गर्भवती महिला का आहार : गर्भावस्था के दौरान क्या खाएं और क्या नहीं?

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Update Date जुलाई 10, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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मां बनना एक अलग ही अहसास होता है। प्रेग्नेंट होने की जानकारी मिलते ही कपल कई तरह की प्लानिंग शुरू कर देते हैं। इस पीरियड के दौरान गर्भवती महिला का खास ख्याल रखा जाता है। महिलाएं भी अपने खान-पान से लेकर बाहर आने-जाने तक के लिए सतर्क हो जाती हैं। इसलिए यहां हम बता रहे हैं कि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला का आहार कैसा होना चाहिए। क्योंकि यह गर्भवती महिला के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे (भ्रूण) के विकास के लिए आवश्यक होता है। मां के आहार से ही गर्भ में पल रहे बच्चे को संपूर्ण पोषण मिलता है और उचित खानपान प्रसव में भी योगदान देता है। तो आइए जानते हैं गर्भवती महिला का आहार कैसा होना चाहिए?

गर्भवती महिला का आहार होना चाहिए इन पोषक तत्वों से भरपूर

प्रेग्नेंसी के दौरान पोषक तत्वों की आवश्यकता कई गुना बढ़ जाती हैं और यह हर ट्राइमेस्टर में अलग-अलग होती है। 50 किलो की एक सामान्य महिला को हर दिन 1875 कैलोरी की आवश्यकता होती है, जबकि गर्भवती महिला को 2175 कैलोरी रोजाना चाहिए होती है।

गर्भवती महिला का आहार कैसा हो

गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन बढ़ना तय होता है। एक स्वस्थ महिला का वजन 11 से 16kg तक बढ़ता है। इसलिए वजन बढ़ने से घबराए नहीं बल्कि अपनी डाइट पर ध्यान दें। प्रेग्नेंसी के दौरान फोलिक एसिड (folic acid), आयरन (iron), विटामिन-सी, विटामिन-डी, कैल्शियम (calcium), ओमेगा-3, ओमेगा-6, और फैटी एसिड (fatty acid) जैसे पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इन तत्वों से युक्त खादृय पदार्थों के सेवन से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे का ठीक तरह से विकास संभव हो सकता है। 

फोलिक एसिड

डीएनए, फोलिक एसिड और आरएनए (RNA) के संश्लेषण और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक होता है। प्रेग्नेंसी के पहले से ही महिला को फोलिक एसिड का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए। गर्भवती महिला का आहार ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर हो। इसके लिए प्रेग्नेंसी डायट चार्ट में अखरोट, काजू , बादाम आदि ड्राई फ्रूट्स को शामिल करें। यह भ्रूण के न्यूरो डेवलपमेंट के लिए भी महत्वपूर्ण है। शरीर में फॉलिक एसिड की मात्रा ठीक रखने के लिए हरी सब्जियां बीन्स, मटर, पालक और मूंग या अंकुरित मूंग, संतरे का सेवन लाभकारी हो सकता  है।  

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आयरन

प्रेग्नेंसी में अक्सर महिलाओं में आयरन की कमी हो जाती है। इसलिए, गर्भवती महिला का आहार आयरन युक्त होना चाहिए। आयरन के कम स्तर के कारण प्री-मेच्योर बर्थ और जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टट्रिशन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (ACOG) के अनुसार गर्भवती महिलाओं को एक दिन में 27 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है।

आयोडीन

शिशुओं के जन्म के समय और युवा बच्चों के डेवलपमेंट के समय आयोडीन की कमी होने संभावना अधिक होती है। इसलिए, गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की पर्याप्त मात्रा गर्भवती महिला का आहार का हिस्सा होना चाहिए।

कैल्शियम

गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों और दांत के निर्माण के लिए कैल्शियम महत्वपूर्ण होता है। डेयरी उत्पाद से भरपूर गर्भवती महिला का आहार शिशु के विकास के लिए जरूरी है। कैल्शियम रिच फूड जैसे दूध, चीज और दही का सेवन करना चाहिए। 

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प्रोटीन

प्रोटीन, गर्भवती महिला का आहार का अनिवार्य हिस्सा है। एक गर्भवती महिला को प्रतिदिन 65 ग्राम प्रोटीन की जरुरत होती है। प्रेग्नेंसी डायट चार्ट में दालें, सोया और अंकुरित चने शामिल करें।

विटामिन (Vitamin)

विटामिन-डी के लिए ऑइली फिश, अंडे का सेवन करना लाभकारी हो सकता है। वहीं विटामिन-डी के लिए सूर्य की किरणें खास कर सुबह की धूप में बैठना लाभकारी हो सकता है। विटामिन-सी के लिए रेड मीट, चिकन, अंडा और ड्राई फ्रूट्स का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

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ओमेगा (Omega)

ओमेगा-3 और ओमेगा-6 की पूर्ति के लिए फिश (मछली), अलसी (Flaxseed) और अखरोट का सेवन हितकारी हो सकता है।

पानी

नियमित रूप से 8 ग्लास तक पानी रोज पिएं। पानी के साथ-साथ फ्रेश जूस और नारियल पानी का भी सेवन करना लाभदायक हो सकता है।

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फर्स्ट ट्राइमेस्टर में गर्भवती महिला का आहार

गर्भावस्था के फर्स्ट ट्राइमेस्टर (गर्भधारण से लेकर 12 सप्ताह) में फोलिक एसिड में प्रचुर पदार्थों का सेवन करना चाहिए। साथ ही डॉक्टर की सलाह से फोलिक एसिड सप्लिमेंट्स (folic acid supplements) भी लिए जा सकते हैं। इसके आलावा आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का भी सेवन ज्यादा करना चाहिए। इस दौरान महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस (morning sickness) की समस्या रहती है। इससे निपटने के लिए विटामिन बी-6 को गर्भवती महिला अपने डायट चार्ट में शामिल करना चाहिए।

दूसरी तिमाही (13 से 27 सप्ताह) में गर्भवती महिला का आहार

तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला का आहार ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्त हों चाहिए। इससे गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क का विकास उचित रूप से होगा। हेल्दी स्किन और साफ रक्त के लिए बीटा कैरोटीन को डायट प्लान में शामिल करें। चाय या कॉफी का सेवन न करें क्योंकि उसमें मौजूद टैनिन शरीर में आयरन के अवशोषण को कठिन बनाता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए गर्भवती महिला का आहार चयन करें।

तीसरी तिमाही (28 से 42 सप्ताह) में गर्भवती महिला का आहार

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही (third trimester) में प्रेग्नेंट लेडीज को अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। आपको इस समय 200-300 अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत होती है। तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला का आहार इन बातों का ध्यान में रखकर ही तय करें।

गर्भावस्था के दौरान कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन करने से बचना चाहिए:

चाय-कॉफी :

चाय या कॉफी में कैफीन की मात्रा अधिक होती है। इसलिए एक दिन में दो कप से ज्यादा नहीं पीना चाहिए। जो नुकसानदायक हो सकती है।

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अल्कोहल (Alcohol):

गर्भावस्था के दौरान अल्कोहल और सिगरेट नहीं पीना चाहिए। इन दोनों का ही आपके और बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है।

हर्बल पदार्थ (Herbal Products) :

किसी भी हर्बल पदार्थों के सेवन से पहले एक्सपर्ट से राय लेना बेहतर होगा।  

गर्भवती महिला का आहार अगर संतुलित और हेल्दी रहेगा तो गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी उचित होगा। गर्भवती महिला का आहार कैसा हो? इस बारे में डायट एक्सपर्ट या गायनेकोलॉजिस्ट से डायट प्लान की जानकारी लेनी चाहिए। इस तरह उचित और पौष्टिक आहार के नियमित रूप से सेवन से गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए लाभदायक सिद्ध होगा। यदि आप इससे जुड़ी अन्य कोई जानकारी चाहते हैं तो इसके लिए अपने चिकित्सक से कंसल्ट करें।

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