स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज (Aerobic exercise after stroke): क्या है रिसर्च रिपोर्ट्स?

    स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज (Aerobic exercise after stroke): क्या है रिसर्च रिपोर्ट्स?

    नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार भारत में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के कारण 2.26 मिलियन लोगों के डेथ के आंकड़ें साल 1990 में रिकॉर्ड किये गयें। वहीं साल 2020 में 4.77 मिलियन लोगों की डेथ हुई। कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular Disease) की लिस्ट में कई अलग-अलग तरह की बीमारियां हैं। इन्हीं अलग-अलग तरह के डिजीज की लिस्ट में स्ट्रोक भी शामिल है। आज इस आर्टिकल में स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज (Aerobic exercise after stroke) से जुड़ी जानकारी शेयर करेंगे, जिससे दिल से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

    • स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज से जुड़े क्या हैं रिसर्च रिपोर्ट्स?
    • स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज: कौन-कौन से एक्सरसाइज हो सकते हैं लाभकारी?
    • कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
    • डॉक्टर से कब कंसल्ट करना चाहिए?

    चलिए अब स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज से जुड़े इन सवालों का जवाब जानते हैं।

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    स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज (Aerobic exercise after stroke): क्या है रिसर्च रिपोर्ट्स?

    स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज (Aerobic exercise after stroke)

    जर्नल ऑफ दि अमेरिकन हार्ट एसोशिएशन (Journal of the American Heart Association) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार एक सर्वे में स्ट्रोक सर्वाइवर्स को शामिल किया गया। इनसभी को एरोबिक एक्सरसाइज नियमित रूप से जरूरत के अनुसार करवाया गया। एरोबिक एक्सरसाइज करने की वजह से कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम की ओर से बेहतर रिस्पॉन्स मिला। इसलिए स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज (Aerobic exercise after stroke) करने से लाभ मिल सकता है, लेकिन यह हर स्ट्रोक सर्वाइवर पर निर्भर करता है कि उनके लिए कितना एक्सरसाइज करना जरूरी है। जरूरत से ज्यादा एरोबिक एक्सरसाइज करने से नुकसान भी पहुंच सकता है। इसलिए अपने डॉक्टर से स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज करने की सलाह जरूर लें।

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    स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज: कौन-कौन से एक्सरसाइज हो सकते हैं लाभकारी? (Workouts for Stroke survivors)

    स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज ना सिर्फ पूरी फिटनेस में सुधार लाता है, बल्कि यह शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी होता है। स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज के फायदों के साथ-साथ ये एरोबिक वर्कआउट कैंसर (Cancer), डायबिटीज (Diabetes), डिप्रेशन (अवसाद), हृदय रोग (Heart disease) और ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) जैसी अन्य बीमारियों से लड़ने में भी सहायक है।

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    चलिए अब स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज की लिस्ट में शामिल वर्कआउट के बारे में समझते हैं-

    स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज 1- डांसिंग (Dancing)

    डांसिंग सबसे बेहतर एरोबिक एक्सरसाइज है। डांस करने से शरीर से काफी तेजी से पसीने निकलता है। इससे शरीर का फैट तो कम होता ही है साथ में शरीर के विषाक्त पदार्थ भी बाहर निकल आते हैं। जिससे वजन कम होने में मदद मिलने के साथ-साथ कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ (Cardiovascular health) भी बेहतर होता है।

    स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज 2- स्विमिंग (Swimming)

    स्विमिंग एरोबिक एक्सरसाइज कि श्रेणी में शामिल है। स्विमिंग से पूरे शरीर की एक साथ एक्सरसाइज हो जाती है। तैराकी करने से कंधों, कमर, पीठ, पेट और पैर को एकसाथ टोन होने में मदद मिलता है। एक्स्ट्रा कैलोरी घटाने के लिए यह एक बेहतरीन एक्सरसाइज है।

    स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज 3- स्क्वॉट्स (Squats)

    स्क्वॉट्स एक्सरसाइज शरीर की ज्यादातर मसल्स को प्रभावित करती हैं। इस वर्कआउट से कंधों, कमर और पैर की सभी मसल्स मजबूत होती हैं। इस एक्सरसाइज से मसल्स का विकास होने के साथ-साथ स्ट्रॉन्ग भी होती है।

    इन तीन एक्सरसाइज को स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज की लिस्ट में शामिल किया जा सकता है।

    नोट: स्ट्रोक के बाद एरोबिक एक्सरसाइज या किसी भी तरह के अन्य एक्सरसाइज को करने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लें। वहीं अगर एक्सरसाइज करने से कोई परेशानी महसूस होती है, तो तुरंत रिलैक्स करें और एक्सरसाइज ना करें। बेहर होगी कि अगर ऐसी कोई स्थिति समझ आती है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से कसंल्ट करें।

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    नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम (Cardiovascular system) से जुड़ी समस्या में स्मोकिंग करना सबसे बड़ा कारण है। तंबाकू में जहरीले पदार्थ ब्लड वेसल्स को छोटा करने के साथ-साथ नुकसान भी पहुंचा सकते हैं, जिससे ब्लड क्लॉट होने का खतरा बढ़ जाता है और ब्लड सर्कुलेशन (Blood Circulation) बिगड़ जाता है। इसलिए अगर आप इन बीमारियों से बचना चाहते हैं, तो स्मोकिंग की लत से बचें और हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करें।

    कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? (Tips to prevent Cardiovascular disease)

    कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जैसे:

    • एल्कोहॉल (Alcohol) का सेवन ना करें।
    • तंबाकू या सिगरेट (Smoking) जैसी चीजों से दूर रहें।
    • चीनी (Sugar), नमक (Salt) एवं सैचुरेटेड फैट (Saturated fat) का सेवन ना करें।
    • जंक फूड (Junk food) या प्रोसेस्ड फूड (Processed food) का सेवन ना करें।
    • ताजे फल (Fruits) एवं सब्जियों (Vegetables) का सेवन रोजाना करें।
    • नियमित योग (Yoga), एक्सरसाइज (Workout) या वॉक (Walk) करें।
    • ब्रेन गेम्स (Brain games) खेलने की आदत डालें।

    ये टिप्स हेल्दी हार्ट (Healthy heart) के लिए बेहद कारगर माने जाते हैं। इसलिए इन ऊपर बताये टिप्स को हर लोगों को फॉलो करना चाहिए, क्योंकि हेल्दी हार्ट में ही छुपा है हेल्दी लाइफ का राज।

    डॉक्टर से कब कंसल्ट करना चाहिए? (Consult Doctor if-)

    किसी भी व्यक्ति को निम्नलिखित लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए-

    • सीने में दर्द (Chest pain) महसूस होना।
    • बाहों, बाएं कंधे, कोहनी, जबड़े या पीठ में दर्द (Pain) होना।
    • सांस लेने में कठिनाई (Breathing problem) होना।
    • मतली (Nausea) और थकान (Tired) महसूस होना।
    • बार-बार चक्कर (Dizziness) आना।
    • ठंड लगना और पसीना (Sweating) आना।

    अगर इनमें से कोई भी स्थिति महसूस होती है, तो देर ना करें और जल्द से जल्द डॉक्टर से कंसल्ट करें। ऐसी स्थिति को इग्नोर करना अनजाने में किसी गंभीर समस्या को दावत देने जैसे ही है।

    नोट: अगर स्ट्रोक के बाद डॉक्टर द्वारा मेडिकेशन दी गई है, तो उसका सेवन ठीक वैसे ही करें जैसे डॉक्टर से सेवन की सलाह दी है। अपनी मर्जी से दवाओं का सेवन नुकसानदायक हो सकता है।

    अगर आप हार्ट डिजीज (Heart diseases) या कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के लिए चाय के फायदे से जुड़े सवालों का जवाब तलाश कर रहें थें, तो उम्मीद करते हैं कि ये जानकारी आपके लिए लाभकारी होगी। वैसे अगर आप या आपके कोई भी करीबी कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular diseases) से पीड़ित हैं, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से कंसल्टेशन अत्यधिक जरूरी है। क्योंकि ये बीमारियां गंभीर बीमारियों की लिस्ट में शामिल है। अगर इनका समय पर इलाज ना करवाया जाए तो पेशेंट की स्थिति गंभीर हो सकती है। डॉक्टर के संपर्क में रहने से पेशेंट की हेल्थ कंडिशन (Health Condition) और बीमारी की गंभीरता को ध्यान में रखकर इलाज किया जाता है।

    स्वस्थ रहने के लिए अपने डेली रूटीन में एक्सरसाइज या योगासन को शामिल करना चाहिए। नीचे दिए इस वीडियो लिंक पर क्लिक कर योगासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को समझें।

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    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    डॉ. प्रणाली पाटील

    फार्मेसी · Hello Swasthya


    Nidhi Sinha द्वारा लिखित · अपडेटेड 05/05/2022

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