फिजियोलॉजिकल रिएक्शन पैदा करता है जिसमें प्यास का उत्तेजित होना मुख्य रूप से शामिल होता है।

अगर आपको हैंगओवर हुआ है तो इन उपायों की मदद लें –

  • इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने के लिए स्पोर्ट्स ड्रिंक का सेवन करें
  • सूप पियें
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पियें
  • दही खाएं

और पढ़ें – Hangover : हैंगओवर क्यों होता है? जानें इसके लक्षण, कारण और बचाव के घरेलू उपाय

स्लीप डिहाइड्रेशन का कारण स्लीप एपनिया

अगर आपको स्लीप एपनिया की बीमारी है तो आप सोते समय नाक की बजाए मुंह से सांस लेते हैं। इसके कारण मुंह का सुखना सामान्य होता है जिसकी वजह से आप उठ सकते हैं। पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) का इस्तेमाल करने से मुंह सूखने की स्थिति और भी अधिक खराब हो सकती है।

और पढ़ें – क्या आपका बच्चा नींद के कारण परेशान रहता है? तो इस तरह दें उसे स्लीप ट्रेनिंग

यह प्रीमेनोपॉज या मेनोपॉज का संकेत तो नहीं?

हमारे शरीर में रिप्रोडक्टिव हॉर्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन तरल पदार्थ और प्यास लगने की स्थिति को कंट्रोल करते हैं। प्रीमेनोपॉज या मेनोपॉज के दौरान शरीर में हॉर्मोनल बदलाव होने लगते हैं जिसके कारण बेहद गर्मी लगना, सोते समय पसीना आना और प्यास का बढ़ जाना सामान्य होता है।

अगर आप मेनोपॉज के दौर से गुजर रही हैं तो पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आपके लिए बेहद जरूरी होता है।

और पढ़ें – ओल्ड एज सेक्स लाइफ को एंजॉय करने के लिए जानें मेनोपॉज के बाद शारिरिक और मानसिक बदलाव

डायबिटीज

डायबिटीज मेलिटस के कारण अत्यधिक प्यास लगती है। जब आपकी बॉडी सही तरिके से शुगर को प्रोसेस नहीं कर पाती है तो इसके कारण आपकी किडनी को रक्त प्रवाह से अधिक शुगर को कम करने के लिए ज्यादा कार्य करना पड़ता है। इस स्थिति में किडनी अधिक पेशाब का उत्पादन करती है जिससे व्यक्ति को प्यास लगने लगती है और वह नींदों में भी पानी पीने के लिए उठता है।

सेंट्रल डायबिटीज इनसिपिडस, नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इनसिपिडस और डिप्सोजेनिक डायबिटीज इनसिपिडस के कारण भी अत्यधिक प्यास लगने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

निष्कर्ष – आपकी बॉडी अधिक मात्रा में पानी को पेशाब के जरिए बहार निकाल देती है जिसके कारण न बुझनेवाली प्यास की स्थिति उत्पन्न होती है।

और पढ़ें – डायबिटिक फूड लिस्ट के तहत डायबिटीज से ग्रसित मरीज कौन सी डाइट करें फॉलो तो किसे कहे ना, जानें

डिहाइड्रेशन क्या है?

शरीर में पानी की कमी को डिहाइड्रेशन कहते हैं। यदि आप जितना पानी रहे हैं उससे ज्यादा पानी शरीर से निकल रहा हो तो शरीर में डिहाइड्रेशन हो जाता है। डिहाइड्रेशन के कारण शरीर सामान्य तरह से काम नहीं कर पाता। डिहाइड्रेशन की कोई उम्र नहीं होती है। छोटे बच्चों में दस्त और उल्टियां इसकी वजह हो सकती है। वहीं बड़ों में दस्त, उल्टी के साथ स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां और दवाएं भी कारण हो सकती हैं।

और पढ़ें – Dehydration: डिहाइड्रेशन क्या है?

स्लीप डिहाइड्रेशन से क्या खतरा हो सकता है?

