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International Men’s Day: इंटरनेशनल मेन्स डे पर मर्दों के ये मुद्दे उठाना भी जरूरी

International Men’s Day: इंटरनेशनल मेन्स डे पर मर्दों के ये मुद्दे उठाना भी जरूरी

इंटरनेशनल मेन्स डे (International Men’s Day) हर साल 19 नवंबर को पुरुषों के हक में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश यह दिखाना है कि किस तरह मर्द परिवार, कम्युनिटी और दुनिया भर में पॉजिटिव बदलाव ला रहे हैं। इसके अलावा इस दिन को पुरुषों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं और उनके मुद्दों को भी उठाने के लिए भी मनाया जाता है।

इंटरनेशनल मेन्स डे 2019 की थीम

इस साल इंटरनेशनल मेन्स डे की थीम है ‘मेकिंग अ डिफरेंस फॉर मेन एंड बॉयज’ (Making a Difference for Men and Boy’s)। इसके तहत मर्दों की महत्वता को जाहिर करना है और उनके प्रयासों को पहचानने का उद्देश है, जिससे उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति सुधार सकती है।

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इंटरनेशनल मेन्स डे की हिस्ट्री

इंटनेशनल मेन्स डे की शुरुआत 1999 में डॉ. जीरोम तिलकसिंह (Dr. Jerome Teelucksingh) ने की थी। वह यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट इंडीज में हिस्ट्री के प्रोफेसर थे। इससे पहले भी लोग वुमेंस डे की ही तरह मेंस डे सेलिब्रेट करना चाह रहे थे। पहले इंटरनेशनल मेन्स डे मनाने के लिए 23 फरवरी के दिन के बारे में सोचा जा रहा था। साल 1923 में पहली बार 8 मार्च को इंटरनेशनल वीमेन डे की तर्ज पर इंटरनेशनल मेन्स डे मनाने की मांग की गई थी। इसके लिए मर्दों ने आंदोलन भी किया। उस समय इंटरनेशनल मेन्स डे को मनाने के लिए 23 फरवरी के बारे में विचार किया जा रहा था। इसके बाद कई सालों तक यह मांग ठंडी पड़ गई। साल 1968 में अमेरिकन पत्रकार जॉन पी. हैरिस ने एक आर्टिकल लिखा। इस आर्टिकल में जॉन ने लिखा कि सोवियत प्रणाली में संतुलन की कमी है। उन्होंने लिखा था कि सोवियत प्रणाली महिलाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाती है लेकिन पुरुषों के लिए इस तरह का कोई दिन नहीं है।

इंटरनेशनल मेन्स डे का महत्व

इंटरनेशनल मेन्स डे मुख्य रूप से पुरुष और लड़कों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने, लिंग संबंधों में सुधार, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और पुरुष रोल मॉडल्स को उजागर किए जाने के लिए मनाया जाता है। इंटरनेशनल मेन्स डे (InternationalMensDay)की वेबसाइट के मुताबिक, दुनिया में महिलाओं से तीन गुना ज्यादा पुरुष सुसाइड करते हैं। तीन में से एक पुरुष घरेलू हिंसा का शिकार है। महिलाओं से चार से पांच साल पहले पुरुष की मौत होती है। महिलाओं से दोगुना पुरुष दिल की बीमारी के शिकार होते हैं। इंटरनेशनल मेन्स डे पुरुषों की पहचान के सकारात्मक पहलुओं पर काम करता है। इंटरनेशनल मेन्स डे मनाने के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं::

  • पुरुष रोल मॉडल को बढ़ावा देना
  • समाज, समुदाय, परिवार, विवाह, बच्चों की देखभाल और पर्यावरण के लिए पुरुषों के सकारात्मक योगदान का जश्न मनाना
  • पुरुषों के स्वास्थ्य और भलाई पर ध्यान केंद्रित करना; सामाजिक, भावनात्मक, शारीरिक और आध्यात्मिक तौर पर
  • पुरुषों के खिलाफ भेदभाव को उजागर करना
  • लिंग संबंधों में सुधार और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना
  • एक सुरक्षित, बेहतर दुनिया बनाना

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पुरुषों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं: महिलाओं से ज्यादा खुदकुशी करते हैं पुरुष

भारत में 26 फीसदी पुरुष खुदकुशी करते हैं, जबकि महिलाओं की संख्या 16.4 प्रतिशत है। वर्ल्ड हेल्थ ऑग्रेनाइजेशन(WHO) ने मेंटल हेंल्थ पर साल 2016 में एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर दस हजार लोगों में से 25.8 प्रतिशत यानी 2580 पुरुष आत्महत्या करते हैं। ये लोग 15 से 29 साल के बीच होते हैं। वहीं प्रति 10 हजार में महिलाओं के खुदकुशी करने का प्रतिशत 16.4 है। भारत को इस लिस्ट में 22वां स्थान दिया गया है, जहां पुरुष अन्य के मुकाबले ज्यादा आत्महत्या करते हैं।

