स्ट्रेस फ्रैक्चर मांसपेशियों के बहुत अधिक इस्तेमाल से होता है जैसे लगातार जंप करना, बहुत दूर तक दौड़ना आदि। इससे मसल्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। जब मांसपेशियों बहुत अधिक थकी होती है और उस पर दवाब डाला जाता है तो वह उसे सहने में असमर्थ होती है और अतिरिक्त दवाब को हड्डियों को ट्रांसफर कर देती है जिसकी वजह से हड्डियों में दरार आ जाती है, इसे ही स्ट्रेस फ्रैक्चर कहते हैं। स्ट्रेस फ्रैक्चर कई बार सामान्य गतिविधि के दौरान भी हो सकता है। ऑस्टियोपोरिसिस जैसी किसी कंडिशन के कारण आपकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं जिससे स्ट्रेस फ्रैक्चर हो सकता है।

आमतौर पर स्ट्रेस फ्रैक्चर लोगों द्वारा एक्टिविटी में बदलाव करने से होता है। जैसे कोई नई एक्सरसाइज शुरू करना और अचानक वर्कआउट की तीव्रता बढ़ा देना। इसके अलावा अगर ऑस्टियोपोरोसिस या अन्य बीमारी के कारण हड्डियां कमजोर हो गई हैं, तो रोजमर्रा की गतिविधियों को करने से स्टेस फ्रैक्चर हो सकता है।
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निचले पैर की जो हड्डियां शरीर का भार उठाती हैं, उसमें स्ट्रेस फ्रैक्चर होना आम है। ट्रैक और फील्ड एथलीट और मिल्ट्री रिक्रूटर्स जो लंबी दूरी तक भारी सामान उठाते हैं उन्हें स्ट्रेस फ्रैक्चर का खतरा अधिक होता है, लेकिन यह सामान्य लोगों में भी हो सकता है। यदि आप कोई नया एक्सरसाइज प्रोग्राम शुरू कर रहे हैं, जो बहुत अधिक एक्सरसाइज कर लेने पर आपको स्ट्रेस फ्रैक्चर हो सकता है।
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स्ट्रेस फ्रैक्चर आमतौर पर तब होता है जब आप बार-बार एक ही गतिविधि को दोहराते हैं (जैसे किसी स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग के दौरान)। गलत उपकरण के इस्तेमाल जैसे रनिंग के दौरान सही जूते न पहनना या खेल का सरफेस बदलने जैसे मिट्टी के मैदान से निकलकर अचानक हार्ड सरफेस पर खेलने से भी यह फ्रैक्चर हो सकता है। इसके अलावा स्ट्रेस फ्रैक्चर रोजाना की गतिविधियों के दौरान उन लोगों को भी हो सकता है जिनकी हड्डिया पोषण की कमी या किसी मेडिकल कंडिशन के कारण कमजोर हो गई हैं।
स्ट्रेस फ्रैक्चर के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:
कमजोर हड्डियां
किसी परेशानी के चलते हड्डियों की ताकत और घनत्व में कमी आने से स्ट्रेस फ्रैक्चर के होने की संभावना अधिक होती है। उदाहरण के तौर पर, सर्दियों के दिनों में शरीर में विटामिन डी की कमी होती है। ऐसे में स्ट्रेस फ्रैक्चर के अधिक मामले देखने को मिलते हैं।
गलत तकनीक
कोई भी चीज जो आपके पैरों को प्रभावित करती है वो स्ट्रेस फ्रैक्चर के जोखिम को बढ़ाती है। उदाहरण के लिए, यदि आपको छाला, गोखरू या टेंडोनाइटिस है, तो आपके चलने और दौड़ते समय आप पैर पर वजन कैसे डालते हैं, यह इसे प्रभावित कर सकता है। सामान्य से अधिक वजन और दबाव को संभालने के लिए हड्डी को एक क्षेत्र की आवश्यकता हो सकती है।
खेल का सरफेस बदलने से
खेल का सरफेस बदलने से भी स्ट्रेस फ्रैक्चर होने की संभावना अधिक होती है। जैसे कोई टेनिस प्लेयर एक ग्रास कोर्ट से हार्ड कोर्ट, या कोई दौड़ लगाने वाला ट्रेडमिल से आउटडोर ट्रैक पर जा रहा है, तो स्ट्रेस फ्रैक्चर होने का जोखिम होता है।
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यदि आपको स्ट्रेस फ्रैक्चर हुआ है तो आपको निम्न लक्षण नोटिस होंगे-
निचले पैर और फुट में स्ट्रेस फ्रैक्चर होना आम है, लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों जैसे बांह, रीढ़ और पसलियों में भी हो सकता है।
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स्ट्रेस फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ाने वाले कारणों में शामिल हैः
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स्ट्रेस फ्रैक्चर के निदान के समय डॉक्टर मरीज के स्ट्रेस फ्रैक्चर के जोखिम कारकों का मूल्यांकन करता है और यह बेहद महत्वपूर्ण होता है।
फ्रैक्चर का पता लगाने के लिए आमतौर पर एक्स-रे किया जाता है। कई बार दर्द शुरू होने के कई हफ्तों बाद तक स्ट्रे फ्रैक्चर के लक्षण नहीं दिखते हैं और कई बार रेग्युलर एक्स-रे में भी यह दिखाई नहीं देता है। ऐसे में कम्प्यूटेड टोपोग्राफी (CT) स्कैन या मैग्नेटिक रेसोनैन्स इमैजिंग (MRI) की जरूरत होती है।
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स्ट्रेस फ्रैक्चर से रिकवरी के लिए बेहद ज़रूरी हैः
इस फ्रैक्चर से ठीक होने के लिए आराम बहुत जरूरी है इसलिए आप खेल या किसी भी तरह की फिजिकल एक्टिविटी से कम से कम 6-8 हफ्ते तक पूरी तरह से दूर रहे, क्योंकि फ्रैक्चर को ठीक होने में इतना समय लगता है। यदि स्ट्रेस फ्रैक्चर के बाद भी आपने फ्रैक्चर के लिए जिम्मेदार गतिविधि बंद नहीं की तो स्थिति और बिगड़ सकती है, फ्रैक्चर गहरा हो सकता है और फिर इसका ठीक होना मुश्किल होगा। कई बार स्ट्रेस फ्रैक्चर के लिए कास्ट, स्प्लिंट या ब्रेस की आवश्यकता होती है। दुर्लभ मामलों में ही सर्जरी की जाती है।
यदि स्ट्रेस टेस्ट पर्याप्त पोषण न मिलने के कारण कमजोर हो चुकी हड्डियों के कारण हुआ है तो न्यूट्रिशनल और साइकोलॉजिकल काउंसलिंग की मदद से फ्रैक्चर ठीक हो जाता है।
कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर स्ट्रेस फ्रैक्चर से बचा जा सकता हैः
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उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में स्ट्रेस फ्रैक्चर से जुड़ी जानकारी देने का प्रयास किया गया है। यदि आप इससे जुड़ी अधिक जानकारी पाना चाहते हैं, तो बेहतर होगा इसके लिए आप डॉक्टर से संपर्क करें।
डिस्क्लेमर
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Current Version
15/06/2021
Kanchan Singh द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील
Updated by: Nikhil deore