home

हम इसे कैसे बेहतर बना सकते हैं?

close
chevron
इस आर्टिकल में गलत जानकारी दी हुई है.
chevron

हमें बताएं, क्या गलती थी.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
इस आर्टिकल में जरूरी जानकारी नहीं है.
chevron

हमें बताएं, क्या उपलब्ध नहीं है.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
हम्म्म... मेरा एक सवाल है
chevron

हम निजी हेल्थ सलाह, निदान और इलाज नहीं दे सकते, पर हम आपकी सलाह जरूर जानना चाहेंगे। कृपया बॉक्स में लिखें।

wanring-icon
यदि आप कोई मेडिकल एमरजेंसी से जूझ रहे हैं, तो तुरंत लोकल एमरजेंसी सर्विस को कॉल करें या पास के एमरजेंसी रूम और केयर सेंटर जाएं।

लिंक कॉपी करें

बिहार में डेंगू व चिकनगुनिया का प्रकोप, जानें इसके लक्षण और इलाज

बिहार में डेंगू व चिकनगुनिया का प्रकोप, जानें इसके लक्षण और इलाज

इस साल बिहार में आई बाढ़ से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अभी बाढ़ से राहत मिली नहीं थी कि पूरे बिहार में डेंगू का कहर टूटा है। बाढ़ और जलजमाव में मच्छर पनपने से अब तक बिहार में डेंगू और चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारी के 1400 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ गए हैं। सरकार लोगों तक डेंगू के उपचार से जुड़ी जानकारी देने के हर प्रयास कर रही है।

बिहार में डेंगू के आंकड़े दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। खबरों की मानें, तो सिर्फ राज्य की राजधानी पटना में मरीजों की संख्या 900 के पार है। राज्य स्वास्थ्य विभाग प्रभावित जिलों में सघन अभियान चला रहा है, जिससे डेंगू से प्रभावित मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। बता दें कि प्रशासन की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार बिहार में डेंगू और चिकनगुनिया से प्रभावित मरीजों में 20 फीसदी मरीज की उम्र 17 साल या इससे कम है। इसे लेकर राज्य सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की है।

यह भी पढ़ें : डेंगू से जुड़ी रोचक बातें जो आपको जानना जरूरी है

डीएम ने जारी किए ये निर्देश

बिहार में डेंगू के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए डीएम ने सभी स्कूल के प्रबंधन को निर्देश दिया है कि इन घातक बीमारियों से बचाव के लिए फिलहाल निर्धारित स्कूल ड्रेस, जो कि हाफ शर्ट और पैंट है, उसे तत्काल खत्म कर दिया जाए। बच्चों को पूरी बाजू का शर्ट पहनने को कहा गया है। इसके अलावा, विद्यालय के आसपास व अंदर में विशेष साफ-सफाई के भी आदेश दिए गए हैं।

डेंगू के उपचार के लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य शिविरों के अलावा दवाओं और एंबुलेंस की सुविधा प्रदान की है। बिहार में डेंगू के उपचार और बचाव के लिए लोगों को जागरुक किया जा रहा है। साथ ही, चिकनगुनिया के लिए लार्वा स्प्रे कराया जा रहा है और ब्लीचिंग पाउडर के पैकेट भी बांटे गए हैं।

ये भी पढ़ें: डेंगू से बचाव के लिए मददगार साबित हो सकते हैं ये फल

सरकार ने लोगों से अपील कर कहा है कि अपने घर के आस-पास सफाई रखें। कहीं भी जलजमाव है तो वहां ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करें। डेंगू के उपचार के लिए जितना हो सकें उबला हुआ पानी पिएं। डॉक्टरों से सलाह लेने के लिए टोल फ्री नंबर 104 और एंबुलेंस के लिए 102 पर कॉल करें।

डेंगू का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है, जिसमें तीन चीजों की जांच की जाती है। पहला NS1 एंटीजन टेस्ट। यह टेस्ट एक सप्ताह के अंदर किया जाता है। जब मरीज में लक्षण दिखाना शुरू हो जाता है, तो यह डेंगू वायरस को ढ़ूढ़ता है। हमारा इम्यून सिस्टम डेंगू इंफेक्शन से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाता है। ये एंटीबॉडी दूसरे सप्ताह से ब्लड टेस्ट में दिखाई देने लगते हैं। तीसरा और आखिर में यह टेस्ट सबस् जरूरी बात बताता है वो यह कि प्लेटलेट काउंट। आमतौर पर यह डेंगू के तीसरे सप्ताह में किया जाता है। इस स्थिती में समय पर डेंगू के उपचार की जरूरत होती है।

जानें डेंगू के लक्षण:

डेंगू की गंभीर स्थिती के संकेत:

शुरुआत में डेंगू में बुखार होता है। बुखार के जाने के 24 से 48 घंटे के बाद इसके अन्य लक्षण उभरते हैं। यदि आप या आपके परिवार में निम्नलिखित में से कोई लक्षण नजर आते हैं तो बिना देरी करें डॉक्टर से परामर्श लें क्योंकि ऐसे में समय पर डेंगू के उपचार की जरूरत होती है।

  • पेट में तेज दर्द या उल्टी (24 घंटे में कम से कम 3 उल्टी)
  • नाक या मसूड़ों से खून बहना
  • त्वचा का पीला व ठंडा पड़ना (कभी-कभी चिपचिपी त्वचा के लक्षण भी मिलते हैं)
  • सांस लेने में कठिनाई
  • शौच या उल्टी में खून आना
  • सुस्ती या चिड़चिड़ाहट

ये भी पढ़ें: डेंगू के मरीज क्या खाएं और क्या नहीं।

डेंगू के उपचार से जुड़ी जरूरी बातें जानें

वैसे तो डेंगू का कोई खास इलाज नहीं है लेकिन, आमतौर पर लोग 15 दिनों में ठीक होने लगते हैं। ऐसे में सबसे जरूरी है इसके लक्षणों को रोकना। सबसे ज्यादा समस्या इन लक्षणों के बढ़ने पर पैदा होती है। इसके लिए डॉक्टर नीचे बताई सलाह देते है:

  • जितना ज्यादा हो सके उतना आराम करें।
  • ज्यादा से ज्यादा लिक्विड डायट लें।
  • डॉक्टर की सलाह से बुखार और दर्द कम करने के लिए दवा लें।
  • दर्द की ऐसी दवाएं न लें, जिससे ब्लीडिंग की समस्या बढ़ जाए, जैसे कि एस्पिरिन (aspirin), आईब्रूफेन (ibuprofen) और नेप्रॉक्सिन सोडियम (naproxen sodium)। बुखार के बिगड़ने पर शॉक या दौरे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जिसमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है।

डेंगू के उपचार के दौरान न करें ये गलतियां

  • सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।
  • घर पर रखें गमलों पर खास ध्यान दें। उनकी मिट्टी गीली नहीं होनी चाहिए।अ
  • यदि संभव हो, तो अत्यधिक आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों से दूर रहें।
  • घर के अंदर भी मच्छरों को दूर भगाने वाली वस्तुओं का उपयोग करें।
  • हमेशा ऐसे कपड़ें पहनें जो पूरी आस्तीन के हो। घर से बाहर जब भी जाएं तो पूरे कपड़ें पहन कर निकलें।
  • अंधेरे कोनों (बिस्तर, सोफे के नीचे और पर्दों के पीछे) में कीटनाशक स्प्रे का उपयोग करें।
  • घर के आस-पास कहीं भी पानी जमा न होने दें। यदी कहीं पानी जमा है भी तो पानी को हटाएं।
  • पानी के सभी बर्तन खाली होने पर उन्हें उल्टा रखें और उन्हें छाया में रखें।

डेंगू के उपचार:

मेथी के पत्ते हैं फायदेमंद:
डेंगू के उपचार के लिए मेथी के पत्तों को उपयोगी माना जाता है। इसके लिए एक चम्मच मेथी के सूखे पत्ते को एक गिलास पानी में डालकर उबालें। अब पानी छान लें और चाय की तरह इसे पीएं। मेथी में एंटी-इन्फलामेटरी और एंटीपायरेटिक प्रॉपर्टीज होती हैं जो बुखार को कम करने में मददगार हैं।

बकरी का दूध:
डेंगू के उपचार के लिए बकरी के दूध को वरदान समान माना जाता है। इस बुखार में शरीर में सेलेनियम और ब्लड प्लेटलेट्स में तेजी से कमी आने लगती है। इसके इलाज के लिए बकरी का दूध बेहद फायदेमंद होता है। यह शरीर में सेलेनियम की कमी पूरी करता है और प्लेटलेट भी बढ़ाता है।

कीवी भी है प्रभावशाली:
पोषक तत्वों से भरपूर कीवी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है। इसमें मौजूद मिनरल, आयरन और विटामिन इम्युनिटी और प्लाजमा में सुधार करते हैं। डेंगू के उपचार के लिए इसे भी बेहद उपयोगी माना जाता है।

गिलोय का उपयोग है प्रभावी:
डेंगू के उपचार के लिए गिलोय भी काफी फायदेमंद माना जाता है। एंटी-इन्फलामेटरी गुणों से भरपूर गिलोय में एंटीपायरेटिक प्रॉपर्टीज भी होती हैं। यह इस बुखार में प्लेटलेट काउंट में आने वाली कमी को मेंटेन करने का काम करता है। डेंगू के इलाज के लिए यह सबसे कारगर है। कई लोग गिलोय का अर्क लेते हैं तो बाजार में इसके कैप्सूल और टैबल्ट भी उपलब्ध हैं। लेकिन एक बात का खास ख्याल रखें आप किसी भी नुस्खे को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

और पढ़ें :

जानें डेंगू से जुड़ी कुछ धारणाएं किस हद तक हैं सही

इबोला वायरस (Ebola Virus) के इलाज के लिए FDA ने दी वैक्सीन को मंजूरी

प्रेग्नेंसी में ट्रैवल करते वक्त इन बातों को न करें इग्नोर

कैंसर फैक्ट्स: लंबी महिलाओं में अधिक रहता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

After Floods, Bihar Grapples With Spike In Dengue Cases To 1,400 Accessed on 9/12/2019

Dengue Fever Accessed on 9/12/2019

Dengue – Symptoms and Treatment Accessed on 9/12/2019

What is dengue? Accessed on 9/12/2019

Dengue Fever Accessed on 9/12/2019

Dengue fever Accessed on 9/12/2019

Dengue Accessed on 9/12/2019

लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Mona narang द्वारा लिखित
अपडेटेड 14/10/2019
x