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आखिर क्यों कुछ लोगों को गॉसिप करने में मजा आता है?

आखिर क्यों कुछ लोगों को गॉसिप करने में मजा आता है?

गॉसिप करना मुझे तो पसंद है लेकिन, मैं इसके लिए समय, स्थान और लोगों का ध्यान भी रखती हूं। गॉसिप करना न सिर्फ मुझ जैसी लाखों लड़कियों को, बल्कि हर उम्र की महिलाओं और पुरुषों को भी आदत होती है। क्योंकि, गॉशिप करना कोई जुर्म या गलत आदत नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।

हालांकि, हमारा सवाल यह है कि आखिर क्यों कुछ लोगों को गॉसिप करना क्यों पसंद होता है? गॉसिप की आदत स्वाभिक है या इसके पीछे किसी तरह की मानसिक बीमारी छिपी हो सकती है? तो चलिए जानते हैं, गॉशिप के पीछे छिपे मिथक और सच्चाई की कहानी।

गॉसिप करने की आदत

आमतौर पर दोस्तों के बीच बातचीत करने की आदत को भी एक तरह से गॉसिप ही कहा जा सकता है। लेकिन, गॉसिप का जिक्र होते ही, महिलाओं की छवि ऊभर कर आती है, जो किसी दूसरी या तीसरी महिला से किसी अन्य के बारे में चुगली करती रहती हैं।

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गॉसिप के प्रकार

गॉसिप को हम दो श्रेणियों में बांट सकते हैं। पहला, मन बहलाने के लिए की गई बातचीत और दूसरा किसी के बारे में गलत अवधारणा किसी अन्य से व्यक्त करना।

अगर गॉसिप पहली श्रेणी का है, तो यह एक अच्छी आदत मानी जाती है। इस मसले पर अमेरिकन साइकोलॉजी एसोसिएशन ने अपना एक सर्वे जारी किया था, जिसके मुताबिक, हल्की-फुल्की गपशप मन को तरोताजा रखती है। साथी ही, काम करने की क्षमता बढ़ाने में मददगार भी होती है।

लेकिन, अगर दूसरी श्रेणी की बात की जाए, तो यह मस्तिष्क में अक्सर नकारात्मक धारणाओं का विकास कर सकती है। अमेरिकी वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. भावना वर्मी की मानें तो “गॉसिप एक तरह से शरीर और मन के लिए टॉनिक का काम करता है। गॉसिपिंग एक सोशल स्किल है। गॉसिप के जरिए हम आपने आस-पास के लोगों से जल्दी घुल-मिल सकते हैं।”

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यकीन दिलाने में आसान

मनोवैज्ञानिकों की मानें तो उनका कहना है, “अगर किसी शख्स को कोई बात गॉसिप के जरिए पता चलती है, तो वह उस बात पर बिना कुछ सोचे-समझे यकीन कर सकता है।”

तनाव दूर करे

कई बार गॉसिप करने से तनाव भी दूर हो सकता है। दरअसल, गॉशिप के दौरान ज्यादा सेंसटिव और भावुक होने पर लोग कई बार भावनाओं में बहकर अपने सीक्रेट्स दूसरों के साथ शेयर कर देते हैं, जिससे उनके मन की बात दूसरों तक आसानी से पहुंच जाती है, वो खुद के तनाव में कमी महसूस कर सकते हैं।

महिलाओं के बारे में चौकाने वाली बात

एक नए यूसी रिवरसाइड अध्ययन के मुताबिक, महिलाएं गॉशिप को सिर्फ मनोरंजन के तौर पर लेती हैं। जबकि, पुरुष गॉशिप के दौरान अपनी निजी समस्याओं के बारे में भी बात करते हैं। इस अध्ययन के मुताबिक, प्रति व्यक्ति एक दिन में कम से कम 52 मिनट तक गॉसिप करता है।

इस शोध में वैज्ञानिकों ने कुछ 467 लोगों को शामिल किया, जिसमें 269 महिलाओं और 198 पुरुषों को शामिल किया। इनकी उम्र 18 से 58 साल थी। शोध में शामिल सभी प्रतिभागियों को पोर्टेबल डिवाइस पहनने के लिए दिया गया, जिसके जरिए उनकी दिनभर की गई बातों का 10 फीसदी हिस्सा रिकॉर्ड किया गया। इसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से सक्रिय रिकॉर्डर या ईएआर कहा जाता है।

इसके बाद, वैज्ञानिकों ने उनकी रिकॉर्ड की गई बातों का परीक्षण किया, जिसमें उन्हें गॉसिप के कुल 4,003 रिकॉर्ड मिले। इस गॉसिप को उन्होंने तीन श्रेणियों में बांटाः सकारात्मक, नकारात्मक और तटस्थ।

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नतीजा हैरान करने वाला था

इस शोध में पाया गया कि कम उम्र के लोग बड़े उम्र के लोगों के मुकाबले अधिक नकारात्मक गॉसिप करते हैं।
शोध में शामिल लगभग 14 फीसदी प्रतिभागियों की बातचीत गपशप थी, इनमें लगभग तीन-चौथाई गॉसिप तटस्थ थी। वहीं, नकारात्मक गॉशिप सकारात्मक से कहीं ज्यादा थी।

शोध में यह भी पाया गया कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक गपशप करती हैं लेकिन, वे केवल तटस्थ, सूचना देने या जानकारी समझने के बारे में ज्यादा बात करती हैं।
इसके अलावा, यह भी पाया गया कि गरीब, कम शिक्षा वाले लोग धनी, बेहतर शिक्षित लोगों की तुलना में उतनी ही गॉसिप करते हैं। अब अगर अगली बार जब भी आप गॉसिप करें, तो जरा सभंल कर करें क्योंकि, आपकी गॉसिप आपके विश्वास के मायने को तय करता है।

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सूत्र

https://medicalxpress.com/news/2019-05-myths-gossip.html

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Ankita mishra द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 12/03/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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