जानें हाइपरटेंशन के प्रकार और इससे बचाव

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Update Date जुलाई 17, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। इसका कारण यह है कि इसके कोई खास लक्षण नहीं होते। हाई बीपी वाले इंसान को यह पता ही नहीं चल पाता कि उसे उच्च रक्तचाप की समस्या है और उसकी जान भी चली जाती है। दुश्मन को मात देनी हो तो पहले उसके बारे में जान लेना चाहिए। ठीक उसी तरह बीमारी से दूर रहना हो तो पहले ही उसके कारणों को जानकर नष्ट कर देना ही समझदारी है। आईए जानते हैं कि हाइपरटेंशन क्या है और हाइपरटेंशन के प्रकार क्या हैं ?

हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन (Hypertension) क्या है?

हाइपरटेंशन का दूसरा नाम हाई ब्लड प्रेशर है। उच्च रक्तचाप का अर्थ है रक्त वाहिकाओं यानी ब्लड वेसल में रक्त का दबाव बढ़ जाना। रक्त का दबाव बढ़ने के कारण दिल और तेज काम करने लगता है। यही स्थिति हार्ट अटैक और  स्ट्रोक को जन्म देती है। यह दो ऐसी समस्याएं हैं जो देश ही नहीं दुनिया भर में तेजी से लोगों के लिए बड़ी समस्या बन रही है।

कैसे जानें कि हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हैं?

यह जान लेना कि आपको हाइपरटेंशन है या नहीं कोई मुश्किल काम नहीं है। किसी भी नर्स या डॉक्टर के पास जाकर आप अपना ब्लड प्रेशर चेक करवा सकते हैं। यह बिल्कुल भी जटिल प्रक्रिया नहीं है।

नॉर्मल ब्लड प्रेशर क्या है?

सामान्यतौर पर रक्तचाप स्तर को 120/80 mmHg के तहत रीड किया जाता है। 120/80 mmHg रक्तचाप नॉर्मल होता है। जब इससे ज्यादा ब्लड प्रेशर जाने लगे तो इसे बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर कहा जाता है। 139/89 mmHg तक की रीडिंग को विशेषज्ञ बहुत गंभीर रूप से नहीं लेते। यह जरूर है कि 139/89 mmHg रक्तचाप होने के बाद आपको अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की जरूरत होती है।

और पढ़ें: हाइपरटेंशन से बचाव के लिए जरूरी है लाइफस्टाइल में ये बदलाव

हाई ब्लड प्रेशर क्या है?

140/90 mmHg से हाई ब्लड प्रेशर के खतरे की घंटी बज चुकी होती है। 140/ 90 mmHg से अधिक ब्लड प्रेशर को ही हाइपरटेंशन की श्रेणी में गिना जाता है।

हाइपरटेंशन के प्रकार

हाइपरटेंशन मुख्य तौर पर दो प्रकार के होते हैं –

प्राइमरी हाइपरटेंशन

हाइपरटेंशन के प्रकार में पहला प्रकार है प्राइमरी या एसेंशियल हाइपरटेंशन। एसेंशियल हाइपरटेंशन से ही अधिकतर लोग प्रभावित होते हैं। इस हाइपरटेंशन का कारण क्या है इसका पता नहीं चल पाता। उम्र के बढ़ने के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर की समस्या गंभीर होने लगती है।

सैकेंडरी हाइपरटेंशन

हाइपरटेंशन के प्रकार में दूसरा प्रकार है सैकेंडरी ​हाइपरटेंशर। सैकेंडरी ​हाइपरटेंशर मुख्य तौर पर शरीर की किसी अन्य बीमारी से ही संबंधित होती है। बीमारी का उपचार या दवा से सैकेंडरी हाइपरटेंशन को कंट्रोल किया जा सकता है।

और पढ़ें: हाइपरटेंशन की दवा के फायदे और साइड इफेक्ट्स क्या हैं?

अन्य प्रकार के हाइपरटेंशन

आइसोलेटेड सिस्टोलिक हाइपरटेंशन (Isolated Systolic Hypertension)

रक्तचाप को दो नंबर में रीड किया जाता है। पहला नंबर सिस्टोलिक दबाव यानी दिल के धड़कने के दौरान पड़ने  वाला दबाव और दूसरा नंबर डायस्टोलिक दबाव यानी दिल के धड़कने के दौरान रुकना या आराम करना होता है। सामान्य रक्तचाप 120/80 mmHg माना जाता है। आइसोलेटेड सिस्टोलिक हाइपरटेंशन में सिस्टोलिक दबाव 140 से ऊपर चला जाता है और डायस्टोलिक दबाव सामान्य या 90 से नीचे ही रहती है। बुजुर्गों में यह समस्या ज्यादा देखी जा सकती है। वहीं सिस्टोलिक दबाव डायस्टोलिक दबाव की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण होता है। चूंकि यह हृदय रोग का खतरा बढ़ाने में कारगर होता है।

