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Lockdown: क्या पीएम मोदी फिर से करेंगे देश को संबोधित? क्या बढ़ेगा लॉकडाउन?

Lockdown: क्या पीएम मोदी फिर से करेंगे देश को संबोधित? क्या बढ़ेगा लॉकडाउन?

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देश के प्रधानमंत्री मोदी ने 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी। लॉकडाउन के बावजूद कोविड-19 के मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब तक देश में (10 अप्रैल, 2020) 7600 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। मोदी सरकार इससे निपटने का हर संभव प्रयास कर रही है। 14 अप्रैल को लॉकडाउन खत्म होने वाला है। एक तरफ जहां लोगों को लॉकडाउन के खत्म होने का इंतजार है, वहीं खबर है कि कई राज्यों के अनुरोध के बाद केंद्र सरकार अप्रैल तक इसे बढ़ा सकती है। पीएम मोदी ने आज देश के सभी मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। ऐसे में सभी लोगों को पीएम मोदी क्या फैसला लेते हैं, इसका बेसब्री से इंतजार है।

मुख्यमंत्रियों ने की लॉकडाउन जारी रखने की वकालत

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने लॉक डाउन को कम से कम 30 अप्रैल तक बढ़ाये जाने के लिए कहा। उन्होंने कहा- यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर होना चाहिए, अगर राज्य अपने स्तर पर फैसला करेंगे तो उतना असर नहीं होगा। अगर किसी तरह की ढील दी जाए तो किसी भी सूरत में ट्रांसपोर्ट नहीं खुलना चाहिए। ना रेल, ना सड़क ना एयरलाइन।

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अटकले लगाई जा रही हैं कि मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करने के बाद रविवार को लॉकडाउन पर पीएम मोदी एक बार फिर देश को संबोधित कर सकते हैं। इसमें वह लॉकडाउन को बढ़ाने या खत्म को लेकर फैसला सुनाएंगे। हो सकता है राज्य मंत्रियों द्वारा रखी गई शर्तों को लेकर भी पीएम मोदी कुछ बात करें। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा- राज्य को आर्थिक नुक़सान हुआ है। कोविड 19 से लड़ने के लिए केंद्र से पैकेज चाहिए। लॉकडाउन बढ़ाया जाए लेकिन मानवीय और व्यवहारिक नजरिए से फैसला हो। हॉटस्पॉट और क्लस्टर की सीलिंग की जाएगी।

बता दें, इससे पहले पीएम मोदी ने बुधवार (8 अप्रैल) को विपक्ष के नेताओं और राज्यों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिग की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने संकेत दिए कि संक्रमण को रोकने के लिए देश में लॉकडाउन 14 अप्रैल के बाद भी जारी रह सकता है। बता दें पंजाब और ओडिशा ने लॉकडाउन को बढ़ाकर 30 अप्रैल तक कर दिया है। इस कॉन्फ्रेंस में राज्य मंत्रियों ने पीएम मोदी के सामने 5 मांगें रखी थी। इसमें कोरोना टेस्ट को फ्री करने और पीपीई समेत सभी मेडिकल इक्विपमेंट को मुहैया कराने की मांग की गई थी। इसके अलावा राज्य एफआरबीएम राजकोषीय सीमा को 3 से 5 फीसदी करने, राज्यों को उनका बकाया देने, राहत पैकेज को जीडीपी के एक फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी करनेके लिए कहा गया था।

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लॉकडाउन पर पीएम मोदी ले सकते हैं ये फैसला

जब देश में कोरोना पीड़ितों की संख्या कम थी उस समय प्रधानमंत्री ने 21 दिन के लॉकडाउन का एलान किया था। आज देश में 6 हजार से ज्यादा लोग कोविड-19 से संक्रमित हैं। देश में कोरोना की मौजूदा स्थिति को देखते हुए क्या लॉकडाउन को लेकर किसी तरह की छूट दी जाएगी या फिर लॉकडाउन को आगे बढ़ा दिया जाएगा। वहीं सरकार के आला सूत्रों का कहना है कि देश में लगभग 400 जिले कोरोना से अछूते हैं। जिन राज्यों में कोरोना के मामले नहीं हैं या न के बराबर हैं उनसे आंतरिक तौर पर लॉकडाउन हटा दिया जाएगा। कुछ क्षेत्रों को सीमित छूट मिलने की संभावना है। क्योंकि यदि लॉकडाउन को जारी रखा तो बड़े पैमाने पर विषम आर्थिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस हफ्ते पीएं मोदी उन उद्योगों को राहत पैकेज पर भी बात कर सकते हैं जिन्हें लॉकडाउन की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

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लॉकडाउन पर पीएम: एनबीएफसी पर नकदी का दबाव

एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ऋण वापसी के कम संग्रह के चलते गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) को नकदी संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनबीएफसी द्वारा ग्राहकों को ऋण की किस्त स्थगित करने की सुविधा देने और बैंको से यह सुविधा नहीं मिलने के कारण दोहरी चुनौतियों का सामना करने पड़ रहा है।

एनबीएफसी को स्वयं बैंकों से ऋण स्थगन की सुविधा नहीं मिली तो उन्हें नकदी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही वह समय पर ऋण दायित्वों को पूरा न कर पाने के लिए मजबूर हो सकते हैं। एनबीएफसी भी कर्ज लौटाने में मोहलत मांग रहे हैं। एनबीएसफी का कहना है कि आखिर वे भी कर्जदार हैं। एनबीएफसी मुख्य रूप से अपनी नकदी संबंधी जरूरतों के लिए बैंकों पर आश्रित हैं।

कोरोना वायरस से बचाव के लिए पीएम मोदी ने शेयर किए थे ये आयुर्वेदिक उपाय:

नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल पर आयुष मंत्रालय द्वारा जारी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपायों की तस्वीरें साझा की थी, जिसमें निम्नलिखित आयुर्वेदिक उपायों का जिक्र किया है।

  • पूरे दिन केवल गर्म पानी पिएं।
  • आयुर्वेदिक उपाय में रोज सुबह 10 ग्राम (1 चम्मच) च्यवनप्राश लें। मधुमेह के रोगी शुगर फ्री च्यवनप्राश लें।
  • तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, शुण्ठी (सूखी अदरक) एवं मुनक्का से बनी हर्बल ची/काढ़ा दिन में एक से दो बार पिएं (स्वाद के अनुसार इसमें गुड़ या ताजा नींबू रस मिला सकते हैं)।
  • प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान करें।
  • हल्दी, जीरा, धनिया एवं लहसुन आदि मसालों का भोजन बनाने में प्रयोग करें।
  • खांसी या गले में खराश होने पर दिन में कम से कम एक बार पुटीना के पत्ते/अजवाइन डाल कर पानी की भाप लें।
  • गोल्डन मिल्क- 150 मिलीलीटर गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी चूर्ण दिन में एक से दो बार लें।
  • सुबह एवं शाम तिल/नारियल का तेल या घी नाक के दोनों छिद्रों में लगाएं।
  • केवल 1 चम्मच तिल/नारियल तेल को मुंह में लेकर दो से तीन मिनट कुल्ले की तरह मुंह में ही घुमाएं। उसके बाद
  • उसे कुल्ले की तरह ही थूक दें। फिर गर्म पानी से कुल्ली कर लें। ऐसा दिन में एक से दो बार करें।
  • आयुर्वेदिक उपाय में खांसी या गले में खराश होने पर लौंग के चूर्ण में गुड़ या शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र
लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Mona narang द्वारा लिखित
अपडेटेड 11/04/2020
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