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कोरोना महामारी के कारण हाथ मिलाने से डर रहे हैं लोग, तो क्या महामारी के कारण हैंडशेक का हो जाएगा अंत ?

कोरोना महामारी के कारण हाथ मिलाने से डर रहे हैं लोग, तो क्या महामारी के कारण हैंडशेक का हो जाएगा अंत ?

हैंडशेक यकीनन पाश्चात्य सभ्यता की निशानी माना जाता है। विदेशों में हैंडशेक अभिवादन करने के लिए प्रचलित तरीका भी माना जाता है। अभिवादन करने की ये परंपरा आज से नहीं बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही है। ऐसा नहीं है कि भारत में लोग हैंडशेक नहीं करते हैं, बल्कि भारत में अभिवादन के लिए नमस्ते सबसे पहले किया जाता है। कॉर्पोरेट वर्ल्ड में चाहे वो भारत का हो अन्य देशों का, हैंडशेक के बिना किसी काम की शुरुआत अधूरी सी मानी जाती है। पिछले कुछ महीनों में कोरोना महामारी से बचने के लिए दुनियाभर में लोग एक -दूसरे के पास जाने से भी डर रहे हैं। हाथ मिलाना तो दूर की बात है, लोग घरों के अंदर कुछ समय से बंद हैं ताकि कोरोना के संक्रमण से बचाव किया जा सके। कोविड-19 और हैंडशेक का भविष्य क्या है, इसके बारे में कह पाना बहुत मुश्किल है। कोरोना महामारी खत्म हो जाने के बाद ये परंपरा जारी रहेगी या नहीं, इस बारे में एक बार आपको भी सोचना चाहिए।

कोविड-19 और हैंडशेक

अभी तक कोरोना वायरस की वैक्सीन इजाद नहीं हुई है और लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखने की सलाह दी जा रही है। अब चूंकि दुनियाभर में लोगों के बीच कोरोना महामारी का डर बैठ चुका है, इसलिए लोग घर से बाहर निकलने पर लोगों से बात भी नहीं कर रहे हैं। हो सकता है कि वैज्ञानिकों की मेहनत रंग लाए और कुछ महीनों बाद कोरोना महामारी पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया जा सके। लेकिन महामारी के बाद क्या लोग एक-दूसरे से पहले की हाथ मिला पाएंगे या फिर सोशल डिस्टेंसिंग के तहत हैंडशेक पूरी दुनिया में समाप्त हो जाएगा ?

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कोविड-19 और हैंडशेक (Covid-19 and Handshake) का संबंध क्या है ?

कोविड-19 और हैंडशेक का संबंध दुनिया में कोरोना महामारी शुरू होने के दौरान ही शुरू हुआ था। अमेरिका के साथ ही कई देशों के प्रमुख ने मीटिंग के दौरान हैंडशेक करने के बजाय नमस्ते या फिर दूर से अभिवादन करना ही बेहतर समझा। इस बारे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शस डीजीजेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एंथनी फॉसी ने एक अहम बात कही है। कोरोना महामारी के दौरान मुख्य भूमिका निभाने वाले एंथनी फॉसी ने स्ट्रीट जनरल से कहा था कि ” मैं मन से कह रहा हूं कि अब हम शायद ही कभी किसी से हाथ मिलाएं”। आपको सुनकर हैरानी हो सकती है लेकिन ये सच है कि कोरोना जैसी महामारी के पूरी दुनिया में छाने के बाद भविष्य में अभिवादन की परंपरा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अगर एंथनी फॉसी की बात सच हो गई तो मानव इतिहास में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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कोविड-19 और अभिवादन की परंपरा : छोड़नी पड़ेगी ये परंपरा

यूएस की मेडिकल रिचर्स इंस्टीट्यूट की मेयो क्लीनिक की इंफेक्शियस डिसीज एक्सपर्ट ग्रेगरी पोलैंड की इस बारे में खास राय है। वो कहती हैं कि फिलहाल हाथ मिलाने के आगे की हाथ बढ़ाना यानी बायोवेपंस (जैविक हथियार) को तानने जैसा है। इसे जैविक हथियार इसलिए कहा क्योंकि हाथ मिलाने से कोरोना वायरस का संक्रमण आसानी से एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है। ऐसे में वर्तमान और भविष्य में अभिवादन की परंपरा यानी हैंडशेक से दूरी बनाना ही उचित होगा। हो सकता है कि आपके लिए फिलहाल इस बात पर अमल करना कुछ मुश्किल लग रहा हो। जिस तरह से लोग सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर पहले कुछ परेशान दिखे थे, लेकिन बाद में लोगों को इसकी आदत पड़ गई। अब जब भी कोई घर से बाहर निकलता है तो उसे इस बात का पूरा ख्याल रहता है कि भीड़ में बिल्कुल नहीं जाना है। ठीक इसी तरह से लोग हाथ मिलाने की इस परंरपरा को पूरी भविष्य में पूरी तरह से खत्म कर सकते है।

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कोविड-19 और हैंडशेक : यहां से आया हैंडशेक का चलन

हैंडशेक हम सभी लोग करते हैं और ये भी जानते हैं कि हैंडशेक हमारे देश की अभिवादन की परंपरा कभी नहीं रहा है। मिस्र और मेसोपोटामिया से लेकर यूनानी सभ्यता के कला और साहित्य में हाथ मिलाने के साक्ष्य मिलते हैं। बेबीलोनिया की प्रस्तर मूर्तियों और होमर के महाकाव्यों में हाथ मिलाने का जिक्र साफ तौर पर मिल जाएगा। सभ्याताओं के अनुसार, राइट हैंड इस बात की ओर इशारा करता है कि उस व्यक्ति के पास कोई भी हथियार नहीं है। यानी जो व्यक्ति दांया हाथ आगे बढ़ाएं, उस पर विश्वास किया जा सकता है। वहीं शास्त्रीय कला परम्पराओं में दांए हाथ का प्रयोग विवाह संबंध, शासकों के बीच संबंध और साथ काम करने या नए सम्बन्ध स्थापित करने आदि स्थितियों में प्रतीक के रूप में माना जाता है। ये बात सच है कि आज के समय में हाथ मिलाने के मायने काफी बदल चुके हैं। व्यवसायिक दुनिया में हाथ मिलाने का मतलब अजनबियों से बातचीत की शुरुआत करना होता है। कोरोना महामारी के बाद क्या ये परंपरा जिंदा रहेगी, इस बारे में कल्पना करना फिलहाल कठिन है।

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भयंकर बीमारी के बाद इस देश में बंद हो गई थी ये परंपरा

कोविड-19 और हैंडशेक पर सवाल उठना इसलिए भी जायज है क्योंकि फ्रांस में ब्लैक प्लेग के बाद सदियों तक गालों में किस का आदान-प्रदान बंद हो गया था। हो सकता है कि हैंडशेक का भविष्य भी ऐसा ही हो। ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत में ही अभिवादन के दौरान शारीरिक संपर्क नहीं होता है। जापान में लोग एक-दूसरे को झुक कर अभिवादन करते हैं। ये परंपरा भी कई लोगों की पसंदीदा है। जबकि इटली के साथ ही अन्य देशों में अभिवादन के दौरान गालों पर चुंबन का आदान-प्रदान किया जाता है। कोरोना महामारी के कारण अभिवादन की कई परंपराओं पर सवाल उठ सकते हैं। इस बारे में ग्रेगरी पोलैंड कहते हैं कि हम सभी लोगों को अभिवादन की नई परंपरा के तौर पर ‘ सिर को हल्का सा झुकाना’ सीख लेना चाहिए। टोरंटो विश्वविद्यालय में, ऑर्गनाइजेशन बिहेवियर की प्रोफेसर तीजियाना कासकियारो कहती हैं कि कोरोना महामारी के बाद कई लोग हाथ मिलाने से बचेंगे। हो सकता है कि अभिवादन का अन्य तरीका इजाद कर लिया जाए।

कोरोना वायरस से बचने के लिए लॉकडाउन का पालन करें। घरों से बाहर निकलने पर सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

(Accessed on 20/4/2020)

Nice To Meet You, But How To Greet You? #NoHandshake Leaves Businesspeople Hanging

https://www.npr.org/2020/03/12/814076913/nice-to-meet-you-but-how-to-greet-you-nohandshake-leaves-businesspeople-hanging

Coronavirus disease (COVID-19) outbreak – https://www.who.int/westernpacific/emergencies/covid-19

Coronavirus – https://www.who.int/health-topics/coronavirus

Coronavirus (COVID-19) – https://www.cdc.gov/coronavirus/2019-ncov/index.html

Coronavirus (COVID-19) – https://www.nhs.uk/conditions/coronavirus-covid-19/

Novel Corona Virus – https://www.mohfw.gov.in/

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/06/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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