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दिल की बीमारी और एचआईवी में आखिर क्या होता है संबंध, क्या बढ़ जाता है खतरा?

दिल की बीमारी और एचआईवी में आखिर क्या होता है संबंध, क्या बढ़ जाता है खतरा?

एचआईवी की बीमारी वायरस के कारण फैलने वाली बीमारी है। इस बीमारी के कारण व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है और अन्य बीमारियों का खतरा अधिक बढ़ जाता है। स्टडी में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों को एचआईवी (HIV) की समस्या होती है, उन लोगों में हाई बीपी यानी हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों में दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। हाय बीपी के कारण दिल की बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है। अगर ये कहा जाए कि जिन लोगों एचआईवी की समस्या होती है, उन लोगों में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं दिल की बीमारी और एचआईवी में संबंध (Connection between high blood pressure and HIV) के बारे में अधिक जानकारी।

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दिल की बीमारी और एचआईवी में संबंध: हाय बीपी और एचआईवी

हाय बीपी और एचआईवी में संबंध

दिल की बीमारी और एचआईवी में संबंध को समझने के लिए आपको हाय बीपी के बारे में भी जानना होगा। हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) को हाइपरटेंशन (Hypertension) के नाम से भी जानते हैं। हाइपरटेंशन के दौरान ब्लड वेसल्स में ब्लड का फोर्स बढ़ जाता है, इस कारण से स्ट्रोक (stroke), हार्ट अटैक (heart attack), हार्ट फेलियर (heart failure) के साथ ही अन्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) का अगर ट्रीटमेंट सही समय पर न कराया जाए, तो हार्ट को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं ह्युमन इन्यूनोडिफिसिएंसी वायरस (human immunodeficiency virus) के कारण एड्स की समस्या होती है।

बिना ट्रीटमेंट के एचआईवी वायरस इम्यून सिस्टम (immune system) पर अटैक करता है और इस कारण से गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं। ऐसे में व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। मॉडर्न मेडिसिन की हेल्प से एड्स के लक्षणों को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है और उनके लक्षणों को काबू में भी किया जा सकता है लेकिन जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है और व्यक्ति एड्स की बीमारी के साथ जीता है, कुछ अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जाता है। इन्हीं में से एक समस्या हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) की भी है। दिल की बीमारी और एचआईवी में संबंध (Connection between high blood pressure and HIV) के बारे में जानने के लिए आपको दोनों ही समस्याओं के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है। आइए जाने इस समस्या के संबंध के बारे में।

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हाय बीपी और एचआईवी में संबंध: एचआईवी पॉजिटिव में आखिर क्यों बढ़ जाता है हाय बीपी का रिस्क?

दिल की बीमारी और एचआईवी में संबंध (Connection between high blood pressure and HIV) में गहरा संबंध है। वैसे तो हाय ब्लड प्रेशर की समस्या किसी भी व्यक्ति को हो सकती है लेकिन जब व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव यानी एड्स की बीमारी से पीड़ित होता है, तो ऐसे में हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) का रिस्क अधिक बढ़ जाता है। बिना एचआईवी के व्यक्ति को 30% तक संभावना रहती है कि उसे हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) की समस्या का सामना करना पड़ेगा। वहीं एचआईवी पॉजिटिव होने पर यह 35% तक संभावना बढ़ जाती है। यानी कि लगभग 17% तक हाय बीपी की संभावना एचआईवी पेशेंट में बढ़ जाती है। हाय ब्लड प्रेशर प्लाक को बढ़ाने में मदद करता है और भविष्य में हार्ट अटैक का कारण भी बन सकता है।

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दिल की बीमारी और एचआईवी में संबंध: एचआईवी के कारण बढ़ जाता है दिल की बीमारियों का खतरा!

हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) और एचआईवी में संबंध के बारे में तो आपको पता ही चल गया होगा। हाय बीपी की समस्या के कारण दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। अभी हमने आपको हाय बीपी और एचआईवी में संबंध में बताया लेकिन एचआईवी पेशेंट को हार्ट की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इस बारे में सीधी तौर पर कहना सही नहीं होगा लेकिन इस संबंध में कई रिसर्च के बाद यह बातें सामने निकल कर आई है।

  • एचआईवी आपके इम्यून सिस्टम को हर समय सक्रिय रखता है। इस कारण से आपकी ब्लड वैसल्स में सूजन आ जाती है और साथ ही वो सख्त हो सकती है।
  • एचआईवी या इसका इलाज करने वाली दवाएं आपके पेट के बैक्टीरिया या गट बैक्टीरिया में बदलाव ला सकती हैं, जिससे आपके ब्लड वैसल्स में सूजन आ जाती है।
  • एचआईवी किडनी की समस्याओं के लिए आपके जोखिम को बढ़ाता है, जो कि हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) से लिंक है।
  • एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (Antiretroviral therapy) मेडिसिंस, जो आमतौर पर एचआईवी के ट्रीटमेंट (HIV treatment) में इस्तेमाल होती है, सूजन या इंफ्लामेशन का कारण बन सकती हैं। दिल की बीमारी और एचआईवी में संबंध का पता इससे चलता है।
  • एचआईवी वाले लोगों में हाय कोलेस्ट्रॉल कुछ हॉर्मोन से जुड़ा हो सकता है, जो फैट प्रोसेस के साथ ही ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है।

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एचआईवी पेशेंट्स में हाय बीपी का इलाज कैसे करते हैं?

क्या एचआईवी के पेशेंट में हाय बीपी को कंट्रोल करने के लिए अलग मेडिसिंस की जरूरत पड़ती है। अगर आपके मन में यह सवाल है, तो इसका जवाब है ‘हां’। ऐसा हो सकता है कुछ पेशेंट को अलग दवा दी जाए। साइंटिस्ट अभी भी इसके बारे में स्टडी कर रहे हैं कि किस तरह से एचआईवी पेशेंट को हाय बीपी कंट्रोल करने के लिए अलग दवाई दी जाए। कुछ दवाएं जैसे कि स्टेटिंस एचआईवी मेडिकेशन में प्रभाव डाल सकती है। डॉक्टर दवा देते समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि एचआईवी मेडिकेशन या फिर एचआईवी के दौरान दी जाने वाली दवाओं में किसी प्रकार का बुरा प्रभाव न पड़े।

अगर आपको दिल की बीमारी और एचआईवी में संबंध से संबंधित किसी प्रकार की जानकारी चाहिए, तो बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से संपर्क करें। एड्स की बीमारी के दौरान कई सावधानियां रखी जाती है। ऐसे में अगर कोई दूसरी बीमारी हो जाए, तो अधिक सावधानी की जरूरत पड़ जाती है। आपको डॉक्टर से पूछना चाहिए कि आपको किन बातों का खास ख्याल रखने की जरूरत है। दिल की बीमारी और एचआईवी में संबंध के बारे में डॉक्टर से जरूर पूछें।

हाय ब्लड प्रेशर की हो गई समस्या, तो इन बातों का रखें ख्याल!

हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) की समस्या को कम करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

  • आपको अपने खाने में नमक की मात्रा को सीमित करना चाहिए।
  • आपको रोजाना एक्साइज करना चाहिए, जिससे कि हाय बीपी की समस्या से छुटकारा मिलने के साथ ही हार्ट डिजीज का खतरा कम हो जाए।
  • अगर आप स्मोकिंग करते हैं, तो छोड़ दें क्योंकि स्मोकिंग के कारण हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
  • साथ ही जो लोग ज्यादा मात्रा में एल्कोहॉल लेते हैं, उनमें भी हाय बीपी की समस्या हो सकती है, बेहतर होगा एल्कोहॉल न लें।
  • अगर आप बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेते हैं, तो बीपी बढ़ सकता है। आप मेडिटेशन का सहारा ले सकते हैं।
  • अधिक वेट के लिए डॉक्टर से जानकारी लें कि आपको डायट में क्या शामिल करना चाहिए।

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इस आर्टिकल में हमने आपको दिल की बीमारी और एचआईवी में संबंध (Connection between high blood pressure and HIV) के बारे में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 04/12/2021 को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड