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एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स के बारे में सुना है? फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स के बारे में सुना है? फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

पिछले कुछ सालों में एयर प्यूरीफायर्स की मांग दुनिया भर में बहुत बढ़ गई है। भारत में हवा की गुणवत्ता सर्दियों की शुरुआत के साथ ही घट जाती है। जबकि एयर प्यूरीफायर घर के अंदर के प्रदूषण से लड़ने के लिए सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं, लेकिन जब प्रकृति ने आपको नैचुरल एयर प्यूरीफायर दिया है तो आर्टिफिशियल एयर प्यूरिफायर पर पैसे क्यों खर्च करना है। एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स घर में लगाएं और आप अपने घर में शुद्ध हवा पाएं। इस आर्टिकल में आप ऐसे कई एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स के बारे में जानेंगे जिन्हें घर में लगा कर आप शुद्ध हवा ले सकते हैं।

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घर के अंदर वायु प्रदूषण क्या है?

आजकल ज्यादातर लोग फ्लैट्स में रहते हैं, वहीं बाहर के प्रदूषण से भी परेशान रहते हैं, लेकिन लोग बाहर के प्रदूषण को ही प्रदूषण मानते हैं। जबकि बाहर से ज्यादा खतरनाक घर का प्रदूषण हेता है। ऐसा इसलिए होता है कि घर में मौजूद हवा घर में ही रह जाती है। घर से बाहर हवा का प्रवाह पूरी तरह से नहीं हो पाता है। वायु प्रवाह की कमी से इनडोर वायु प्रदूषण से अस्थमा या सिक बिल्डिंग सिंड्रोम जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। आजकल घरों में पर्दे, सोफा या बेडशीट से बेन्जीन जैसा खतरनाक प्रदूषक निकलता है। ये प्रदूषक हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं। ये रसायन इनडोर वायु प्रदूषण का 90 प्रतिशत तक बना सकते हैं। ये इंडोर पॉल्यूशन निम्न चीजों से होता है :

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इनडोर पॉल्यूशन के बारे में जानें एक्सपर्ट की राय

हैलो स्वास्थ्य ने दिल्ली और वाराणसी में स्थित गार्डन ऑन कॉन्क्रीट के डायरेक्टर अविषेक से बात की। अविषेक बताते हैं कि “आजकल इनडोर पॉल्यूशन काफी बढ़ गया है। जिसे आम इंसान अनदेखा कर देते हैं। घरों में पर्दे, सोफा या बेडशीट से बेन्जीन जैसा खतरनाक प्रदूषक निकलता है। ये पॉल्यूटेंट हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं। इन्हें इनडोर पॉल्यूटेंट कहना गलत नहीं होगा। अगर घर की हवा शुद्ध रहेगी तो सेहत अपने आप सही रहेगी।” अविषेक कहते हैं कि “ लोग प्लांट्स लगाने को तो घरों में लगा लेते हैं, लेकिन बिना सोचे समझे ऐसे प्लांट्स लगाते हैं, जो हमारे हेल्थ के लिए ज्यादा फायदेमंद नहीं होते हैं। इसलिए हमें अपने घरों में ऐसे प्लांट्स को लगाना चाहिए जो वास्तव में एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स की कैटेगरी में आते हो।”

एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स पर क्या कहती है रिसर्च

नासा ने एक शोध में पाया कि हाउसप्लांट हवा से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को अवशोषित कर सकते हैं। विशेष रूप से छोटी जगहों से जहां से हवा का प्रवाह बहुत कम होता है। यह अध्ययन इनडोर एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स और उनकी हवा के साफ करने की क्षमताओं पर आधारित है। एयर प्यूरीफायर की तुलना में एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स प्राकृतिक, कम लागत वाले और औषधीय होते हैं।

एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स हवा शुद्ध करने के साथ निम्न काम भी करते हैं :

नासा कहता है कि हमें 100 फुट के अंतराल पर 8 से 10 इंच के बर्तन में दो या तीन एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स लगाना चाहिए। जिससे घर के अंदर की हवा शुद्ध होती रहेगी।

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एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स के फायदे क्या हैं?

एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स से हवा में नमी रहती है

एयर प्यूरीफाइंग प्लांट फ्लेमिंगो लिली है जो पानी के वाष्प के साथ हवा को शुद्ध करता है। जायलिन नामक केमिकल इनडोर पॉल्यूशन है। जिसके कारण सांस लेन में परेशानी और त्वचा संबंधित समस्याएं होती हैं। एयर प्यूरीफाइंग प्लांट आपके श्वसन तंत्र और त्वचा के लिए लाभदायक होता है।

एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स हमें टॉक्सिन से बचाते हैं

जरबेरा जैम्सोनिल और सैंसेविया जैसे पौधे उन पॉल्यूटेंट्स को हटाते हैं जो एलर्जी, म्यूकस मेमब्रेन से होने वाली समस्या, अस्थमा और त्वचा रोगों का कारण बन सकते हैं। ये हवा शुद्ध करने वाले पौधे लिवर और किडनी को भी बीमार होने से रोकते हैं और कार्सिनॉजेन्स के लिए एक एंटीडॉट के रूप में काम करते हैं। कार्सिनॉजेन्स ल्यूकीमिया, नर्वस एक्साइटमेंट आदि का कारण बन सकता है। ये हवा शुद्ध करने वाले पौधे ब्लड प्रेशर को भी कम करते हैं। संक्षेप में समझा जाए तो, हमें हवा शुद्ध करने वाले फॉर्मलाडेहाइड, ट्राइक्लोरोएथीलीन और बेंजीन जैसे केमिकल के साइड इफेक्ट्स से बचाते हैं।

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एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स बिजली की बचत में मदद करते हैं

एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स नैचुरल होते हैं। अगर हम एयर प्यूरीफाइंग मशीन का इस्तेमाल करते हैं तो उसे चलाने के लिए हमें बिजली की आवश्यकता होती है, लेकिन हवा शुद्ध करने वाले पौधे को किसी भी तरह की ऊर्जा की जरूरत नहीं पड़ती है। हवा शुद्ध करने वाले पौधे प्रकृति से ही ऊर्जा लेते हैं और हमारे घर की हवा को शुद्ध बनाते हैं। वहीं, आर्टिफिशियल एयर प्यूरीफायर न केवल हमें आकर्षित करते हैं, बल्कि वे आपके खर्चों में लगातार बढ़ोत्तरी करते रहते हैं। फिर बिजली का बिल आने पर आप अपनी जेब की तरफ देखने लगते हैं। इसलिए आप प्राकृतिक एयर प्यूरिफायर का सहारा लें और खुद को फिजूलखर्च से बचाएं।

लंबे समय के लिए होते हैं एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स

एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स प्रकृति के साथ धीरे-धीरे बढ़ते हैं, लेकिन ये चलते लंबे समय के लिए है। जैसा कि आपको पता होगा कि नैचुरल एयर प्यूरीफायर ओजोन गैस रिलीज करता है। ये ओजोन गैस हमारे शरीर को करॉनिक डिजीज से ग्रसित कर देती है, लेकिन एयर प्यूरिफाइंग प्लांट्स ऐसा कत्तई नहीं करते हैं।

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वन टाइम इंवेस्टमेंट हैं एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स

अविषेक के मुताबिक हवा शुद्ध करने वाले पौधों के रखरखाव में बहुत अधिक लागत नहीं आती है। आपको बस एक बार निवेश करने की जरूरत है और फिर ये नैचुरल एयर प्युरिफायर आपके लिए सालों साल काम करेंगे। मात्र 1000 रूपए की लागत में हम घर में नैचुरल एयर प्युरीफायर ला सकते हैं।

एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स से घर भी दिखता है सुंदर

घर में इंसानों के साथ पौधे भी रहते हैं तो घर, घर लगता है। इसके अलावा आप चाहें तो सुंदर-सुंदर गमलों में साफ हवा के लिए पौधे लगा सकते हैं। आजकल तो बाजार में कई तरह के गमले उपलब्ध हैं, जिन्हें सजा कर हम एक पंथ दो काज कर सकते हैं। हवा भी शुद्ध होगी और देखने में घर भी सुंदर दिखेगा।

मच्छरों और कीड़े-मकोड़े को भी दूर रखते हैं एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स

कुछ पौधों की महक इतनी तीक्ष्ण होती है कि वे घर से मच्छरों और कीड़ों को दूर रखने में मदद करती है। तो फिर क्या मच्छर मारने की दवा का इस्तेमाल करने से अच्छा है कि आप एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स लगाएं और प्रदूषण व मच्छरों को दूर भगाएं।

एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स के लिए कौन से पौधे लगाएं?

स्नेक प्लांट

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स्नेक प्लांट एक एयर प्यूरीफाइंग प्लांट माना जाता है। यह घर की हवा में मौजूद बेन्जीन को साफ करता है और घर की हवा को शुद्ध बनाता है। साथ ही एंग्जायटी के कारण होने वाले सिरदर्द को भी दूर करता है। प्लांट एक्सपर्ट अविषेक ने बताया कि स्नेक प्लांट हवा को शुद्ध करने में सभी इनडोर प्लांट में सबसे अव्वल है। जिसके कारण हमारी एनर्जी लेवल में इजाफा होता है और एंग्जायटी कम होती है। स्नेक प्लांट हमारी एकाग्रता और नींद को दुरुस्त करता है।

नासा द्वारा की गई रिसर्च में ये बात सामने आई है कि स्नेक प्लांट एक CAM प्रकार का प्लांट है जो दिन के साथ-साथ रात में भी हवा को शुद्ध करने का काम करता है। इसकी पत्तियों के अवशोषक बेन्जीन, कार्बन डाइऑक्साइड और फार्मेल्डिहाइड जैसी गैसों को भी अवशोषित कर लेते हैं।

सबसे अच्छी बात ये है कि स्नेक प्लांट का ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत नहीं होती है। यह मिट्टी और पानी दोनों में सर्वाइव कर सकता है। अगर ये मिट्टी और पानी दोनों में न रहे तो भी दो महीनों तक जिंदा रह सकता है। इसे बहुत नाम मात्र का दो से तीन हफ्तों में पानी देना होता है।

एरेका पाम

एरेका पाम एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स में गिना जाता है। ये एयर प्यूरीफाइंग प्लांट भारत और मेडागास्कर में ज्यादा पाया जाता है। एरेका पाम को बटरफ्लाई पाम भी कहा जाता है। एरेका पाम की पत्तियां घर में नमी को बनाए रखती है। छह फीट लंबा एरेका पाम एक लीटर पानी को वाष्प के रूप में निकालता है। गर्मियों के दिनों में इससे पीले रंग के सुंदर फूल निकलते हैं।

एरेका पाम की पत्तियां देखने में बहुत अच्छी लगती हैं। ये हवा से पॉल्यूटेंट्स को भी कम करता है। क्योंकि ये एक एयर मॉश्चराज्ड प्लांट है जो, घर की नमी को सूखने नहीं देता है और शुद्ध हवा भी देता है।

प्लांट एक्सपर्ट अविषेक ने बताया कि एरेका पाम आउटडोर और इनडोर दोनों प्रकार का प्लांट है, लेकिन इसे धूप की जरूरत होती है, इसलिए इसे खिड़की के पास रखें। ताकि रोजाना हल्की धूप इसे लगती रहे। इसे आप रोजाना हल्का पानी देते रहें। इस पौधे का जीवन 10 साल का होता है। इसका ध्यान सिर्फ पानी देने के मामले में रखना होता है।

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सकुलेंट प्लांट्स

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सकुलेंट प्लांट बेहद खूबसूरत प्लांट्स होते हैं। सकुलेंट प्लांट को लोग अक्सर अपने दोस्तों को गिफ्ट करते हैं। सकुलेंट प्लांट की पत्तियां मोटी होती हैं और यह एलो और कैक्ट्स की तरह के होते हैं। सकुलेंट प्लांट्स की एक लंबी लिस्ट है। ये एक इनडोर प्लांट है, जिसका ध्यान काफी आसानी से रखा जाता है। सकुलेंट प्लांट्स अच्छे एयर प्यूरिफायर होते हैं। साथ ही ये घर में नमी को भी बनाए रहते हैं।

सकुलेंट प्लांट्स को उसकी टहनी से भी लगाया जा सकता है। ज्यादा पानी की जरूरत सकुलेंट प्लांट्स को नहीं होती है। इसे आधे दिन धूप में और आधा दिन छांव में रखें।

स्पाइडर प्लांट

Air purifying plants

स्पाइडर प्लांट जिसका वैज्ञानिक नाम क्लोरोफाइटम कोमोसम है। स्पाइडर प्लांट एक हवा शुद्ध करने वाले पौधे के रूप में जाना जाता है। इसकी पत्तियां मकड़ी के पैरों की तरह फैली रहती हैं, जिस कारण हम इसे स्पाइडर प्लांट कहते हैं। स्पाइडर प्लांट तेजी से बढ़ने वाला पौधा है। अगर इसे हम हैंगिंग बास्केट में लगाएंगे तो ये देखने में ज्यादा अच्छा लगता है। इस प्लांट को अपने वर्क स्पेस में लगाएं। कभी-कभी इससे सफेद रंग के फूल निकलते हैं, जो देखने में बेहद आकर्षक लगते हैं।

