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लॉकडाउन: महामारी के समय पीरियड्स नहीं रुकते, फिर सेनेटरी पैड की बिक्री भी नहीं रुकनी थी...

लॉकडाउन: महामारी के समय पीरियड्स नहीं रुकते, फिर सेनेटरी पैड की बिक्री भी नहीं रुकनी थी...

कोरोना वायरस के चलते भारत में, लॉकडाउन धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। ऐसे में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए ग्रोसरी और मेडिकल स्टोर खुले हैं। लेकिन लॉकडाउन में सेनेटरी पैड्स की समस्या पैदा हो गई है। कई जगहों पर प्रोडक्शन बंद होने की वजह से ऐसा हो रहा है। महिलाएं मासिक धर्म के समय खुद को हाइजीन रखने में उपयोग होने वाले उत्पाद नहीं खरीद पा रही हैं। गांव में रहने वाली महिलाओं तक तो यह सुविधा बिल्कुल ही नहीं पहुंच पा रही है। साथ ही, गोपनीयता के साथ हाइजीन बनाए रखने में लाखों लड़कियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लॉकडाउन में सेनेटरी पैड्स की समस्या

राजस्थान, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में महिलाएं को लॉकडाउन में सेनेटरी पैड्स की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में राजस्थान की लड़कियों ने मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है। झारखंड में लड़कियों ने स्वयंसेवी संस्थाओं को फोन कर मदद के लिए कहा है। दूर-दराज के गांव में रहने वाली लड़कियों ने पत्र में बताया कि उन्हें हर महीने स्कूल से सेनेटरी पैड मिलते थे लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण जब से स्कूल बंद हुए हैं उन्हें इस मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि इनके घर से बाजार दूर हैं। ट्रांस्पोर्टेशन बंद होने के कारण ये लड़कियां मेडिकल स्टोर भी नहीं जा पा रही हैं।

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लॉकडाउन में सेनेटरी पैड्स की समस्या : हाइजीन को लेकर जागरुकता

पिछले कुछ सालों में भारत सरकार और कई एनजीओ ने मिलकर मासिक धर्म में स्वच्छता बनाए रखने के लिए महिलाओं को जागरूक किया है। खासकर किशोर लड़कियों के बीच यह जागरुकता फैलाई गई। इस समय सेनेटरी पैड हर गांव, कस्बों और शहर तक पहुंच गया है। सरकार के प्रयासों के कारण जॉनसन एंड जॉनसन, और प्रॉक्टर एंड गैंबल जैसी कई नई कंपनियां सेनेटरी नैपकिन बना रही हैं। जिन्हें देश के कोने-कोने तक पहुंचाया जाता है। सेनेटरी नैपकिन हर महिला तक पहुंचे, इसके लिए सरकार ने मुफ्त वितरण और स्थानीय उत्पादन जैसी सुविधाएं शुरू की हैं। साथ ही, नैपकिन की कीमतों में भी काफी छूट दी है। वहीं, सेनेटरी नैपकिन की कई वैराइटी भी अब बाजार में उपलब्ध है। हर गांव और कस्बों में महिलाओं को कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन में सेनेटरी पैड्स की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

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लॉकडाउन में सेनेटरी पैड्स की समस्या : स्टॉक आउट हो चुके थे सेनेटरी नैपकिन

24 मार्च, 2020 से, हर चीज की बिक्री बंद हो गई थी। लॉकडाउन की वजह से ऐसा जरूरी सामान बाजार तक नहीं पहुंच पाया। 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान सेनेटरी पैड न मिलने की वजह से महिलाओं को बहुत समस्या हुई थी। इसके अलावा, सेनेटरी पैड के उत्पादन और वितरण को रोक दिया गया था। उद्यमियों ने खुद इस बात का जिक्र किया था। ऐसे में महिलाओं के साथ उन्हें भी काफी नुकसान हुआ। सेनेटरी पैड को 30 मार्च, 2020 को आवश्यक वस्तुओं के रूप में शामिल किया गया, जिससे कुछ स्थानों पर इसका उत्पादन फिर शुरू हुआ। तब तक बाजार में सेनेटरी नैपकिन स्टॉक आउट हो चुके थे।

ऐसे में महिलाओं और लड़कियों के बारे में नहीं सोचा गया। जिन छोटी-बड़ी फैक्ट्री में उत्पादन शुरू हुआ, वहां कच्चे के माल की समस्या आ गई। ऐसे में उत्पादन लंबे समय तक बाधित रहा। साथ ही, श्रमिकों को भी काम नहीं मिला। लॉकडाउन की स्थिति में ज्यादा उत्पादन संभव भी नहीं है।

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लॉकडाउन में सेनेटरी पैड्स की समस्या: मानुषी छिल्लर ने सरकार से की ये अपील

पूर्व मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार सेनेटरी पैड बांटने का आग्रह किया है। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा- मैं बहुत शुक्रगुजार हूं कि कोरोना वायरस संकट के दौरान भारत सरकार द्वारा सैनिटरी पैड को एक आवश्यक वस्तु के रूप में शामिल किया गया है। हालांकि, हमें इस बात पर ध्यान देने की आवश्यकता है कि जो महिलाएं विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर तबके से वें मुफ्त में पैड प्राप्त कर सकें। इसके लिए मैं सभी राज्यों की सरकारों से आग्रह करती हूं कि वे दैनिक राशन के साथ-साथ वंचितों को सैनिटरी पैड बांटने करने की कृपा करें।

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महिलाओं के लिए मासिक धर्म उत्पादों की आवश्यकता पर किसी का ध्यान नहीं गया

स्कूलों, आंगनवाड़ियों और स्वयं सहायता समूहों से मुफ्त में या रियायती कीमत पर सेनेटरी पैड पाने वाली लड़कियों और महिलाओं को कम से कम एक महीने तक यह सुविधा नहीं मिली। कम आय वाले परिवारों और दैनिक वेतन पाने वाले श्रमिकों के परिवार को पैड खरीदना काफी मुश्किल हो गया। ये श्रमिक लॉकडाउन की वजह से अपनी नौकरी भी गंवा चुके हैं। बाजार में पैड कम होने की वजह से बिना वजह उनकी कीमत भी बढ़ा दी गई। अगर ऐसा ज्यादा समय तक रहा तो महिलाएं सेनेटरीन पैड नहीं खरीद पाएंगी। राहत शिविरों और आश्रयों में भोजन और पानी पहुंचाने को प्राथमिक चिंता माना जा रहा है। वहीं कोरोना वायरस से बचने के लिए सोशल डिस्टेंस बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। परीक्षण के लिए किट और आवश्यक दवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं लेकिन महिलाओं के लिए मासिक धर्म उत्पादों की आवश्यकता पर किसी का ध्यान नहीं गया।

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अनहाइजीनिक प्रैक्टिस के लिए मजबूर

महिलाएं और लड़कियां अपने मासिक धर्म में सेनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल ज्यादा समय तक कर सकती हैं। साथ ही वे पुराने कपड़े जैसी अनहाइजीनिक चीजों का इस्तेमाल करने पर मजबूर हो सकती हैं। आज के समय में पैड को नियमित रूप से बदलना, कपड़े को बार-बार धोकर प्रयोग करना और शरीर की सफाई करना पहले के समय से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। मलिन बस्तियों में, आज भी बहुत से लोग सामुदायिक शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के समय में महिलाओं का सामूहिक शौचालय इस्तेमाल काफी मुश्किल हो सकता है।

गांवों में, मासिक धर्म के दौरान इस्तेमाल किए गए कपड़े को धोने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत होती है। ऐसे में पानी न मिलना भी बड़ी समस्या हो सकती है। पैड को बार-बार बदलना और उन्हें फेंकने के लिए गोपनीयता बनाए रखना, शहरी और ग्रामीण महिलाओं के लिए एक जैसी समस्या है। जिन महिलाओं के घर सड़क पर बने हैं। उनको पीरियड के समय क्या-क्या कठिनाई होती होगी, यह हमारी सोच से भी परे है।

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लॉकडाउन में सेनेटरी पैड्स की समस्या को लेकर क्या कहते हैं डॉक्टर

लॉकडाउन में सेनेटरी पैड्स की समस्या को लेकर गायनेकोलॉजिस्ट दीपाली गुप्ता ने बताया कि मासिक धर्म के समय स्वच्छता न रखने से महिलाओं के स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। गरीब महिलाओं के लिए साफ-सफाई रखना जरूरी है। सफाई रखना उनके परिवार के लिए भी बेहद जरूरी है। अगर सेनिटरी नैपकिन उन्हें नहीं मिलेंगे तो हाइजीन मेंटेन करना मुश्किल हो जाएगा। मासिक धर्म में पैड को ज्यादा समय तक इस्तेमाल करने से प्रजनन संक्रमण (आरटीआई) का खतरा रहता है। साथ ही एक बार इस्तेमाल किए हुए कपड़े को बार—बार धोकर इस्तेमाल करने से भी संक्रमण तेजी से फैलता है। महिलाएं आरटीआई के बारे में ज्यादा जागरूक नहीं हैं।

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इन उपायों से महिलाओं को बीमार होने से बचाया जा सकता है:

  • सबसे पहले, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के चैनलों के माध्यम से मासिक धर्म में उपयोग होने वाले उत्पादों को महिलाओं तक पहुंचाना जरूरी है। इसके लिए बड़े पैमाने पर कंपनियों को हर क्षेत्र की दुकानों और मेडिकल स्टोरों तक सेनेटरी पैड की आपूर्ति होनी चाहिए।
  • यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि पैड की कीमत ज्यादा न हो और दुकानदार भी उसे सही दाम पर ही बेंचे। राज्य सरकारें जिला प्रशासनों के माध्यम से सेनेटरी पैड का स्टॉक रख सकती हैं।
  • जिला अधिकारी फ्रंटलाइन वर्कर्स, आंगनवाड़ी वर्कर, कम्युनिटी वालंटियर्स और अन्य समूह के साथ मिलकर मीलों दूर तक भी सेनेटरी नैपकिन की पहुंच बना सकते हैं।
  • जिन लड़कियों और महिलाओं तक सेनेटरी नैपकिन नहीं पहुंच पा रहे हैं, उन्हें कपड़े को सुरक्षित तरीके से प्रयोग करने के बारे में जानकारी देना जरूरी है। जतन संस्थान जैसे संगठन घर में बने कपड़े के पैड और उनके स्वच्छ रखरखाव पर जानकारी दे सकते हैं।
  • आइसोलेशन में रह रहीं महिलाओं तक सैनिटरी पैड और अंडरवियर पहुंचाया जाना चाहिए। साथ ही, महिलाओं के लिए अलग और सुरक्षित शौचालय और पानी की सुविधा भी होनी चाहिए। पैड फेंकने के लिए डस्टबिन भी आवश्यक है।
  • डिस्पोजेबल और दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले सेनेटरी पैड के स्वच्छ उपयोग की जानकारी देना भी आवश्यकता है। पैड को धोने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए पानी के भंडारण पर जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है।
  • कोरोना वायरस के कारण तेजी से दुनिया में बदलाव हो रहा है। सभी लोगों को सावधानी देने की जरूरत है।

ध्यान रहे

संकट के समय में, महिलाओं और लड़कियों के प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों को अक्सर उपेक्षित कर दिया जाता है। भारतीय नीति निर्माताओं ने लड़कियों और महिलाओं के लिए मासिक धर्म में स्वच्छ और स्वस्थ रहने के लिए खूब काम किया है। इस समय उन प्रयासों को जारी रखना जरूरी है। हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में लॉकडाउन में सेनेटरी पैड्स की समस्या को लेकर बताया गया है। यदि आपका इससे जुड़ा कोई सवाल है तो आप कमेंट कर पूछ सकते हैं। हम अपने एक्सपर्ट्स द्वारा आपके सवाल का उत्तर दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे।

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हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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All About Menstruation   :https://www.rchsd.org/health-articles/all-about-menstruation/

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लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Mona narang द्वारा लिखित
अपडेटेड 27/04/2020
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