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1 मई, वर्ल्ड लेबर डे (विश्व मजदूर दिवस): कोरोना वायरस लॉकडाउन बना देश भर के कामगारों के लिए मुसीबत

1 मई, वर्ल्ड लेबर डे (विश्व मजदूर दिवस): कोरोना वायरस लॉकडाउन बना देश भर के कामगारों के लिए मुसीबत

ऐसा पहली बार हो रहा होगा कि विश्व मजबूर दिवस, मजबूर दिवस बन गया हो। ऐसा लगता है कि इस बार दुनिया भर के कामगारों को किसी की बुरी नजर लग गई है। इस साल लेबर डे के मौके पर मजदूर या दूसरे कामगार उत्सव मनाने की बजाय भगवान से अपनी जान की हिफाजत की दुआ मांग रहे हैं। इस स्थिति का सबसे बड़ा कारण है कोरोणा वायरस की वजह से लगा लॉकडाउन। इस लॉकडाउन की वजह से कामगारों को आर्थिक, मानसिक व शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस आर्टिकल में जानें किस तरह लॉकडाउन बना कामगारों के लिए मुसीबत।

लॉकडाउन बना कामगारों के लिए मुसीबत : पहले जानें विश्व मजदूर दिवस के बारे में

1 मई को विश्व मजदूर दिवस (लेबर डे) मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन साल 1886 में मजदूरों ने एक बड़ा आंदोलन किया था। मजदूरों ने मांग की थी कि उनके काम करने के लिए 8 घंटे का समय निर्धारित किया जाए। मजदूरों की मांग मानी गई और इसके बाद से पूरी दुनिया में 8 घंटे वाली शिफ्टों में काम होना शुरू हुआ। उस समय से दुनिया भर के कामगार 1 मई को विश्व मजदूर दिवस के अवसर पर अपनी जीत की खुशी मनाते रहे हैं।

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लॉकडाउन बना कामगारों के लिए मुसीबत : भारत में लेबर डे मनाने की शुरुआत

भारत में विश्व मजदूर दिवस को कई नामों से जाना जाता है। देश में इसे इंटरनेशनल वर्कर डे, मई दिवस, मजदूर दिवस, अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, लेबर डे, कामगार दिन, वर्कर डे आदि के नाम से जाना जाता है। भारत में साल 1923 से लेबर को मनाने की शुरुआत हुई। 1 मई को लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान ने चेन्नई में लेबर डे मनाने की शुरुआत की।

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लॉकडाउन बना कामगारों के लिए मुसीबत : मजदूरों की जिंदगी पर लगा कोरोना ग्रहण

मजदूर दिवस के मौके पर भारत में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। देश भर में कई जगहों पर इस दिन नेता रैली करते हैं, तो कई स्थानों पर सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। कामगारों और मजदूरों के लिए कई तरह की योजनाओं की घोषणा भी की जाती है।

प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया सहित हर माध्यमों में बस लेबर डे की ही चर्चा होती रहती है। इस दिन केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व के 80 से अधिक देशों के अधिकांश संस्थानों में अवकाश होता है, लेकिन ऐसा लगता है कि इस साल मजदूरों की जिंदगी पर कोरोना वायरस नामक ऐसा ग्रहण लगा है कि जिसके कारण मजदूर अपने घरों में रहने को मजबूर हैं।

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पूरे विश्व में कोविड-19 का कहर

चीन में जब कोरोना वायरस का प्रकोप शुरू हुआ, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह वायरस दुनिया भर में इस तरह का आतंक मचाएगा और विश्व भर के कामगारों के लिए मुसीबत बन जाएगा, लेकिन सच यह है कि लॉकडाउन में बंद रहने के कारण यह बना कामगारों के लिए मुसीबत। किसी ने नहीं सोचा था कि कोरोना वायरस के डर से दुनिया भर के मजदूर विश्व मजदूर दिवस के दिन अपने घर में बैठकर अपनी जीवन की रक्षा के लिए हर उपाय कर रहे होंगे। किसी को उम्मीद नहीं थी कि कोरोना वायरस लॉकडाउन

लॉकडाउन बना कामगारों के लिए मुसीबत-Labour day-lockdown-musibat

आज कोरोना वायरस संक्रमण से 30 लाख से अधिक लोग बीमार हैं और इसके कारण दुनिया भर में लाखों लोगों की मृत्यु हो चुकी है। भारत में भी कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 30 हजार से अधिक लोग बीमार हैं और हजारों की मौत हो चुकी है। इसके कारण लाखों मजदूर हों या दूसरे कर्मचारी, सभी अपने-अपने घरों में बंद हैं।

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सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप

भारत में जब कोविड-19 ने कहर ढाना शुरू किया, तो सरकार ने 24 मार्च को देश भर में लॉकडाउन लगा दिया। लॉकडाउन लगाने के बाद सभी सरकारी कार्यालय पूरी तरह से बंद कर दिए गए। सरकारी कामगारों को पूरी तरह घर में रहने का आदेश दिया गया। उस समय से आज तक देश भर के लगभग सभी राज्यों में सरकारी कामकाज बंद हैं और कर्मचारी घर बैठे हुए हैं।

हर साल लेबर डे के मौके पर सरकारी कर्मचारियों, दूसरे कामगारों या मजदूरों को छुट्टियां मिलती थीं। वे अपने परिवार के सदस्यों के साथ विश्व मजदूर दिवस का उत्सव मनाया करते थे, लेकिन इस साल का लॉकडाउन और क्वारंटाइन में लेबर डे सभी मजदूरों की मुसीबत बन गई है।

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निजी संस्थानों के बंद होने से नौकरी पर खतरा

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण लगाए गए लॉकडाउन में केवल सरकारी संस्थान ही नहीं, बल्कि प्राइवेट संस्थान भी पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं। निजी कंपनियां बंद हैं और कंपनियों के कर्मचारी बेकार हो गए हैं। फैक्ट्रीरियां बंद होने के कारण मजदूर के पास कोई काम नहीं रह गया है। देश भर के सभी निजी संस्थान बंद हैं, इसलिए सभी कामगारों की नौकरी खतरे में पड़ गई है।

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लॉकडाउन बना कामगारों के लिए मुसीबत : मजदूरों के पास नहीं कोई काम

जब कोरोना वायरस संक्रमण के कारण देश को बंद कर दिया गया, तो सबसे अधिक परेशानी वैसे मजदूरों और कामगारों को होने लगी, जो रोज की कमाई पर अपना जीवनयापन करतेथे। मजदूर अपनी मेहनत से अपना और अपने परिवार का पेट पालना चाहते हैं, लेकिन दुनिया में उन्हें कोई न काम दे रहा है। शायद ही कभी किसी मजदूर ने सपने में ऐसे मजदूर दिवस की कल्पनी की होगी।

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लॉकडाउन बना कामगारों के लिए मुसीबत : पलायन को मजबूर हुए मजदूर

आप सोचते होंगे कि मजदूरों को शायद कोई परेशानी नहीं हो रही है, लेकिन सच यह है कि लॉकडाउन बना है कामगारों के लिए मुसीबत। लॉकडाउन के कारण काम बंद होने के कारण लोगों की आय पूरी तरह से बंद हो गई। इससे मजदूरों के लिए जीवन यापन करना मुश्किल हो गया। कई जगह स्थिति ऐसी उत्पन्न हो गई कि मजदूरों को कई दिनों तक भूखे पेट भी रहना पड़ा। लॉकडाउन के कारण देश की सार्वजनिक और निजी परिवहन सेवाएं बंद कर दी गईं थीं।

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लगातार कई दिनों तक बेकार बैठने और भोजन की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण मजदूरों के पास घर जाने के अलावा कोई उपाय नहीं था। इससे देश भर में पलायन शुरू हो गया। पूरे देश में मजदूर महानगरों और शहरों को छोड़कर अपने-अपने घर की ओर पैदल ही निकलना पड़ा।

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लॉकडाउन बना कामगारों के लिए मुसीबत : घर और परिवार से दूर रहने को मजूबर

इससे पहले के हर लेबर डे के मौके पर दुनिया भर के कामगार जश्न मनाया करते थे, लेकिन साल 2020 का लेबर डे पर कामगारों कई तरह की परेशानियां झेल रहे हैं। हजारों की संख्या में जब मजदूर बिना खाने-पीने की कोई व्यवस्था के पलायन करने लगे, तो सरकार ने मजदूरों को पलायन करने से रोक दिया।

जो मजदूर जहां थे, वहीं उनको रहने को बोला गया। इसी कारण आज लॉकडाउन और क्वारंटाइन के कारण मजदूरों को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ रही है। वे अपने घरों और परिवार के सदस्यों से दूर हैं और दिन-रात उनको अपने परिवार की चिंता हो रही है।

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लॉकडाउन बना कामगारों के लिए मुसीबत : चिंता और तनाव से बीमार होने की संभावना

लॉकडाउन बना कामगारों के लिए मुसीबत, क्योंकि उनकी रोजी-रोटी बंद हो गई। इससे मजदूरों की आर्थिक हालत बहुत खराब हो रही है। कामगारों के बेकार होने के कारण इनके परिवार में पहुंचने वाला पैसा बंद हो गया है। पैसा नहीं पहुंचने से परिवार की आर्थिक समस्याएं शुरू हो गईं हैं और इस कारण सैकड़ों मजदूर का जीवन चिंता और तनाव में गुजर रहा है। लगातार तनाव और चिंता में रहने के कारण उनको मानसिक बीमारियां होने की संभावना बढ़ रही है।

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लॉकडाउन बना कामगारों के लिए मुसीबत : लॉकडाउन और क्वारंटाइन में मजदूरों को परेशानी

सरकार ने कोरोना वायरस के कारण जब देश की सारी गतिविधयों को बंद कर दिया, तो लॉकडाउन में मजदूरों को कई तरह की मुश्किलें होने लगीं। कई ऐसी खबरें भी आईं, जिसमें अपने घर की ओर जाते मजदूरों की भूख और प्यास के कारण रास्ते में ही मौत हो गई।

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1 मई को देश में लगे लॉकडाउन का 38वां दिन है और यह बना है देश भर के लिए कामगारों के लिए मुसीबत। आज भी किसी को पता नहीं कि कब देश भर में पूरी तरह से लॉकडाउन खत्म होगा। भारत में लगातार कोरोना वायरस का संक्रमण फैलता जा रहा है और इसके कारण लगातार कई दिनों से संस्थाएं बंद है। ऐसे में लॉकडाउन और क्वारंटाइन के कारण कामगार सबसे अधिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उम्मीद है कि लॉकडाउन में मजदूरों की मुसीबत खत्म होगी और उनकी जिंदगी फिर से पटरी पर आएगी।

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हैलो हेल्थ सभी कामगारों से यह अपील करता है कि कोरोना महामारी अचानक से आई एक आपदा है और इस संकट के समय में आप सभी को धैर्य रखने की जरूरत है। आप लोग जहां भी हैं, नियमित रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन और सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते रहें। ऐसा नहीं करने से आप नोवल कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते हैं और इससे आपकी जान भी जा सकती है।

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हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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सूत्र

All accessed on 30/04/2020

Occupational Safety and Health Administration – https://www.osha.gov/SLTC/electrical/

History of Labor Day – https://www.dol.gov/general/laborday/history

Coronavirus-https://www.who.int/health-topics/coronavirus-

Coronavirus disease (COVID-19) Pandemic –https://www.who.int/emergencies/diseases/novel-coronavirus-2019

India ramps up efforts to contain the spread of novel coronavirus-https://www.who.int/india/emergencies/novel-coronavirus-2019

#IndiaFightsCorona COVID-19 –https://www.mygov.in/covid-19

 

लेखक की तस्वीर badge
Suraj Kumar Das द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/06/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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