स्पाइडर प्लांट की लगभग 200 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। कई सारी प्रजातियां बिना किसी खास देखरेख के आसानी से सरवाइव कर सकती हैं। इसके अलावा ये एक नॉन-टॉक्सिक प्लांट है, जिससे बच्चों और पशुओं को किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं है। स्पाइडर प्लांट इनडोर पॉल्यूशन में फॉर्मेल्डिहाइड और जायलिन नामक पॉल्यूटेंट्स को खत्म करने में मददगार है। स्पाइडर प्लांट को हफ्ते में सिर्फ दो से तीन बार ही पानी देना होता है और ये हल्की धूप और छांव में रह सकने वाला प्लांट है।

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ड्रसीना (Dracaenas)

Air purifying plants

ड्रसीना को न्यूबी ग्रीन थंब्स ड्रीम कहते हैं। ये एक जाना माना हाउसप्लांट है। ये हर शेप, साइज और रंगों में नर्सरी में मिलता है। ये इनडोर पॉल्यूशन में मौजूद फॉर्मेल्डिहाइड, जायलिन, टाउलिन, ट्राईक्लोरोइथाइलीन आदि पॉल्यूटेंट को अवशोषित कर लेता है, लेकिन ड्रसीना जानवरों के लिए टॉक्सिक हो सकता है। कुत्ते और बिल्लियों को इससे उल्टियां हो सकती है या उनकी आंखें डाइलेट हो सकती हैं। वहीं, ड्रसीना को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती है। इसे दो हफ्ते में हल्का सा पानी दें।

एलोवेरा

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कांटों की तरह दिखने वाला और कई खूबियों से भरपूर एलोवेरा का पौधा गर्म और शुष्क इलाकों में पाया जाता है। एलोवेरा के पौधे का इस्तेमाल जेल बनाने और लैटेक्स बनाने के लिए किया जाता है। इसकी पत्तियों को बीच से काटने पर जो तरल पदार्थ निकलता है, उससे जेल का निर्माण किया जाता है। कई औषधीय गुणों से भरपूर एलोवेरा का इस्तेमाल कई तरह की दवाओं के निर्माण में भी किया जाता है। इसे सीधे दवाई के तौर पर भी खाया जा सकता है। कई त्वचा संबंधित समस्याओं में भी इसे उपचार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग एलोवेरा का इस्तेमाल वजन घटाने, मधुमेह, हेपेटाइटिस, आंतों की सूजन, पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस, पेट के अल्सर, अस्थमा, त्वचा के घावों, बुखार, खुजली और सूजन आदि समस्या में भी करते हैं।

एलोवेरा एक सीएएम (CAM) प्लांट है। CAM का पूरा नाम क्रैसुलेसियन एसिड मेटाबॉलिजम (Crassulacean acid metabolism) है। CAM प्लांट की खासियत होती है कि ये दिन भर एनर्जी को अवशोषित करते हैं और रात में ऑक्सीजन देते हैं। एलोवेरा बेन्जीन और फॉर्मल्डिहाइड जैसे प्रदूषक को भी साफ करने में माहिर है। ये काफी छोटा पौधा होता है और आप इसे एक सुंदर से गमले में कहीं भी लगा सकते हैं।

एलोवेरा का ज्यादा ध्यान नहीं रखना पड़ता है। ये एकदम लो मेंटेनेंस प्लांट है। इसे तीन दिन में एक बार पानी दें। ठंड के समय में इसे कम पानी दें और अगर गमले में नमी है तो पानी न दें।

इंग्लिश आईवी

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इंग्लिश आईवी एक एवरग्रीन क्लाइम्बिंग इनडोर एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स है। इंग्लिश आईवी की कई सारी अलग-अलग प्रजातियां आती हैं। यह प्रकाश की स्थिति पर निर्भर करता है, यानी कि इंग्लिश आईवी को कितने प्रकाश की जरूरत है। इंग्लिश आईवी को हैंगिंग बास्केट में लगाकर खिड़की पर टांगने से देखने पर अच्छा लुक आता है।

इंग्लिश आईवी बेन्जीन, कार्बन मोनोऑक्साइड, फॉर्मेल्डिहाइड, ट्राइक्लोरोइथाइलिन आदि पॉल्यूटेंट्स से हमारे घर को शुद्ध रखता है, लेकिन इंग्लिश आईवी जानवरों और इंसानों के लिए टॉक्सिक होता है। अगर गलती से किसी व्यक्ति या जानवर ने इंग्लिश आईवी खा ली तो उसे उल्टियां हो सकती है। इसके साथ ही अगर त्वचा इसके कॉन्टेक्ट में आई तो खुजली हो सकती है। इंग्लिश आईवी में बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है। इसे हर हफ्ते एक बार पानी दें।

चायनीज एवरग्रीन

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चायनीज एवरग्रीन एक सदाबहार एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स है। ये एशिया के जंगलों में पाया जाता है। इसकी रंग बिरंगी पत्तियां अनायास ही सभी का ध्यान आकर्षित कर लेती है, लेकिन चायनीज एवरग्रीन का ज्यादा ध्यान देना होता है। चायनीज एवरग्रीन बेंजीन, कार्बन मोनोऑक्साइड, फॉर्मेल्डिहाइड, ट्राईक्लोरोइथायलिन आदि को अवशोषित करता है। जिस कारण इसे हवा शुद्ध करने वाले पौधे के नाम से जाना जाता है।

चायनीज एवरग्रीन को पानी हफ्ते में दो से तीन बार देना होता है। इसके साथ ही इस पर रोजाना पानी का छिड़काव किया जाता है। इसके अलावा हर साल इसे निकालकर फिर से दूसरे गमले में लगाना पड़ता है। चायनीज एवरग्रीन कुत्ते के लिए टॉक्सिक होता है। ऐसे में अगर आपने कुत्ते को पाल रखा है तो उसकी पहुंच से चायनीज एवरग्रीन को दूर रखें।

पीस लिली

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नासा और एसोसिएट लैंडस्केप कॉनट्रैक्टर ऑफ अमेरिका ने पीस लिली को 1980 में खोजा था। पीस लिली टॉप 3 एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स की लिस्ट में शुमार है। एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स के रूप में जाने जाना वाली पीस लिली हमारे घरों से फॉर्मेल्डिहाइड, बेन्जीन, ट्राईक्लोरोइथायलीन, जायलीन, अमोनिया आदि जैसे घातक प्रदूषक को अवशोषित करता है। पीस लिली को खास तौर से अमोनिया को अवशोषित करने के लिए जाना जाता है।

हवा शुद्ध करने वाले पौधे पीस लिली को आप जिस गमले में लगाएं, उसमें नमी बरकरार रखें। इसके साथ ही इसे ऐसी जगह लगाएं, जहां धूप आती हो। क्योंकि हल्की या कम रोशनी में पीस लिली के फूल खिल नहीं पाते हैं। पीस लिली जानवरों और इंसानों के लिए टॉक्सिक होती है। पीस लिली देखने में बहुत खूबसूरत लगती है, लेकिन पीस लिली का लैटेक्स त्वचा पर जलन, सूजन या खुजली पैदा कर सकता है।

लकी बैम्बू

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लकी बैम्बू देखने में बांस का छोटा रूप लगता है। वास्तुशास्त्र के मुताबिक लकी बैम्बू को तोहफे के रूप में देने से व्यक्ति का भाग्य खुल जाता है। ये तो हो गई वास्तु की बात, लेकिन लकी बैम्बू को अगर आफ घर में रखेंगे तो घर जरूर साफ रहेगा। लकी बैम्बू बेहतरीन एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स है। जो एक छोटे से कटोरे में भी सालों साल सरवाइव कर लेता है। लकी बैम्बू बेन्जीन और फॉर्मेल्डिहाइड जैसे प्रदूषकों को अवशोषित करता है।

लकी बैम्बू को आप फ्रीज, डाइनिंग टेबल, स्टडी टेबल पर रख सकते हैं। इसे जिस बर्तन में रखें उसका पानी हर हफ्ते बदलते रहें। लकी बैम्बू को सीधे धूप में न रखें, वरना वह मुरझा सकता है और उसकी पत्तियां पीली पड़ सकती हैं।

