एआरएफआईडी (ARFID) के कारण बच्चों में हो सकती है आयरन की कमी

Medically reviewed by | By

Update Date दिसम्बर 13, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें
Share now

आपने कभी सोचा है कि आपके बच्चे का पिकी ईटर होना पिकी ईटिंग से ज्यादा कुछ और भी हो सकता है। बच्चों का पिकी ईटर होना एक सामान्य परेशानी है। लेकिन,  आजकल बच्चे एआरएफआईडी (ARFID) यानि कि अवॉयडेंट रिस्ट्रिक्टिव फूड इनटेक डिसऑर्डर (Avoidant Restrictive Food Intake Disorder, ARFID) से भी ग्रसित पाएं जाते हैं। अधिकांश टॉडलर्स और छोटे बच्चे बचपन के दौरान पिकी ईटिंग की आदतों का अनुभव करते हैं। लेकिन एक स्तर के बाद नॉर्मल पिकी ईटिंग की आदत भी खतरनाक हो सकती है क्योंकि यह एआरएफआईडी में तब्दील हो सकती है, जिसके लिए पेरेंट्स को मेडिकल हेल्प लेनी पड़ सकती है।

यह भी पढ़ेंः बच्चों की स्वस्थ खाने की आदतें डलवाने के लिए फ्रीज में रखें हेल्दी फूड्स

एआरएफआईडी (ARFID) क्या है

अवॉयडेंट रिस्ट्रिक्टिव फूड इनटेक डिसऑर्डर यानि की एआरएफआईडी खाने का डिसऑर्डर है, जिसकी वजह से बच्चों में पोषण या ऊर्जा की कमी हो जाती है। यह पिकी ईटिंग की तरह लग सकता है जैसे कि एआरएफआईडी से पीड़ित और पिकी ईटर्स दोनों के पास बहुत कम खाने के ऑप्शन होते है, जिन्हें ये पसंद करते हैं। एआरएफआईडी और पिकी ईटर्स के पास उनके पसंदीदा खाने की लिस्ट बहुत छोटी होती है। लगभग सारे गुण एक जैसे होने के बाद भी दोनों डिसऑर्डर में कई बड़े अंतर हैं।

एआरएफआईडी को कैसे करें डायग्नोस

एआरएफआईडी की वजह से बच्चों में खाने की परेशानी होती है (जैसे खाने या भोजन में रुचि न लेना, खाना खाने से परहेज, खाने के नेगेटिव कारणों के बारे में चिंता) जिसके कारण बच्चों में सही पोषण या ऊर्जा की जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं। इसको डायग्नोस करने के लिए कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  • वजन में कमी (या अपेक्षित वजन बढ़ने में असफल होना)
  • पोषण की महत्वपूर्ण कमी।
  • एंटरल फीडिंग या ओरल न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट पर निर्भर होना।
  • साइकोसोशल फंक्शनिंग में कमी आना
  • एआरएफआईडी के कारण खाने की कमी नहीं होती बल्कि कुछ खाने की चीजें बच्चे खाना ही नहीं चाहते
  • एनोरेक्सिया नर्वोसा या बुलिमिया नर्वोसा के दौरान एआरएफआईडी की परेशानी नहीं होती और किसी के शरीर के वजन या आकार का बढ़ना या घटना भी इसका कारण नहीं होता
  • खाने की गड़बड़ी एक समवर्ती चिकित्सा स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं है या किसी अन्य मानसिक विकार से बेहतर नहीं बताई गई है
  • एआरएफआईडी को किसी दूसरी स्थिति या परेशानी के साथ नहीं जोड़ा जा सकता इसके कारण और डायग्नोस के तरीके अलग हैं

यह भी पढ़ेंः बच्चों के लिए कैलोरीज जितनी हैं जरूरी, उतना ही जरूरी है उन्हें बर्न करना भी

एआरएफआईडी के प्रकार

  • खाने में रुचि की कमी: एआरएफआईडी से ग्रस्त बच्चों को खाने में कम रुचि होती है। इसके अलावा उनका पेट भी जल्दी भर जाता है।
  • सेंसरी अवॉयडेंस: सेंसरी अवॉयडेंस के साथ बच्चों को खाने के स्वाद, बनावट, तापमान और खुशबू से परेशानी हो सकती है।
  • खाने के निगेटिव परिणाम का डरः खाना खाने से बीमारी, चोकिंग, मतली और एलर्जी का डर भी बच्चों में बना रहता है।

एआरएफआईडी के लक्षण

बच्चों में एआरएफआईडी होने की वजह से उनके व्यवहार में काफी बदलाव होता है। साथ ही साइकोलॉजिकल बदलाव भी बच्चों में देखने को मिलते हैं। अगर आपके बच्चे में एआरएफआईडी की परेशानी है, तो आप इन लक्षणों को अपने बच्चों में देख सकते हैंः

  • वजन घटना
  • कब्ज, पेट दर्द, कोल्ड इनटोलरेंस, सुस्ती होना
  • खाने के समय पेट भरा होने की बात करना या पेट में दूसरी परेशानी बताना
  • खाने के अमाउंट कम होना
  • केवल कुछ टेक्सचर वाला खाना खाने की बात करना
  • चोकिंग या उल्टी का डर
  • भूख में कमी या खाना पसंद न आना
  • पसंदीदा खाने की लिमिटेड रेंज, जो समय के साथ कम होती जाती है (पिकी ईटिंग जो समय के साथ और बढ़ जाए)
  • शरीर और इमेज को लेकर कोई चिंता नहीं होना और न ही वजन बढ़ने या घटने का डर
  • सब्जियों, प्रोटीन स्रोतों (मांस, सेम, आदि) फलों से परहेज
  • खाने की चीजों को छोड़ना और कभी भी उन्हें अपनी डायट में वापस न लाना
  • पोषक तत्वों की कमी (आयरन, विटामिन ए और विटामिन सी सबसे आम)

यह भी पढ़ेंः बच्चों का पढ़ाई में मन न लगना और उनकी मेंटल हेल्थ में है कनेक्शन

एआरएफआईडी की वजह से फिजिकल बदलाव

क्योंकि एनोरेक्सिया और एआरएफआईडी दोनों की वजह से पोषण की कमी हो सकती है। दोनों परेशानियों की वजह से शरीर में एक जैसे बदलाव होते हैं:

  • पेट में ऐंठन, गेस्ट्रोइंटेस्टाइन की शिकायतें (जैसे कब्ज, एसिडिटी आदि)
  • लड़कियों में मासिक धर्म की अनियमितताएं
  • ध्यान फोकस करने में परेशानी
  • एनीमिया, कम थायरॉयड और हार्मोन के स्तर में बदलाव, लो पोटेशियम, लो ब्लड सेल काउंट, स्लो हार्ट रेट
  • चक्कर आना
  • बेहोशी
  • हर समय ठंड लगना
  • नींद की समस्या
  • रूखी त्वचा
  • ड्राई नाखून
  • शरीर पर पतले बालों का होना
  • बालों का झड़ना
  • मांसपेशियों में कमजोरी
  • घाव जल्दी न भरना

यह भी पढ़ेंः होममेड बेबी फूड है बच्चों के लिए हेल्दी, जानें आसान रेसिपी

एआरएफआईडी के जोखिम

  • एंग्जायटी
  • बच्चों के वजन बढ़नें में कमी आना
  • गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल की परेशानी
  • कुपोषण (Malnutrition)
  • वजन घटना
  • बच्चों के विकास में समय लगना

एआरएफआईडी का बचाव कैसे करें

हालांकि, एआरएफआईडी या दूसरी खाने के परेशानियों को रोकने का कोई तरीका नहीं है। लेकिन, आप बच्चे को स्वस्थ खाने के व्यवहार को विकसित करने में मदद के लिए कुछ बातों का ध्यान रख सकते हैंः

बच्चे के आस-पास खाने से परहेज करने से बचेंः

खान-पान की आदतें बच्चों के भोजन के साथ विकसित होने वाले रिश्तों को प्रभावित कर सकती हैं। एक साथ भोजन करने से आपको अपने बच्चे को एआरएफआईडी के नुकसान के बारे में सिखाने का मौका मिलता है। बच्चों को सही मात्रा में संतुलित आहार खाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

बच्चे से बात करेंः

एआरएफआईडी को एक खाने की परेशानी के बजाए एक लाइफस्टाइल ऑप्शन के रूप में देखना। इस तरह की किसी भी परेशानी को ठीक करना और खाने के विकल्पों के जोखिम के बारे में अपने बच्चे से बात करना जरूरी हैं।

यह भी पढ़ेंः बच्चों की गलतियां नहीं हैं गलत, उन्हें समझाएं यह सीखने की है शुरुआत

बच्चे को सेल्फ इमेज के बारे में बताएं:

चाहें उसका आकार या साइज कुछ भी हो। सेल्फ इमेज के बारे में अपने बच्चे से बात करें और उन्हें बताएं कि शरीर का आकार अलग-अलग हो सकता है। अपने बच्चे के सामने किसी के भी शरीर की आलोचना करने से बचें।

 बच्चे के लिए डॉक्टर की मदद लेंः

आपका डॉक्टर बच्चे की एआरएफआईडी की समस्या के शुरुआती संकेतों की पहचान कर सकते हैं। उदाहरण के लिए बच्चों की रुटिन और मेडिकल हिस्ट्री के दौरान डॉक्टर उनकी खाने की आदतों और संतुष्टि के बारे में सवाल पूछ सकते हैं। डॉक्टर के पास जाने में बच्चे की हाईट और वजन के प्रतिशत और बॉडी मास इंडेक्स के चेक शामिल होने चाहिए, जो आपको और आपके बच्चे के डॉक्टर को किसी भी जरूरी बदलाव के लिए सचेत कर सकें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

संबंधित लेख:

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy"
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

बच्चों में फूड एलर्जी का कारण कहीं उनका पसंदीदा पीनट बटर तो नहीं

बच्चों में फूड एलर्जी के कारण, बच्चों में फूड एलर्जी क्यों होता है, फूड एलर्जी के लिए क्या करें, कैसे पहचाने फूड एलर्जी kids Food Allergy, जानें और

Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
Written by Lucky Singh
बच्चों का पोषण, पेरेंटिंग दिसम्बर 13, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें

अपनी प्लेट उठाना और धन्यवाद कहना भी हैं टेबल मैनर्स

बच्चों को टेबल मैनर्स कैसे सिखाएं, Table Manners in kids, टेबल मैनर्स क्यों जरुरी है, बच्चों को बाहर खाना सिखाएं, क्यों सिखाएं बच्चों को बाहर खाना

Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
Written by Lucky Singh
बच्चों का पोषण, पेरेंटिंग दिसम्बर 13, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें

बच्चों को खड़े होना सीखाना है, तो कपड़ों का भी रखें ध्यान

बच्चों को खड़े होना सीखाना टिप्स क्यों जरूरी है, बच्चों को खड़े होना सीखाना कैसे आसान बनाएं, बच्चों को खड़े होने के लिए जरूरी टिप्स

Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
Written by Lucky Singh
पेरेंटिंग टिप्स, पेरेंटिंग दिसम्बर 13, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें

बच्चों के लिए सिंपल बेबी फूड रेसिपी, जिन्हें सरपट खाते हैं टॉडलर्स

सिंपल बेबी फूड रेसिपी, सिंपल बेबी फूड रेसिपी कैसे बनाएं, Simple Baby Food Recipes, कैसे बनाएं बेबी फूड, जानें घर पर बनाई जाने वाली रेसिपी

Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar
Written by Lucky Singh
बच्चों का पोषण, पेरेंटिंग दिसम्बर 12, 2019 . 5 मिनट में पढ़ें

Recommended for you

शिशुओ-को-घमौरी

जानें शिशुओं को घमौरी होने पर क्या करनी चाहिए?

Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
Written by Shivam Rohatgi
Published on अप्रैल 14, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
Roseola- रास्योला

Roseola: रोग रास्योला?

Written by Kanchan Singh
Published on अप्रैल 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
डाउन सिंड्रोम की समस्या

डाउन सिंड्रोम की समस्या से जूझ रहे लोगों के सामने जानिए क्या होते हैं चैलेंजेस

Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
Written by Bhawana Awasthi
Published on मार्च 23, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
Child Tantrums: बच्चों के नखरे

Child Tantrums: बच्चों के नखरे का कारण कैसे जानें और इसे कैसे हैंडल करें

Medically reviewed by Dr. Hemakshi J
Written by Surender Aggarwal
Published on जनवरी 14, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें