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स्मोकिंग और लंग कैंसर का है बेहद स्ट्रॉन्ग कनेक्शन, स्मोकिंग करने से कई गुना बढ़ जाता है कैंसर होने का खतरा

    स्मोकिंग और लंग कैंसर का है बेहद स्ट्रॉन्ग कनेक्शन, स्मोकिंग करने से कई गुना बढ़ जाता है कैंसर होने का खतरा

    पहले लंग कैंसर के मामले दुर्लभ थे, लेकिन अब ये बढ़ने लगे हैं, जिसका कारण स्मोकिंग का बढ़ता प्रचलन है। हालांकि सभी लोग जो धूम्रपान करते हैं उनको लंग कैंसर नहीं होता है, लेकिन स्मोकिंग और लंग कैंसर (Smoking and lung cancer) का कनेक्शन है। स्मोकिंग करने से लंग कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार जो लोग स्मोक करते हैं उनको लंग कैंसर होने का खतरा 15-30 गुना ज्यादा होता है। जितना ज्यादा और जितने लंबे समय तक व्यक्ति स्मोकिंग करता है उसका खतरा उतना ही बढ़ता जाता है। इस आर्टिकल में स्मोकिंग और लंग कैंसर के बीच के कनेक्शन के बारे में बताया जा रहा है।

    स्मोकिंग और लंग कैंसर (Smoking and lung cancer) से संबंधित आकंड़े

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार लंग कैंसर मौत के सबसे आम कारणों में से एक है। एनसीबीआई (NCBI) में छपी स्टडी के अनुसार तंबाकू के धुएं से व्यक्ति 7000 टाइप के कैमिकल्स के साथ एक्सपोज होता है जिसमें 70 कैंसर का कारण बनने वाले कैमिकल्स होते हैं। एनसीबीआई के ही अनुसार 90 प्रतिशत मामलों में लंग कैंसर और स्मोकिंग का कनेक्शन पाया जाता है।

    जो लोग स्मोकिंग छोड़ देते हैं उनमें स्मोकिंग छोड़ने के 10 साल के बाद कैंसर के डेवलप होने का रिस्क स्मोकिंग करने वालों की तुलना 30 से 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है। वहीं लेंसेट की एक स्टडी के अनुसार लगभग 22 प्रतिशत कैंसर से होने वाली मौतों के लिए तंबाकू का उपयोग जिम्मेदार है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि स्मोकिंग और लंग कैंसर एक दूसरे से संबंधित हैं।

    और पढ़ें: लंग कैंसर के लिए इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy for lung cancer) कितनी प्रभावी है?

    स्मोकिंग और लंग कैंसर (Smoking and lung cancer)

    जैसे ही आप तंबाकू के धुएं को अंदर लेते हैं हजारों प्रकार के कैमिकल्स फेफड़ों में जाते हैं। इनमें से कई कैमिकल्स लंग सेल्स के डीएनए (DNA) को डैमेज करने की संभावना रखते हैं। हमारी शरीर इस क्षति को भरने का काम करता है, लेकिन समय के साथ स्मोकिंग बॉडी के हील करने की तुलना में अधिक नुकसान पहुंचा सकती है। डीएनए कोशिका का “इंस्ट्रक्शन मेन्युल (Instruction Manual)” है जो सेल की सामान्य वृद्धि और कार्य को नियंत्रित करता है। जब डीएनए क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो एक कोशिका नियंत्रण से बाहर हो सकती है और कैंसर ट्यूमर बना सकती है।

    इसके साथ ही सिगरेट के धुएं में मौजूद कैमिकल्स शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकते हैं, जिससे कैंसर कोशिकाओं को मारना कठिन हो जाता है। जब ऐसा होता है तो कैंसर कोशिकाएं बिना रुके बढ़ती रहती हैं।

    इतना ही नहीं तंबाकू के धुएं को इनहेल करना लंग्स में मौजूद छोटे एयर सेक्स जिन्हें एलवियोली (Alveoli) कहा जाता है को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ये सूक्ष्म वायु थैली आपके श्वसन तंत्र के गैस एक्सचेंज का केंद्र हैं। वे आपके रक्त में ऑक्सीजन ले जाते हैं, और जब आप सांस छोड़ते हैं तो कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकाल देते हैं। समय के साथ, आपके फेफड़ों में एलवियोली को होने वाले नुकसान से क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (Chronic obstructive pulmonary disease) हो सकती है।

    सेकेंड हेंड स्मोकिंग और लंग कैंसर (Second hand smoking and lung cancer) का भी है कनेक्शन

    स्मोकिंग और लंग कैंसर

    सीडीसी के अनुसार डॉक्टरों ने कई वर्षों से जाना है कि धूम्रपान सबसे अधिक फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता है। यह आज भी सच है, जब 10 में से 9 फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतें सिगरेट पीने या सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आने के कारण होती हैं। वास्तव में, धूम्रपान करने वालों में 1964 की तुलना में आज फेफड़ों के कैंसर का अधिक खतरा है, भले ही वे कम सिगरेट पीते हैं। इसका एक कारण पहले की तुलना में अब सिगरेट कैसे बनती है और उनमें कौन से रसायन होते हैं हो सकता है।

    उपचार बेहतर हो रहे हैं, लेकिन फेफड़ों का कैंसर अभी भी किसी भी अन्य प्रकार के कैंसर की तुलना में अधिक पुरुषों और महिलाओं को मारता है। स्मोकिंग और लंग कैंसर (Smoking and lung cancer) का कनेक्शन इतना गहरा है कि स्मोकिंग ना करने वालों को भी यह प्रभावित कर सकता है। सेकेंड हैंड स्मोकिंग भी लंग कैंसर का कारण बन सकती है। सेकेंड हैंड धुआं सिगरेट के जलने से निकलने वाला धुआं और धूम्रपान करने वाले व्यक्ति द्वारा सांस से निकलने वाले धुएं का संयोजन है। सेकेंड स्मोकिंग भी हर साल लोगों के लिए कैंसर का कारण बनता है।

    और पढ़ें: ALK positive lung cancer: एएलके पॉसिटिव लंग कैंसर क्या है? जानिए इसके लक्षण और इलाज!

    स्मोकिंग करने वाले लोगों में किस प्रकार का लंग कैंसर होना आम है? (What type of lung cancer is common in people who smoke?)

    लंग कैंसर तो प्राइमरी केटेगरी में डिवाइड किया जाता है। पहला स्मॉल सेल लंग कैंसर (Small cell lung cancer-(SCLC)) दूसरा नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर (Non-small cell lung cancer)। लंग कैंसर के 80-85 प्रतिशत मामले नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर के होते हैं, लेकिन स्मॉल सेल लंग कैंसर अधिक अग्रेसिव होता है। स्मोकिंग और लंग कैंसर के मामलों में स्मोकिंग करने वाले 95 प्रतिशत लोग एससीएलसी डेवलप करते हैं। हालांकि स्मोकिंग से दोनों कैंसर के होने का रिस्क बढ़ जाता है।

    जहां कैंसर कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं, उसके आधार पर एनएससीएलसी (NSCLC) को कई उपश्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।

    • एडेनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma) फेफड़ों की म्यूकस सेल्स से शुरू होता है। यह धूम्रपान न करने वालों लोगों में फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम प्रकार है, लेकिन धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वालों में यह अभी भी अधिक आम है।
    • स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (Squamous cell carcinoma) यह वायुमार्ग के अंदर फ्लैट कोशिकाओं में शुरू होता है। ये एडेनोकार्सिनोमा कैंसर ही तरह आम नहीं हैं, लेकिन ये धूम्रपान से संबंधित है।

    ई-सिगरेट (E-cigarette) स्मोकिंग और लंग कैंसर

    ई सिगरेट एक बैटरी से चलने वाली डिवाइस है जिसे स्मोकिंग का एहसास कराने के लिए डिजाइन किया गया है। यह धुंध को उत्पन्न करके निकोटिन डिलिवर करती है। ये अभी भी बाजार में अपेक्षाकृत नए हैं, और ई-सिगरेट के संभावित दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों पर अभी तक बहुत अधिक शोध नहीं हुआ है। यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि ई-सिगरेट स्मोकिंग और लंग कैंसर (Smoking and lung cancer) आपस में कितने संबंधित हैं। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार ई सिगरेट कुछ कैमिकल्स को डिलिवर करती है जो कैंसर से संबंधित हैं। हालांकि इनकी मात्रा ट्रेडिशनल सिगरेट की तुलना में कम है।

