Stress Fracture: स्ट्रेस फ्रैक्चर क्या है?

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Update Date अप्रैल 10, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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परिभाषा

स्ट्रेस फ्रैक्चर क्या है?

स्ट्रेस फ्रैक्चर मांसपेशियों के बहुत अधिक इस्तेमाल से होता है जैसे लगातार जंप करना, बहुत दूर तक दौड़ना आदि। इससे मसल्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। जब मांसपेशियों बहुत अधिक थकी होती है और उस पर दवाब डाला जाता है तो वह उसे सहने में असमर्थ होती है और अतिरिक्त दवाब को हड्डियों को ट्रांसफर कर देती है जिसकी वजह से हड्डियों में दरार आ जाती है, इसे ही स्ट्रेस फ्रैक्चर कहते हैं। स्ट्रेस फ्रैक्चर कई बार सामान्य गतिविधि के दौरान भी हो सकता है। ऑस्टियोपोरिसिस जैसी किसी कंडिशन के कारण आपकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं जिससे स्ट्रेस फ्रैक्चर हो सकता है।

निचले पैर की जो हड्डियां शरीर का भार उठाती हैं, उसमें स्ट्रेस फ्रैक्चर होना आम है। ट्रैक और फील्ड एथलीट और मिल्ट्री रिक्रूटर्स जो लंबी दूरी तक भारी सामान उठाते हैं उन्हें स्ट्रेस फ्रैक्चर का खतरा अधिक होता है, लेकिन यह सामान्य लोगों में भी हो सकता है। यदि आप कोई नया एक्सरसाइज प्रोग्राम शुरू कर रहे हैं, जो बहुत अधिक एक्सरसाइज कर लेने पर आपको स्ट्रेस फ्रैक्चर हो सकता है।

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कारण

स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण क्या है?

स्ट्रेस फ्रैक्चर आमतौर पर तब होता है जब आप बार-बार एक ही गतिविधि को दोहराते हैं (जैसे किसी स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग के दौरान)। गलत उपकरण के इस्तेमाल जैसे रनिंग के दौरान सही जूते न पहनने या खेल का सरफेस बदलने जैसे मिट्टी के मैदान से निकलकर अचानक हार्ड सरफेस पर खेलने से भी यह फ्रैक्चर हो सकता है। इसके अलावा स्ट्रेस फ्रैक्चर रोजाना की गतिविधियों के दौरान उन लोगों को भी हो सकता है जिनकी हड्डिया पोषण की कमी या किसी मेडिकल कंडिशन के कारण कमजोर हो गई हैं।

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लक्षण

स्ट्रेस फ्रैक्चर के लक्षण क्या है?

यदि आपको स्ट्रेस फ्रैक्चर हुआ है तो आपको निम्न लक्षण नोटिस होंगे-

निचले पैर और फुट में स्ट्रेस फ्रैक्चर होना आम है, लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों जैसे बांह, रीढ़ और पसलियों में भी हो सकता है।

स्ट्रेस फ्रैक्चर के जोखिम

स्ट्रेस फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ाने वाले कारणों में शामिल हैः

  • हाई इंपैक्ट स्पोर्ट्स जैसे ट्रैक और फील्ड, बास्केटबॉल, टेनिस, डांस या जिमनास्टिक करने वाले खिलाड़ियों को स्ट्रेस फ्रैक्चर होने का खतरा अधिक होता है।
  • यह उन लोगों को भी हो सकता है जो अचानक से सुस्त लाइफस्टाइल छोड़कर अति सक्रिया हो जाते हैं या जिनकी शारीरिक गतिविधि बहुत अधिक बढ़ जाती है। जैसे वर्कआउट का समय या फ्रिक्वेंसी बढ़ना।
  • जिन महिलाओं के पीरियड्स असामान्य हैं या नहीं आते हैं उऩ्हें भी स्ट्रेस फ्रैक्चर होने का खतरा अधिक रहता है।
  • कमजोर हड्डियां जैसे ऑस्टियोपोरोसिस आदि के कारण हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं जिससे स्ट्रेस फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ जाता है।
  • जिन लोगों को पहले भी स्ट्रेस फ्रैक्चर हो चुका उन्हें दोबारा यह फ्रैक्चर होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • बैलेंस डायट नहीं लेना, विटामिन डी और कैल्शियम की कमी के कारण स्ट्रेस फ्रैक्चर की संभावना बढ़ जाती है।

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निदान

स्ट्रेस फ्रैक्चर का निदान कैसे किया जाता है?

स्ट्रेस फ्रैक्चर के निदान के समय डॉक्टर मरीज के स्ट्रेस फ्रैक्चर के जोखिम कारकों का मूल्यांकन करता है और यह बेहद महत्वपूर्ण होता है।

फ्रैक्चर का पता लगाने के लिए आमतौर पर एक्स-रे किया जाता है। कई बार दर्द शुरू होने के कई हफ्तों बाद तक स्ट्रे फ्रैक्चर के लक्षण नहीं दिखते हैं और कई बार रेग्युलर एक्स-रे में भी यह दिखाई नहीं देता है। ऐसे में कम्प्यूटेड टोपोग्राफी (CT) स्कैन या मैग्नेटिक रेसोनैन्स इमैजिंग (MRI) की जरूरत होती है।

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उपचार

स्ट्रेस फ्रैक्चर का उपचार क्या है?

स्ट्रेस फ्रैक्चर से रिकवरी के लिए बेहद ज़रूरी हैः

  • चोटिल हिस्से को आराम देना
  • खेल से ब्रेक लेना

इस फ्रैक्चर से ठीक होने के लिए आराम बहुत जरूरी है इसलिए आप खेल या किसी भी तरह की फिजिकल एक्टिविटी से कम से कम 6-8 हफ्ते तक पूरी तरह से दूर रहे, क्योंकि फ्रैक्चर को ठीक होने में इतना समय लगता है। यदि स्ट्रेस फ्रैक्चर के बाद भी आपने फ्रैक्चर के लिए जिम्मेदार गतिविधि बंद नहीं की तो स्थिति और बिगड़ सकती है, फ्रैक्चर गहरा हो सकता है और फिर इसका ठीक होना मुश्किल होगा। कई बार स्ट्रेस फ्रैक्चर के लिए कास्ट, स्प्लिंट या ब्रेस की आवश्यकता होती है। दुर्लभ मामलों में ही सर्जरी की जाती है।

स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण होने वाले दर्द को कम करने के लिएः

  • कोल्ड कंप्रेसर या तौलिया में बर्फ लपेटकर प्रभावित हिस्से पर 15 मिनट तक रखें। ऐसे दिन में 3 बार करें।
  • डॉक्टर ने जो पेनकिलर दिया है उसे सही समय पर लें।

यदि स्ट्रेस टेस्ट पर्याप्त पोषण न मिलने के कारण कमजोर हो चुकी हड्डियों के कारण हुआ है तो न्यूट्रिशनल और साइकोलॉजिकल काउंसलिंग की मदद से फ्रैक्चर ठीक हो जाता है।

स्ट्रेस फ्रैक्चर से बचाव

कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर स्ट्रेस फ्रैक्चर से बचा जा सकता हैः

  • कोई भी बदलाव धीमी गति से करें। जैसे आपने यदि कोई एक्सरसाइज प्रोग्राम शुरू किया है तो पहले ही दिन जोश में आकर सारी एक्सरसाइज न कर लें। बल्कि पहले दिन सामान्य एक्सरसाइज करें और धीरे-धीरे एक्सरसाइज की स्पीड बठाएं इससे मसल्स फ्लेक्सिबल हो जाती हैं और अधिक दबाव नहीं पड़ता है।
  • खेलते और दौड़ते समय अपने जूतों का खास ख्याल रखें। फिटिंग सही होने के साथ ही इनका कंफर्टेबल होना भी जरूरी है। यदि आपके फ्लैट फीट हैं तो आर्क सपोर्ट के लिए डॉक्टर से सलाह लें।
  • शरीर के किसी एक हिस्से को बार-बार तनावग्रस्त होने से बचाने के लिए लो इंपैक्ट एक्टिविटी
    एक्सरसाइज रूटीन से शुरुआत करें।
  • आहार का ध्यान रखें और भोजन में सभी पोषक तत्वों को शामिल करें ताकि हड्डियां मज़बूत रहें। आपकी डायट में विटामिन डी, कैल्शियम और अऩ्य पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए।
  • याद रखिए कि स्ट्रेस फ्रैक्चर के लक्षणों की पहचानकर जितनी जल्दी इसका इलाज करवाया जाए यह उतनी जल्दी ठीक हो जाता है और आप जल्दी खेल के मैदान में वापसी कर सकते हैं।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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