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भारत के वो शहर जहां सबसे ज्यादा है डेंगू का खतरा

भारत के वो शहर जहां सबसे ज्यादा है डेंगू का खतरा

डेंगू मच्छरों से फैलने वाला एक संक्रमण है जिसके चार प्रकार (DENV-1, DENV-2, DENV-3, DENV-4) हैं। यह वायरस संक्रमित एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस मादा मच्छरों के काटने से फैलता है, जो दिन के दौरान (सुबह से शाम तक) ही काटता है। डेंगू पानी के टैंक, कंटेनर और पुराने टायर में जमे हुए पानी की वजह से फैलता है। साफ-सफाई के अभाव में भी डेंगू का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में लगभाग पूरे भारत में ही डेंगू का खतरा मंडरा रहा है।

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इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर मेडिकल असिस्टेंस टू ट्रैवेलर्स (IAMAT) के अनुसार भारत में निम्नलिखित जगहों पर डेंगू का खतरा देखा गया है।

भारत के इन शहरों को है डेंगू का खतरा:

  • आंध्र प्रदेश
  • असम
  • बिहार
  • छत्तीसगढ़
  • दिल्ली
  • हरियाणा
  • हिमाचल प्रदेश
  • कर्नाटक
  • केरल
  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • झारखण्ड
  • नागालैंड
  • ओडिशा
  • पंजाब
  • राजस्थान
  • तेलंगाना
  • उत्तराखंड
  • वेस्ट बंगाल

साल 2018 और 2019 के एक आंकड़ों पर गौर करें तो देखा जा सकता है:

  • तमिलनाडु में जून 2018 में 98 डेंगू के मरीज थे, वहीं जून 2019 में 1100 डेंगू के पेशेंट देखे गए।
  • पॉन्डिचेरी में जून 2018 में 2 डेंगू के मरीज थे, वहीं जून 2019 में 295 डेंगू के पेशेंट देखे गए।
  • तेलंगाना में जून 2018 में 33 डेंगू के मरीज थे, वहीं जून 2019 में 953 डेंगू के पेशेंट देखे गए।
  • कर्नाटक में जून 2018 में 415 डेंगू के मरीज थे, वहीं जून 2019 में 1933 डेंगू के पेशेंट देखे गए।
  • महाराष्ट्र में जून 2018 में 550 डेंगू के मरीज थे, वहीं जून 2019 में 969 डेंगू के पेशेंट देखे गए।

अगर सिर्फ इन दो सालों के आंकड़ों को देखें तो भारत के इन 5 राज्यों में डेंगू का खतरा कम नहीं हुआ है और साथ इसके मरीज भी कम नहीं हुए हैं बल्कि डेंगू के पेशेंट बढ़े ही हैं। इस लिए डेंगू के लक्षणों को समझना बेहद जरूरी हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं:

  • अचानक से तेज बुखार होना।
  • अत्यधिक सिरदर्द होना।
  • आंखों में तेज दर्द होना।
  • मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द होना।
  • थका हुआ महसूस होना।
  • बार-बार उल्टी जैसा महसूस होना या उल्टी आना।
  • त्वचा पर लाल निशान होना (2 से 5 दिनों तक ऐसे निशान रहते हैं)।
  • नाक या मसूड़ों से हल्का खून आना।
  • प्लेटलेट्स कम होता है।
  • डेंगू किसी भी उम्र में हो सकता है।

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किन कारणों से होता है डेंगू?

  • एडीज मच्छर काटने और साफ-सफाई नहीं रखने के कारण डेंगू का बुखार होता है।
  • डाइग्नोस्टिक टेस्ट- NS1 एंटीजीन टेस्ट, डेंगू IgG, डेंगू IgM एंटीजेन टेस्ट ।

रिसर्च के अनुसार अगर आप यात्रा ज्यादा करते हैं, तो आपको डेंगू का खतरा हो सकता है ऐसे में निम्लिखित बातों का ध्यान रखें:

  • डेंगू का खतरा कम करने के लिए ऐसी बॉडी क्रीम का इस्तेमाल करें, जिनमें 20%-30% डाइएथिलमाइड (diethyltoluamide/DEET) या 20% पिकार्डियन की मात्रा हो। इस क्रीम को वैसे ही लगाएं जैसे सलाह दी गई हो।
  • अगर आप सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो एंटी डेंगू क्रीम लगाने के 20 मिनट बाद सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।
  • हल्के रंग के और शरीर को पूरी तरह से ढ़कने वाले कपड़े पहनें।
  • जहां आप रहने वालें हो वहां यह जरूर देखें की खिड़कियां ठीक से बंद होती हैं या नहीं, आसपास कहीं पानी न जमा हो और साफ-सफाई है या नहीं।
  • ट्रॉपिकल और सबट्रॉपिकल एरिया में डेंगू का खतरा ज्यादा होता है। इन इलाकों में यात्रा करने वाले भी डेंगू को एक जगह से दूसरी जगह ला सकते हैं।

