Cervicitis: सर्विसाइटिस क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज

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Update Date मई 26, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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परिचय

सर्विसाइटिस क्या है?

गर्भाशय ग्रीवा में होने वाली सूजन को सर्विसाइटिस कहा जाता है। गर्भाशय ग्रीवा एक निचला और संकीर्ण हिस्सा है जो योनि की ओर जाता है। ​सर्विसाइटिस होने पर मासिक धर्म के ​बीच में ब्लीडिंग होती है। साथ ही संभोग करने पर भी दर्द होता है। इसके अलावा ग्रीवा का परीक्षण कराने पर भी काफी दर्द होता है। ऐसा भी हो सकता है कि सर्विसाइटिस में किसी भी लक्षण का अनुभव ना हो।

आमतौर पर सर्विसाइटिस संभोग से होने वाला इंफेक्शन है। सर्विसाइटिस में क्लैमाइडिया या गोनोरिया जैसे संक्रमण होते हैं। सर्विसाइटिस बिना इंफेक्शन से भी विकसित हो सकता है। सर्विसाइटिस के इलाज में डॉक्टर गर्भाशय ग्रीवा की सूजन को कम करने का प्रयास करते हैं।

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लक्षण

सर्विसाइटिस के लक्षण क्या है?

ज्यादातर मामलों में ऐसा देखा गया है कि सर्विसाइटिस में लक्षण नहीं दिखते हैं। डॉक्टर से शरीर का नियमित परीक्षण कराने पर ही इस बीमारी का पता चल पाता है। अगर कुछ लक्षण ​दिखते भी हैं तो वो इस प्रकार है:

  • कमर के निचले हिस्से में दर्द
  • पेट में दर्द
  • संभोग के दौरान दर्द
  • योनि में खुजली होना
  • सेक्स के बाद खून आना
  • पीरियड्स के बीच खून आना
  • पेशाब के दौरान जलन
  • सेक्स करते समय दर्द
  • लगातार और दर्दनाक पेशाब
  • सर्विसाइटिस एक आम बीमारी मानी जाती है। असल में, महिलाओं को 40 की उम्र के बाद इस तरह की समस्यास हो सकती है।

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कारण

सर्विसाइटिस के कारण क्या है?

गर्भाशय ग्रीवा में सूजन के गंभीर मामले संक्रमण के कारण होते हैं। सर्विसाइटिस के अन्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • गोनोरिया- यह सेक्स के दौरान होने वाला संक्रमण है। यह महिलाओं और पुरुष दोनों में हो सकता है।
  • क्लैमाइडिया- यह भी सेक्स से होने वाली एक समस्या है।
  • ट्राइकोमोनियासिस- यह भी संभोग से होने वाली बीमारी है।
  • जननांग में दाद की समस्या होना।
  • कई महिलाओं को सर्विसाइटिस होते हुए भी उनके टेस्ट पॉजिटिव नहीं आते हैं। ऐसे में सूजन के अन्य कारण इस प्रकार हैं:
  • कंडोम के लेटेक्स रबर से एलर्जी होना।
  • टैम्पोन, पेसरी या डायाफ्राम जैसी जन्म​नियंत्रण दवाओं की वजह से जलन होना।
  • बैक्टीरिया का असंतुलन होना। कभी-कभी योनि में मौजूद सामान्य और स्वस्थ बैक्टीरिया हानिकारक बैक्टीरिया के चलते खत्म हो जाते हैं। इसे ही बैक्टीरियल वेजाइनोसिस भी कहा जाता है।
  • हार्मोन का असंतुलन भी सर्विसाइटिस का कारण हो सकता है।
  • कैंसर या कैंसर का इलाज होने के बाद भी महिलाओं को सर्वि​साइटिस की समस्या हो सकती है।
  • सर्विसाइटिस में उस समय सबसे ज्यादा जोखिम होता है जब आप संभोग करना शुरू करना शुरू करते हैं। इसके अलावा अगर आप पहले से कुछ सेक्स संबंधी दवाएं ले रहे हैं तो भी सर्विसाइटिस की समस्या हो सकती है। अगर आपके कई सेक्सुअल पार्टनर हैं तो भी यह समस्या हो सकती है।
  • अगर सर्विसाइटिस का सही समय पर इलाज नहीं हुआ तो यह  बांझपन, श्रोणि दर्द, गर्भपात, गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर, या बच्चे के जन्म से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकता है।
  • प्रेग्नेंसी में भी महिलाओं में हार्मोन का स्तर बढ़ता-घटता रहता है। ऐसे मे भी सर्विसाइटिस हो सकता है।
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परीक्षण

सर्विसाइटिस का परीक्षण कैसे होता है?

  • डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानेंगे। वो आपसे पूछ सकते हैं कि क्या आप कोई गर्भनिरोध दवाएं ले रही हैं? इसके अलावा सेक्स या प्रेग्नेंसी संबंधी जानकारी भी पूछ सकते हैं। सबसे पहले डॉक्टर आपका पेल्विक यानी श्रोणि परीक्षण करेंगे।
  • इस परीक्षण में स्पेक्यूलम नाम का एक उपकरण योनि की दीवारों को अलग करने के लिए योनि में डाला जाएगा। इस प्रकार लालिमा, जलन, या घावों का पता लगाने के लिए ग्रीवा का परीक्षण हो सकेगा।
  • डॉक्टर गर्भाशय ग्रीवा से पैप स्मीयर परीक्षण के लिए एक नमूना लेंगे। डॉक्टर गोनोरिया और क्लैमाइडिया के परीक्षण के लिए भी सैंपल लेंगे। वह अन्य संक्रमणों को देखने के लिए भी कुछ जांच कर सकते हैं।
  • पैप स्मीयर का उपयोग गर्भाशय ग्रीवा में कैंसर या कोई हानिकारक बदलावों को देखने के लिए किया जाता है। पैल्विक अंगों का परीक्षण डॉक्टर दोनों हाथों से करेंगे।
  • डॉक्टर अपने हाथ की दो उंगलियां योनि में डालेंगे, दूसरे हाथ की उंगलियों को पेट की दीवार पर दबाएंगे। यह प्रक्रिया डॉक्टर को गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा के आकार और स्थान का पता लगाने में सहायक होगा।
  • इसके अलावा दर्द, कोमलता या किसी अन्य अनियमितता की जांच करने में भी मदद मिलेगी। इस परीक्षण में अगर दर्द का अनुभव होता है तो डॉक्टर को बताया जाना चाहिए। दर्द तब महसूस किया जा सकता है जब गर्भाशय ग्रीवा में एक तरफ से दूसरी तरफ ले जाया जाता है।
  • यदि गर्भाशय ग्रीवा असामान्य दिखाई देती है तो बायोप्सी होती है या ऊतक का नमूना लिया जा सकता है।
  • कोल्पोस्कोपी से भी गर्भाशय ग्रीवा की जांच की जा सकती है। यह उपकरण गर्भाशय ग्रीवा का चित्र दिखाएगी जिससे डॉक्टर आसानी से घाव या सूजन को पहचान सकेंगे।

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इलाज

सर्विसाइटिस का इलाज क्या है?

  • सर्विसाइटिस के इलाज के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपको कुछ एंटिबायोटिक्स दे सकते हैं। ये दवाएं संक्रमण को साफ करने में मदद करती हैं। इसके बाद लक्षणों का इलाज किया जाता है।
  • अगर कोई बाहरी चीज गर्भाशय ग्रीवा में संक्रमण का कारण बन रही है तो डॉक्टर उस वस्तु को हटा देगा और एंटीबायोटिक दवाओं को लिख सकता है।
  • डॉक्टर आपके पार्टनर का भी इलाज करने के लिए कह सकते हैं जिससे आप फिर से संक्रमित न हों। आपको तब तक सेक्स नहीं करना चाहिए जब तक आपका और आपके साथी का इलाज खत्म न हो जाए।
  • यदि आप एचआईवी पॉजिटिव हैं तो उपचार बेहद जरूरी हो जाता है, क्योंकि गर्भाशय ग्रीवा में गर्भाशय से निकलने वाले वायरस की मात्रा बढ़ जाती है। इससे साथी के संक्रमित होने की संभावना भी रहती है। साथ ही सर्विसाइटिस होने से आपको भी आपके साथी द्वारा एचआईवी संक्रमण मिल सकता है।
  • यदि उपचार के बावजूद आपके लक्षण बने रहते हैं, तो आपको फिर से डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • अगर सर्विसाइटिस होने पर समस्या ज्यादा है तो डॉक्टर से इलाज ही बे​हतर रहेगा। इसके अलावा अगर किसी महिला में हल्के लक्षण हैं तो वो कुछ घरेलू उपचार भी अपना सकती हैं।
  • 2014 के एक अध्ययन में पाया गया कि चीनी (Chinese) जड़ी बूटियों सहित चीनी औषधि भी सर्विसा​इटिस के लिए लाभदायक हो सकती हैं।
  • दही का सेवन करना या प्रोबायोटिक की खुराक लेना भी एक अच्छा उपचार है। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स नाम के स्वास्थ्यवर्धक बैक्टीरिया होते हैं। प्रोबायोटिक्स दवा के रूप में भी उपलब्ध हैं और ऑनलाइन खरीदा जा सकता है।
  • 2014 के एक अध्ययन से पता चलता है कि प्रोबायोटिक्स बैक्टीरियल वेजाइनोसिस का इलाज करने में मदद कर सकता है, जो कि सर्विसाइटिस का एक कारण है।
  • लहसुन खाने या लहसुन से बनी चीजें भी ले सकते हैं। लहसुन में  जीवाणुरोधी गुण होते हैं। 2014 के एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि लहसुन की खुराक लेने से बैक्टीरियल वेजाइनोसिस ठीक हो जाता है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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