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जानें थ्रोट चक्र क्या है और इसे कैसे संतुलित किया जा सकता है

    जानें थ्रोट चक्र क्या है और इसे कैसे संतुलित किया जा सकता है

    चक्र हमारी बॉडी में अहम भूमिका निभाते हैं। रीढ़ हड्डी (Spine) से शुरू होकर यह सिर तक जाते हैं। बॉडी में सात प्रमुख चक्र होते हैं और प्रत्येक चक्र स्पेसिफिक नर्व और बॉडी के ऑर्गन से जुड़े होते हैं और उसे प्रभावित करते हैं। जब आपका एक या इससे ज्यादा चक्र ब्लॉक या इंबैलेंस हो जाते हैं या उनमें असंतुलन हो जाता है तो इसका फिजिकल, स्प्रिचुअल और इमोशनल हेल्थ पर असर होता है। पांचवें चक्र को विशुद्धि चक्र या विशुद्ध चक्र (vishuddhi chakra) कहा जाता है। गले के मध्य होने के कारण इसे गला चक्र या थ्रोट चक्र (Throat chakra) कहा गया है। यह स्वर यंत्र के केंद्र में होता है। थ्रोट चक्र कम्युनिकेशन (Communication), सेल्फ एक्सप्रेशन और बोलने की क्षमता को प्रभावित करता है। इसके साथ ही यह बॉडी लैग्वेंज को भी प्रभावित करता है। थ्रोट चक्र यह मुंह, गर्दन, जीभ व गले को कंट्रोल करता है।

    थ्रोट चक्र (Throat chakra)

    संस्कृत में विशुद्धि का सामान्य अर्थ है शुद्ध किया जाना। गला चक्र शरीर और मन से अशुद्धियों को डिटॉक्स कर नई ऊर्जा को प्रवाहित करता है। जब यह चक्र अपनी पूरी क्षमता से कार्य कर रहा होता है तो आप अपनी बातों को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर पाते हैं। साथ ही आपका खुद से कम्युनिकेशन भी अच्छा होता है।

    यदि हम सातों चक्रों की बात करें तो विशुद्धि उच्च या आध्यात्मिक चक्रों में प्रथम चक्र है। स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाला खाना व दूषित हवा थ्रोट चक्र के लिए भी हानिकारक होती है। जब गले के चक्र में ब्लॉकेज होता है तो यह हमारी अभिव्यक्ति भी प्रभावित होती है। हिंदी में इसे कंठ चक्र भी कहते हैं क्योंकि यह कंठ यानी गले में होता है। आयुर्वेद के अनुसार गला चक्र का तत्व आकाश माना गया है। इसलिए इसका रंग भी नीला है। नीला रंग शुद्व, खुशी और शांति देने वाला होता है।

    थ्रोट चक्र (Throat chakra) के असक्रिय होने का पता कैसे लगाएं?

    थ्रोट चक्र (Throat chakra)

    गला चक्र का सीधा जुड़ाव कम्युनिकेशन से है, इस लिहाज से यदि आपके स्वयं या किसी अन्य के साथ कम्युनिकेट करने में या फीलिंग्स को पॉजिटिव रूप से एक्सप्रेस और एक्सचेंज करने में परेशानी होती है तो इसका अर्थ है कि आपके गले के चक्र में भी बाधा है और वो एक्टिव नहीं है। विशुद्ध चक्र की एनर्जी के बैलेंस होने पर हम दूसरों के साथ-साथ खुद को भी सुनना नहीं चाहते। ऐसे में पनपता है अकेलापन, अविश्वास और मानसिक तनाव।

    यदि थ्रोट चक्र इम्बैलेंस (Throat chakra imbalance) होने के लक्षणों की बात करें तो वह हैं:

    • भावनाओं को व्यक्त करने में मुश्किल आना
    • कई बार भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शब्दों का चुनाव कर पाना भी मुश्किल सा लगने लगता है
    • अक्सर यह समझ लेना कि आस-पास के सभी लोग आपको गलत निगाहों से देख रहे हैं या गलत ही समझते हैं
    • आक्रामक व्यवहार
    • नकारात्मक शब्दों को चुनना और कार्यों को करना

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    शारीरिक तौर पर दिखने वाले लक्षण

    • गले में खराश, हॉर्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव, गले में दर्द, गर्दन का दर्द या जकड़न। यह भी थ्रोट चक्र के असंतुलन को दर्शाते हैं।
    • इनके साथ ही थ्रोट चक्र को तीन अन्य रूप से भी देखा जा सकता है

    संतुलित थ्रोट चक्र (Balance throat chakra)

    ऐसे लोग जिनका गला चक्र संतुलित होता है उनकी आवाज आपको स्पष्ट सुनाई देती है। वह भावनाओं को भी पूर्ण रूप से व्यक्त कर लेते हैं। उनका उच्चारण भी एकदम साफ होता है।

    अति सक्रिय थ्रोट चक्र (Hyperactive throat chakra)

    अति सक्रिय थ्रोट चक्र के कारण व्यक्ति की वाक शैली या कहें कि बोलने में भी अति हो जाती है। यानी इस तरह का व्यक्ति बातें कम करता और चिल्लाता ज्यादा है। किसी और को सुने बिना ही वह जवाब देना शुरू कर देता है। सदैव अधिकारपूर्ण लैंग्वेज का उपयोग करता है। मुख्य रूप से ऐसे व्यक्ति या तो अतिविश्लेषण करते नजर आते हैं या आलोचना।

    बाधित थ्रोट चक्र (Blocked throat chakra)

    बाधित से स्पष्ट है ऐसे व्यक्ति को बात करते समय या भावना को व्यक्त करने में बाधा का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोग डरकर या धीरे-धीरे बात करते हैं। किसी से बातचीत की शुरूआत करना भी ऐसे व्यक्तियों को असमंजस की स्थिति में ले आता है।

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    थ्रोट चक्र में सुधार कैसे करें? (How to improve throat Chakra)

    कंठ चक्र में सुधार के कई तरीके हैं। आप भावनात्मक, योग व फूड्स तीनों तरीकों को अपनाकर इसमें सुधार ला सकते हैं।

    भावनात्मक तरीका अपनाएं

    किसी भी बात को मन से लगाकर न बैठें। सदैव सकारात्मक रूख अपनाने की कोशिश करें। यदि आप अपने अंदर किसी भी प्रकार का दुख या किसी प्रकार की अनचाही भावना को लेकर बैठे हैं तो, तुरंत उससे दूरी बना लें। इसके लिए या तो आप किसी से इस विषय पर खुलकर बात करें। यदि आप इस विषय पर बात नहीं करना चाहते और समय के साथ उस बात का महत्व नहीं रह गया हो तो उसे दिलो-दिमाग से हटा दें। बार-बार उस बात को न दोहराएं। अनचाहे या नकारात्मक विचार विशुद्ध चक्र को बाधित करते हैं और एनर्जी का प्लो नहीं हो पाता है।

    ध्यान से जाग्रत करें थ्रोट चक्र

    ध्यान से मन शांत होता है और एकाग्रता के साथ नई उर्जा का भी संचार होता है। ध्यान के लिए आप किसी योग विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं। एक बार आप यह कला समझ गए तो उसके बाद आप स्वयं भी यह कर सकते हैं।

    कंठ चक्र के ध्यान के लिए आपको शांत वातावरण की आवश्यकता पड़ेगी ताकि आपका ध्यान भंग न हो। ज्ञान मुद्रा में आएं। रीढ़ की हड्डी को सीधा कर लें। शरीर को ढीला छोड़ते हुए लंबी और गहरी सांस लें। विशुद्धि चक्र पर ध्यान केंद्रित करें। मन में नीले रंग के प्रकाश की कल्पना करें। सांस के साथ महसूस करें कि यह नीला प्रकाश आपके पूरे शरीर में फैल रहा है। ऐसा करने पर आपको गले में फ्रीनेस का आभास होगा।

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    नीले रंग हो सकता है आपके लिए मददगार

    थ्रोट चक्र (Throat chakra)

    यदि आप गला चक्र को सक्रिय करना चाहते हैं तो नीले और बैंगनी रंग को जीवन में प्राथमिकता दें। घर के पर्दे, पेंट आदि में आप नीले रंग का उपयोग कर सकते हैं। यदि आप चाहें तो नीले क्रिस्टल जैसे लैपिस लाजुली, फिरोजा, सेलेस्टाइट आदि रत्नों को पहन सकते हैं। इससे भी चक्र प्रभावित होता है। गले चक्र के इन पत्थरों को आप ज्वैलरी के अलावा अन्य तरह से भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आप चाहें तो घर में सजावट की तरह रखें या घर से बाहर जाने पर अपने साथ ले जाएं।

