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पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का निधन, सारकोमा सॉफ्ट टिशू कैंसर से थे पीड़ित

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का निधन, सारकोमा सॉफ्ट टिशू कैंसर से थे पीड़ित

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। एम्स से जारी किए गए बयान में बताया कि 24 अगस्त को 12 बजकर 7 मिनट पर माननीय सांसद अरुण जेटली अब हमारे बीच में नहीं रहे। अरुण जेटली को सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी की शिकायत के बाद 9 अगस्त को एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरूवार को उनका डायलिसिस किया था लेकिन, शुक्रवार से हालत बिगड़ने लगी थी।

पिछले कुछ महीनों में वित्त मंत्री अरुण जेटली की सेहत लगातार गिर रही थी। खराब सेहत की वजह से ही उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था। उन्हें को किडनी संबंधी बीमारी थी जिसकी वजह से इसी साल 14 मई को एम्स में उनके गुर्दे का ट्रांसप्लांट किया गया था। वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली एक अनुभवी राजनेता के साथ-साथ जाने-माने वकील भी थे।

किडनी की परेशानी के साथ-साथ जेटली कैंसर से भी जूझ रहे थे। उनके बाएं पैर में सॉफ्ट टिशू सारकोमा कैंसर था। यह रेयर कैंसर की केटेरगरी में आता है। उनके बाएं पैर में इस कैंसर का असर था। इसी कैंसर का इलाज करवाने के लिए वह अमेरिका भी गए थे। इसके बाद उनको कीमो थेरिपी भी दी गई थी, लेकिन उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। आखिरकार उनका निधन हो गया।

और पढ़ें – Cancer: कैंसर क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपचार

क्या होता सारकोमा सॉफ्ट टिशू कैंसर? (Sarcoma soft tissue cancer)

सारकोमा एक ऐसा कैंसर है जो बॉडी में विभिन्न जगहों पर हो सकता है। सारकोमा कई सारे कैंसर जो हड्डियों और सॉफ्ट टिशू से शुरू होते हैं के लिए एक व्यापक शब्द है। हमारे शरीर में कई तरह के सॉफ्ट टिशू ट्यूमर होते हैं। सभी सॉफ्ट टिशू कैंसरस नहीं होते। सॉफ्ट टिशू में कई मामूली ट्यूमर होते हैं। इनमें कैंसर नहीं होता और न ही ये शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल पाते। सॉफ्ट टिशू सारकोमा उन टिशूज से बनते हैं जो बॉडी को सपोर्ट, कनेक्ट करने के साथ ही उसे स्ट्रक्चर देने का काम करते हैं। इसमें मसल्स, फैट, ब्लड वेसल्स, नर्व, टेंडन्स और ज्वॉइंट शामिल हैं। यह कैंसर 50 प्रकार का होता है। शरीर में इसका पता लगा पाना बेहद मुश्किल होता है।

शरीर के इन हिस्सों में शुरू होता है सारकोमा सॉफ्ट टिशू कैंसर (Sarcoma soft tissue cancer)

सारकोमा एक तरह का कैंसर होता है जो मांसपेशियों या हड्डी के टिशू से शुरू होता है। सॉफ्ट टिशू सारकोमा मसल्स, नर्व्स, टिशू, फाइबर, फैट या स्किन टिशू में विकसित होता है। ये शरीर के किसी भी हिस्से में शुरू हो सकता है लेकिन ज्यादातर इसकी शुरुआत हाथ या पैर से होती है। शरीर के जिस हिस्से में सारकोमा सॉफ्ट टिशू कैंसर बढ़ता है वहां सूजन और हल्का दर्द होता है। जिस जगह पर यह होता है उसके आसपास के अंगों की कार्यक्षमता पर इसका असर पड़ता है। ज्यादातर यह जोड़ों, पेट और मांसपेशियों में पनपता है।

और पढ़ें – ट्रिपल-नेगिटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) क्या है ?

