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जानिए किस तरह स्वास्थ्य के कई राज खोलती है जीन थेरिपी

जानिए किस तरह स्वास्थ्य के कई राज खोलती है जीन थेरिपी

जो भी जीवित प्राणी आप अपने आस-पास देख रहे हैं, उनका शरीर कई जरूरी कोशिकाओं से बना है, जिनकी संख्या अरबों से भी अधिक है। इन कोशिकाओं में हजारों जीन होते हैं, जिनका कार्य शरीर के विभिन्न कार्यों की क्षमता में योगदान देना होता है। ये जीन शरीर के विभिन्न कार्यों जैसे- खाना पाचन, ऊर्जा उत्पादन करने, शरीर की वृद्धि में करने वाली मांसपेशियों, हड्डियों और खून का निर्माण करने वाले प्रोटींस और एंजाइम का उत्पादन करते हैं।

क्या है जीन थेरिपी?

शरीर के अंदर पाई जाने वाली ऐसी जींस जो खराब हो चुकी हैं या उनका काम अनियंत्रित हो गया है, अब उन्हें बदला या प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इसे ही जीन थेरिपी कहा जाता है। किसी भी मनुष्य में जीन के कारण 5000 से अधिक बीमारियां उत्पन हो सकती हैं। जैसे- सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic Fibrosis), सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anaemia), हन्टिंग्टन कोरिया (Huntington’s Chorea), हंटर्स सिंड्रोम (Hunter’s Syndrome), हीमोफीलिया (Haemophilia) आदि, जिनके उपचार के लिए जीन थेरिपी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

हालांकि, अभी भी जीन थेरिपी के जरिए होने वाले उपचार पर प्रयोग चल रहा है। इसके तहत जब भी कोई जीन अपना रूप बदलता है या सही ढंग से काम नहीं करता है उसे शरीर से बाहर कर उसकी जगह दूसरी जीन को स्थापित किया जा सकेगा।

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जीन थेरिपी कैसे काम करती है?

जीन थेरिपी का उपयोग किसी बीमारी को ठीक करने के साथ ही, शरीर को बेहतर तरीके से लड़ने में मदद करने के लिए उस दोषपूर्ण जीन (जिस जीन को बदलना हो) को ठीक करने के लिए किया जाता है।

म्युटेशन जीन को बदलना : अगर जीन गलत तरीके से काम करने लगें या काम करना बंद कर दें, तो कुछ कोशिकाएं रोगग्रस्त हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में उन जीन की जगह पर नए जीन को प्रतिस्थापित किया जा सकेगा।

म्युटेशन जीन को ठीक करना : जीन थेरेपी की मदद से म्युटेशन जीन में हुई बीमारी को ठीक किया जा सकता है, जो रोग को बढ़ने से रोकने में मदद करेगा।

रोगग्रस्त कोशिकाओं को प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अधिक मजबूत बनाना : कुछ मामलों में, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली रोगग्रस्त कोशिकाओं को ठीक करने में असक्षम होती है, क्योंकि उन्हें ऐसी कोशिकाओं के बारे में पता ही नहीं चल पाता है। ऐसी स्थिति में भी डॉक्टर जीन थेरिपी का इस्तेमाल कर सकते हैं, ताकि प्रतिरक्षा प्रणाली को उन कोशिकाओं की पहचान हो सकें, जो शरीर के लिए खतरा है।

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कैसे आपके सेहत के बारे में बताएगी जीन थेरिपी

शरीर किस तरह की बीमारियों से ग्रसित है न सिर्फ इसकी, बल्कि भविष्य में शरीर किन तरह की बीमारियों से पीड़ित हो सकता है, जीन थेरिपी इसके बारे में भी बता सकती है। हालांकि, अभी तक सिर्फ आनुवंशिक बीमारियों, कुछ प्रकार के कैंसर और कुछ वायरल संक्रमण का इलाज ही जीन थेरेपी के जरिए किया जा सकता है।

जीन थेरेपी का प्रचलन अभी दुनिया में नया है। इस थेरिपी के जोखिमों को देखते हुए साल 2007 में अमेरिका में “अमेरिकन फूड और ड्रग प्रशासन” ने तीन प्रकार के जीन थेरिपी को मंजूरी दी है, जिनमें से दो तरह की थेरिपी कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने वाली कोशिकाओं को रिप्रोग्राम करते हैं जबकि, तीसरा किसी निश्चित जीन में म्युटेशन (जीन की बनावट में बदलाव) के कारण हुई खराबी को ठीक करता है।

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जीन थेरेपी कैसे की जाती है?

सबसे पहले खराब या क्षतिग्रस्त जीन का पता लगाया जाता है। फिर उसके खराब होने का कारण पता लगया जाता है, जिसके बाद उसी जीन की एक नई कॉपी उसकी जगह पर कोशिका में प्रत्यारोपित कर दी जाती है। हालांकि, नए जीन को सीधे कोशिका में प्रत्यारोपित नहीं किया जा सकता है क्योंकि, इसके परिणाम असफल हो सकते हैं। इसलिए, एक जेनेटिकली तौर पर बनाई गई वेक्टर नाम के वाहक से जीन को कोशिका में पहुंचाया जाता है। इसके लिए कुछ प्रकार के वायरस वेक्टर का उपयोग भी किया जा सकता है, ताकि कोशिका को किसी भी तरह का संक्रमण न हो।

हालांकि, यह सुनने में रोचक और आसान लग सकता है लेकिन, इसकी प्रक्रिया बहुत ही मुश्किल होती है। एक जरा-सी चूक जीवन के लिए घातक हो सकती है। उम्मीद है कि आने वाले समय में जल्द ही इसके सफल इलाज का प्रचलन देखा जाएगा, जिससे न सिर्फ होने वाली बीमारियों का इलाज किया जा सकेगा, बल्कि गर्भ से ही किसी भी अनुवांशिक बीमारी को भी रोका जा सकेगा।

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जीन थेरेपी का जोखिम

जीन थेरेपी बीमारी के इलाज या इलाज की प्रक्रिया में मदद करने के लिए खराब जीन को ठीक करने में मदद करती है, लेकिन इस थेरेपी को करवाने के कई जोखिम भी हो सकते हैं। किसी भी जीन को आसानी से कोशिकाओं के अंदर नहीं डाला जा सकता है। इसकी बजाए उसे एक वेक्टर की मदद से पहुंचाया जाता है।

जीन थेरेपी के सबसे सामान्य वाहक (वेक्टर) वायरस होते हैं, क्योंकि वह विशेष प्रकार की कोशिकाओं की पहचान कर सकते हैं और जेनेटिक मटेरियल को कोशिकाओं तक ले जा सकते हैं। शोधकर्ता रोग के कारण वाली जीन को हटा कर वायरस की मदद से उस जीन को वहां लगा देते हैं जो रोग को रोकने में मदद कर सके।

इस प्रक्रिया को अपनाने पर निम्न खतरों की आशंका बढ़ सकती है –

  • सुरक्षा प्रणाली में खराबी आना – आपकी बॉडी की सुरक्षा प्रणाली नए वायरस को एक बाहरी विषाक्त पदार्थ की तरह समझेगी जिसके कारण उसपर वह अटैक कर सकती है। इसके कारण सूजन और बेहद गंभीर मामलों में ऑर्गन फेल हो सकता है।
  • गलत कोशिका को टारगेट करना – वायरस एक से अधिक कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है जिसके कारण वह अन्य स्वस्थ कोशिकाओं को भी संक्रमित बना सकता है। यदि ऐसा होता है तो स्वस्थ कोशिकाओं भी खराब हो सकती है जिससे बीमारी और भी गंभीर हो सकती है। इसके अलावा इस स्थिति में कैंसर जैसा गंभीर रोग भी विकसित हो सकता है।
  • वायरस के कारण संक्रमण – वायरस शरीर में जाने के बाद हो सकता है अपनी असली क्षमताओं में वापस आ जाए जिससे वह बीमारी फैलाने का काम शुरू कर सकता है।
  • ट्यूमर होने का खतरा – अगर नया जीन डीएनए की गलत जगह पर घुस जाता है तो इसके कारण ट्यूमर होने की आशंका बेहद अधिक हो जाती है।

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परिणाम

जीन थेरेपी के सफल होने की संभावना बेहद अधिक होती है। क्लीनिकल ट्रायल में यह पाया गया है कि जीन थेरेपी की मदद से कुछ विशेष प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। जैसे की –

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लेकिन कई बाधाएं जीन थेरेपी के इलाज के एक विश्वसनीय रूप बनने की राह में परेशानियां डाल सकती हैं, जिनमें शामिल हैं –
  • सही कोशिका को टारगेट करना
  • एक भरोसेमंद जेनेटिक उत्पाद जिसे कोशिका में डाला जा सके
  • दुष्प्रभावों के खतरे को कम करना

जीन थेरेपी रिसर्च का एक बेहद महत्वपूर्ण एक्टिव एरिया है। जिस पर लगातार अध्ययन किए जा रहे हैं। इन शोध के जरिए जीन थेरेपी द्वारा कई बीमारियों के इलाज करने की कोशिश जारी है।

जीन थेरेपी को केवल क्लीनिकल ट्रायल में भाग लेकर ही करवाया जा सकता है। क्लीनिकल ट्रायल वह शोध होते हैं जिनमें डॉक्टर यह स्टडी करते हैं कि जीन थेरेपी व्यक्ति के लिए सुरक्षित है या नहीं। इसके साथ ही इन क्लीनिकल ट्रायल की मदद से डॉक्टर को यह भी जान पाते हैं कि जीन थेरेपी का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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Ankita mishra द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 13/08/2020 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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