    सही खाना भी करता है प्रभावित

    कंठ चक्र को नीले रंग का माना जाता है। इसलिए यदि आप नीले और बैंगनी रंग के फल व सब्जियों का सेवन करें तो यह आपके गले के चक्र के लिए लाभकारी हो सकते हैं। बैंगन, जामुन, ब्लूबेरी आदि का सेवन कंठ चक्र के उपचार के लिए लाभदायक हो सकता है। ब्राउन राइस, साबुत अनाज भी चक्र के लिए गले के चक्र के लिए अच्छा है। गले के चक्र को ठीक करने के लिए नमक, लेमनग्रास या अदरक आदि को भी डायट में एड किया जा सकता है।

    और पढ़ें: योग क्या है? स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र योग और योगासन

    योगा से करें थ्रोट चक्र को जाग्रत

    योगा के आसनों से भी आप गले का चक्र जाग्रत कर सकते हैं। आइए जानते हैं कौन से योगासन करें और कैसे करें।

    सर्वांगासन (Sarvangasana)

    यह आसन फेफड़ों में ऑक्सीजन और रक्त के प्रवाह को बढ़ाने में मदद करता है। बेहतर रक्त परिसंचरण के कारण पाचन तंत्र में सुधार होता है।

    सर्वांगासन करने की विधि

    थ्रोट चक्र (Throat chakra)

    योगा मेट या दरी में शवासन की पुजिशन में लेट जाएं। अब दोनों पैरों को श्वास छोड़ते हुए ऊपर की ओर 90 डिग्री पर लाएं। दोनों कोहनियों को मोड़ते हुए हाथों की हथेली से कमर को असमान की तरफ यानी 180 डिग्री पर ले जाना है। इस पुजिशन में शरीर का पूरा भार आपके कंधों पर आना चाहिए। इस पुजिशन से विशुद्धि चक्र जाग्रत होता है। अब अवस्था में 30 सेकेंड से 2 मिनट तक रहने के बाद धीरे-धीरे शवासन की पुजिशन पर वापस आएं।

    सर्वांगासन करते समय शरीर को बिलकुल सीधा रखें। शरीर का संतुलन न बिगड़ने दें। यदि गर्दन या हाय ब्लड प्रेशर या हार्ट से संबंधित कोई समस्या हो तो न करें। सबसे उत्तम है कि किसी योगा विशेषज्ञ से सलाह लें व उसकी निगरानी में ही करें।

    हल की मुद्रा हलासन (Halasana)

    थ्रोट चक्र (Throat chakra)

    यह आसन तंत्रिका तंत्र को शांत करने में प्रभावी है। हलासन का अभ्यास करने से तनाव, थकान, सिर दर्द में कमी देखी जा सकती है। यह आसन थायरॉयड ग्रंथि और पेट के अंगों को उत्तेजित करके गले के चक्र में रुकावट को दूर करता है।

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    कैसे करें हलासन?

    योग मैट या दरी पर पीठ के बल लेट जाएं। अपने हाथों को शरीर से सटा लें। हथेलियां जमीन की ओर रहेंगी। सांस भीतर की ओर लेते हुए पैरों को ऊपर की तरफ ले जाएं। टांगे कमर से 90 डिग्री का कोण बनाएंगी। पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ेगा। टांगों को ऊपर उठाते हुए अपने हाथों से कमर को सहारा दें। टांगों को सिर की तरफ झुकाएं और पैरों को सिर के पीछे ले जाएं। पैरों के अंगूठे से जमीन को छुएं। हाथों को कमर से हटाकर जमीन पर सीधा रख लें। हथेली नीचे की तरफ रखें। कमर जमीन के समानांतर रखें। इसी स्थिति में एक मिनट तक बने रहें। सांसों पर ध्यान केंद्रित करें सांस छोड़ते हुए टांगों को वापस जमीन पर ले जाएं। आसन में जल्दबाजी न करें। टांगों को एक समान गति से ही सामान्य स्थिति में वापस लेकर आएं।

    अपने दिनचर्या में योग कैसे शामिल करें और योगासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए नीचे दिए इस वीडियो लिंक पर क्लिक करें।

    हलासन के अभ्यास में सावधानियां

    • अगर आपको डायरिया या गर्दन में चोट की समस्या है तो हलासन का अभ्यास न करें।
    • अगर आप हाय बीपी या अस्थमा के मरीज हैं तो ये आसन न करें।
    • हलासन के अभ्यास के दौरान समस्या होने पर टांगों को सहारा दिया जा सकता है ।
    • हलासन का अभ्यास शुरुआत में किसी योग्य योग ट्रेनर की देखरेख में ही शुरू करें।

    उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और गले के चक्र से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    सूत्र

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    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/04/2021 को
    डॉ. स्नेहल सिंह के द्वारा मेडिकली रिव्यूड