  • यदि आप कम पानी पी रहे हो और ऐसा काम या एक्सरसाइज करें जिसमें ज्यादा पसीना आए तो आप हीट स्ट्रोक, थकान आदि के शिकार हो सकते हैं।
  • यदि डिहाइड्रेशन की समस्या लंबे समय से चली आ रही हो तो आप यूरिनरी और किडनी की समस्या से जूझने पर मजबूर हो सकते हैं।
  • लो ब्लड वॉल्यूम शॉक (Low blood volume shock (hypovolemic shock)) आपको मौत के करीब पहुंचा देता है। इसमें ब्लड प्रेशर और ऑक्सिजन में कमी आ जाती है जिसके कारण आपकी जान भी जा सकती है।

कब्ज का बढ़ सकता है जोखिम

कब्ज और नींद में गहरा संबंध हैं। क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन का सबसे सामान्य कारण शरीर में पानी की कमी होती है। हम जो आहार खाते हैं वह पेट के जरिए बड़ी आंत तक अपने आप चला जाता है। हालांकि, अगर आपकी बॉडी में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं होता है तो बड़ी आंत खाने के वेस्ट से पानी को सोख लेती है। इसके कारण सख्त मल आता है जिसे पास करना मुश्किल हो जाता है।

यह भी पढ़ें : स्लीपिंग सिकनेस (Sleeping Sickness) क्या है? जानें इसके लक्षण और बचाव उपाय

स्लीप डिहाइड्रेशन के उपाय क्या हैं?

इस समस्या का इलाज आप खुद पर ध्यान देकर कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप खुद को पूरी तरह से हाइड्रेट रखें। नीचे हम बताने जा रहे हैं कि आप खुद को कैसे इस समस्या से बचा सकते हैं –

  • ओरल रिहाइड्रेशन और जूस, सूप आदि लेना चाहिए।
  • गर्मियों में और उमस वाले मौसम में ही नहीं सर्दियों में भी पानी की इंटेक ज्यादा कर दें। चूंकि सर्दियों में खुस्क वातावरण के कारण भी शरीर में नमी की कमी आ जाती है।
  • बुजुर्गों में पानी की कमी ज्यादा होती है। यदि उनमें ब्लैडर इंफेक्शन, ब्रोंकाइटिस हो तो यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। इसलिए उन्हें भी पर्याप्त मात्रा में पानी लेना चाहिए।
  • कैफीन और शराब के कारण भी स्लीप डिहाइड्रेशन होता है। इसलिए इनसे दूरी बनाने की कोशिश करें या कम सेवन करें।
  • महिलाओं को खान-पान से करीब दो से तीन लीटर और पुरुषों को करीब चार से पांच लीटर पानी लेना चाहिए।
  • यदि आप सोते वक्त कई बार उठकर पेशाब जाते हैं तो हो सकता है कि आपको नोक्टूरिया की दिक्कत हो। इसके कारण नींद में बार-बार खलल पड़ता है। इसलिए रात को सोने से पहले ही दिनभर के पानी पीने का कोटा पूरा न करें, बल्कि दिन में अलग-अलग समय पर खुद को हाइड्रेट करें।
  • पेशाब करने के बाद ही बिस्तर में सोएं।

स्लीप डिहाइड्रेशन के कारण आप रात भर या तो सो नहीं पाते हैं या दिन भर आलस और बेहोशी सा महसूस करते हैं। इसलिए दिन भर खुद को हाइड्रेट रखने के साथ ही रात में भी हाइड्रेशन का पूरा ख्याल रखें।

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डॉक्टर को कब दिखाएं

किसी भी असुविधाजनक स्वास्थ्य स्तिथि में डॉक्टर या अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी से सलाह लेना एक अच्छा विकल्प होता है। यदि आपको किसी रोग के लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर को उनके बारे में बताएं।

अगर आपको निम्न स्थिति महसूस होती है तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं –

  • आप अक्सर थका हुआ या कमजोर महसूस करते हैं।
  • धुंधला दिखाई देना।
  • चोट, घाव के निशान या फोड़ो का सही तरीके से ठीक न होना।
  • जितना मर्जी पानी पीने के बाद भी प्यास लगती रहती है।
  • रोजाना बड़ी मात्रा में पेशाब करना।

उम्मीद है इस आर्टिकल में आपको स्लीप डिहाइड्रेशन से जुड़ी जरूरी बातों के बारे में जानकारी मिल गई होगी। अगर आपको ऐसी कुछ समस्या है, तो आप भी ऊपर बताए गए तरीके अपना सकते हैं। आपको ये आर्टिकल कैसा लगा हमारे साथ अपनी प्रतिक्रिया जरूर शेयर करें, ताकि हम आपके लिए इसी तरह नई-नई जानकारियां लाते रहें।

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Hema Dhoulakhandi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/01/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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