प्रेग्नेंट महिलाएं रखें इन बातों का ध्यान, बच्चे को नहीं होगा ऑटिज्म

By Medically reviewed by Dr. Radhika apte

प्रेग्नेंसी और ऑटिज्म का खतरा

प्रेग्नेंसी और ऑटिज्म के बीच का संबंध सीधे गर्भ में पल रहे भ्रूण से जुड़ा होता है। ऑटिज्म जैसी बीमारी क्यों होती है इसका सटीक कारण आज भी नहीं जाना जा सका है। हालांकि, कहीं ना कहीं हमारे जींस को इसके लिए दोषी माना जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि अगर जन्म देने वाली मां प्रेग्नेंसी के दौरान किन्हीं खास तरह के केमिकल्स के संपर्क में आ जाती है तो भी बच्चे को इस तरह की परेशानियों के साथ पैदा होना पड़ता है। वहीं कई वैज्ञानिकों का मत है कि जींस के साथ-साथ हमारे वातावरण का संयुक्त असर बच्चे के ऑटिस्टक होने का प्रमुख कारण हैं।

हालांकि, ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर बच्चे को ऑटिज्म होने का पता नहीं लगा सकते। यूं तो ऑटिज्म को पूरी तरह से नहीं रोका जा सकता। हालांकि, इसके खतरों को कम किया जा सकता है। यहां जानिए गर्भवती महिला की देखभाल कैसे करें।

यह भी पढ़ें : Ferrous Fumarate + Folic Acid : फेरस फ्यूमरेट+फोलिक एसिड क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

स्वस्थ जीवन जिएं

स्वस्थ जीवन जीना ऑटिज्म से बचने का एक प्रभावी तरीका है। खासकर जन्म देने वाली मां को समय-समय पर अपना और बच्चे का चेकअप कराना चाहिए। ध्यान रहे कि आप और आपका परिवार संतुलित आहार लेता हो और अपने स्वास्थ्य का ठीक तरह से ख्याल रखता हो। प्रेग्नेंट महिलाओं को अल्कोहल यानी शराब से बिल्कुल दूर रहना चाहिए।

वायु प्रदूषण से बचें

प्रेग्नेंसी के दौरान वायु प्रदूषण ऑटिज्म का खतरा बढ़ा सकता है। हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की शोध में पाया गया कि जो माएं प्रदूषित वायु के संपर्क में ज्यादा थीं उनके बच्चों में ऑटिज्म होने का खतरा दोगुना था। वायु प्रदूषण से बचने से ज्यादा ट्रैफिक के वक्त बाहर निकलने से बचना चाहिए।

जहरीले केमिकल्स से बचकर रहें

प्रेग्नेंसी के दौरान कई तरह के टॉक्सिट केमिकल्स से संपर्क भी बच्चे को ऑटिज्म का शिकार बना सकता है। हाल ही में हुई एक रिसर्च के मुताबिक केमिकल्स और खास तौर पर कई तरह के धातुओं से संपर्क ऑटिज्म का खतरा बढ़ाते हैं। किन किन केमिकल्स से ये खतरा होता है ये जानना बेहद कठिन है इसलिए डॉक्टर्स प्रदूषित वातावरण से बचने की सलाह देते हैं। इसके अलावा कैन में पहले पैक किए भोजन, डिओडरेंट्स और एल्युमिनम और प्लास्टिक में पैक पानी से बचने की सलाह दी जाती है।

अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल है, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेना ना भूलें।

और पढ़ें:-

Anorexia : एनोरेक्सिया क्या है? इसके लक्षण और इलाज

प्रेग्नेंट लेडीज…. गर्भावस्था में पीठ दर्द होने पर इन घरेलू नुस्खों से मिलेगा आराम

गर्भ संस्कार से प्रेग्नेंट महिला और शिशु दोनों को ही होते हैं ये अद्भुत फायदे

ये 10 बातें पति कभी अपनी प्रेग्नेंट पत्नी से न कहें

अभी शेयर करें

रिव्यू की तारीख जुलाई 4, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया नवम्बर 21, 2019

सूत्र
शायद आपको यह भी अच्छा लगे