Lip cancer: लिप कैंसर का कैसे किया जाता है डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट?

    Lip cancer:  लिप कैंसर का कैसे किया जाता है डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट?

    कैंसर की समस्या शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। कैंसर की बीमारी में सेल्स यानी की कोशिकाएं तेजी से ग्रोथ करने लगती हैं, जिसके कारण शरीर में कोशिकाओं का जाल बन जाता है, जो गांठ या ट्यूमर का निर्माण करता है। लिप कैंसर (Lip cancer) भी एब्नॉर्मल सेल्स की ग्रोथ के कारण होता है। इसके कारण होंठों पर ट्यूमर की तरह आकृति दिखाई देने लगती है। यह पतली, फ्लैट सेल्स में विकसित होती है, जिसे स्क्वैमस सेल्स (Squamous cells) कहा जाता है। लिप कैंसर का डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट (Diagnosis and Treatment of lip cancer) अहम होता है। लिप कैंसर (Lip cancer) या होंठ का कैंसर ऊपरी या निचले होंठ पर डेवलप हो सकता है, लेकिन यह निचले होंठ पर आम होता है।

    लिप कैंसर (Lip cancer) की समस्या किसी भी व्यक्ति को हो सकती है लेकिन 50 वर्ष से अधिक की उम्र के लोगों में यह समस्या आम होती है। जो लोग तंबाकू का सेवन अधिक करते हैं या फिर अधिक मात्रा में एल्कोहॉल पीते हैं या फिर लंबे समय तक धूप में रहते हैं, उनमें लिप कैंसर की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। जो लोग ऑर्गन ट्रांसप्लांट के कारण प्रतिरक्षित (Immunocompromised) हैं, उनमें भी लिप कैंसर का खतरा अधिक होती है।

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    लिप कैंसर का डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट (Diagnosis and Treatment of lip cancer)

    लिप कैंसर

    ओरल कैंसर में लिप कैंसर को आम प्रकार का कैंसर माना जाता है। लिप कैंसर की समस्या होने पर मुंह में घाव जैसा दिख सकता है। जिन लोगों की स्किन हल्की होती है, उनकी स्किन में लालिमा दिख सकती है। वहीं जिन लोगों की स्किन डार्क होती है, उनकी स्किन में डार्क ब्राउन कलर का धब्बा या दाग दिख सकता है। हर व्यक्ति में लिप कैंसर या होंठों का कैंसर अलग-अलग दिख सकता है। अगर आपको लिप के आसपास कुछ भी अलग-सा दिखाई दे, तो आपको इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। सही समय पर अगर लिप कैंसर को डायग्नोज कर लिया जाए, तो इसका ट्रीटमेंट कराया जा सकता है। कैंसर बढ़ने के बाद उसका ट्रीटमेंट भी कठिन हो जाता है। समय पर कैंसर की जानकारी मिलने पर कैंसर को खत्म किया जा सकता है। आइए जानते हैं कैंसर की बीमारी को कैसे किया जा सकता है डायग्नोज।

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    लिप कैंसर का डायग्नोज (Lip cancer diagnosis)

    लिप कैंसर के बारे में जानकारी सबसे पहले डेंटिस्ट को मिल सकती है।अक्सर रूटीन एग्जाम या क्लीनिंग के दौरान डेंटिस्ट लिप में किसी स्पॉट या फिर पैच को लेकर आपसे पूछ सकते हैं। अगर आपके डेंटिस्ट को लिप कैंसर को लेकर शंका होगी, तो वह आपको डायग्नोसिस टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। जानिए लिप कैंसर का डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट (Diagnosis and Treatment of lip cancer) के दौरान क्या किया जाता है।

    फिजिकल एग्जामिनेशन (Physical examination): लिप कैंसर का डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट (Diagnosis and Treatment of lip cancer) के दौरान सबसे पहले डॉक्टर डायग्नोसिस में फिजिकल एग्जामिनेशन करते हैं। एग्जामिनेशन के दौरान डॉक्टर होठों के आसपास जांच करते हैं और साथ ही वह कुछ लक्षणों के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं। डॉक्टर लिप के आसपास जांच करने के साथ ही मुंह, चेहरे और गर्दन की भी जांच करते हैं।

    कम्प्लीट ब्लड काउंट (Complete blood count): सीबीसी (CBC) टेस्ट के माध्यम से डॉक्टर को ब्लड सेल्स के काउंट्स के बारे में जानकारी मिलती है। कैंसर की जांच के दौरान सीबीसी टेस्ट जरूरी होता है।

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    सॉफ्ट टिशु बायोस्पी (Soft tissue biopsy): इस दौरान क्षतिग्रस्त स्किन का छोटा सा सैंपल लेकर पैथोलॉजी लैब में एनालिसिस के लिए भेजा जाता है इसके माध्यम से कैंसर के बारे में जानकारी मिल जाती है

    इमेजिंग टेस्ट (Imaging tests) : इस दौरान हेल्थ केयर प्रोवाइडर कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन करता है। मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग यानी की MRI का इस्तेमाल यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि कैंसर होंठों में फैला है या फिर नहीं।

    एंडोस्कोपी (Endoscopy): एंडोस्कोपी की हेल्प से होंठ के बाहर अगर कैंसर की कोशिकाएं फैल गई हैं, तो इसकी जानकारी मिलती है। इस दौरान फ्लेक्सिबल कैमरे को गले से पास किया जाता है ताकि कैंसर के लक्षणों के बारे में जानकारी मिल सके।

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    लिप कैंसर का डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट (Diagnosis and Treatment of lip cancer) : जानिए लिप कैंसर का ट्रीटमेंट

    लिप कैंसर का डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट (Diagnosis and Treatment of lip cancer) समय पर बहुत जरूरी होता है। अगर लिप कैंसर को समय पर डायग्नोज कर लिया गया है, तो समय पर ट्रीटमेंट भी बहुत जरूरी हो जाता है।

    लिप कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान एक नहीं बल्कि कई तरीके अपनाए जाते हैं। कैंसर का साइज कितना है या फिर कितने भाग की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं, उसी के अनुसार कैंसर का ट्रीटमेंट किया जाता है। जानिए लिप कैंसर का डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट के दौरान कैसे इलाज किया जा सकता है।

    सर्जरी (Surgery): सर्जरी के माध्यम से क्षतिग्रस्त भाग को निकाल दिया जाता है। अगर कैंसर अधिक भाग में फैला होता है, तो रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की मदद से कैंसर को निकाल दिया जाता है। ऐसा करने से कैंसर जड़ से खत्म हो जाता है।

    रेडिएशन थेरिपी (Radiation therapy) : इसके साथ ही रेडिएशन थेरिपी की हेल्प से कैंसर को खत्म किया जाता है। इसे सर्जरी के बाद भी किया जा सकता है। यह डॉक्टर तय करते हैं कि रेडिएशन थेरेपी पेशेंट को दी जाएगी या फिर नहीं।

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    लिप कैंसर का डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट में कीमोथेरिपी (Chemotherapy): कैंसर को खत्म करने के लिए कीमोथेरिपी का अहम रोल होता है। कीमोथेरेपी के दौरान ड्रग या मेडिसिंस दिए जाते हैं। जो कैंसर की कोशिकाओं को मारने का काम करते हैं। यह ड्रग्स वेंस के माध्यम से दिए जाते हैं। कई बार कीमोथेरेपी के साथ ही रेडिएशन थेरेपी भी दी जाती है। अगर आपका लिप कैंसर शरीर के अन्य भाग में भी फैल चुका है और कोई अन्य ट्रीटमेंट नहीं है, तब कीमोथेरेपी की हेल्प ली जा सकती है। यह कैंसर के लक्षणों को कम करने का काम करती है।

    टारगेटेड ड्रग थेरेपी (Targeted drug therapy): टारगेटेड ड्रग थेरेपी को कीमोथेरेपी के साथ दिया जा सकता है। टारगेट ड्रग थेरेपी का इस्तेमाल जीन्स और कैंसर सेल्स की प्रोटीन को खत्म करने के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से कैंसर सेल्स को मारने में मदद मिलती है।

    लिप कैंसर का डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट में इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy): इम्यूनोथेरिपी का इस्तेमाल करने से शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और यह कैंसर सेल्स से लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। अकेले या फिर अन्य ट्रीटमेंट को इम्यूनोथेरेपी के साथ शामिल किया जा सकता है। इम्यूनोथेरेपी का इस्तेमाल एडवांस कैंसर स्टेज में किया जाता है जब ट्रीटमेंट का कोई अन्य उपाय नहीं बचता है।

    लिप कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान कौन सा ट्रीटमेंट दिया जाएगा, इस बात को डॉक्टर कैंसर की स्टेज के अनुसार तय करते हैं। अगर सर्जरी की हेल्प ली जाती है, तो उसके कुछ साइड इफेक्ट भी दिख सकते हैं जैसे कि बोलने के दौरान दिक्कत महसूस होना, मुंह खोलने के दौरान समस्या होना आदि। इसके अलावा कैंसर के अन्य ट्रीटमेंट भी दुष्प्रभाव पैदा कर सकते हैं। अगर ट्रीटमेंट के बाद आपको किसी प्रकार की समस्या हो रही है, तो आपको डॉक्टर को इस बारे में जानकारी देनी चाहिए। आमतौर पर कैंसर के ट्रीटमेंट के बाद थकान, बालों का झड़ना, शरीर में खून की कमी, वजन का कम होना, स्किन का ड्राई होना, गले में खराश रहना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

    इस आर्टिकल में हमने आपको लिप कैंसर का डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट (Diagnosis and Treatment of lip cancer) को लेकर जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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    Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/01/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड