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कैंसर का फेक वीडियो मिला यू ट्यूब में

कैंसर का फेक वीडियो मिला यू ट्यूब में

आप यू ट्यूब में बहुत सारे वीडियो देखते होंगे। कई वीडियो आपको पसंद भी आते होंगे। लेकिन क्या आपको पता है कि कुछ वीडियो फेक भी हो सकते हैं। जब हम किसी बीमारी के बारे में सर्च करते हैं तो हमे लगता है कि जो भी वीडियो सामने दिख रहा है, उसमे सही जानकारी होगी।मीडिया रिपोर्ट की जांच में पाया गया है कि YouTube की एल्गोरिथ्म कैंसर का फेक वीडियो बनाया है जिसे कई भाषाओं में प्रमोट कर रही है। यू ट्यूब के करीब 10 भाषाओं के चैनल में 80 फेक वीडियो के बारे में पता चला है। इसमें स्वास्थय संबंधी गलत जानकारी को दिखाया जा रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन फेक वीडियो को दस लाख बार देखा जा चुका है। इसमे विज्ञापन भी भरपूर दिख रहे हैं।

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कैंसर का फेक वीडियो क्यों हुआ वायरल

कैंसर का फेक वीडियो काफी तेजी से लोगों के बीच फेमश हो चुका है, जिसकी वजह से इस कैंसर के फेक वीडियो में बताई गई उसकी बातें। जिसे अधिकतर लोग सच मान रहे हैं।

गधे के दूध बताया लाभकारी

कैंसर का फेक वीडियो काफी चौंकाने वाला है। इस वीडियों में कैंसर के इलाज के लिए हल्दी या बेकिंग सोडा को उपयोगी बताया जा रहा है। साथ ही जूस और फास्ट (उपवास) को भी कैंसर के इलाज के लिए अहम बताया जा रहा है। हद तो तब हो गई है जब गधे के दूध को भी इसमे शामिल कर लिया जाता है। ये सभी उपाय चिकित्सकीय रूप से सिद्ध नहीं होते हैं। कैंसर के फेक वीडियो में सैमसंग, हेंज और क्लिनिक सहित जाने-माने ब्रांडों के विज्ञापन भी दिखाई दे रहे हैं। कैंसर का फेक वीडियो और इसमें बताए गए उपाय और तरीके आजमाने से पहले आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ताकि ऐसी गलत जानकारी आपके स्वास्थ्य को किसी तरह का नुकसान न पहुंचा सकें।

ज्यादा खराब हो सकती है हालत

मीडिया रिपोर्ट की खोज में अंग्रेजी, पुर्तगाली, रूसी, अरबी, फारसी, हिंदी, जर्मन, यूक्रेनी, फ्रेंच और इतालवी आदि भाषाओं को शामिल किया गया।डेटा एंड सोसाइटी इंस्टीट्यूट के शोध विश्लेषक एरिन मैकएवेनी कहते हैं कि यू ट्यूब में दिखाया गया वीडियो चाहे जो हो, लेकिन आप देखने पर पाएंगे कि अंदर सलाह दी गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह का इलाज लेने पर हो सकता है कि मरीज की हालत अधिक खराब हो जाए

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ऐसी जानकारी हटानी चाहिए

मॉनिटरिंग टीम ने विज्ञापनदाताओं के बारें में भी जांच की और पाया कि ये सभी मिसइंफारमेशन को प्रमोट कर रहे हैं। वीडियो में दिख रहे कंटेट को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता है। सैमसंग ने अपने स्टेटमेंट में साफ कहा कि इस तरह की फेक न्यूज से उसका कोई लेना-देना नहीं है। हमारी कंपनी सेफ्टी को फॉलो करती है। क्राफ्ट हेंज ने कहा कि इस तरह की चीजों को कंट्रोल करना होगा और ऐसी जानकारी को पूरी तरह से हटाया जाना चाहिए।

एड कंपनियां दे रही जवाब

जब एड कंपनी से मीडिया ने बात की तो उनका कहना था कि हमे इसकी जानकारी नहीं थी। अब हम इस तरह के फेक वीडियो में विज्ञापन नहीं देंगे। ये हमारी छवि खराब करता है। Clinique के ऑनर से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। ग्लूस्टरशायर विश्वविद्यालय ने इस बारे में कहा कि यू ट्यूब को इस बारे में ध्यान रखना चाहिए। एड देने के बाद वीडियो की सामग्री बदल जाती है। हम गूगल के साथ काम कर रहे हैं ताकि इस तरह की गलती दोबारा न हों।

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कुछ जानकारी होती हैं अनफिल्टर्ड

मीडिया रिपोर्ट में पाया गया कि यू ट्यूब को पेशेवर चिकित्सक सलाहकार की जरूरत है। पारंपरिक रूप से कैंसर के इलाज को बढ़ावा विकल्प नहीं है। इंपीरियल कॉलेज लंदन के एक प्रमुख कैंसर विशेषज्ञ, प्रोफेसर जस्टिन स्टीबिंग कहते हैं कि ‘YouTube और इंटरनेट पर कुछ चीजें खतरनाक और अनफिल्टर्ड है।’ वहीं डॉ फंग और उनके स्टूडेंट्स ने YouTube पर अंग्रेजी में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी रिसर्च किया और पाया कि कुछ वीडियो में जानकारी सही नहीं है।

ऐसे फेक वीडियो से कैसे बचाव करें?

इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि यू ट्यूब पर ऐसे कई चैनल हैं, एकदम सटीक और सही जानकारी लोगों को प्रदान करते हैं। इसलिए हर तरह के वीडियो को हम इस कैंसर का फेक वीडियो जैसा नहीं मान सकते हैं। ऐसी गलत जानकारी भरी बातों से बचने के लिए आपको खुद भी सावधान होने की जरूरत हो सकती है। जब भी यू ट्यूब पर आप कैंसर का फेक वीडियो जैसा कोई फेक वीडियो देखें, तो पहले उसमें बताई गई बातों की पुष्टी करें। इसके लिए आप किसी एक्सपर्ट की भी मदद ले सकते हैं। जानकारी की पुष्टी होने के बाद अगर आपको लगता है कि वीडियों में बताई गई बातें सरासर गलत है, तो आप यू ट्यूब पर ही इसके लिए रिपोर्ट कर सकते हैं। साथ ही, सोशल मीडिया के जरिए अपने अन्य दोस्तों और जानकारों को भी इससे अवगत करा सकते हैं।

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कौन सही, कौन लगत? कैसे पहचानें?

अब लाखों वीडियों के बीच किसी एक को गलत या किसी दूसरे को सही ठहराना बहुत मुश्किल काम हो सकता है। इसके लिए आप खुद से थोड़ी रिसर्च कर सकते हैं। और यह पता लगा सकते हैं कि वीडियो में बताई गई जानकारी कितनी पुरानी है और इसे वीडियो को अपलोड करने वाला चैनल कितना पुराना है, वो किस तरह के वीडियो अपलोड करते हैं और उनका चैनल कितना पुराना और विश्वासनीय हैं। अगर उस यू ट्यूब चैनल पर सारे वीडियो उसके एक ही विषय जैसे हेल्थ या किसी अन्य विषय से संबंधित हैं, तो आपके लिए वे विश्वासनीय हो सकते हैं। हालांकि, फिर भी इनकी बातों पर पूरी तरह से यकीन करना जोखिम भरा हो सकता है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकली सलाह या उपचार की सिफारिश नहीं करता है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो कृपया इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए आपको अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

YouTube has been running ads on videos promoting bogus medicine, including the claim that donkey’s milk can prevent cancer/https://www.businessinsider.in/tech/youtube-has-been-running-ads-on-videos-promoting-bogus-medicine-including-the-claim-that-donkeys-milk-can-prevent-cancer/articleshow/71114516.cms/Accessed on 17/07/2020

YouTube advertises big brands alongside fake cancer cure videos/https://www.bbc.com/news/blogs-trending-49483681/Accessed on 17/07/2020

Brand ads on YouTube appear alongside fake cancer cures/https://www.warc.com/newsandopinion/news/brand_ads_on_youtube_appear_alongside_fake_cancer_cures/42636/Accessed on 17/07/2020

BBC: YouTube advertises big brands alongside fake cancer cure videos/https://www.hifa.org/dgroups-rss/bbc-youtube-advertises-big-brands-alongside-fake-cancer-cure-videos/Accessed on 17/07/2020
लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Bhawana Awasthi द्वारा लिखित
अपडेटेड 26/10/2019
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