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जानें हाइपरटेंशन के प्रकार और इससे बचाव

जानें हाइपरटेंशन के प्रकार और इससे बचाव

हायपरटेंशन या हाय ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। इसका कारण यह है कि इसके कोई खास लक्षण नहीं होते। हाय बीपी वाले इंसान को यह पता ही नहीं चल पाता कि उसे उच्च रक्तचाप की समस्या है और उसकी जान भी चली जाती है। दुश्मन को मात देनी हो तो पहले उसके बारे में जान लेना चाहिए। ठीक उसी तरह बीमारी से दूर रहना हो तो पहले ही उसके कारणों को जानकर नष्ट कर देना ही समझदारी है। आईए जानते हैं कि हायपरटेंशन क्या है और हायपरटेंशन के प्रकार (Types of Hypertension) क्या हैं ?

हाय ब्लड प्रेशर या हायपरटेंशन (Hypertension) क्या है?

High Blood Pressure

हायपरटेंशन का दूसरा नाम हाय ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) है। उच्च रक्तचाप का अर्थ है रक्त वाहिकाओं यानी ब्लड वेसल में रक्त का दबाव बढ़ जाना। रक्त का दबाव बढ़ने के कारण दिल और तेज काम करने लगता है। यही स्थिति हार्ट अटैक (Heart attack) और स्ट्रोक को जन्म देती है। यह दो ऐसी समस्याएं हैं जो देश ही नहीं दुनिया भर में तेजी से लोगों के लिए बड़ी समस्या बन रही है।

कैसे जानें कि हाय ब्लड प्रेशर के शिकार हैं?

यह जान लेना कि आपको हायपरटेंशन है या नहीं कोई मुश्किल काम नहीं है। किसी भी नर्स या डॉक्टर के पास जाकर आप अपना ब्लड प्रेशर चेक करवा सकते हैं। यह बिल्कुल भी जटिल प्रक्रिया नहीं है।

नॉर्मल ब्लड प्रेशर क्या है?

सामान्यतौर पर रक्तचाप स्तर को 120/80 mmHg के तहत रीड किया जाता है। 120/80 mmHg रक्तचाप नॉर्मल होता है। जब इससे ज्यादा ब्लड प्रेशर जाने लगे तो इसे बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर कहा जाता है। 139/89 mmHg तक की रीडिंग को विशेषज्ञ बहुत गंभीर रूप से नहीं लेते। यह जरूर है कि 139/89 mmHg रक्तचाप होने के बाद आपको अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की जरूरत होती है।

और पढ़ें: हाइयपरटेंशन से बचाव के लिए जरूरी है लाइफस्टाइल में ये बदलाव

हाय ब्लड प्रेशर

140/90 mmHg से हाय ब्लड प्रेशर के खतरे की घंटी बज चुकी होती है। 140/ 90 mmHg से अधिक ब्लड प्रेशर को ही हायपरटेंशन की श्रेणी में गिना जाता है।

हायपरटेंशन के प्रकार (Types of Hypertension)

हायपरटेंशन मुख्य तौर पर दो प्रकार के होते हैं –

प्राइमरी हायपरटेंशन (Primary Hypertension)

हायपरटेंशन के प्रकार (Types of Hypertension) में पहला प्रकार है प्राइमरी या एसेंशियल हायपरटेंशन। एसेंशियल हायपरटेंशन से ही अधिकतर लोग प्रभावित होते हैं। इस हायपरटेंशन का कारण क्या है इसका पता नहीं चल पाता। उम्र के बढ़ने के साथ ही हाय ब्लड प्रेशर की समस्या गंभीर होने लगती है।

सेकेंडरी हायपरटेंशन (Secondary hypertension)

हायपरटेंशन के प्रकार (Types of Hypertension) में दूसरा प्रकार है सैकेंडरी ​हायरटेंशर। सैकेंडरी ​हायपरटेंशर मुख्य तौर पर शरीर की किसी अन्य बीमारी से ही संबंधित होती है। बीमारी का उपचार या दवा से सैकेंडरी हायपरटेंशन को कंट्रोल किया जा सकता है।

और पढ़ें: हायपरटेंशन की दवा के फायदे और साइड इफेक्ट्स क्या हैं?

अन्य प्रकार के हायपरटेंशन

आइसोलेटेड सिस्टोलिक हायपरटेंशन (Isolated Systolic Hypertension)

रक्तचाप को दो नंबर में रीड किया जाता है। पहला नंबर सिस्टोलिक दबाव यानी दिल के धड़कने के दौरान पड़ने वाला दबाव और दूसरा नंबर डायस्टोलिक दबाव यानी दिल के धड़कने के दौरान रुकना या आराम करना होता है। सामान्य रक्तचाप 120/80 mmHg माना जाता है। आइसोलेटेड सिस्टोलिक हायपरटेंशन में सिस्टोलिक दबाव 140 से ऊपर चला जाता है और डायस्टोलिक दबाव सामान्य या 90 से नीचे ही रहती है। बुजुर्गों में यह समस्या ज्यादा देखी जा सकती है। वहीं सिस्टोलिक दबाव डायस्टोलिक दबाव की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण होता है। चूंकि यह हृदय रोग का खतरा बढ़ाने में कारगर होता है।

रिनल हायपरटेंशन (Renal Hypertension)

किडनी की बीमारी के कारण बढ़े उच्च रक्तचाप को रिनल या रेनोवैस्कुलर हायपरटेंशन कहते हैं। इस हायपरटेंशन के प्रकार (Types of Hypertension) में किडनी तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियां सिकुड जाती हैं। इसे रिनल आर्टरी स्टेनोसिस (Renal Artery Stenosis) भी कहते हैं। रिनल हायपरटेंशन के लक्षण पकड़ में नहीं आते। फिर भी सिर दर्द, पेशाब में खून आना, नकसीर को इसके कुछ लक्षणों में गिना जा सकता है।

मैलिग्नेंट हायपरटेंशन (Malignant Hypertension)

हायपरटेंशन के प्रकार(Types of Hypertension) में एक प्रकार मैलिग्नेंट हायपरटेंशन है। मैलिग्नेंट हायपरटेंशन बहुत कम लोगों को प्रभावित करता है। इसमें ब्लड प्रेशर बहुत जल्दी बढ़ता है। जब आपका डायस्टोलिक दबाव 130 से अधिक हो जाता है तब कहा जा सकता है कि आपको मैलिग्नेंट हायपरटेंशन हो सकता है। इसके कारण शरीर के किसी अंग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं।

  • ब्लड प्रेशर की दवा स्किप करना
  • कोलेजन वसकूलर डिजिज
  • किडनी की बीमारी
  • एड्रिनल ग्लैंड का ट्यूमर
  • गर्भनिरोधक दवाओं के कारण भी हायपरटेंशन का यह प्रकार जन्म ले सकता है
  • चरस, गांजा और भांगआदि नशीले पदार्थों के कारण भी यह हो सकता है

इस हायपरटेंशन के प्रकार (Types of Hypertension) के कारण धुंधली दृष्टि, मानसिक स्थिति में बदलाव, बेहोशी, सिरदर्द और उल्टी आ सकती है। इस हायपरटेंशन के प्रकार (Types of Hypertension) के कारण ब्रेन स्वेलिंग भी हो सकती है। ब्रेन स्वेलिंग एक गंभीर बीमारी है जिसे हायपरटेंसिव एन्सेफैलोपैथी (Hypertensive Encephalopathy) कहते हैं।

रेसिस्टेंट हायपरटेंशन (Resistant Hypertension)

रेसिस्टेंट हायपरटेंशन एक जेनेटिक समस्या हो सकती है। देखा जाए तो बुजुर्ग, महिलाएं व मोटे लोग और किडनी व डायबिटीज के रोगी इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं। इसमें डॉक्टर की दी दवा भी कारगर साबित नहीं होती।

और पढ़ें: जानें किन कारणों से बढ़ता है हाय ब्लड प्रेशर?

हायपरटेंशन के क्या कारण हैं? (Cause of Hypertension)

बिगड़ती जीवशैली ही आज की दुनिया की सबसे बड़ी बीमारी है और हर बीमारी की जड़ भी। हायपरटेंशन भी इससे अछूता नहीं है। हायपरटेंशन का मुख्य कारण खराब डायट, एक्सरसाइज ना करना व स्ट्रेस या तनाव ही है। मोटापा, धूम्रपान, शराब, आहार उच्च रक्तचाप में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए इनको कंट्रोल में रखना जरूरी है। आप चाहें तो बी एम आई (BMI) कैलक्युलेटर के तीन स्टेप में ही आप जान सकते हैं कि आप मोटापे के कितने करीब हैं?

हायपरटेंशन के लक्षण (Symptoms of hypertension)

गंभीर बात यह है कि हायपरटेंशन के बारे में 90 प्रतिशत लोगों को पता ही नहीं होता। किसी एक चीज को आप तय पैमाना नहीं बना सकते हैं। फिर भी हायपरटेंशन के कुछ लक्षण निम्न प्रकार हैं।

  • सिरदर्द
  • थकान
  • चक्कर
  • हाथ और पैर सुन्न होना
  • धुंधली दृष्टि
  • सीने में दर्द
  • घबराहट

इसके अलावा खास डायग्नोस्टिक के आधार पर हाइपरटेंशन की तीन और कैटेगरी होती है।

आइसोलेटेड सिस्टोलिक हाइपरटेंशन

ब्लड प्रेशर को दो नबंरों में मापा जाता है। पहला ऊपरी स्तर जिसे सिस्टोलिक प्रेशर कहते हैं, जो दिल के धड़कने के दौरान दबाव डालता है और दूसरा है डायस्टोलिक प्रेशर यह दिल की धड़कनों के बीच आराम के दौरान बनने वाले दबाव को दिखाता है। सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 के नीचे माना जाता है। इसोलेटेड सिस्टोलिक हाइपरटेंशन में सिस्टोलिक प्रेशर 140 के ऊपर रहता है जबकि नीचे वाला प्रेशर 90 से कम होता है। 65 साल से अधिक उम्र के लोगों में इस तरह के हाइपरटेंशन की अधिक संभावना होती है और यह धमनियों में एलास्टिसिटी कम होने की कारण होता है। जब बाद बुजुर्गों के कार्डियोवस्कुल डिसीज के जोखिम की हो तो सिस्टोलिक प्रेशर अधिक महत्वपूर्ण होता है।

और पढ़ेंः हाइपरटेंशन के लिए हानिकारक फूड्स से दूर रहें और रहिये हेल्दी

मैलिगैंट हाइपरटेंशन

इस तरह का हाइपरटेंशन इस बीमारी से पीड़ित केवल एक प्रतिशत लोगों में होता है। यह कम उम्र के व्यस्कों को अधिक होता है। यह तब होता है जब आपका ब्लड प्रेशर तुरंत बहुत अधिक बढ़ जाता है। जब आपका डायस्टोलिक प्रेशर 130 के ऊपर चला जाए तो आपको मैलिगैंड हाइपरटेंशन है। यह मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति होती है और आपको अस्पताल में इलाज की आवश्यकता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं बांह और पैरों का सुन्न होना, धुंधला दिखना, कन्फ्यूजन, छाती और सिर में दर्द।

रेसिस्टैंट हाइपरटेंशन

यदि आपके डॉक्टर ने आपको तीन अलग तरह की एंटीहाइपरटेंसिव दवाईयां दी हैं, लेकिन बावजूद इसके आपका ब्लड प्रेशर हाई है तो आपको रेसिस्टैंट हाइपरटेंशन है। हाई ब्लड प्रेशर के 20-30 प्रतिशत मामलों में रेसिस्टैंट हाइपरटेंशन होता है। यह अनुवांशिक कारणों से भी हो सकता है और यह बुजुर्ग, मोटे लोगों, महिलाओं, अफ्रिकन अमेरिकन और डायबिटीज और किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों में आम है।

कैसे बचें हायपरटेंशन से (How to avoid hypertension)?

बीमारी होने पर तो डॉक्टर आपको दवा देंगे ही, लेकिन आप अपनी लाइफस्टाइल में थोड़े-बहुत बदलाव लाकर भी हायपरटेंशन से बच सकते हैं

  • फिजिकली एक्टिव रहें यानी नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
  • स्ट्रेस कम करने की कोशिश करें, इसके लिए मेडिटेशन का सहारा ले सकते हैं।
  • मोटापा कम करें
  • हेल्दी डायट लें।
  • स्मोकिंग और शराब से पूरी तरह दूरी बना लें।
  • जब लगे की तनाव बढ़ रहा है तो रिलैक्सिंग टेक्नीक से उसे कम करनें की कोशिश करें।
  • खाने में नमक की मात्रा सीमित करें।

हाय ब्लड प्रेशर शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है पर इससे सबसे ज्यादा नुकसान हृदय को होता है। हाय प्रेशर हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी की समस्या या डिमेंशिया को जन्म दे सकता है। हायपरटेंशन के कारण जान का खतरा भी हो सकता है।

हाय ब्लड प्रेशर सिर्फ बड़े-बूढ़ों की बीमारी बनकर नहीं रह गई है। लाइफस्टाइल में गिरावट के कारण युवा व बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। 90 प्रतिशत रोगियों को हायपरटेंशन के कारणों के बारे में पता ही नहीं चल पाता। इस वजह से इससे बचाव करने में भी वह असमर्थ रहते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप दिल को दुरुस्त रखने वाली कार्डियो एक्सरसाइज, भरपूर सेहत भरी डायट और मेडिटेशन कर स्ट्रेस को खुद से दूर रखें।

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सूत्र

Is my blood pressure normal?/https://www.heartfoundation.org.au/your-heart/know-your-risks/blood-pressure/is-my-blood-pressure-normal/Accessed on 11/12/2019

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Hema Dhoulakhandi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/02/2022 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड