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Year End 2019 : गैजेट्स और टेक्नोलॉजी ने बचाई लोगों की जिंदगी, जानें कैसे करते हैं ये गैजेट हेल्प

Year End 2019 : गैजेट्स और टेक्नोलॉजी ने बचाई लोगों की जिंदगी, जानें कैसे करते हैं ये गैजेट हेल्प

रास्ते में कहीं भी जाते समय अगर किसी भी प्रकार की समस्या या दुर्घटना होती है, तो लोग राहगीरों की मदद लेते हैं। अगर राहगीर जरूरत पड़ने पर मदद कर देते हैं तो लोगों की जिंदगी भी बच जाती है। लेकिन किसी कारणवश अगर इमरजेंसी में मदद नहीं मिल पाती है तो किसी की जिंदगी भी जा सकती है। गैजेट हेल्प से इस समस्या का समाधान निकल चुका है। इस तरह के मामले साल 2019 में देश के साथ ही विदेशों में भी देखने को मिले हैं।

इस समस्या से निपटने के लिए गैजेट्स हेल्प लोगों के बहुत काम आ रही है। ऐसे मामले सिर्फ भारत देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी इसके उदाहरण देखने को मिले हैं। गैजेट हेल्प लेकर लोग कई सारी समस्याओं से उबर चुके हैं। गैजेट्स हेल्प तब बहुत काम आती है, जब आसपास कोई भी मदद के लिए नहीं होता है। गैजेट्स और टेक्नोलॉजी की हेल्प से मुश्किल समय में मदद मिल जाती है। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि किस तरह से लोगों ने गैजेट हेल्प लेकर खुद को और दूसरों को मुश्किल से निकाला।

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वाशिंगटन में दिखा गैजेट हेल्प का मामला

गैजेट हेल्प का एक मामला वाशिंगटन में देखने को मिला। एप्पल की स्मार्ट वॉच ने एक शख्स की जिंदगी बचाई। इस बात की जानकारी तब मिली, जब शख्स गेब बरडेट ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से इस बात की जानकारी दी। गेब बरडेट ने फेसबुक में जानकारी शेयर करते हुए बताया कि किस तरह से उसके पिता की एप्पल स्मार्ट वॉच ने जिंदगी बचाई। गेब बरडेट ने बताया कि उसके पिता बाइक से कुछ लोगों से मिलने जा रहे थे, तभी रास्ते में वो हादसे का शिकार हो गए। बरडेट के पिता की कलाई में बंधी एप्पल स्मार्ट वॉच ने हादसे को डिटेक्ट किया और इमरजेंसी सर्विस नंबर पर अलर्ट भेजा।

गेब ने बताया कि उसके पिता माउंटेन बाइकर से मिलने के लिए जा रहे थे। जब गेब के पिता रास्ते में थे तभी गेब को एप्पल वॉच के जरिए एक मैसेज मिला। मैसेज में लिखा था कि उसने हार्ड फाल डिटेक्ट किया है। इसके अलावा वॉच ने लोकेशन भी शेयर की। जब गेब लोकेशन पर पहुंचा तो वहां उसके पिता नहीं थे। तभी वॉच के गेब को एक और अपडेट दिया और नई लोकेशन के बारे में बताया। एक्सीडेंट के बाद एप्पल स्मार्ट वॉच ने 911 पर कॉल कर एंबुलेंस को जानकारी दी थी। हार्ड फाल डिटेक्टशन फीचर को सेट करके ऐसी सूचना का पता चल जाता है, ताकि हादसे के बाद स्मार्ट वॉच जानकारी शेयर कर सके।

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एप्पल फॉल डिटेक्शन फीचर क्या है?

एप्पल फॉल डिटेक्शन फीचर में फॉल डिटेक्शन के बारे में आसानी से जानकारी मिल जाती है। वॉच में इमरजेंसी की स्थिति में सेंसर और सॉफ्टवेयर की हेल्प से लिस्टेड कॉन्टैक्ट्स को नोटिफिकेशन मिल जाता है। एप्पल के इस खास फीचर की वजह लाइफ को बचाने में हेल्प मिलती है। गैजेट हेल्प न केवल जीवन बचाती हैं, बल्कि करीबी लोगों को इसके बारे में जानकारी भी देती हैं।

ट्रेन में वाट्सएप की हेल्प से ली जानकारी, फिर कराई डिलिवरी

एमबीबीएस के एक छात्र ने वाट्सएप की हेल्प से एक बच्चे को अहमदाबाद-पुरी एक्सप्रेस में डिलिवरी में हेल्प की। उसने अपने सीनियर्स की इस मामले में हेल्प ली। साथ ही बच्चे की डिलिवरी होने के बाद का फोटो भी शेयर किया। इस फोटो को लोगों ने खूब शेयर किया और छात्र की तारीफ भी की। 24 वर्षीय विपिन खड़से ने एक कम्पार्टमेंट को एक अस्थायी डिलिवरी रूम में बदल दिया गया। डॉक्टर्स के वाट्सएप ग्रुप में हेल्प के बारे में पूछा गया था, इसके बाद विपिन ने हेल्प के लिए हामी भरी। गैजेट हेल्प समस्या के समय बड़ा समाधान भी कर सकती है।

यूके में बच्चे ने बचाई मां की जान

यूके में रोमन नाम के चार साल के बच्चे ने देखा कि अचानक से उसकी मां ने रिस्पॉन्स करना छोड़ दिया है। उसने मदर के फिंगरप्रिंट का यूज करके आईफोन को अनलॉक किया और फिर सिरी (Siri) की हेल्प से यूके का इमरजेंसी नंबर 999 डायल किया। नंबर डायल करने के कुछ ही समय बाद पैरामेडिक्स और पुलिस उसके घर में तुरंत पहुंच गई। बिना समय लगाए रोमन की मां को हॉस्पिटल पहुंचाया गया। गैजेट हेल्प के कारण छोटे बच्चे को तुरंत मदद मिल गई। यकीनन गैजेट्स हेल्प लेना आज के समय में आसान काम है। छोटे बच्चे भी इसका आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर बच्चों को इमरजेंसी के लिए गैजेट हेल्प लेना सिखाया जाए तो कई दुर्घटनाओं से बच सकते हैं। इसके लिए माता-पिता को भी सावधान रहने की जरूरत है।

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यंग गर्ल की बच गई लाइफ

मथुरा में चार साल की बच्ची आशिया को डायरिया की समस्या हो गई थी। किन्हीं कारणों से निजी अस्पताल ने बच्ची को एडमिट करने से मना कर दिया गया। बच्ची के माता-पिता ने हेल्प के लिए वाट्सएप में जर्नलिस्ट को इस बारे में जानकारी दी। वाट्सएप ग्रुप में एसएसपी भी मेंबर थे। तुरंत एसएसपी ने एरिया के एसएचओ को बच्ची के इलाज के लिए मदद करने को कहा। पुलिस की इंवेस्टिगेशन के बाद बच्ची को तुरंत हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। गैजेट हेल्प तुरंत मदद के लिए बहुत उपयोगी है। गैजेट्स हेल्प से कम समय में उपचार मिलने की संभावना रहती है। गैजेट्स हेल्प के लिए टेक्नोलॉजी की जानकारी होना बहुत जरूरी होता है।

ड्राइविंग के समय मिल गई गैजेट हेल्प

टेस्ला मॉडल एक्स ने ऑटोपायलट फंक्शन के बाद जोशुआ नील को खतरे से बचाया और पल्मोनरी एम्बोलिज्म की समस्या के कारण उसे हॉस्पिटल मे भी भर्ती कराया। नील को ड्राइविंग के समय दिक्कत हो रही थी। ऐसे में टेस्ला मॉडल ने समस्या को भांप लिया और तुरंत एम्बुलेंस को कॉल किया। जब टेस्ला मॉडल को ये लगा कि बैठे व्यक्ति का टच स्टीयरिंग को नहीं मिल रहा है तो टेक्नोलॉजी की हेल्प से तुरंत कॉल इम्बुलेंस को लग गया। इस तरह से गैजेट्स हेल्प के कारण नील को तुरंत ट्रीटमेंट मिल गया।

लड़के को रोका आत्महत्या करने से

मैरीलैंड में एक लड़की फेसबुक चला रही थी। अचानक से उसे फेसबुक फीड में दिखा कि ऑक्सफोर्ड में एक लड़के ने आत्महत्या का अनाउंसमेंट किया है। लड़की को उस लड़के के घर का एड्रेस नहीं पता था, लेकिन उसने पहले लड़के को मैसेज करके आत्महत्या न करने की सलाह दी और फिर ब्रिटिश एंबेसी वाशिंगटन में कॉन्टेक्ट करके माता-पिता तक जानकारी पहुंचाई। ऐसा करने से लड़के की जान बच गई। किसी अच्छे काम के लिए गैजेट हेल्प लेना वाकई बहुत ही सराहनीय काम है। गैजेट हेल्प कैसे लेनी है, इस बारे में विचार करने की जरूरत है।

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गैजेट हेल्प से बचाया पिता को

यंग लड़की ब्रायनना वेंस ने अपने पिता ग्रेगरी की जान फेसबुक पोस्ट की हेल्प से बचाई। ब्रायनना वेंस केवल दस साल की थी। उसके पिता के ऊपर एक पेड़ गिर गया, साथ ही कुछ दोस्त भी उसमे फंस गए। ऐसा देखने के बाद तुरंत ब्रायनना वेंस ने फेसबुक में लोगों से मदद की अपील की। स्थानीय लोगों ने जैसे ही पोस्ट पढ़ी, तुरंत 911 पर कॉल कर इमरजेंसी मदद की मांग की। बचाव दल ने तुरंत उसके पिता को बचा लिया और फिर हॉस्पिटल भेज दिया। गैजेट हेल्प किसी भी दुविधा के समय में आपका साथ दे सकते है, बस उसका उपयोग करना जरूर आना चाहिए।

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चेन्नई फ्लूड में गैजेट हेल्प बना था बड़ा सहारा

हाल ही के सालों में गैजेट हेल्प के कारण लोगों को बड़ी मुसीबतों से बचाया। साल 2015 में जहां एक और चेन्नई बाढ़ से जूझ रहा था, वहीं टेक्नोलॉजी की हेल्प से पीड़ित लोगों और उनके परिजनों ने ट्विटर का सहारा लेकर फंसे लोगों को मदद पहुंचाने की कोशिश की। हैशटैग चेन्नई रेन को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया गया और मदद की गुहार की गई। जिन लोगों के पास मदद का संदेश पहुंचा, उन्होंने हर संभव मदद की। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से गैजट हेल्प बड़ी मुसीबत से भी बचाने के काम आती है।

गैजेट हेल्प चाहिए तो कर सकते हैं इनका प्रयोग

अलार्म रिंग

अलार्म रिंग को अंगूठी की तरह ही पहना जाता है। अलार्म रिंग का कनेक्शन स्मार्ट फोन से होता है। जब भी कही बाहर जा रही हो, इसे हाथ में रिंग की तरह पहन लें। जैसे ही कोई खतरा महसूस हो, बटन दबा दें। ऐसा करने से आपके नजदीकियों को स्मार्टफोन की हेल्प से मैसेज पहुंच जाएगा। ऐसा करने से आपको तुरंत सहायता मिल सकती है। गैजेट हेल्प का यूज खतरे वाले स्थान में बेहतर साबित होता है।

शार्क रिपेलेंट (A Shark Repellent)

अगर आप समुद्र में जा रहे हैं तो शार्क का खतरा हो सकता है। ऐसे में शार्क रिपेलेंट गैजेट हेल्प की मदद से शार्क से बचा जा सकता है। इसे पैरो में पहना जाता है। ब्रेसलेट नुमा इस डिवाइस को पैर में पहनने के बाद अल्ट्रासाउंड सिगनल निकलना शुरू हो जाता है। शार्क इससे दूर रहना पसंद करती हैं। आप अगर इसे यूज नहीं कर रहे हैं तो इसकी जानकारी अपने दोस्तों को भी दे सकते हैं।

गैजेट हेल्प के लिए एक्सटरनल एंटीना

एक्टरनल एंटीना को मोबाइल नेटवर्क की समस्या होने पर यूज किया जा सकता है। ऐसे बहुत से एरिया होते हैं जहां मोबाइल नेटवर्क को लेकर इश्यू होता है। ऐसे में एक्सटरनल एंटीना नेटवर्क के लिए हेल्प करता है। इसकी हेल्प से प्राइवेट नेटवर्क क्रिएट होता है जो मैसेज और जीपीएस कॉर्डिनेशन में हेल्प करता है। साथ ही लो फ्रीक्वेंसी वेव्स करीब 50 माइल्स (80 किमी) की सहायता प्रदान करता है। इस गैजेट हेल्प का इस्तेमाल समुद्री किनारे में भी किया जा सकता है।

टेक्नोलॉजी और गैजेट हेल्प से समस्या में फंसे लोगों को तुरंत मदद मिल जाती है। अगर गैजेट हेल्प की जानकारी हो तो इसे यूज में लाया जा सकता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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लेखक की तस्वीर
Dr. Hemakshi J के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Bhawana Awasthi द्वारा लिखित
अपडेटेड 27/12/2019
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