हाइपरग्लेसेमिया : जानिए इसके लक्षण, कारण, निदान और उपचार

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प्रकाशित हुआ जुलाई 7, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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हाइपरग्लेसेमिया का अर्थ है शरीर में ब्लड शुगर या ग्लूकोज की मात्रा का बढ़ना जो खाना हम खाते हैं, उससे हमें ग्लूकोज मिलता है। इसके साथ ही इंसुलिन वो हार्मोन है जो ग्लूकोज को हमारी कोशिकाओं तक ले जाती है, ताकि हमें ऊर्जा मिले। हाइपरग्लेसेमिया तब होता है जब हमारा शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता और न ही उसे सही तरीके से प्रयोग कर पाता है। जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें सही आहार न खाने या सही दवाईयां न लेने से हाइपरग्लेसेमिया हो सकता है। अन्य समस्याएं जो ब्लड शुगर को बढ़ा सकती हैं वो हैं इन्फेक्शन, कुछ खास दवाईयां, हॉर्मोन असंतुलन या कोई गंभीर बीमारी। हाइपरग्लेसेमिया की स्थिति में टाइप-2 डायबिटीज होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। हालांकि, अपने लाइफस्टाइल में थोड़ा बदलाव कर के इस रोग से पीड़ित व्यक्ति टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को कम कर सकता है। साधारण भाषा में समझाया जाए तो हाइपरग्लेसेमिया उसे कहते हैं जब ब्लड ग्लूकोज की मात्रा 180 से अधिक हो।  हाइपरग्लेसेमिया के बारे में पूरी जानकारी इस प्रकार है।

हाइपरग्लेसेमिया के कारण

अगर आपको हाइपरग्लेसेमिया की समस्या लंबे समय से है, तो उससे आपकी नसों, ब्लड वेसल्स और शरीर के अन्य अंगों को नुकसान हो सकता है। हाइपरग्लेसेमिया के कारण इस प्रकार हैं।

  • अपने इंसुलिन या ओरल ग्लूकोज कम करने वाली दवा को छोड़ देना या लेना भूल जाना
  • गलत खाद्य पदार्थ खाने 
  • अधिक खाना
  • इंफेक्शन
  • कोई गंभीर बीमारी
  • अधिक तनाव
  • शारीरिक गतिविधि कम करना

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हाइपरग्लेसेमिया के लक्षण

हाइपरग्लेसेमिया के लक्षण तब दिखाई देने शुरू होते हैं, जब ग्लूकोज की मात्रा 180 से 200 मिलीग्राम पर डेसीलीटर नहीं हो जाती। इसके लक्षण सामने आने में कई दिन या हफ्ते लग सकते हैं। जब तक शुगर लेवल अधिक रहेगा, इसके गंभीर लक्षण दिखाई देंगे। हालांकि, कुछ लोग जिनमें लंबे समय से टाइप 2 मधुमेह था, उनमें ब्लड शुगर के स्तर के बावजूद इसके कोई लक्षण नहीं दिखाई देते।

हाइपरग्लेसेमिया के शुरुआती लक्षण

अगर हाइपरग्लेसेमिया के लक्षण शुरुआत में ही पता चल जाएं। तो इसका इलाज सही समय और अच्छे से हो सकता है। इसके शुरुआती लक्षण इस प्रकार हैं:

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बाद में दिखाई देने वाले लक्षण

अगर हाइपरग्लेसेमिया का इलाज सही समय पर न कराया जाए। तो इससे आपके खून और मूत्र में टॉक्सिक एसिड(कीटोनस) बन सकते हैं। जिसे केटोएसिडोसिस कहा जाता है, यह स्थिति गंभीर हो सकती है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

  • फलों की खुशबु वाली सांस आना
  • मतली और उल्टी
  • सांस लेने में कठिनाई
  • मुंह का सुखना
  • दुर्बलता
  • बेचैनी
  • कोमा
  • पेट में दर्द

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डॉक्टर के पास कब जाएं

इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं, अगर 

  • आपकी ब्लड शुगर लगातार चार-पांच बार 240 mg/dL से अधिक हो।
  • अगर आप ऊपर दिए हाइपरग्लेसेमिया के लक्षणों मे से किसी भी लक्षण को महसूस करें।
  • आप हर संभव प्रयास कर रहे हों लेकिन आपकी शुगर कम न हो रही हो।

जोखिम 

हाइपरग्लेसेमिया के जोखिम को कई कारक बढ़ाते हैं,उनमें से कुछ इस प्रकार हैं

  • पर्याप्त इंसुलिन या डायबिटीज की दवाईयां न लेना 
  • इंसुलिन को सही से न लेना या एक्स्पायर्ड इंसुलिन का प्रयोग
  • डायबिटीज में क्या खाना चाहिए इसका ध्यान न रखना 
  • एक्टिव न रहना
  • कोई बीमारी या इंफेक्शन होना 
  • कोई खास दवाई लेना जैसे स्टेरॉयड 
  • चोट लगना या सर्जरी होना 
  • परिवार या कार्यस्थान पर कोई तनाव
  • मोटापा
  • आहार मे गड़बड़

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निदान

आपके डॉक्टर आपकी ब्लड शुगर की जांच करेंगे। इसके परिणाम कैसे हैं, उस पर आपका इलाज निर्भर करता है। जानिए आपको ब्लड शुगर के परिणाम कैसे होने चाहिए।

