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डायबिटीज की दवा दिला सकती है स्मोकिंग से छुटकारा

डायबिटीज की दवा दिला सकती है स्मोकिंग से छुटकारा

दोस्तों के साथ या काम से ब्रेक के लिए शुरू की गई सिगरेट कब आपके लिए एक आदत या लत बन जाती है पता नहीं चलता। इसके बाद लोग सारी जिंदगी स्मोकिंग की लत से जूझते रहते हैं। इससे बचने के लिए लोग अलग-अलग उपाय भी अपनाते हैं। ऐसे में इसको लेकर कई शोध भी किए जाते रहते हैं। इसी कड़ी में एक नए शोध में निकोटीन छोड़ने से पता चलता है कि आमतौर परटाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं चूहों में क्षण को कम करती हैं। यह शोध स्मोकिंग से छुटकारा पाने के लिए संघर्ष करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। अध्ययन के परिणाम ‘जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस 2019’ में प्रकाशित हुए हैं।

स्मोंकिग के साइड इफेक्ट्स होते हैं कम (Decreased side effects of smoking)

स्मोकिंग से छुटकारा पाने के लिए लोग जब निकोटीन छोड़ने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें इसके अलग-अलग साइड इफेक्ट्स को झेलना पड़ता हैं, जिसमें क्रेविंग,अधिक भूख लगना, बेचैनी, चिंता, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन शामिल हैं। भले ही लोग स्मोकिंग से छुटकारा पाना चाहते हों, लेकिन इसके साइड इफेक्ट इतने ज्यादा होते है कि लोग घबराकर धूम्रपान करना जारी रखते हैं।

डायबिटीज की दवा पियोग्लिटाजोन (pioglitazone) रिसेप्टर में एक्टिव पेरोक्सीसम प्रोलिफरेटर (peroxisome proliferator) के एक विशिष्ट रूप को टार्गेट करता है। यह रिसेप्टर, मादक पदार्थों की लत में ग्रसित लोगों के दिमाग में पाया जाता है।

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स्मोकर्स में दिखेंगे शारीरिक और भावनात्मक बदलाव (Physical and emotional changes in smokers)

शोध के परिणामों में बताया कि जब पुरुष चूहों के हिप्पोकैम्पसी (दिमाग का एक हिस्सा) में पियोग्लिटाजोन के सीधे इंजेक्शन लगाए गए, तो इन इंजेक्शन ने निकोटीन छोड़ने के साइड इफेक्टस को कम कर दिया, जिसमें चूहें के पंजों का कांपना, चीखना और सिर हिलाना शामिल है। वहीं जब पुरुष चूहों के न्यूरॉन में पियोग्लिटाजोन (pioglitazone) इंजेक्शन दिया गया, तो उनमें निकोटीन छोड़ने की वजह से होने वाली चिंता के संकेत दिखे।

निकोटीन का इस्तेमाल करने वालों में टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता हैं। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि पियोग्लिटाजोन (pioglitazone) डायबिटिक स्मोकर के अंदर शारीरिक और भावनात्मक साइड इफेक्टस को कम करके उनके अंदर इंसुलिन रेजिस्टेंस को घटाता है।

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स्मोकिंग से छुटकारा पाने के आसान तरीकें (Easy ways to quit smoking)

पहले खुद हो तैयार

स्मोकिंग एक लत है जिसमें आपका दिमाग पहले से ही निकोटिन का आदि हो चुका होता है। इसलिए स्मोकिंग से छुटकारा पाने के लिए अपने आपको तैयार करना होगा। इसके लिए अपने डॉक्टर से हर उस तरीके के बारे में जानने की कोशिश करें जो आपकी मदद कर सकते हैं। जैसे कि दवाइयां, योग, एक्सरसाइज, निकोटिन पैच (यह निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी में यूज होता है) इत्यादि। तभी आप अगले स्टेप के लिए पूरी तरह तैयार हो पाएंगे। इससे आपको स्मोकिंग से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी।

अपनों के साथ बिताएं समय

परिवार, दोस्तों से स्मोकिंग से छुटकारा पाने के बारे में बात करें। इसका फायदा यह होगा कि जब कभी आपकी इच्छाशक्ति कम पढ़ने लगेगी तो परिवार व दोस्त आपको प्रोत्साहित करेंगे। आजकल तो ऐसे कई ग्रुप भी हैं, जहां स्मोकिंग से छुटकारा पाने के इच्छुक अनेक लोग मिल जुलकर एक दूसरे की मदद करते हैं और अपना अनुभव साझा करते हैं। आप ऐसे किसी भी ग्रुप का हिस्सा बन सकते हैं। स्मोकिंग से छुटकारा पा कर आप पैसिव स्मोकिंग से लोगों को बचा सकते हैं।

