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बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स: इंफेक्शन, कैंसर या सांस की परेशानी दे सकती है दस्तक!

बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स: इंफेक्शन, कैंसर या सांस की परेशानी दे सकती है दस्तक!

शिशु के लिए कई तरह के अलग-अलग प्रॉडक्ट्स बाजार में आसानी से उपलब्ध है। इन्हीं बेबी प्रॉडक्ट्स में शामिल है बेबी ऑयल, बेबी पाउडर (टैल्कम पाउडर) या फिर बेबी ओरल केयर जैसे अन्य प्रॉडक्ट्स। आपने बेबी केयर प्रॉडक्ट्स (Baby care products) के फायदों के बारे में जरूर पढ़ा होगा, लेकिन क्या आपने कभी बच्चों पर इन प्रॉडक्ट्स के इस्तेमाल से पहले इनके नुकसान के बारे में पढ़ा है? अगर नहीं, तो आज आर्टिकल में बेबी पाउडर यानी टैल्कम पाउडर एवं बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स (Baby powder side effects) से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारी शेयर करेंगे।

नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स (Baby powder side effects) बच्चों पर देखे जा सकते हैं। वहीं कुछ रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार बेबी पाउडर में मौजूद एस्बेस्टस केमिकल शिशु की त्वचा की नुकसान पहुंचा सकते हैं या ऐसे बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।

और पढ़ें : बेबी स्माइल ना करे, तो पेरेंट्स क्या करें?

वहीं इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (International Agency for Research on Cancer) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार प्राइवेट ऑर्गेन या उसके आसपास टैल्कम पाउडर में मौजूद टैल्क कैंसर (Cancer) की संभावना को बढ़ा सकते हैं। इसलिए बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स (Baby powder side effects) को समझना जरूरी है। मैंने मुंबई की रहने वाली 34 वर्षीय प्रीति श्रीवास्तव से बात की, क्योंकि प्रीति एक 7 महीने की बच्ची की मां है। प्रीति से हमने बेबी केयर प्रॉडक्ट्स खासकर बेबी पाउडर के इस्तेमाल के बारे में जानना चाही, तो प्रीति कहती हैं “मैं अपनी बेबी की बॉडी पर बेबी पाउडर अप्लाई करती हूं, क्योंकि इससे रैशेश की समस्या दूर होती है। हालांकि मैं बहुत ज्यादा बेबी पाउडर के इस्तेमाल से बचती हूं।” प्रीति की ही तरह कई ऐसे पेरेंट्स हैं, जो बेबी पाउडर (टैल्कम पाउडर) का इस्तेमाल बच्चे को रैशेश या पसीने से बचाने के लिए और अच्छी हल्की खुशबु के लिए स्तेमाल करते हैं। दरअसल कई रिसर्च में पब्लिश्ड रिपोर्ट्स के अनुसार शिशु पर बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स (Baby powder side effects) भी देखे गए हैं। इसलिए आर्टिकल में बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स से जुड़ी इन्फॉर्मेशन शेयर करेंगे।

  • बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं?
  • शिशु पर बेबी पाउडर अप्लाई करने से पहले किन-किन बातों का ध्यान रखें?
  • बेबी पाउडर के नुकसान से बचने के लिए क्या है विकल्प?

और पढ़ें : बेबी केयर प्रोडक्ट्स का चुनाव करते समय रखें इन बातों का ध्यान

बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स (Baby powder side effects) क्या हो सकते हैं?

बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स (Baby powder side effects)

बेबी पाउडर के इस्तेमाल से शिशु को निम्नलिखित परेशानी हो सकती है। जैसे:

बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स: हो सकती है सांस से संबंधित तकलीफ!

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बेबी पाउडर में टैल्क मौजूद होता है, जो शिशु के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। जब शिशु को पाउडर लगाया जाता है, तो उसके छोटे-छोटे कण हवा में फैलने लगते हैं और यह शिशु के लंग्स (Lungs) तक पहुंचकर सांस लेने के दौरान पहुंच सकते हैं। धीरे-धीरे ये टैल्क शिशु में एक्यूट और क्रॉनिक लंग्स डिजीज (Acute or Chronic Lung Disease) का कारण बन सकते हैं। वहीं नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बेबी पाउडर में मौजूद टैल्क लंग्स के टिश्यू को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बेबी पाउडर की वजह से बच्चे को अस्थमा (Asthma) की भी समस्या हो सकती है।

बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स: बढ़ सकता है कैंसर का खतरा!

नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बेबी पाउडर में मौजूद कंपाउंड्स कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। दरअसल छोटी बच्चियों पर जब पाउडर इस्तेमाल किया जाता है, तो खासकर उनके प्राइवेट ऑर्गेन के पास जब पाउडर अप्लाई किया जाता है, तो टैल्क में मौजूद एस्बेस्टस प्राइवेट ऑर्गेन से रिप्रोडक्टिव ऑर्गेन तक आसानी से पहुंच जाते हैं, जो भविष्य में ओवरी (Ovary) या मेसोथेलियोमा कैंसर (Mesothelioma Cancer) का कारण बन सकते हैं। हालांकि बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स (Baby powder side effects) से जुड़ी रिसर्च अभी भी जारी है।

बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स: बढ़ सकता स्किन इंफेक्शन का खतरा!