पुरुषों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में डिप्रेशन की समस्या सबसे आम है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के अनुसार डिप्रेशन कई फैक्टर का कॉम्बिनेशन हो सकता है। अगर ये कहा जाए कि कुछ जीन डिप्रेशन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं तो ये गलत नहीं होगा। जिन पुरुषों की फैमिली हिस्ट्री में डिप्रेशन की समस्या रही हो, उन्हें डिप्रेशन की समस्या आसानी से हो सकती है। वातावरण के कुछ फैक्टर भी पुरुषों में डिप्रेशन की समस्या को उजागर कर सकते हैं। कुछ फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स, किसी खास का बिछड़ जाना, रिलेशनशिप में परेशानी, लाइफ से अचानक से बदलाव आ जाना, पुरुषों में कुछ हेल्थ कंडिशन जैसे कि डायबिटीज की समस्या, हार्ट डिजीज, कैंसर के कारण भी डिप्रेशन की समस्या हो सकती है।

पुरुषों में डिप्रेशन की समस्या का सही समय पर डायग्नोज और फिर उसका ट्रीटमेंट बहुत जरूरी है, ताकि समस्या से निजात पाया जा सके। पुरुषों में डिप्रेशन के लक्षण अगर दिखाई दें तो उन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए। मन को शांत करने के लिए योग का सहारा भी लिया जा सकता है। एक अच्छा वातावरण डेवलप करने के लिए परिवार का योगदान भी बहुत जरूरी है। अगर आपको डिप्रेशन के बारे में अधिक जानकारी चाहिए तो बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से जानकारी प्राप्त करें।

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पुरुषों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं: भावनाएं जाहिर न करना भी कई समस्याओं का कारण

भावनाएं साझा न करने के कारण पुरुष डिप्रेशन की समस्या, सिजोफ्रेनिया और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ ह्युमन बिहेवियर एंड एप्लाइड साइंसेज (इहबास) ने अध्ययन में पाया कि सीजोफ्रेनिया के 25 प्रतिशत मरीजों के खुदखुशी कर लेने का खतरा होता है।

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पुरुषों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं: भारत, आस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने विशेष कदम उठाए

  • डिप्रेशन के बढ़ते मामलों की गंभीरता को देखते हुए 2017 में भारत सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य कानून लागू किया।
  • ऑस्ट्रेलिया में एक समय हर दस हजार पुरुषों में 12.6 प्रतिशत पुरुष आत्महत्या कर रहे थे। इसके समाधान के लिए यहां ‘आर यू ओके’ (Are you ok) प्रोग्राम चलाया गया। यहां डिप्रेशन से जूझ पुरुषों की काउंसलिंग के लिए 24 घंटे चलने वाले क्राइसिस सेंटर खोले गए।
  • ब्रिटेन ने आत्महत्या के मामलों की गंभीरता को देखते हुए देश में आत्महत्या रोधी मंत्री साल 2018 में नियुक्त किया।

पेरेंट्स इन बातों पर भी दें ध्यान

महिलाओं के लिए जरूरी

  • महिलाएं यह न सोचें कि पति की जिम्मेदारी सिर्फ उनकी परेशानियां सुनना ही है।
  • अगर आपका मेल पार्टनर समस्या साझा न करे, तो मनोवैज्ञानिक से सलाह दिलाएं।

घर से ही शुरू होगा पॉजिटिव बदलाव

हमारे समाज में लोगों की मानसिकता है कि लड़के या फिर लड़की को अलग-अलग बातें समझाई जाती हैं। जिस तरह से अब घर का काम सिर्फ महिलाएं नहीं पुरुष भी करते हैं, ठीक उसी तरह बाहर का काम सिर्फ पुरुष नहीं बल्कि महिलाएं भी करती हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि बच्चों को बचपन से ही इस बात की जानकारी दी जाए कि घर या बाहर के काम बंटे नहीं हैं, बल्कि आवश्यकता के अनुसार उन्हें कोई भी कर सकता है। जब बच्चों को बचपन में ऐसी शिक्षा नहीं दी जाती है तो उनकी मानसिकता बंध सी जाती है और इस बात को मानना ही नहीं चाहते हैं कि बदलाव से सकारात्मक असर सामने आएगा। बचपन में दी गई शिक्षा बच्चों के मानसिक विकास में अहम योगदान करती है। पॉजिटिव चेंज मानसिक स्वास्थ्य को दुरस्त रखने में सहायता करता है। मानसिक स्वास्थ्य को कैसे दुरस्त रखा जाए, आप इस बारे में डॉक्टर से जानकारी ले सकते हैं।

आशा करते हैं कि आपको इस आर्टिकल की जानकारी पसंद आई होगी और आपको इंटरनेशनल मेन्स डे के मौके पर पुरुषों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं के बारे में सभी जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अगर आपको कोई सवाल पूछना हो तो आप हमारे हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट पर आप स्वास्थ्य संबंधी अन्य आर्टिकल्स को पढ़ सकते हैं। अगर आपको पुरुषों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में अधिक जानकारी चाहिए तो बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Men’s Health – https://www.nccih.nih.gov/health/mens-health– accessed on 21/01/2020

Men’s Health – https://medlineplus.gov/menshealth.html– accessed on 21/01/2020

WHO: Global suicide crisis calls for widespread preventive action – https://www.medicalnewstoday.com/articles/326375.php#1 – accessed on 21/01/2020

International Men’s Day/https://internationalmensday.com/Accessed on 13/12/2019

Men’s Health  https://www.womenshealth.gov/blog/mens-mental-health Accessed on 13/12/2019

 

 

Welcome to International Men’s Day UK/https://ukmensday.org.uk/Accessed on 13/12/2019

लेखक की तस्वीर
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Govind Kumar द्वारा लिखित
अपडेटेड 18/11/2019
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