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शरीर और दिमाग को आराम दें

कई लोग स्ट्रेस को कम करने के लिए भी स्मोकिंग करते हैं। तो अगर आप स्मोकिंग से छुटकारा पाने की सोच रहे हैं तो आपको अपने शरीर को आराम देना चाहिए, ताकि आप फिर से स्मोकिंग की तरफ न मुड़ें। इसके लिए बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं जैसे कि व्यायाम करना, संगीत सुनना, घूमना, मेडिटेशन करना इत्यादि। अपने आप को इन में व्यस्त रखने की कोशिश करें।

हेल्दी डायट पर दें ध्यान

कई अध्ययनों के अनुसार नॉनवेज या कुछ और अन्य फूड प्रोडक्ट्स ऐसे हैं जिसके बाद आपको स्मोकिंग की तलब लग सकती है। वहीं पनीर, फल और सब्जियां सिगरेट के स्वाद को खराब करते हैं। जिससे आपका स्मोकिंग की तरफ आकर्षण खत्म होने लगता है। इसलिए कोशिश करें कि जब आप स्मोकिंग से छुटकारा पाने के लिए प्रयास कर रहे हैं तो इस दौरान ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां और फल आपके डायट का हिस्सा बनाएं।

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स्मोकिंग से छुटकारा पा कर बचे सीओपीडी से

स्मोकिंग करने से क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) हो जाता है। सीओपीडी एक क्रोनिक इंफ्लेमेटरी लंग डिजीज है, जो फेफड़ों से एयरफ्लो को रोकता है। सीओपीडी के लक्षणों में सांस लेने में परेशानी, खांसी, बलगम (थूक) और घरघराहट शामिल हैं। यह गैस या पार्टिकुलेट मैटर की ज्यादा मात्रा के संपर्क में आने के कारण होता है, जो कि ज्यादातर सिगरेट के धुएं से होता है। सीओपीडी वाले लोगों में हृदय रोग, फेफड़ों के कैंसर और कई अन्य स्थितियों के विकास का खतरा रहता है।

सीओपीडी का मुख्य कारण तंबाकू धूम्रपान है। वहीं विकासशील देशों में सीओपीडी खराब हवा और जलने वाले ईंधन से धुएं को सूंघने की वजह से होता है। केवल 20 से 30 प्रतिशत क्रोनिक धूम्रपान करने वालों को सीओपीडी हो सकता है। हालांकि, जो लोग लंबे समय से धूम्रपान करते आ रहे हैं उन्हें फेफड़ों में दूसरी परेशानी हो सकती हैं। कम धूम्रपान करने वालों में भी आम फेफड़ों की परेशानी हो सकती है। ऐसे में स्मोकिंग से छुटकारा पाना ही एक मात्र उपाय है ताकि आप सीओपीडी से बचे रहें।

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स्मोकिंग से छुटकारा पाने के बाद आप महसूस करेंगे ये बदलाव

  • सिगरेट पीने से खांसी की समस्या होना काफी होता है। जिसे मेडिकल की भाषा में ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) कहा जाता है। इससे गले में सूजन हो जाती है और कफ जमने लगती है जिसकी वजह से सांस लेने में समस्या होती है। वहीं, स्मोकिंग से छुटकारा पाने के बाद यह समस्या कम हो सकती है।
  • स्मोकिंग करने से तंत्रिका आंत पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण धीरे-धीरे स्वाद और सूंघने की क्षमता कम होने लगती है। वहीं, जब स्मोकिंग से छुटकारा पा लिया जाए, तो कुछ ही दिनों में स्वाद और सूंघने की क्षमता कई गुना तक बढ़ सकती है।
  • स्मोंकिग छोड़ने से शरीर पर बहुत अधिक अनुकूल प्रभाव पड़ता है। दिल के खतरे बढ़ाने में स्मोकिंग भी एक वजह हो सकती है। वहीं, जब इसकी आदत बंद हो जाए तो दिल दुरुस्त होने लगता है, क्योंकि शरीर में ऑक्सीजन का संचार बेहतर हो जाता है।
  • अगर आप स्मोकिंग से छुटकारा पा लें, तो इसका फायदा सिर्फ 12 घंटों के अंदर ही देखा जा सकता है। स्मोकिंग छोड़ने से 12 घंटे के अंदर ही, कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर बहुत कम हो जाता है, जिससे बाद शरीर के सभी हिस्सों में खून का संचार अच्छे से होने लगता है।
  • सिगरेट पीने के कारण होंठ अपने आप काले पड़ने लगते हैं। तो अगर गुलाबी होंठ चाहिए तो स्मोकिंग की लत बंद करनी होगी।
  • स्मोकिंग छोड़ने से फेफड़े स्वस्थ रहेंगे और लंग कैंसर का खतरा भी नहीं होगा। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों में से 80 फीसदी से अधिक का कारण स्मोकिंग पाया जाता है। सिगरेट में 70 से अधिक हानिकारक कैंसर पैदा करने वाले रसायन होते हैं।

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Lucky Singh द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 19/11/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड