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डिप्रेशन का शिकार रह चुकीं दीपिका ने कही मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) से जुड़ी यह बात

डिप्रेशन का शिकार रह चुकीं दीपिका ने कही मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) से जुड़ी यह बात

चिंता और अवसाद का सामना करने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने रविवार को दिल्ली में मानसिक स्वास्थ्य पर अपनी पहली व्याख्यान श्रृंखला की शुरूआत की। 33 वर्षीय अभिनेत्री ने कहा कि ‘ द लाइव लव लाफ फाउंडेशन’ को चार साल हो चुके हैं और आज हमने अपनी पहली व्याख्यान श्रृंखला शुरू की है। मुझे लगता है कि हम एक लंबा सफर तय कर चुके हैं’। इस कार्यक्रम के दौरान मानसिक स्वास्थ्य और विषय पर बातचीत की गई। 2015 में शुरू की गई ये संस्था तनाव, चिंता और अवसाद का अनुभव करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का मार्गदर्शन करती है।

ये ताकत करेंगी काम

कार्यक्रम के दौरान पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक और पद्म श्री डॉ सिद्धार्थ मुखर्जी ने व्याख्यान दिया गया। उन्होंने ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब कैंसर से पीड़ित लोगों को समाज में कलंक माना जाता था। बीमारी का जिम्मेदार भी उन्हीं को माना जाता था। आज ये समस्या मानसिक रोगी को झेलनी पड़ रही है। संबोधन के दौरान उन्होंने तीन बातों पर जोर दिया।

1. राजनीतिक बल

मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) के लिए एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के रूप में मान्यता प्राप्त होना।

2.राष्ट्रीय मुद्दा

मानसिक स्वास्थ्य के राष्ट्रीय संस्थान बनाने की आवश्यकता है।

3. समान दिशा

राजनीतिक क्षेत्र में हितधारकों को एक साथ आना होगा और हम सब को सामान्य लक्ष्य की दिशा में काम करना होगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने की तारीफ

कार्यक्रम में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने वीडियो संदेश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है। द लाइव लव एंड लाफ फाउंडेशन ने इस ओर सराहानीय कदम उठाया है। मैं इसके लिए दीपिका पादुकोण को बधाई देना चाहता हूं।

आगे आना जरूरी है

आयुष्मान भारत के सीईओ डॉ इंदु भूषण ने कहा कि मुझे खुशी है कि इस कार्यक्रम का आयोजन मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों को जड़ से खत्म करने के लिए किया गया है। लोग मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर बात नहीं करना चाहते है। इसके लिए हमे दूसरों से खुलकर बात करने की जरूरत है। जब तक हम समस्या को स्वीकार नहीं करते हैं, तब तक हम इसका समाधान नहीं ढूंढ पाएंगे।

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हमें साथ मिलकर इस समस्या से निपटना है

इस समारोह में दीपिका अपने बैडमिंटन स्टार पिता प्रकाश पादुकोण, मां उजाला और गोल्फ खिलाड़ी बहन अनिशा पादुकोण के साथ शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने अपने सबसे लंबे संघर्ष के बारे में बात करते हुए कहा कि ‘मुझे लगता है कि समय बदल चुका है। लोगों को अब खुल के बात करनी चाहिए। निश्चित रूप से हमे अभी और अधिक काम करने की जरूरत है। मुझे यकीन है कि हम सब साथ मिलकर इन समस्याओं से छुटकारा पा लेंगे।

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मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) के बारे में क्या कहते हैं आंकड़े?

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस ने 2016 में देश के 12 राज्यों में एक सर्वे करवाया था। जिसमें पाया गया कि 2.7 प्रतिशत हिस्सा अवसाद जैसे सामान्य मेंटल डिसऑर्डर से ग्रसित है। जबकि 5.2 प्रतिशत आबादी कभी न कभी मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से दो चार हुई है। भारत के 15 करोड़ लोगों को किसी न किसी मानसिक समस्या की वजह से तत्काल डॉक्टरी मदद की जरूरत है। साइंस मेडिकल जर्नल लैनसेट की 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 10 जरूरतमंद लोगों में से सिर्फ एक व्यक्ति को डॉक्टरी मदद मिलती है।

इन आंकड़ों की मानें तो भारत में मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) की समस्या से ग्रसित लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है और आने वाले दस सालों में विश्वभर में मानसिक स्वास्थ्य से ग्रसित लोगों की एक तिहाई संख्या भारतीयों की हो सकती हैं। नतीजन, अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) समस्याएं बढ़ने के आसार हैं।

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बच्चों का भी मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) नहीं है बेहतर

आकड़ों की मानें तो अवसाद जैसी मानसिक बीमारी से बच्चे भी अछूते नहीं हैं। डिप्रेशन से ग्रस्त बच्चों में आत्मविश्वास में कमी, चिड़चिड़पन, गुस्सा आदि भावनात्मक समस्याएं पाई जाती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इसके पीछे का एक कारण सोशल मीडिया भी है। साथ ही आजकल बच्चों पर कई तरह के परफॉर्मेंस का भी दबाव रहता है जिसकी वजह से भी बच्चा चिंता या अवसाद का शिकार हो जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) के प्रति जागरुकता है जरूरी

लाइव लव लाफ फाउंडेशन की संस्थापक दीपिका ने कहा कि ‘ मीडिया ने लोगों के बीच मानसिक स्वास्थय के बारे में जानकारी को आगे बढ़ाया है। मैं सबको धन्यवाद कहना चाहूंगी। उन्होंने आगे कहा मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) के बारे में हम सभी को जागरुक रहना चाहिए। बाकी कुछ लोग साक्षात्कार, लेखन, व मीडिया के माध्यम इस विषय में जागरुकता फैला रहे हैं।

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TLLLF के बारे में

ये संस्था मानसिक स्वास्थ (मेंटल हेल्थ) को बेहतर करने के लिए अब तक छह राज्यों की सात भाषाओं में, 7,000 स्कूली छात्रों और 17,763 शिक्षकों के लिए मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कर चुकी है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र
लेखक की तस्वीर
Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 01/10/2020 को
Dr. Shruthi Shridhar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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