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केरल सरकार ने एर्नाकुलम जिले को किया निपाह वायरस फ्री

केरल सरकार ने एर्नाकुलम जिले को किया निपाह वायरस फ्री

केरल सरकार ने मंगलवार को एर्नाकुलम जिले को निपाह मुक्त घोषित किया। दरअसल, जानलेवा निपाह वायरस से 23 वर्षीय कॉलेज छात्र संक्रमित था। 54 दिनों से एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। उत्तरी परावुर के पास एक गांव में रहने वाले व्यक्ति का पिछले 54 दिनों से एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। जो अभी पूरी तरह से ठीक है और निपाह मुक्त है।

अस्पताल के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केरल की स्वास्थ्य मंत्री के. के. शैलजा ने कहा कि सरकारी और निजी क्षेत्र ने निपाह पर रोक लगाने के लिए सफलता से काम किया। स्वास्थ्य विभाग ने 338 लोगों को निगरानी में रखा था और उनमें से 17 को कालामसेरी के एक सरकारी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया था। के.के. शैलजा ने निपाह वायरस (Nipah Virus) के प्रकोप पर सफलता पाने के लिए डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा पेशेवरों को बधाई दी।

निपाह वायरस (Nipah Virus) क्या है?

निपाह वायरस एक जानलेवा वायरस है। निपाह वायरस के कारण दुनिया भर में मौतों का आंकड़े भी डराने वाले हैं। इस वायरस की चपेट में आने पर पीड़ितों का डेथ रेट लगभग 74.5 प्रतिशत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, निपाह वायरस (Nipah Virus) एक तेजी से फैलने वाला वायरस है, जिसके संक्रमण से इंसानों को जानलेवा बीमारी हो सकती है। निपाह वायरस सबसे पहले साल 1998 में मलेशिया के कंपंग सुंगाई में पाया गया था। वहीं से इस वायरस को निपाह नाम मिला। उस वक्त इस बीमारी के वाहक सूअर बने थे। इस मामले के बाद जहां निपाह वायरस के केस मिले। वहां इस वायरस के वाहक का स्पष्ट रूप से पता नहीं लग पाया था। इसके बाद साल 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग निपाह वायरस से संक्रमित पाए गए। इन सभी लोगों ने खजूर के पेड़ से निकलने वाले लक्विड का सेवन किया था। यहां सामने आया कि इस तरल में वायरस चमकादड़ों के कारण पहुंचा। इन चमकादड़ों को फ्रूट बैट भी कहा जाता है। यह वायरस इंसानों में संक्रमित चमगादड़ों, सूअरों या फिर दूसरे इंसानों से फैल सकता है।

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वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, निपाह वायरस एक नई उभरती बीमारी है। इसे ‘निपाह वायरस एन्सेफलाइटिस’ भी कहा जाता है। यह एक तरह का दिमागी बुखार है, जिसका संक्रमण तेजी से फैलता है। संक्रमण होने के 48 घंटे के भीतर यह व्यक्ति को कोमा में पहुंचा देता है। इसकी जद में जो भी व्यक्ति आता है उसे सांस लेने में दिक्कत के साथ सिर में भयानक दर्द और तेज बुखार होता है। इसकी चपेट में आने वालों का डेथ रेट 74.5 फीसदी होता है।

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निपाह वायरस के लक्षण क्या हैं?

  • निपाह वायरस इंफेक्शन से आपको सांस लेने से जुड़ी गंभीर बीमारी हो सकती है जैसे, इंसेफ्लाइटिस।
  • ये लक्षण 24-48 घंटों में मरीज को कोमा में पहुंचा सकते हैं। इंफेक्शन के शुरुआती दौर में सांस लेने में समस्या होती है जबकि, आधे मरीजों में न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें भी हो सकती हैं।
  • वायरस की चपेट में आने के 5 से 14 दिनों के बीच निपाह वायरस से संक्रमित होने के लक्षण दिखने लगते हैं। इसके बाद यह वायरस खख्स के लिए 3 से 14 दिनों तक तेज बुखार और सिरदर्द का कारण बन सकता है।

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निपाह वायरस कितना सामान्य है?