सारकोमा सॉफ्ट टिशू कैंसर (Sarcoma soft tissue cancer) के लक्षण

यदि आपको इनमें से कोई लक्षण नजर आए तो जरूरी नहीं है कि ये सारकोमा के ही लक्षण हो। हो सकता है ये किसी अन्य बीमारी के लक्षण हो, लेकिन इनमें से कोई लक्षण नजर आने पर हल्के में न लें। तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श लें। शरीर के किसी भी हिस्से में गठान बनना इस कैंसर की पहचान है। वक्त रहते इसका इलाज किया जा सकता है। इसमें सर्जरी के जरिए इसकी गठान को बाहर निकाला जाता है। आपकी जरा सी लापरवाही आपके लिए हानिकारक हो सकती है। यह कैंसर शरीर में तेजी से नहीं फैलता है। यह हाथ- पैर के अलावा शरीर के अंदरूनी अंगो में भी हो सकता है। बहुत सारे मरीजों में इस कैंसर की गठान पेट के अंदर बनती देखी गई है। पेट में जो गठान बनती है उसे निकाल पाना बेहद मुश्किल होता है।

और पढ़ें – रेड मीट बन सकता है ब्रेस्ट कैंसर का कारण, इन बातों का रखें ख्याल

सारकोमा सॉफ्ट टिशू कैंसर (Sarcoma soft tissue cancer) का ट्रीटमेंट

सारकोमा सॉफ्ट टिशू कैंसर में सर्जरी के जरिए गठान को बाहर निकाल इसे खत्म किया जाता है। कुल कैंसर पेशेंट्स में 1% पेशेंट्स में यह देखने को मिलता है। यह बच्चों से लेकर बड़ों को अपना शिकार बनाता है। इस दुर्लभ किस्म के कैंसर का सफल इलाज ट्यूमर के आकार और कैंसर की स्टेज पर निर्भर करता है। इसकी सर्जरी के बाद रेडिएशन थैरिपी और कीमो थैरिपी की जाती है। इसकी सर्जरी में 30 से 50 हजार रुपए खर्चा आता है।

सारकोमा सॉफ्ट टिशू कैंसर (Sarcoma soft tissue cancer) होने के पीछे क्या कारण हैं?

सारकोमा सॉफ्ट टिशू कैंसर किन कारणों से होता है इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। कई अध्ययनों में निम्नलिखित कारणों का अनुमान लगाया गया है:

  • कुछ खास जीन और डीएनए कोशिकाओं में गड़बड़ इसकी वजह मानी जाती है।
  • रेडिएशन की अधिक मात्रा से सॉफ्ट टिशू को होने वाला नुकसान भी इसकी वजह है।
  • प्लास्टिक और लकड़ी पर किए जाने वाले लेप में मौजूद विनाइल क्लोराइड, क्लोरोफिनॉल आदि कैमिकल से इसके होने की आशंका जताई गई है।

और पढ़ें – गृह मंत्री अमित शाह भी आए कोरोना की चपेट में, देश में नहीं थम रही कोरोना की रफ्तार

यदि आपको स्टूल यानी मल काला आ रहा है या फिर उसमें ब्लीडिंग हो रही है तो तुरंत अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें। इसके अलावा खून में उल्टी आने पर भी आप डॉक्टर दिखाएं। यदि डॉक्टर को आपके लक्षण देखकर लगता है कि आपको सरकोमा हो सकता है तो वो आपको फिजिकल एग्जामिनेशन कराने के लिए कहेंगे। इसकी जांच के लिए एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई का सहारा लिया जाता है।

हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में सारकोमा सॉफ्ट टिशू कैंसर से जुड़ी ज्यादातर जानकारियां देने की कोशिश की है, जो आपके काफी काम आ सकती हैं। अगर आपको ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत जांच कराएं और वक्त रहते इसका इलाज कराएं। सारकोमा सॉफ्ट टिशू कैंसर से जुड़ी यदि आप अन्य जानकारी चाहते हैं तो आप हमसे कमेंट कर पूछ सकते हैं। इसके अलावा आपको हमारा लेख कैसा लगा यह आप हमें कमेंट कर बता सकते हैं।

नोट : नए संशोधन की डॉ. प्रणाली पाटील द्वारा समीक्षा

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Indian FM Arun Jaitley diagnosed with rare cancer/https://www.khaleejtimes.com/international/india/indian-minister-diagnosed-with-rare-cancer 

(Accessed on 23-12-2019)

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https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/soft-tissue-sarcoma/symptoms-causes/syc-20377725

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What Is a Soft Tissue Sarcoma?/https://www.cancer.org/cancer/soft-tissue-sarcoma/about/soft-tissue-sarcoma.html

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Soft tissue sarcoma/https://www.cancercenter.com/cancer-types/soft-tissue-sarcoma

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Soft Tissue Sarcoma/https://medlineplus.gov/softtissuesarcoma.html

(Accessed on 23-12-2019)

लेखक की तस्वीर
Dr. Shruthi Shridhar के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Manjari Khare द्वारा लिखित
अपडेटेड 24/08/2019
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