बेबी पाउडर में मौजूद टैल्क से स्किन इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। दरअसल कई बार शिशु की त्वचा ड्राय (Dry skin) होने की वजह से फट जाती है, ऐसे में फटी हुई त्वचा पर पाउडर डालने से इंफेक्शन की संभावना बनी रहती है।

बेबी पाउडर के ये साइड इफेक्ट्स उनकी बढ़ती उम्र में कई गंभीर बीमारियों को दावत दे सकते हैं। इसलिए बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स (Baby powder side effects) से अपने लाडले को बचाएं। ऐसे में बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स ना हों इसलिए कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

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शिशु पर बेबी पाउडर अप्लाई करने से पहले किन-किन बातों का ध्यान रखें? (Tips to apply baby powder on baby)

शिशु पर बेबी पाउडर अप्लाई करने से पहले निम्नलिखित बातों का ध्यान अवश्य रखें। जैसे:

  1. प्राइवेट ऑर्गेन पर या आसपास के हिस्से पर पाउडर ना लगाएं।
  2. आंखों के पास बेबी पाउडर का इस्तेमाल ना करें।
  3. बेबी पाउडर को शिशु के चेहरे (Face) पर ना लगाएं।
  4. बच्चों की पहुंच से बेबी पाउडर को दूर रखें।
  5. बच्चे पर बेबी पाउडर अप्लाई करने से पहले पाउडर को अपने हाथों पर निकालें और फिर शिशु को लगाएं।
  6. बेबी पाउडर के डब्बे को शिशु के पास ना रखें और ना डब्बे से उसे खेलने दें।
  7. बेबी पाउडर के डब्बे को बच्चे के सामने या अपने चेहरे के सामने शेक ना करें।
  8. बच्चे को पाउडर लगाने के लिए उंगलियों का इस्तेमाल ना करें और क्लीन कॉटन या कपड़े की सहायता से लगाएं।
  9. एक्सपायरी डेट देखकर ही बेबी पाउडर का इस्तेमाल करें।

शिशु पर बेबी पाउडर अप्लाई करने से पहले इन ऊपर बताये 7 बातों को जरूर ध्यान रखें।

बेबी पाउडर के नुकसान से बचने के लिए क्या है विकल्प?

बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स (Baby powder side effects)

बेबी पाउडर के नुकसान से बचने के लिए हर्बल बेबी पाउडर का विकल्प अपनाया जा सकता है। जैसे:

अरारोट पाउडर (Arrowroot powder)

एकेडेमिया (Academia) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार शिशु को बेबी पाउडर के नुकसान से बचाने के लिए अरारोट पाउडर का इस्तेमाल किया जा सकता है। अरारोट एक तरह का स्टार्च है, जिसमें मैरेंटा अरुंडिनेशी एल. (Maranta arundinacea L.) के पौधे के जड़ से बनाया जाता है। अरारोट पाउडर के इस्तेमाल से बच्चे की त्वचा को सॉफ्ट बनाये रखने में मददगार है। अरारोट पाउडर के इस्तेमाल से त्वचा की एक्स्ट्रा नमी को एब्सॉर्ब करने की भी क्षमता है। इसलिए शिशु को बेबी पाउडर के नुकसान से बचने के लिए अरारोट पाउडर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कॉर्नस्टार्च पाउडर (Cornstarch powder)

नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार कॉर्नस्टार्च पाउडर शिशु के लिए अच्छा माना गया है। कॉर्नस्टार्च पाउडर यानी मकई से तैयार पाउडर नाजुक त्वचा के लिए बेहद लाभकारी बताया गया है कॉर्नस्टार्च पाउडर से कैंसर (Cancer) का डर भी नहीं हो सकता है। शिशु के लिए कॉर्नस्टार्च पाउडर बेबी पाउडर बाजार में आसानी से उपलब्ध है।

काओलीन क्ले (Kaolin clay)

बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स से शिशु को बचाने के लिए काओलीन क्ले (Kaolin clay) का इस्तेमाल किया जा सकता है। काओलीन क्ले का इस्तेमाल कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स में किया जाता है और इससे किसी तरह के साइड इफेक्ट्स नहीं हो सकती है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organisation) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार शिशु के लिए काओलीन क्ले (Kaolin clay) के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करें।

नोट: यहां 3 अलग-अलग तरह के हर्बल बेबी पाउडर की जानकारी शेयर की गई है, लेकिन किसी भी पाउडर के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें। अगर बेबी पाउडर हर्बल (Herbal baby powder) या नॉन हर्बल बेबी पाउडर (Non-Herbal baby powder) से शिशु की त्वचा पर नुकसान होता है, तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें और इसकी जानकारी डॉक्टर से शेयर करें।

और पढ़ें : बच्चों के लिए मिनिरल सप्लिमेंट्स हो सकते हैं लाभकारी, लेकिन डॉक्टर से कंसल्टेशन के बाद

शिशु के लिए बाजार में अलग-अलग तरह के एक नहीं, बल्कि कई तरह के बेबी पाउडर उपलब्ध हैं। इसलिए आपके शिशु के लिए बेबी पाउडर का चुनाव करना थोड़ा कठिन हो सकता है। इसलिए बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स (Baby powder side effects) से बचने के लिए सबसे पहले डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। क्योंकि हेल्थ एक्सपर्ट बच्चे की पूरी हेल्थ कंडिशन (Babies health condition) को ध्यान में रखकर ही शिशु के लिए बेबी पाउडर प्रिस्क्राइब करेंगे।

बच्चों के लिए मां का दूध सर्वोत्तम माना जाता है। नीचे दिए वीडियो लिंक पर क्लिक करें और हेल्थ एक्सपर्ट से जानिए ब्रेस्टमिल्क एवं फॉर्मूला मिल्क (Breast milk and formula milk) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 16/09/2021 को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड