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कुछ ऐसे किया जाता है रेक्टल बायोप्सी से कई समस्याओं का निदान

कुछ ऐसे किया जाता है रेक्टल बायोप्सी से कई समस्याओं का निदान

किसी भी रोग के निदान के लिए डॉक्टर मरीज को कुछ टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। यह टेस्ट बीमारी के निदान में मदद करते है। जिससे डॉक्टर को रोग और उसके उपचार के बारे में जानने में मदद मिलती है। इन्हीं में से एक है बायोप्सी। बायोप्सी शरीर के किसी हिस्से से टिश्यू का नमूना निकालने को कहा जाता है। ताकि, इस निकाले गए हिस्से की अच्छा से जांच हो सके और समस्या का पता चल सके। डॉक्टर बायोप्सी की सलाह तब देते हैं, जब शरीर के किसी भाग के टिश्यू सामान्य न हों। इस भाग को घाव (Lesion), ट्यूमर (Tumor) या मास (Mass) कहा जा सकता है। यह मेडिकल प्रक्रिया किसी एक्सपर्ट द्वारा की जाती है जैसे सर्जन (Surgeon), इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट (Interventional Radiologist) या एक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट (Interventional Cardiologist)। आज हम एक बायोप्सी जिसे रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) कहा जाता है, उसके बारे में आपको बताने वाले हैं।

यह रेक्टम यानी मलाशय से जुडी बायोप्सी है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (National Library of Medicine) के अनुसार रेक्टल सक्शन बायोप्सी हर्षप्रंग रोग (Hirschsprung’s Disease) जैसे बोवेल मोटिलिटी के विकारों के लिए एक बेहतरीन डायग्नोस्टिक प्रोसीजर है। हालांकि, रेक्टल टिश्यू रिमूव करने के लिए कुछ अन्य तरीके भी हैं। जानिए, क्या है रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy), कैसे की जाती है और इससे पहले किन बातों का रखना चाहिए ध्यान।

रेक्टल बायोप्सी क्या है? (What is Rectal Biopsy)

रेक्टम यानी मलाशय लोअर गैस्ट्रोएंट्राइटिस ट्रैक्ट (Gastrointestinal Tract) का एक हिस्सा है। जिसका उद्देश्य होता है शरीर के सॉलिड वेस्ट को तब तक स्टोर कर के रखना, जब तक यह शरीर से बाहर नहीं निकल जाता। रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) वो प्रक्रिया है, जिससे रेक्टम से टिश्यू का हिस्सा निकाला जाता है ताकि उसकी जांच की जा सके। यह तरीका रेक्टम यानी मलाशय में किसी समस्या के बारे में पता लगाने के लिए जरूरी है। रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) उन समस्याओं का निदान करने में मदद करती है जिसकी पहचान कुछ स्क्रीनिंग टेस्ट्स के मदद से हो जाती है जैसे एनोस्कोपी (Anoscopy) या सिग्मोइडोस्कोपी (Sigmoidoscopy)।

विभिन्न बोवेल इन्फ्लेमेटरी डिजीज जैसे अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative colitis) और क्रोहन रोग (Crohn’s Disease) के निदान के लिए रेक्टल बायोप्सी एक अच्छा तरीका है। इस बायोप्सी के कई लाभ भी हैं, जिसके कारण इसे आसान और प्रभावी माना जाता है। इसके अन्य लाभ इस प्रकार हैं:

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  • रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) से डॉक्टर स्टूल में खून,बलगम या पस आने के कारण जान सकते हैं।
  • ट्यूमर (Tumors), सिस्ट्स (Cystes) और मास (Mass) के कारणों को जाना जा सकता है।
  • एमिलॉयडोसिस (Amyloidosis) का निदान किया जा सकता है।
  • मलाशय के कैंसर (Rectum Cancer) का एक निश्चित निदान हो जाता है।
  • अगर अन्य कोई समस्या हो, तो उसके बारे में भी पता चल सकता है

rectal biopsy

रेक्टल बायोप्सी से पहले कैसे करें तैयारी? (Rectal Biopsy)

रेक्टल बायोप्सी से पहले मरीज का शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से तैयार होना बेहद जरूरी है। इसमें डॉक्टर भी आपकी मदद कर सकते हैं। रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) से पहले डॉक्टर रोगी को लैक्सेटिव (Laxative) , एनिमा (Enema) या अन्य कोई तरीका बता सकते हैं ताकि रोगी का पेट पूरी तरह से खाली हो। रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) से पहले पेट का खाली होना जरूरी है। क्योंकि, इससे ही डॉक्टर आपके रेक्टम को अच्छे से देख और जांच पाएंगे। अगर आप कोई दवा या उपचार ले रहे हैं, तो इस बायोप्सी से पहले अपने डॉक्टर को इस बारे में अवश्य बताएं। इसके साथ ही अगर आप गर्भवती हैं या इसके बारे में सोच रही हैं तो यह टेस्ट कराने से पहले अपने डॉक्टर की राय अवश्य लें।

अगर आप कोई ऐसी अन्य दवा ले रहे हैं, जो इस प्रक्रिया को प्रभावित करती है तो डॉक्टर आपको कुछ खास इंस्ट्रक्शंस दे सकते हैं। इन दवाइयों में एंटीकोगुलेंट (Anticoagulant), नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (Nonsteroidal Anti-Inflammatory Drugs), ऐसी दवाइयां जो ब्लड क्लॉटिंग को प्रभावित करती हैं (Any Medications that Affect Blood Clotting) आदि शामिल हैं।

रेक्टल बायोप्सी कैसे की जाती है? (The Rectal Biopsy Procedure)

एक रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) आमतौर पर एनोस्कोपी या सिग्मोइडोस्कोपी का हिस्सा होती है। ये मलाशय के अंदर देखने की प्रक्रियाएं हैं। जिनके माध्यम से डॉक्टर को मलाशय के अंदर देखने में मदद मिलती है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से:

एनोस्कोपी (Anoscopy)

एनोस्कोपी को एक इंस्ट्रूमेंट जिसे एनोस्कोप कहा जाता है की मदद से किया जाता है। इसमें लाइट लगी होती। जिससे डॉक्टर एनल कैनाल (Anal Canal) और लोअर रेक्टम (Lower Rectum) के दो इंच नीचे तक देख सकते हैं। इसमें प्रोक्टोस्कोप (Proctoscope) का प्रयोग भी किया जा सकता है, जो एनोस्कोप से थोड़ा बड़ा होता है।

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सिग्मोइडोस्कोपी (Sigmoidoscopy)

सिग्मायोडोस्कोपी में एक बहुत लंबे इंस्ट्रूमेंट का प्रयोग किया जाता है। इसकी मदद से डॉक्टर बड़ी आंत में, मलाशय के पिछले हिस्से और कोलन में देख सकते हैं। यह एक फ्लेक्सिबल ट्यूब (Flexible tube) होती है। इसमें लगा कैमरा मॉनिटर से वीडियो इमेज ट्रांसमिट करता है। इन तस्वीरों से डॉक्टर को समस्या के बारे में जानने में आसानी होती है।

कैसे की जाती है यह बायोप्सी? (The Procedure of This Biopsy)

एनोस्कोपी (Anoscopy) और सिग्मोइडोस्कोपी (sigmoidoscopy) दोनों एक जैसी प्रक्रियाएं हैं। सिग्मोइडोस्कोपी (Sigmoidoscopy एक कॉम्प्लिकेटेड प्रोसीजर है, जिसे करने में बीस मिनट तक लग सकते हैं। रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) के लिए एनेस्थीसिया (Anesthesia), सेडेटिवस (Sedatives) या दर्द दूर करने वाली दवाईयां नहीं दी जाती है। इस प्रक्रिया को करने के लिए मरीज को एक्सामिनिंग टेबल के बाएं तरफ लेटना होता है और घुटने छाती की तरफ मोड़ने होते हैं। इसके बाद डॉक्टर डिजिटल रेक्टम की जांच करते हैं।

डॉक्टर ग्लव्स वाली उंगली में लुब्रीकेंट लगा कर उसे धीरे से मरीज के एनस में डालते हैं। इस तरीके को उन अवरोधों की जांच के लिए किया जाता है ताकि इस प्रक्रिया में कोई परेशानी न हो। अब डॉक्टर एनस में लुब्रिकेटेड स्कोप डालते हैं। इस तरीके से डॉक्टर रेक्टम में मौजूद एब्नार्मल टिश्यू का सैंपल ले लेते हैं। इसे निकालने के लिए ब्रश (Brush), सक्शन (Suction),फोरसेप्स (Forceps), स्वैब (Swab) आदि का प्रयोग किया जा सकता है। टिश्यू निकालते हुए भी आमतौर पर दर्द नहीं होती है। इस प्रक्रिया के दौरान मरीज थोड़ी परेशानी और दबाव महसूस कर सकता है। अगर इस प्रक्रिया के दौरान टिश्यू को निकालते हुए अगर ब्लीडिंग होती है तो उसे रोकने के लिए इलेक्ट्रोकॉट्रीजेशन (Electrocauterization) या हीट (Heat) का प्रयोग किया जाता सकता है।

जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो स्कोप को धीरे-धीरे बाहर निकाल लिया जाता है। इस तरह से यह प्रक्रिया पूरी होती है। माउंट सीनायी हेल्थ सिस्टम (Mount Sinai Health System) के अनुसार रेक्टम बायोप्सी के दौरान मरीज मल त्याग की इच्छा महसूस कर सकता है या इंस्ट्रूमेंट के रेक्टल एरिया में जाने के कारण वो ऐंठन या हल्की बेचैनी का भी अनुभव कर सकता है। हालांकि सब मरीजों के साथ ऐसा नहीं होता है। अगर आपको कोई भी समस्या होती है तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें।

रेक्टल बायोप्सी

क्या कहते हैं रेक्टल बायोप्सी के रिजल्ट्स? (Rectal Biopsy Results)

रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) के द्वारा निकाले गए टिश्यू को जांच के लिए लैब भेजा जाता है। पैथोलॉजिस्ट इस टिश्यू की जांच करते हैं और इसकी रिपोर्ट बनाते हैं। जानिए इस टेस्ट के रिपोर्ट के रिजल्ट का क्या अर्थ हो सकता है:

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रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) के रिजल्ट के अनुसार ही आगे का उपचार संभव है। अगर रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) का परिणाम सामान्य होता है तो इसका अर्थ है कि मरीज में एनस और रेक्टम सामान्य साइज, रंग और शेप के हैं और इनमें निम्नलिखित चीजों का कोई सुबूत नहीं मिला है:

असामान्य परिणाम का अर्थ क्या है?

अगर रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) का परिणाम असामान्य आता है, तो इससे यह सब समस्याएं होने की संभावना है:

  • एब्सेस (Abscess)
  • कोलोरेक्टल पोलिप्स (Colorectal polyps)
  • इंफेक्शन (Infection)
  • इन्फ्लेमेशन (Inflammation)
  • ट्यूमर (Tumors)
  • एमिलॉयडोसिस (Amyloidosis)
  • क्रोहन डिजीज (Crohn Disease)
  • बच्चों में हर्षप्रंग डिजीज (Hirschsprung Disease in Infants)
  • अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis)

रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) में टिश्यू सैंपल की जांच की रिपोर्ट आमतौर पर चार से पांच दिनों में आ जाती है इसके बाद डॉक्टर रोगी को टेस्ट का परिणाम बताएंगे और मेडिकल केयर का प्लान बनाएंगे। कुछ समस्याओं का जल्दी पता लगने से उनका उपचार आसान हो जाता है और रिकवरी भी जल्दी होती है।

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रेक्टल बायोप्सी से जुड़े कौन से हैं जोखिम? (Risks of a Rectal Biopsy)

रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) रेक्टम में एब्नार्मल टिश्यूस के निदान के लिए एक बेहतरीन तरीका है। ऐसे मामलों में जहां कैंसर एक चिंता का विषय है, यह टेस्ट सही निदान के लिए सहायक है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान कुछ खास ख्याल रखना बेहद जरूरी हैं क्योंकि इसके कारण रेक्टम और आसपास के भागों में इंटरनल डैमेज होने का खतरा रहता है। हालांकि यह रिस्क बहुत ही दुर्लभ हैं। लेकिन, इससे जुड़े कुछ जोखिम इस प्रकार हैं:

  • ब्लीडिंग (Bleeding)
  • आंतों को नुकसान होना (Intestinal Damage)
  • मूत्र त्याग में समस्या (Difficulty with Urination)

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रेक्टल बायोप्सी के बाद किन बातों का ध्यान रखें

रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) के बाद कुछ लोग ब्लीडिंग की समस्या महसूस कर सकते हैं। हालांकि उस जगह पर दबाव डालने पर यह रुक जाती है। इस जगह पर इंफेक्शन (Infection) होने की संभावना हो सकती है हालांकि इसकी संभावना कम है। अगर आपको इसके बाद दर्द हो जिसका खतरा रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) के बाद न के बराबर होता है तो आपको दवाई दी जा सकती है। अगर आप इस प्रोसीजर से गुजरे हैं तो आपको कुछ चीजों का खास ध्यान रखना चाहिए, जैसे:

  • रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) के बाद कुछ देर आराम करें। अगर इसके दौरान आपका कोई दोस्त या रिश्तेदार साथ हो तो बेहतर है। क्योंकि इसके बाद कम चलने और ड्राइव न करने की सलाह दी जाती है।
  • नीडल बायोप्सी (Needle Biopsy) के बाद घाव को बंद कर दिया जाता है और इसे अगले कुछ दिनों तक साफ और सूखा रखने की सलाह दी जाती है
  • ओपन बायोप्सी (Open Biopsy) में घाव को टांकों से बंद कर दिया जाता है। ऐसे में इन टांकों का कैसे ख्याल रखना है, यह पूरी जानकारी डॉक्टर से प्राप्त करना जरूरी है।
  • इस प्रक्रिया के बाद डॉक्टर द्वारा दी गयी सलाहों का पूरी तरह से पालन करना जरूरी है। ताकि सही उपचार हो सके और आप जल्दी ठीक हो सकें।

रेक्टल बायोप्सी के बाद रिकवरी (Recovery from a Rectal Biopsy)

रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) से रिकवरी इस बात पर निर्भर करती है कि रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) के दौरान सैंपल लेने के लिए कौन से तरीके को अपनाया गया है। फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी के बाद मरीज कोलन में गई हवा के कारण ब्लोटिंग महसूस कर सकते हैं। जिससे इस टेस्ट के कई समय बाद तक मरीज को पेट में या गैस पास होने में समस्या हो सकती है। यही नहीं, रेक्टल बायोप्सी के बाद रोगी पहली बार जब मल त्याग करता है तो उसमें खून भी नोटिस कर सकता है। हालांकि, पहली बार ऐसा होना सामान्य है। लेकिन, कुछ स्थितियों में आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए जैसे:

रेक्टल बायोप्सी

  • अधिक पेट में दर्द (Extreme Abdominal Pain)
  • बुखार (Fever)
  • मल त्याग होने के बाद भी मल में खून आना और ब्लेडिंग का अधिक या क्लॉट्स वाला होना (More than one Bloody Bowel Movement, especially if Bleeding is Heavy or Clotted)
  • बेहोश होने जैसा अनुभव (Feeling of Faintness)
  • अन्य कोई समस्या (Any Other Problem)

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रेक्टल बायोप्सी (Rectal Biopsy) कई परेशानियों के निदान के लिए आसान और पूरी तरह से सुरक्षित तरीका है। लेकिन, अगर आपको इस टेस्ट के बाद कुछ भी समस्या या गंभीर लक्षण नजर आते हैं तो डॉक्टर की सलाह जरूरी है। इसके साथ ही हेल्दी रहने और जल्दी रिकवर करने के लिए सही और संतुलित आहार का सेवन करें (Healthy Food), व्यायाम करें (Exercise), तनाव से बचे (Avoid Stress) और अपना ख्याल रखें (Take Care of Yourself)। समय- समय पर शारीरिक जांच कराना भी जरूरी है ताकि समस्याओं का निदान जल्दी और सही समय पर हो सके व आप किसी भी बड़े रोग से बच सकें। ध्यान रखें कि किसी भी रोग या परेशानी को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़े खतरा का कारण बन सकता है। इसलिए, सकारात्मक रहें और समय-समय पर अपनी जांच कराते रहें।

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सूत्र

Rectal biopsy. https://www.mountsinai.org/health-library/tests/rectal-biopsy#:~:text=A%20rectal%20biopsy%20is%20a,growth%20found%20in%20the%20colon. Accessed on 22/4/21

Rectal biopsy: what is the optimal procedure?. https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/12598984/ . Accessed on 22/4/21

Rectal Biopsy as an Aid in the Diagnosis of Hirschsprung’s Disease. https://pediatrics.aappublications.org/content/18/2/176 . Accessed on 22/4/21

Rectum Biopsies. https://www.rileychildrens.org/health-info/rectum-biopsies . Accessed on 22/4/21

What is the role of rectal biopsy . https://www.medscape.com/answers/178493-62813/what-is-the-role-of-rectal-biopsy-in-the-diagnosis-of-hirschsprung-disease . Accessed on 22/4/21

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 22/04/2021 को
और Hello Swasthya Medical Panel द्वारा फैक्ट चेक्ड