खाने से पहले आपकी ब्लड शुगर इस प्रकार होनी चाहिए

  • 59 साल या उससे कम उम्र के लोग जिन्हें कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं है, उनकी ब्लड शुगर 80 और 120 mg/dL के बीच में होनी चाहिए।
  • 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोग जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्या हैं (जैसे हार्ट, फेफड़े या किडनी से जुड़ी समस्याएं, या लो ब्लड शुगर), उनकी ब्लड शुगर 100 and 140 mg/dL के बीच में होनी चाहिए।

जिन लोगों को डायबिटीज है उन लोगों का ब्लड लेवल इस प्रकार होना चाहिए

  • खाने से पहले 80 से 130 mg/dL के बीच 
  • खाने के बाद 180 mg/dL के कम 

ब्लड शुगर की रेंज अगल हो सकती है खासतौर पर अगर आप प्रेग्नेंट हैं या आपमें डायबिटीज से संबंधित जटिलताएं हैं। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, आपका लक्ष्य ब्लड शुगर रेंज भी बदल सकता है। आपके डॉक्टर आपकी ब्लड शुगर को जांचने के लिए आपका अन्य टेस्ट भी करा सकते जैसे हीमोग्लोबिन A1C टेस्ट।

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हीमोग्लोबिन A1C टेस्ट

आपके डॉक्टर आपकी शुगर लेवल को जांचने के लिए आपका हीमोग्लोबिन A1C टेस्ट करा सकते हैं। इससे रोगी का पिछले दो से तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर लेवल का पता चल जाता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं में ऑक्सीजन ले जाने वाले प्रोटीन से जुड़े ब्लड शुगर के प्रतिशत को मापने  का काम करता है।

  • A1C के स्तर का 7% या उससे कम होने का मतलब है कि आपका उपचार काम कर रहा है और आपकी ब्लड शुगर निर्धारित रेंज से कम है। यदि आपका A1C स्तर 7% से अधिक है, तो आपकी ब्लड शुगर सामान्य सीमा से अधिक है। इस मामले में, डॉक्टर आपको अपने डायबिटीज के उपचार के तरीकों को बदलने के लिए कहेंगे।
  • लेकिन कुछ लोग जैसे बड़ी उम्र के वयस्क, जिन्हें कोई रोग है उनका A1C स्तर 8 % से अधिक हो सकता है।
  • इस बात का ध्यान रखें कि A1C परिणामों का सामान्य स्तर हर लैब में अलग हो सकता है। इसलिए, इस बारे में अपने डॉक्टर से पहले ही बात कर लें।
  • A1C टेस्ट डायबिटीज के प्रकार पर निर्भर करता है और साथ ही इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप ब्लड शुगर को कैसे कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

घरेलू उपाय

  • ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • अपना वजन कम करने की कोशिश करें।
  • ऐसा आहार खाएं जिसमें सैचुरेटेड बसा और फाइबर अधिक हो।
  • अगर आप स्मोकिंग करते हैं तो तुरंत इसे छोड़ दें।
  • अपने ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने के लिए अपनी डॉक्टर की सलाह लें।
  • जैसे डॉक्टर ने बताया हो, वैसे ही दवाईयां लें। इसके साथ ही इस समस्या में क्या खाना है या क्या नहीं। इस बारे में भी डॉक्टर से पूछें।
  • अपने ब्लड शुगर को नियमित रूप से जांचते रहें।

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गंभीर हाइपरग्लेसेमिया की स्थिति में उपचार 

अगर रोगी में गंभीर हाइपरग्लेसेमिया के लक्षण दिखाई दें तो रोगी को तुरंत हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ता है। इस स्थिति में इमरजेंसी उपचार से ब्लड शुगर का स्तर सामान्य हो सकता है। इस उपचार में यह सब शामिल है:

फ्लूइड रिप्लेसमेंट 

इसके लिए आपको फ्लूइड यानी तरल नसों के माध्यम से दिया जाएगा। इससे जितना तरल आपके पेशाब के माध्यम से आपके शरीर से निकल गया है, उसकी भरपाई हो जाएगी।

इलेक्ट्रोलाइट रिप्लेसमेंट 

इलेक्ट्रोलाइट शरीर में मौजूद वो मिनरल हैं ,जो हमारे शरीर के उत्तकों के सही से काम करने के लिए जरूरी हैं। इंसुलिन के न होने से खून में कई इलेक्ट्रोलाइट कम हो जाते हैं। ऐसे में आपके दिल, मांसपेशियों और कोशिकाओं आदि के सही कार्य के लिए आपको इलेक्ट्रोलाइटस नसों के माध्यम से दिए जाते हैं।

इंसुलिन थेरेपी

इंसुलिन उन प्रक्रियाओं को उलट देता है, जो आपके रक्त में किटोन्स का निर्माण करते हैं। नसों के मध्यम से आप तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स के साथ-साथ इंसुलिन थेरेपी भी प्राप्त करेंगे।

ओरल एंटीहाइपरग्लाइसेमिक एजेंट

ओरल एंटीहाइपरग्लाइसेमिक एजेंट रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करते हैं। इनका प्रयोग डायबिटीज मेलेटस के उपचार में किया जाता है। कुछ मुख्य एजेंट हैं सल्फोनिलयूरिया, अल्फा-ग्लूकोसिडेस इन्हिबिटर्स, थियाजोलिडेनिओनेस

एंटीबायोटिकस

अगर अभी भी आपकी स्थिति में सुधार नहीं होते तो अन्य उपचारों की सलाह दी जा सकती है अगर डॉक्टर को लगेगा कि आपको बैक्टीरियल इंफेक्शन है तो आपको एंटीबायोटिकस दी जा सकती है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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