बच्चों की इन बातों को न करें नजरअंदाज, बच्चों में डिप्रेशन हो सकता है

Medically reviewed by | By

Update Date जनवरी 21, 2020
Share now

लखनऊ के केजीएमयू के मनोचिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ डॉ. विवेक अग्रवाल बताते हैं, “डिप्रेशन के लक्षण, हर बच्चे में अलग-अलग हो सकते हैं। बच्चे में किसी भी तरह का परिवर्तन नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 13-15 वर्ष की आयु के चार बच्चों में से लगभग एक बच्चा डिप्रेशन (depression) से ग्रस्त हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में 86 मिलियन लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। अवसाद, चिंता, और कई अन्य मानसिक रोगों (mental problems) के लक्षण लोगों को पता नहीं चल पाते, जिसके चलते बच्चों व किशोरों को सही व जरूरी इलाज भी नहीं मिल पाता है।”

बच्चों में डिप्रेशन को ऐसे समझें

बच्चा कहता है कि ‘मां मैं थका हुआ हूं।’ आपको लगता है कि उसे पढ़ने का मन नहीं होगा, इसलिए बहाने बना रहा है। बच्चा अचानक मोटा हो रहा है और आपको लगता है कि यह हेल्थ टॉनिक का असर है। ऐसे ही कई बदलाव हैं, जिन्हें पेरेंट्स अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन, ये लक्षण बच्चों में डिप्रेशन की ओर इशारा करते हैं। डिप्रेशन और तनाव ऐसी मानसिक समस्याएं हैं जो न सिर्फ व्यस्कों को बल्कि छोटे बच्चों को भी अपनी चपेट में लेती हैं। हालांकि, बड़ों की तुलना में बच्चों में अवसाद का पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए, “हैलो स्वास्थ्य” के इस आर्टिकल में बच्चों में होने वाले डिप्रेशन के कारण, लक्षण और उपचार के बारे में बताया जा रहा है।

बच्चों में डिप्रेशन के प्रकार

बच्चों में डिप्रेशन निम्नलिखित तरह का होता है:

डिसथीमिया (Dysthymia)
यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसके लक्षण बहुत मामूली होते हैं। लेकिन हो सकता है यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे।

बाईपोलर डिप्रेशन (Bipolar Depression)
किसी भी चीज का भ्रम होना या कई पर हाईपोथॉयराइडिज्म या सर्दी की दवाओं के परिणाम के चलति बच्चों में डिप्रेशन के यह लक्षण नजर आ सकते हैं।

मौसम से प्रभावित विकार (Seasonal Affective Disorder)
प्राकृतिक रोशनी के संपर्क में आने के कारण भी अवसाद हो सकता है। आमतौर पर यह परेशानी सर्दियों के मौसम में कम रोशनी के कारण होती है।

सामंजस्य संबंधी विकार (Adjustment Disorder)
किसी करीबी की मृत्यु हो जाने से बच्चा स्थितियों के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाता है। ऐसी स्थिती में इस तरह का डिप्रेशन हो सकता है।

बच्चों में डिप्रेशन के क्या लक्षण हैं? (Symptoms of depression in children)

बच्चों में अवसाद के लक्षण अलग-अलग होते हैं। इनका पता लगाना भी थोड़ा कठिन ही होता है क्योंकि अक्सर पेरेंट्स इन्हें विकास के दौरान होने वाले सामान्य भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों के रूप में देखते हैं। ऐसे में ये कुछ लक्षण हैं जो बच्चों में डिप्रेशन की ओर इशारा करते हैं-

  • चिड़चिड़ापन या गुस्सा
  • लगातार उदास रहना या निराशा की भावनाएं
  • लोगों से अलग-थलग रहना 
  • भूख में बदलाव (ज्यादा या कम खाना)
  • नींद में बदलाव (अत्यधिक या कम सोना)
  • अत्यधिक रोना 
  • अत्यंत संवेदनशील हो जाना
  • थकान लगना 
  • पेट में दर्द, सिरदर्द (जो उपचार से ठीक नहीं हो रहा हो)
  • अतिरिक्त गतिविधियों/शौक या रुचियों में दिलचस्पी न लेना 
  • एकाग्रता में कमी
  • आत्महत्या के विचार आना या बात करना।

सभी बच्चों में ये सभी लक्षण एक जैसे नहीं होते हैं। लेकिन, अवसाद ग्रस्त अधिकांश बच्चों में सामाजिक गतिविधियों से दूर होना, स्कूल जाने में आनाकानी करना, पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन न करना आदि लक्षण दिखाई देते हैं। बच्चे ड्रग्स या एल्कोहॉल का उपयोग करना भी शुरू कर सकते हैं, खासकर यदि वे 12 वर्ष से अधिक उम्र के हैं।

यह भी पढ़ें: चिंता और निराशा दूर करने का अचूक तरीका है गार्डनिंग

बच्चों में डिप्रेशन के कारण क्या हैं? (Causes of Depression in children)

बच्चों में डिप्रेशन या मेंटल डिसऑर्डर आनुवांशिक (Genetic), किसी घटना या बचपन का आघात (childhood trauma) के कारण हो सकता है। अगर किसी बच्चे के पेरेंट्स इस समस्या से गुजर चुके हों तो वे अवसाद के शिकार जल्दी हो सकते हैं। बच्चों पर माता-पिता द्वारा पढ़ाई के लिए डाले गए अत्यधिक दबाव की वजह से भी डिप्रेशन हो सकता है। 

बच्चों में अवसाद का निदान कैसे करें? (How is Depression Diagnosed in Children)

यदि बच्चे में डिप्रेशन के लक्षण कम से कम दो सप्ताह तक रहते हैं, तो आपको यह सुनिश्चित करने के लिए उसे डॉक्टर के पास ले जाएं। हालांकि, अवसाद को डायग्नोज करने के लिए कोई विशेष टेस्ट उपलब्ध नहीं हैं। व्यक्तिगत जानकारी के साथ कुछ सवाल/जवाब (बच्चे और माता-पिता दोनों) से बच्चों में अवसाद का पता लगाया जा सकता है। कभी-कभी इन प्रश्नावली से कुछ और समस्याएं जैसे एडीएचडी (ADHD), कनडक्ट डिसऑर्डर (conduct disorder) और ओसीडी (OCD) भी सामने आ सकती हैं, जो अवसाद का कारण हो सकती  हैं। बच्चों में अवसाद का इलाज काफी हद तक बड़ों के डिप्रेशन के इलाज जैसा ही होता है। इलाज बच्चे की स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है। डिप्रेशन से बच्चों को दूर रखने के लिए आप उनके आहार में विटामिन बी कॉम्पलेक्स और विटामिन सी को शामिल कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें: जानिए कितना खतरनाक हो सकता है बाइपोलर डिसऑर्डर

बच्चों में डिप्रेशन से बचाव के लिए क्या करें? (Treatment for Depression)

बच्चों को घर में अच्छा माहौल दें और उन्हें आस-पड़ोस के लोगों, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ समय बिताने के लिए कहें। इसके अलावा, अगर बच्चे के व्यवहार में कोई बदलाव नजर आए तो उनसे प्यार से बात करके इसका कारण पूछें। इसके अलावा बच्चों के खान-पान का भी ख्याल रखें। शारीरिक रूप से सक्रिय रखें। स्वभाविक ढंग से जीने दें। यदि बच्चे में डिप्रेशन की समस्या बढ़ जाए तो बेहतर होगा कि आप जल्द से जल्द किसी मनोचिकित्सक से संपर्क करें।

इन चीजों का रखें ध्यान

अपने बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। उसके साथ घूमें, गेम खेलें, खाना बनाएं और कोई मजेदार फिल्म देखें। धीरे-धीरे सकारात्मक माहौल बनाएं, जिससे बच्चा डिप्रेशन के नकारात्मक प्रभाव से बाहर निकलने लगेगा।

यह भी पढ़ें- एंग्जायटी के उपाय चाहते हैं तो जरूर अपनाएं ये टिप्स

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, 0.4-2.5 प्रतिशत बच्चे डिप्रेशन से ग्रस्त हैं। अगर बच्चे में उदासी के लक्षण लगातार एक साल तक बने रहते हैं तो इसे डिस्थायमिया (Dysthymia) कहते हैं। डिस्थायमिया से पीड़ित 10 प्रतिशत बच्चों में डिप्रेशन देखने को मिलता है। अवसाद से ग्रस्त होने वाले इन बच्चों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों पर थोड़ा ज्यादा दें। उन पर ज्यादा दबाव न डालें और न ही बच्चों को वैसा बनाने पर जोर दें, जैसा आप चाहते हैं। 

और पढ़ें-

लर्निंग डिसेबिलिटी के उपचार : जानें इसके लक्षण और समय रहते करें रोकथाम

एंग्जायटी डिसऑर्डर के लक्षण, जिनके बारे में जानना जरूरी है

ये हो सकते हैं मनोविकृति के लक्षण, कभी न करें अनदेखा

डिप्रेशन और नींद: बिना दवाई के कैसे करें इलाज?

संबंधित लेख:

    क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
    happy unhappy"

    शायद आपको यह भी अच्छा लगे

    ये 5 बातें बताती हैं डिप्रेशन और उदासी में अंतर

    डिप्रेशन और उदासी में अंतर क्या है? क्या डिप्रेशन और उदासी में अंतर को समझना आसान है? Depression और Sadness से बचने के क्या हैं उपाय?

    Medically reviewed by Dr. Hemakshi J
    Written by Hema Dhoulakhandi

    तनाव का प्रभाव शरीर पर पड़ते ही दिखने लगते हैं ये लक्षण

    तनाव का प्रभाव शारीरिक और मानसिक सेहत दोनों पर ही पड़ता है। क्रोनिक स्ट्रेस के चलते हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट स्ट्रोक जैसी भयानक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। तनाव का प्रभाव कभी-कभी जानलेवा भी....stress effects on body in hindi

    Medically reviewed by Dr. Hemakshi J
    Written by Smrit Singh

    गुस्से का प्रभाव बॉडी के लिए बुरा, हो सकती हैं पेट व दिल से जुड़ी कई बीमारियां

    गुस्से का प्रभाव मानसिक और शारीरिक स्तर पर होता है। गुस्से का प्रभाव दिल, पाचन प्रणाली, ब्लड प्रेशर को प्रभावित करता है। क्रोध पर काबू कैसे पाएं? anger effects body in hindi

    Medically reviewed by Dr. Hemakshi J
    Written by Smrit Singh

    दोस्त होता है स्ट्रेस बस्टर, जानें ऐसे ही तनाव को दूर करने के 9 उपाय

    आपका स्ट्रेस बस्टर क्या है? एक्सरसाइज, वॉक करना, हेल्दी खाना, मेडिटेशन, सही पोश्चर, डीप ब्रीदिंग आदि भी स्ट्रेस बस्टर का काम करते हैं..सेक्स भी कभी-कभी तनाव को...stress buster in hindi

    Medically reviewed by Dr. Hemakshi J
    Written by Smrit Singh