साल 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोगों के इस वायरस के शिकार होने के बाद इस वायरस के एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंचने का मामला भारत में सामने आया। साल 1998-99 में जब निपाह वायरस की बीमारी फैली थी, तो इस वायरस की चपेट में 200 से ज्यादा लोग आए थें। अस्पतालों में भर्ती हुए इनमें से करीब 40 प्रतिशत मरीज ऐसे थे, जिन्हें गंभीर नर्वस बीमारी हुई थी और उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। आमतौर पर, ये वायरस इंसानों में इंफेक्शन की चपेट में आने वाली चमगादड़ों, सूअरों या फिर दूसरे इंसानों से फैलता है।

मलेशिया और सिंगापुर में इसके सूअरों के जरिए फैलने की जानकारी मिली थी जबकि, भारत और बांग्लादेश में इंसान से इंसान का संपर्क होने पर इसकी चपेट में आने का खतरा ज्यादा रहता है।

निदान और उपचार

निपाह वायरस (Nipah Virus) का संक्रमण का निदान कैसे किया जाता है?

इंसानों को इस बीमारी बचाने के लिए अभी तक कोई इंजेक्शन या दवा नहीं बनी है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक कमेटी बनाई है, जो बीमारी की तह तक जाने में जुटी है। इस वायरस बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति को सीधे हॉस्पिटल में एडमिट कराना चाहिए।

निपाह वायरस से बचने के क्या हैं उपाय?

निम्नलिखित टिप्स को अपना कर निपाह वायरस से बचा जा सकता है। जैसे-

  • फ्रेश फ्रूट्स खाएं और हमेशा अच्छी तरह से फलों को धो कर खाएं।
  • अगर आप अपने बगीचे के पेड़ से गिरे फलों को खा लेते हैं, तो ऐसा न करें।
  • खाना खाने से पहले अच्छी तरह से हाथ धोएं
  • अगर कोई परिवार या करीबी निपाह वायरस से पीड़ित हैं, तो ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें।
  • वायरस से इंफेक्टेड व्यक्ति या पेशेंट की साफ-सफाई का ध्यान रखें।

दरअसल इंसानों को इस बीमारी बचाने के लिए अभी तक कोई इंजेक्शन या दवा नहीं बनाई जा सकी है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक कमेटी बनाई है, जो बीमारी की तह तक जाने में जुटी है। इस वायरस से बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति को सीधे हॉस्पिटल में एडमिट कराना चाहिए।

भारत में निपाग वायरस का सबसे पहले साल 2001 में देखा गया था। इस समय जनवरी और फरवरी महीने में सिलिगुड़ी में देश में सबसे पहले इस वायरस के केस देखे गए थे। पहली बार में ही यह इतना गंभीर था कि यहां इसके लगभग 66 मामले सामने आए थे। वहीं इन 66 में से 45 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। इसके बाद छह साल बाद निपाह वायरस के दुसरी बार मामले भी पश्चिम बंगाल में ही देखने को मिले। लेकिन इस बार ये यहां नदिया नामक जगह पर मिलें। इस बार निपाह वायरस के सिर्फ पांच मामले देखे गए थे और इस बार पांचों की ही मौत हुई थी। हालांकि की रिसर्च के अनुसार अभी तक इसका इलाज संभव नहीं हो पाया है लेकिन, हेल्थ एक्सपर्ट की टीम इस पर लगातार रिसर्च कर रही है। अगर निपाह वायरस के लक्षण नजर आते हैं, तो जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुंचें। अगर आप निपाह वायरस से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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NIPAH VIRUS/https://www.swinehealth.org/Accessed on 25/12/2019

Enhancing preparation for large Nipah outbreaks beyond
Bangladesh: Preventing a tragedy like Ebola in West Africa/https://www.ijidonline.com/article/S1201-9712(18)34425-4/pdf/Accessed on 25/12/2019

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Shikha Patel द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 13/05/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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