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डब्लूएचओ की तरफ से हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन की ट्रायल पर ग्रीन सिग्नल, मिल सकती है कोरोना मरीजों को राहत

डब्लूएचओ की तरफ से हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन की ट्रायल पर ग्रीन सिग्नल, मिल सकती है कोरोना मरीजों को राहत

देश और विदेशों में कोरोना की दस्तक ने जहां हम सभी को हाथ धोने का सही तरीका समझाया, वहीं हैंड ग्लब्स और फेस मास्क के इस्तेमाल से हमें किस तरह से संक्रमण से बचना है इसकी जानकारी भी मिली। इस बीच हम सभी कई अलग-अलग तरह की महत्वपूर्ण जानकारी भी हासिल कर रहें हैं। इन जानकारियों में शामिल है कोरोना के इलाज के लिए प्रयोग में लाये जाने वाली दवाएं भी। क्योंकि हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल की खबरें सामने आ रहीं हैं। दरअसल कोविड-19 का इलाज कैसे जल्द से जल्द किया जाए इस पर लगातार विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) के ट्रायल को फिर से शुरू करने की सलाह दी गई है। डब्लूएचओ ने ही 25 मई 2020 को हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल पर यह कहते हुए दवा की ट्रायल पर सुरक्षा मानको को देखते हुए कुछ वक्त के लिए ब्रेक लगाई थी। लेकिन, अब एक बार से हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल को डब्लूएचओ की ओर से ग्रीन सिग्नल दे दी गई है। क्योंकि यह दवा कोविड-19 के मरीजों को जानलेवा संक्रमण से बचाने में मददगार हो सकती है। हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल के साथ-साथ रेमडेसिविर (Remdesivir), आइबूप्रोफेन (Ibuprofen) और पेरासिटामोल (Paracetamol) जैसी दवाओं पर भी इलाज के लिए जोर दिया जा रहा है। इन दवाओं को समझने की कोशिश करेंगे लेकिन, सबसे पहले हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन क्या है और हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल फिर से जोर क्यों दिया जा रहा है।

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क्यों लाभकारी हो सकता है हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल?

हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन दवा स्वास्थ्य विशेषज्ञ मलेरिया के पेशेंट को प्रिस्क्राइब करते हैं। इसका अर्थ यह है की आप इस दवा का सेवन अपनी मर्जी से नहीं कर सकते हैं और यह ओवर द काउंटर भी उपलब्ध नहीं होती है। हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन ओरल टेबलेट मलेरिया के पेशेंट के साथसाथ ल्यूपस एरिथेमेटोसस(Lupus erythematosus) एवं रुमेटिक आर्थराइटिस (Rheumatoid arthritis) के पेशेंट को भी प्रिस्क्राइब किया जाता है। कोरोना वायरस के इलाज के लिए हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन पर कुछ वक्त के रोक इस लिए लगा दी गई थी क्योंकि कुछ रिपोर्ट्स में इस दवा के कारण कोरोना वायरस पेशेंट की मृत्यू की खबरे सामने आने लगी थीं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं की इस दवा से मरीजों को कोरोनावायरस के संक्रमण से बचाने में सफलता मिल सकती है। इसलिए हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल फिर से शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।

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हालही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने मीडिया से बात चीत के दौरान यह कहा था कि ‘भारत देश हमेशा से दूसरे देशों की मदद करता आ रहा है और सरकार भी ड्रग मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को मदद करते आ रही है और अभी कुल 97 देशों को हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) और 103 देशों को पेरासिटामोल (Paracetamol) दे रहे हैं। सरकार ने अपने एग्जिट प्लान में ड्रग मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को जरूरी सहायता देने और अपने लिए पर्याप्त दवाओं का उत्पादन करने के लिए तैयारी कर रखी है।” अगर हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल सफल होता है, तो यह भारत के लिए अत्यधिक गर्व की बात होगी क्योंकि हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन का उत्पादन अपने देश में ही हो रहा है। हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल सफल होने पर अपने देश में कोविड-19 के पेशेंट के साथ-साथ अन्य देशों में भी इस बीमारी से लड़ रहे लोगों के लिए एक नई जिंदगी की शुरुआत से कम नहीं होगी।

कोरोना वायरस की शुरुआत बीते साल 2019 की नवंबर से शुरू हुई और 3 जून 2020 तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी किये गए आंकड़ों के अनुसार पूरे देश में 62,87 771 कोविड-19 पोस्टिटिव पेशेंटस हैं। वहीं इस खतरनाक वायरस की वजह से 379 941 लोगों की जान चली गई है। हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल से जुड़ी रिपोर्ट्स की मानें तो ट्रायल में भाग लेने के लिए 35 देशों में 3,500 से ज्यादा पेशेंट्स को अस्पताल में एडमिट किया गया है।

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हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल की सफलता की कामना हम सभी कर रहें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन के सेवन से साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। जैसे:-

  • सिरदर्द होना
  • चक्कर आना
  • दस्त होना
  • पेट में ऐंठन महसूस होना
  • उल्टी होना

इन ऊपर बताई गई साइड इफेक्ट्स के साथ-साथ गंभीर शारीरिक परेशानी भी हो सकती है। जैसे:-

  • धुंधला दिखाई देना और कुछ लोगों में इस दवा की वजह से परमानेंट विजन प्रॉब्लम शुरू हो जाती है
  • दिल से संबंधित परेशानी जैसे हार्ट फेलियोर या दिल की धड़कन संबंधी परेशानी
  • कान में घंटी की आवाज सुनाई देना या कम सुनाई देना
  • तेजी से स्किन सुजना
  • हीव्स (Hives)
  • गले में परेशानी महसूस होना
  • हाइपोग्लाइसीमिया की परेशानी बढ़ जाना
  • हल्की चोट लगने पर भी ब्लीडिंग ज्यादा होना
  • त्वचा का रंग ब्लैक या ब्लू होना
  • मांसपेशियां कमजोर होना
  • सामान्य से ज्यादा बाल झड़ना या बालों का अनहेल्दी होना
  • मूड स्विंग होना
  • मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना। ऐसी स्थिति में आत्महत्या के बारे में सोचना

इन ऊपर दी गई साइड इफेक्ट्स को समझते हुए यह अंदाजा लगाना आसान हो सकता है कि आखिर हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन दवा क्यों बिना प्रिस्क्रिप्शन के न ही ली जा सकती है और न ही सेवन की जा सकती है। कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए अबतक वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं हो पाई है , जो दवाएं मौजूद हैं उनपर ही विशेषज्ञों की टीम लगातार कोशिश कर रही है सफलता पाने की। इसलिए इस मेडिसिन ट्रायल की कड़ी में एक बार फिर से हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल में शामिल किया गया है।

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हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल की इन जानकारियों के बीच रेमडेसिविर (Remdesivir) के बारे में भी समझने की कोशिश करते हैं। दरअसल के जैसे हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल के फिर से जांच की बात सामने आई है ठीक उसी तरह रेमडेसिविर कोरोना वायरस ट्रायल किया गया है। कोविड-19 के इलाज में यह एंटी-वायरल दवा सक्सेफुल मानी जा रही है। रेमडेसिविर दवा का कोविड-19 के इलाज के लिए उपयोग की जाने की सलाह दे दी गई है। लेकिन, रेमडेसिविर का सेवन तभी पेशेंट को करवाया जा सकेगा जब पेशेंट की स्थिति क्रिटिकल मानी जाएगी। भारत की टॉप ड्रग्स रेगुलेटरी बॉडीज ने कोविड-19 के इलाज के अप्रूवल दे दी है। कोरोना के इलाज के लिए वैश्विक नैदानिक परीक्षणों में सबसे ज्यादा ट्रायल की जाने वाली दवाओं में से एक भी है।

हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल की जा रही है और रेमडेसिविर कोरोना वायरस ट्रायल किया गया है। अब ऐसी स्थिति में दोनों में से कौन दवा ज्यादा लाभकारी हो सकती है? यह एक बड़ा सवाल है। हालांकि रिपोर्ट्स की मानें तो अभी तक दोनों दवाओं की तुलना नहीं की गई है।

इन दवाओं के साथ-साथ आइबूप्रोफेन और पेरासिटामोल (Paracetamol) भी कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए लाभकारी हो सकती है, ऐसी खबरें आ चुकी हैं। साउथहेम्प्टन विश्वविद्यालय के प्राइमरी केयर के रिसर्च के अनुसार आइबूप्रोफेन और पेरासिटामोल दवा की अपनी अलग-अलग अहमियत होती है। आइबूप्रोफेन जब किसी पेशेंट की परेशानी अत्यधिक बढ़ जाती है तब दी जाती है। इसलिए नॉर्मल फीवर होने पर हेल्थ एक्सपर्ट आइबूप्रोफेन प्रिस्क्राइब नहीं करते हैं। आइबूप्रोफेन या पेरिसिटामोल में मौेजूद एंटी-इंफ्लामेटरी मौजूद होने के कारण यह पेशेंट के इम्यून पावर को कमजोर कर सकता है, जिससे मरीजों को साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। हर दवा के अपने फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। इसलिए इन दवाओं को प्रिस्क्राइब करने से पहले कई बातों का ध्यान रखा जाता है और ट्रायल की जाती है।

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इनसभी खबरों के बीच आप और हम इस वक्त इस बीमारी से निपटने के लिए दुआ ही कर सकते हैं और जल्द से जल्द टेस्टिंग किट, दवा और वैक्सीन का इंतजार कर सकते हैं। लेकिन, जिस तरह से बार-बार इस बीमारी से बचने का अब तक का सबसे सफल विकल्प यही रहा है की अपना और अपने करीबियों का विशेष ख्याल रखना है। इसलिए कुछ बातों को अवश्य फॉलो करते रहना है। जैसे:

इन छोटी-छोटी बातों को ध्यान रख कर इस बीमारी या संक्रमण से बचना आसान हो सकता है।

अगर आप हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस ट्रायल या हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन दवा से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Q&A : Hydroxychloroquine and COVID-19/https://www.who.int/news-room/q-a-detail/q-a-hydroxychloroquine-and-covid-19/Accessed on 04/06/2020

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Most-watched antiviral remdesivir cleared for use in ‘severe’ Covid cases/ https://indianexpress.com/article/india/remdesivir-drug-ccoronavirus-covid-19-cases-6437975/Accessed on 04/06/2020

Most anticipated COVID-19 drug, remdesivir cleared for use in severe cases/https://www.oneindia.com/india/most-anticipated-covid-19-drug-remdesivir-cleared-for-use-in-severe-cases-3098047.html/Accessed on 04/06/2020

 

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 05/06/2020 को
डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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