बॉस्टन फर्न

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बॉस्टन फर्न ट्रॉपिकल फॉरेस्ट में पाया जाने वाला एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स है। बॉस्टन फर्न जायलिन और फॉर्मेल्डिहाइड नामक प्रदूषक को हवा से अलग करते हैं और हमें शुद्ध हवा देते हैं। इस प्लांट को बाथरूम में रखना चाहिए। इसे गमले में लगाकर बाथरूम में लगा दें, जिससे बॉस्टन फर्न में नमी बनी रहेगी।

क्राइसैंथेमम (chrysanthemum)

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क्राइसैंथेमम छोटे-छोटे महक वाले फूल होते हैं, जिसे हम घर में कहीं भी लगा सकते हैं। इसे किचन या लिविंग रूम में लगाया जा सकता है। क्राइसैंथेमम प्लास्टिक, डिटर्जेंट और गोंद से निकलने वाले एमोनिया और बेन्जीन जैसे पॉल्यूटेंट को अवशोषित कर हमारे घर की हवा को शुद्ध बनाता है। क्राइसैंथेमम को धूप काफी पसंद है, ऐसे में इसके गमले को खिड़की के पास ऐसी जगह रखें, जहां पर धूप आती हो।

वीपिंग फिग (Weeping Fig)

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वीपिंग फिग एक ऐसा हाउस प्लांट है जो विक्टोरियन काल से प्रसिद्ध है। वीपिंग फिग फॉर्मेल्डिहाइड, जायलिन और टाउनिन जैसे प्रदूषकों को साफ कर के घर में शुद्ध हवा देता है। ये एक बड़े पेड़ के रूप में विकसित होता है, जिसे आप चाहें तो बोनशाई की तरह घर में भी लगा सकते हैं। इसकी पत्तियां चौड़ी और घनी होती हैं। इसे रोशनी ज्यादा पसंद है। लेकिन इसे ऐसी जगह पर रखें, जहां पर इसे थोड़ी रोशनी और छांव मिलती रहे। एक बार आपने इसे लगा दिया तो ये सालों-साल के लिए हो जाएगा। इसके लिए इसे एक बड़े गमले में लगाया जा सकता है, इसमें हर हफ्ते में दो बार पानी दें।

डेनड्रॉबियम फैलेनॉप्सिस (Dendrobium Phalaenopsis)

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एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स में डेनड्रॉबियम फैलेनॉप्सिस का नाम शामिल है। ये ऑर्किड की तरह दिखने वाला एक खूबसूरत फूल है। ये घर की हवा में मौजूद जायलिन प्रदूषक, जो पेंट और गोंद ले निकलता है, उसे साफ करता है। इस तरह से डेनड्रॉबियम फैलेनॉप्सिस हमें सुंदर फूलों के साथ शुद्ध हवा देता है। इस प्रकार का ऑर्किड ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी एशिया में पाया जाता है। इस प्लांट को लगाना बहुत आसान है। बसंत के मौसम में इसके फूल निकलते हैं। इसे शुरुआत के दिनों में तेजी से बढ़ने के लिए तेज रोशनी में रखें। जब इसमें फूल आने लगे तो आप इसे छांव में रख दें। इससे फूल सीधे-सीधे आएंगे।

घर की हवा को प्यूरीफाई करने के अन्य तरीके

एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स के साथ हमें हवा को शुद्ध करने के लिए अन्य तरीकों को भी अपनाना चाहिए :

  • अपने घर के फर्श को साफ करें और पोछा लगाएं।
  • सिंथेटिक क्लीनर या एयर फ्रेशनर का इस्तेमाल न करें।
  • हवा में नमी को कम करें
  • घर में हवा के वेंटिलेशन को बढ़ाएं।

हमें उम्मीद है कि एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स पर लिखा गया यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स के बारे में अधिक जानकारी के लिए किसी एक्सपर्ट से संपर्क करें।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई मेडिकल जानकारी नहीं दे रहा है।

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सूत्र

The Best Air-Purifying Plants for Your Home https://www.healthline.com/health/air-purifying-plants Accessed on 25/3/2020

The best air purifying plants, according to NASA https://timesofindia.indiatimes.com/life-style/health-fitness/health-news/the-best-purifying-plants-according-to-nasa/photostory/68626731.cms Accessed on 25/3/2020

Plants can improve your work life https://www.sciencedaily.com/releases/2020/01/200102184829.htm Accessed on 25/3/2020

Interaction with indoor plants https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4419447/ Accessed on 25/3/2020

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Shayali Rekha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 26/03/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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