डेंगू से रिस्क:

डेंगू (dengue) की गंभीर स्थिति के संकेतों और लक्षणों को पहचानें, जो शुरूआती बुखार के जाने के बाद 24-48 घंटे में उभरते हैं। यदि आप या आपके परिवार के सदस्य में इनमें से कोई संकेत दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं-

  • पेट में तेज दर्द या उल्टी (24 घंटे में कम से कम 3 उल्टी)
  • नाक या मसूड़ों से खून बहना
  • उल्टी या दस्त में खून आना
  • सुस्ती या चिड़चिड़ाहट
  • त्वचा का पीला व ठंडा पड़ना (कभी-कभी चिपचिपी त्वचा के लक्षण भी मिलते हैं)
  • सांस लेने में कठिनाई

डेंगू का खतरा कम करने के लिए उठाएं ये कदम

कई सरकारी संगठन डेंगू से लड़ने के लिए कई तरह के प्रयास कर रहे हैं। वर्तमान में उनके प्रयास रोकथाम पर केन्द्रित हैं, जैसे कीटनाशकों का उपयोग या डेंगू मच्छरों के संभावित आवासों को नष्ट करना। हालांकि, डेंगू बुखार की रोकथाम के लिए कोई टीका नहीं है। इसलिए, मच्छर के काटने से बचना जरूरी है। यदि आप उष्णकटिबन्धीय क्षेत्र (Tropical region) में रहते हैं या वहां की यात्रा करते हैं। निम्नलिखित तरीकों से आप खुद को बचा सकते हैं :

  • यदि संभव हो, तो अत्यधिक आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों से दूर रहें।
  • घर के अंदर भी मच्छरों को दूर भगाने वाली वस्तुओं का उपयोग करें।
  • फुल आस्तीन वाली शर्ट और फुल पैन्ट पहनकर बाहर जाएं।
  • मच्छरदानी का उपयोग करें।
  • अंधेरे कोनों (बिस्तर, सोफे के नीचे और पर्दों के पीछे) में कीटनाशक स्प्रे का उपयोग करें।
  • ध्यान दें गमलों की मिट्टी गीली न रहे।
  • अपनी सोसायटी के भीतर और आस-पास जमा पानी को हटाएं।
  • पानी के सभी बर्तन खाली होने पर उन्हें उल्टा रखें और उन्हें छाया में रखें।

सेक्सुअली ट्रांसफर भी हो सकता है डेंगू वायरस

‘द टेलीग्राफ’ की खबर के अनुसार, सितंबर में इस व्यक्ति का डेंगू टेस्ट पॉजिटिव आया था, हालांकि शुरू में यह पता नहीं चल पाया कि उसके अंदर यह वायरस कहां से आया, क्योंकि वह जिस क्षेत्र में रहता हैं, वहां अब तक ऐसा कोई केस रिकॉर्ड नहीं हुआ था। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि यह वायरस उन्हें ऐसे क्षेत्र से मिला जिसे इस इंफेक्शन का हॉटस्पॉट माना जाता है।

इसके बाद में यह इंफेक्शन उस व्यक्ति से उसके मेल पार्टनर में सेक्सुअली ट्रांसफर हुआ। स्पेन की एक स्वास्थ्य अधिकारी सुसाना हिमिनेज ने मीडिया को बताया कि दस दिन पहले उसके साथी के अंदर भी उस वायरस की तरह लक्षण दिखे। लेकिन, उसके साथी के मुकाबले ये सारे लक्षण कम थे। वह पहले क्यूबा और डोमिनिकन रिपब्लिक का दौरा कर चुका था। उसके स्पर्म की जांच की गई और यह पता चला कि न केवल उसे डेंगू था, बल्कि वह वायरस भी पाया गया, जो केवल क्यूबा में फैलता है।

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सूत्र

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Everything you need to know about Dengue fever- https://www.medicalnewstoday.com/articles/179471.php – accessed on 30/01/2020

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Fifty years of dengue in India Accessed on 06/12/2019

South India under the grip of dengue again Accessed on 06/12/2019

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Dengue fever – including symptoms, treatment and prevention Accessed o/ 06/12/2019/

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लेखक की तस्वीर
Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 30/01/2020 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड