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कोरोना के कहर के बीच मध्यम वर्ग ऐसे कर सकता है निवेश की प्लानिंग

कोरोना के कहर के बीच मध्यम वर्ग ऐसे कर सकता है निवेश की प्लानिंग

कोरोना वायरस की वजह से दुनिया मंदी की तरफ बढ़ रही है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। इस वायरस ने आम-जन से लेकर बड़े-बड़े उद्योगपतियों की कमर तोड़ दी है। लेकिन सबसे ज्यादा अगर कोई प्रभावित हुआ है तो वो है मध्यम वर्ग। मध्यम वर्ग ऐसा वर्ग है जिसे सरकार की तरफ से भी कुछ खास राहत नहीं मिलती है। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए भारत में पिछले पांच हफ्तों से आवश्यक वस्तुओं के अलावा हर तरह का कारोबार और उत्पाद बंद है। जाहिर है भारत के हर वर्ग की स्थिति कमजोर होगी। ऐसे में जानते हैं कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन में मध्यम वर्ग कैसे निवेश की प्लानिंग करे…

लॉकडाउन में मध्यम वर्ग : नौकरियों पर हो सकता है खतरा

इतना तो आप जानते ही होंगे कि ऐसे वक्त में किसी भी कंपनी को चलाए रखने के लिए आमतौर पर मैनपावर में कमी की जाती है। तो ऐसे में स्थिति और बिगड़ी तो वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं और उद्योगों पर प्रभाव पड़ सकता है और शायद आपकी नौकरी पर भी। लेकिन इस मंदी से मिडिल क्लास खुद को बचा कर रख सकता है। मंदी के दौरान, लोग कम पैसा खर्च करते हैं, निवेश भी कम होता है और इसका सीधा असर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। लेकिन कभी-कभी ये निवेश आपके काम आ सकता है।

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लॉकडाउन में मध्यम वर्ग: गैर जरूरी खर्चों से रहें दूर

लॉकडाउन में मध्यम वर्ग परेशान है। इस कठिन परिस्थिति में एक सवाल है जो बार-बार आपके दिमाग में घूम रहा होगा कि इस आर्थिक संकट के दौरान मौजूदा वित्तीय योजनाओं को कैसे पूरा करें। ऐसी मुश्किल घड़ी में मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए जरूरी आवश्यकता एक ऐसा बजट तैयार करने की है जिनसे उन्हें लाभ हो सके। वर्तमान परिदृश्य को देखें तो देश भर में अधिकांश परिवारों में अचानक आय के साधन कम हो गए हैं। कहीं किसी की नौकरी गई है तो किसी की सैलरी में मनचाही कटौती कर दी गई है। ऐसे में उनके लिए जरूरी खर्चों को वहन करना भी मुश्किल हो गया है। नतीजतन अधिकांश मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए एक तत्काल वित्तीय नियोजन की आवश्यकता है जिससे की स्थिति में सुधार हो सके। यानी गैर जरूरी खर्चों को तब तक के लिए टाल दें जब तक स्थिति बेहतर न हो जाए।

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लॉकडाउन में मध्यम वर्ग: इन चीजों का ध्यान रखकर भी कर सकते हैं निवेश

आरबीआई ने की है रेपो रेट में कटौती

पिछले दिनों आरबीआई ने रेपो रेट में 0.75% कमी की थी। ऐसे में आम आदमी को इससे राहत मिलने की उम्मीद है। आपके पास यदि कोई मौजूदा लोन है तो आपकी ईएमआई में फर्क पड़ेगा। इतना ही नहीं रिवर्स रेपो रेट कटौती के बाद बैंकों को आरबीआई से कम ब्याज मिलेगा। ऐसे में बैंक अपनी रकम को आरबीआई से निकाल कर अपने ग्राहकों को ज्यादा से ज्यादा लोन दे सकते हैं।

शेयर खरीदने का है खास मौका

अगर आप निवेश के लिहाज से सोच रहे हैं तो शेयर की कीमतें कम होना शेयर खरीदने का सबसे सुनहरा मौका होता है। क्योंकि इससे उम्मीद की जाती है कि जब स्थिति बेहतर होगी तो शेयर की कीमतें बढ़ेंगी। आकंड़ों को देखें तो पता चलेगा कि शेयर तभी अधिक लाभ देती है जब उसकी कीमतें सबसे कम हों। ऐसे में आपके पास शेयर खरीदने का खास मौका है जिसका लाभ आप बाद में ले सकते हैं। लेकिन इस बीच ध्यान रखने की बात ये है कि आप अपना सारा पैसा एक ही जगह पर न लगाएं। यह आपके लिए घाटे का सौदा हो सकता है।