रिनल हाइपरटेंशन (Renal Hypertension)

किडनी की बीमारी के कारण बढ़े उच्च रक्तचाप को रिनल या रेनोवैस्कुलर हाइपरटेंशन कहते हैं। इस हाइपरटेंशन के प्रकार में किडनी तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियां सिकुड जाती हैं। इसे रिनल आर्टरी स्टेनोसिस (Renal Artery Stenosis) भी कहते हैं। रिनल हाइपरटेंशन के लक्षण पकड़ में नहीं आते। फिर भी सिर दर्द, पेशाब में खून आना, नकसीर को इसके कुछ लक्षणों में गिना जा सकता है।

मैलिग्नेंट हाइपरटेंशन (Malignant Hypertension)

हाइपरटेंशन के प्रकार में एक प्रकार मैलिग्नेंट हाइपरटेंशन है। मैलिग्नेंट हाइपरटेंशन बहुत कम लोगों को प्रभावित करता है। इसमें ब्लड प्रेशर बहुत जल्दी बढ़ता है। जब आपका डायस्टोलिक दबाव 130 से अधिक हो जाता है तब कहा जा सकता है कि आपको मैलिग्नेंट हाइपरटेंशन हो सकता है। इसके कारण शरीर के किसी अंग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।  इसके कई कारण हो सकते हैं।

  • ब्लड प्रेशर की दवा स्किप करना
  • कोलेजन वसकूलर डिजिज
  • किडनी की बीमारी
  • एड्रिनल ग्लैंड का ट्यूमर
  • गर्भनिरोधक दवाओं के कारण भी हाइपरटेंशन का यह प्रकार जन्म ले सकता है
  • चरस, गांजा और भांगआदि नशीले पदार्थों के कारण भी यह हो सकता है

इस हाइपरटेंशन के प्रकार के कारण धुंधली दृष्टि, मानसिक स्थिति में बदलाव, बेहोशी, सिरदर्द और उल्टी आ सकती है। इस हाइपरटेंशन के प्रकार के कारण ब्रेन स्वेलिंग भी हो सकती है। ब्रेन स्वेलिंग एक गंभीर बीमारी है जिसे हाइपरटेंसिव एन्सेफैलोपैथी (Hypertensive Encephalopathy) कहते हैं।

रेसिस्टेंट हाइपरटेंशन (Resistant Hypertension)

रेसिस्टेंट हाइपरटेंशन एक जेनेटिक समस्या हो सकती है। देखा जाए तो बुजुर्ग, महिलाएं व मोटे लोग और किडनी व डायबिटीज के रोगी इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं। इसमें डॉक्टर की दी दवा भी कारगर साबित नहीं होती।

और पढ़ें: जानें किन कारणों से बढ़ता है हाई ब्लड प्रेशर?

हाइपरटेंशन के क्या कारण हैं?

बिगड़ती जीवशैली ही आज की दुनिया की सबसे बड़ी बीमारी है और हर बीमारी की जड़ भी। हाइपरटेंशन भी इससे अछूता नहीं है। हाइपरटेंशन का मुख्य कारण खराब डायट, एक्सरसाइज ना करना व स्ट्रेस या तनाव ही है। मोटापा, धूम्रपान, शराब, आहार उच्च रक्तचाप में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए इनको कंट्रोल में रखना जरूरी है। आप चाहें तो बी एम आई कैलक्युलेटर के तीन स्टेप में ही आप जान सकते हैं कि आप मोटापे के कितने करीब हैं?

हाइपरटेंशन के लक्षण

गंभीर बात यह है कि हाइपरटेंशन के बारे में 90 प्रतिशत लोगों को पता ही नहीं होता। किसी एक चीज को आप तय पैमाना नहीं बना सकते हैं। फिर भी हाइपरटेंशन के कुछ लक्षण निम्न प्रकार हैं।

  •  सिरदर्द
  •  थकान
  • चक्कर
  •  हाथ और पैर सुन्न होना
  •  धुंधली दृष्टि
  •  सीने में दर्द
  •  घबराहट

हाइपरटेंशन के खतरे

हाई ब्लड प्रेशर शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है पर इससे सबसे ज्यादा नुकसान हृदय को होता है। हाई प्रेशर हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी की समस्या या डिमेंशिया को जन्म दे सकता है। हाइपरटेंशन के कारण जान का खतरा भी हो सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर सिर्फ बड़े-बूढ़ों की बीमारी बनकर नहीं रह गई है। लाइफस्टाइल में गिरावट के कारण युवा व बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। 90 प्रतिशत रोगियों को हाइपरटेंशन के कारणों के बारे में पता ही नहीं चल पाता। इस वजह से इससे बचाव करने में भी वह असमर्थ रहते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप दिल को दुरुस्त रखने वाली कार्डियो एक्सरसाइज, भरपूर सेहत भरी डायट और मेडिटेशन कर स्ट्रेस को खुद से दूर रखें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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