    जब ई-सिगरेट में मौजूद लिक्विड अधिक गरम हो जाता है, तो यह कैंसर पैदा करने वाले रासायनिक फॉर्मलाडेहाइड formaldehyde का उत्पादन कर सकता है। शोधकर्ता अभी भी ई-सिगरेट के उपयोग के अन्य संभावित स्वास्थ्य परिणामों की जांच कर रहे हैं, लेकिन कई विशेषज्ञ गैर-धूम्रपान करने वालों, विशेष रूप से किशोरों को ई-सिगरेट का उपयोग करने से हतोत्साहित करते हैं।

    फ्लेवरिंग में इस्तेमाल किया जाने वाला डायसेटाइल (Diacetyl) नामक एक रसायन ब्रोंकियोलाइटिस ओब्लिटरन्स bronchiolitis obliterans नामक एक गंभीर फेफड़ों की स्थिति के विकास के आपके जोखिम को बढ़ा सकता है। कुछ ई-सिगरेट्स में सीसा या टिन जैसी भारी धातुएं भी हो सकती हैं। अधिकांश ई-सिगरेट में निकोटिन होता है। निकोटिन किशोरों में मस्तिष्क के विकास में बाधा डाल सकता है, और अत्यधिक नशे की लत लगा सकता है।

    लंग कैंसर के अन्य संभावित कारण क्या हो सकते हैं? (Other possible causes of lung cancer)

    स्मोकिंग और लंग कैंसर

    एनसीबीआई में छपी स्टडी के अनुसार 10 से 15 प्रतिशत लंग कैंसर के मरीजों की स्मोकिंग हिस्ट्री नहीं होती है। स्मोकिंग और लंग कैंसर (Smoking and lung cancer) के कनेक्शन के अलावा कुछ अन्य फैक्टर्स भी हैं जो लंग कैंसर के रिस्क को बढ़ा सकते हैं:

    रेडॉन के संपर्क में आना (Exposure to radon)

    रेडॉन एक प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली गैस है जो जमीन से और इमारतों की नींव में छोटी दरारों के माध्यम आती है। आप अपने घर में स्तरों को मापने के लिए एक प्रोफेशनल की मदद ले सकते हैं या रेडॉन परीक्षण किट खरीद सकते हैं।

    और पढ़ें: Lung cancer treatment: लंग कैंसर ट्रीटमेंट कैसे किया जाता है, जानिए इसके बारे में विस्तार से!

    आनुवंशिकी (Genetics)

    यदि परिवार के किसी करीबी सदस्य को फेफड़े का कैंसर था (भले ही वे धूम्रपान न करते हों), तो आपको इस बीमारी का खतरा अधिक हो सकता है। स्मोकिंग और लंग कैंसर का कनेक्शन और फैमिली हिस्ट्री कैंसर डेवलप होने की संभावना को बढ़ा देते हैं।

    अभ्रक (Asbestos)

    अमेरिकन नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, एस्बेस्टस (Asbestos) के संपर्क में आने से आपके फेफड़ों के कैंसर के विकास का खतरा बढ़ सकता है, जिसमें मेसोथेलियोमा (Mesothelioma) नामक एक दुर्लभ रूप भी शामिल है।

    अन्य रसायन (Other chemicals)

    सीडीसी के अनुसार, कुछ रसायनों जैसे आर्सेनिक, कुछ प्रकार के सिलिका और क्रोमियम के संपर्क में आने से भी आपके फेफड़ों के कैंसर के विकास का खतरा बढ़ सकता है। धूम्रपान करने वाले लोगों के लिए जोखिम और भी अधिक हो सकता है।

    आहार संबंधी कारक (Dietary factors)

    शोधकर्ता अभी भी फेफड़ों के कैंसर पर आहार के प्रभाव की जांच कर रहे हैं। एनसीबीआई के एक शोध से पता चलता है कि बीटा-कैरोटीन सप्लिमेंट लेने वाले धूम्रपान करने वालों में फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

    और पढ़ें: इजीएफआर टार्गेटेड थेरिपी : नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर में दी जा सकती है यह ड्रग थेरिपी!

    वायु प्रदुषण (Air pollution)

    अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, प्रदूषित हवा में सांस लेने से आपके फेफड़ों के कैंसर का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है। इसलिए इससे बनचे का प्रयास करें।

    उम्मीद करते हैं कि आपको स्मोकिंग और लंग कैंसर (Smoking and lung cancer) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में स्मोकिंग और लंग कैंसर के बारे में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    लेखक की तस्वीर badge
    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 14/06/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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