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फिक्स डिपॉजिट

हर इंसान की यह कोशिश रहती है कि वह जो पैसे की कमाई करे तो अपने खर्च और बचत के आलवा कुछ पैसों को कहीं निवेश करे। ऐसे में फिक्स्ड डिपॉजिट अच्छा विकल्प हो सकता है। फिक्स डिपॉजिट यानी FD में आप जब चाहें तब पैसा निकाल सकते हैं। अगर आपने पहले से निवेश किया हुआ है तो इस वक्त वो बचाया हुआ पैसा आपके काम आ सकता है और अगर नहीं किया तो कर सकते हैं क्योंकि फिक्स डिपाॅजिट से अच्छा रिटर्न मिल सकता है। 1 वर्ष की FD के लिए प्रमुख बैंकों की निश्चित जमा ब्याज दरें कुछ इस प्रकार हैं।
एसबीआई: 5.7%
एचडीएफसी बैंक: 5.8%
आईसीआईसीआई बैंक: 5.8%

इक्विटी स्‍कीमों में निवेश करना बेहतर विकल्प

इक्विटी म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में पैसा बनाने में मदद करते हैं। नई टैक्स व्यवस्था में 5 से 7.5 लाख रुपये तक की सालाना आय पर इनकम टैक्स रेट को घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। ऐसे में मध्यम वर्ग के पास अच्छा मौका है इक्विटी स्‍कीमों में इनवेस्ट करने का। इसे मार्केट में बेस्ट इन्वेस्टमेंट में से एक माना जाता है। इसकी वजह ये है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न देने की संभावना होती है। इसके तहत आपके द्वारा इन्वेस्ट किए पैसे को म्यूचुअल फंड कंपनियां शेयर मार्केट में लगाती हैं, जो विभिन्न सेक्टर्स के होते हैं। पिछले पांच साल में तीन म्यूचुअल फंड स्कीमों (मिराए एसेट इमर्जिंग ब्लूचिप फंड, एसबीआई स्मॉल कैप फंड और आदित्य बिड़ला सनलाइफ बैंकिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज फंड) ने निवेशकों का पैसा दोगुना कर दिया है।

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नया हेल्थ इंश्योरेंस प्लान

अगर आप भी इन दिनों कोरोना के इलाज को कवर करने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेने का सोच रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना है। दरअसल भारत में चिकित्सा महंगाई की सालाना दर करीब 17 फीसदी है। यह महंगाई के सामान्य स्तर से कहीं ज्यादा है। इस तरह पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरत बढ़ जाती है। हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेने से पहले इस बात का ध्यान रखें की इसमें सभी बीमारियों के अलावा महामारी जैसे स्वाइल फ्लू या कोरोना वायरस के इलाज का खर्च कवर है या नहीं। हेल्थ पॉलिसी खरीदने से पहले यह समझ लें कि उसमें कितना और क्या आर्थिक कवर मिलेगा?

हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में लॉकडाउन में मध्यम वर्ग कैसे निवेश को लेकर प्लानिंग करें इससे जुड़े टिप्स दिए गए हैं। यदि आप इससे जुड़ी कोई अन्य जानकारी पाना चाहते हैं तो आप अपना सवाल कमेंट कर पूछ सकते हैं। हम अपने एक्सपर्ट्स द्वारा आपके सवाल का जवाब दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Coronavirus outbreak/https://www.who.int/emergencies/diseases/novel-coronavirus-2019/advice-for-public/Accessed April 24, 2020

Coronavirus (COVID-19) – https://www.cdc.gov/coronavirus/2019-ncov/index.html – Accessed April 24, 2020

Coronavirus – https://www.who.int/health-topics/coronavirus – Accessed on 24/4/2020

Coronavirus (COVID-19) – https://www.nhs.uk/conditions/coronavirus-covid-19/ – Accessed on 24/4/2020

 

लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Mona narang द्वारा लिखित
अपडेटेड 24/04/2020
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